NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
राजस्थान : क्या है जयपुर में हुई नरेंद्र मोदी की रैली की सच्चाई ?
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों को रैली में लाया गया था उनमें से बहुतों को लाभ  नहीं मिला था , कई लोगों को जबरन लाया गया और कुछ अपनी शिकायतें लेकर आये थे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Jul 2018
modi
image courtesy: Hindustan Times

7 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी की जयपुर में हुई जिस रैली जिसे बढ़ा चढ़ा के दिखाया गया था ,उसकी असलियत अब धीरे धीरे सामने आ रही । मीडिया रिपोर्टों ने इस रैली पर कई सवाल उठाये हैं। 

सबसे पहला मुद्दा जो सामने आया वह था कि राजस्थान सरकार ने इस रैली में लोगों को लाने के लिए पूरा सरकारी तंत्र लगा दिया। राजस्थान भर में सभी कलेक्टरों को अपने ज़िले से औसतन  9,300 लोग लाने को कहा गया था।  इस रैली में प्रदेश भर से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही 12 स्कीमों के लाभार्थियों को लाया जाना था। विभिन्न जगहों से लाये गए 2. 5 लाख लाभार्थियों को लाने ले जाने में ही 7. 2 करोड़ रुपये का सरकारी खर्च लगा और 5 हज़ार से ज़्यादा बसों को इस काम में लगाया गया। प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये 7. 2 करोड़ रुपये इन स्कीमों के फण्ड से ही लिए गए थे। सरकार की तरफ से ये कहा गया कि ये आयोजन सरकारी आयोजन था। लेकिन ये सब जानते हैं कि राज्य में चुनाव होने वाले हैं और  इसीलिए ये कहा जा सकता है कि बीजेपी ने इसे अपने चुनावी प्रचार की तरह इस्तेमाल किया है । यहॉं सवाल ये है कि क्या पार्टी के प्रचार के लिए राज्य के तंत्र को और आम जनता के पैसे को इस तरह इस्तेमाल करना सही है  ? 

रिपोर्टों के मुताबिक 2 जुलाई को इस रैली के स्थल अमरूदों के बाग़ में बीजेपी के राज्य अध्यक्ष मदन लाल सैनी , पंचायती राज्य मंत्री राजेंद्र राठौर और बाकी बड़े नेताओं ने भूमि पूजन और वैदिक रिवाज़ो से पूजा की। सवाल ये खड़ा होता है कि क्या जिस रैली को सरकारी बताया जा रहा है वहाँ हिन्दू रीति  रिवाज़ों से पूजा करना , राज्य का एक धर्म के प्रति पक्षपात नहीं ? और क्या ये अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं ? 

इन मुद्दों के आलावा एक और गंभीर मुद्दा सामने आया है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों को रैली में लाया गया था उनमें से बहुतों को लाभ  नहीं मिला था , कई लोगों को जबरन लाया गया और कुछ अपनी शिकायतें लेकर आये थे। रिपोर्ट के मुताबिक एक महिला को ये कहकर लाया गया था कि अगर वह रैली में नहीं आती तो उन्हें मनरेगा स्कीम के तहत मिलने वाली दिहाड़ी नहीं दी जाएगी।कई लोगों ने ये कहा कि उन्हें स्कीमों का लाभ नहीं मिल रहा इसीलिए वह इसकी शिकायत प्रधानमंत्री से करने आये हैं। लेकिन इसके बजाये इस कार्यक्रम में 12 स्कीमों के 12 लाभार्थियों की रिकॉर्ड की गयी आवाज़ों को सुनाया गया ।  इसके बाद उन्ही 12 लोगों ने प्रधानमंत्री को फूल दिए।  इसके आलावा  इस 'तथाकथित' जन सुनवाई में जनता को सवाल पूछने या शिकायत करने का कोई अवसर नहीं दिया गया। 

कार्यक्रम में आये एक शख्स ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना में सिर्फ 30000 की एक किस्त मिली जिससे वह ट्रैकर तक नहीं ख़रीद पा रहे हैं। इसी तरह दो लोगों ने बताया कि वह कौशल विकास योजना से जुड़े रहे हैं, लेकिन अब तक रोज़गार नहीं मिला। इस सब के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये था कि ज़्यादातार लोग जो यहाँ जमा थे वह सच में लभारती थे या नहीं ? रिपोर्ट के मुताबिक वहाँ मौजूद लोगों के पास इस बात का कोई सबूत नहीं था कि उन्हें किस योजना से कैसे लाभ हुआ। ज़्यादातार लोग ज़िला प्रशासन के द्वारा या ग्राम सभाओं के द्वारा लाये गए थे। आंगनवाड़ी सेंटरों के पास भी इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं था कि उनके इलाकों से इस सभा में कितने लोग गए थे।  

इसके आलावा रैली में काले कपड़े पहन के आये लोगों को रैली में घुसने नहीं दिया गया। बताया जा रहा है ऐसा इसीलिए किया गया क्योंकि आयोजकों को डर था कि कहीं कोई मोदी को काले झंडे न दिखा दे। इस पर सवाल ये है कि अगर मोदी सरकार और राज्य की राजे सरकार को अपने काम पर इतना ही भरोसा है तो इतना डर क्यों ?

इस मुद्दे PUCl की महासचिव  और राजस्थान की सामाजिक कार्यकर्त्ता कविता श्रीवास्तव ने कहा "जिन योजनाओं के लाभार्थियों को लाया गया उनमें से कई असफल रही हैं। जैसे उज्वला योजना तो पूरी तरह असल रही है, उसमें महिलाओं को एक बार तो गैस सिलेंडर सस्ते में मिल जाता है लेकिन दूसरी सिलेंडर महंगा मिलता है और इसी वजह से वह फिर से चूल्हे पर काम करने लगतीं हैं। इसी तरह जन आवास योजना के तहत घर बहुत ही कम लोगों को मिला है। इसी तरह भामा शाह योजना  जिसके तहत सरकार स्वस्थ्य सेवाओं का खर्चा उठती है , में आम जन  से ज़्यादा अस्पतालों को लाभ मिला है। ये भी सच है कि इन स्कीमों का लाभ बहुत ही कम लोगों को मिल रहा है। " 

Narendra modi
jaipur
rally
Rajasthan
Vasundhara Raje

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा
    20 May 2022
    एक तरफ भारत की बहुसंख्यक आबादी बेरोजगारी, महंगाई , पढाई, दवाई और जीवन के बुनियादी जरूरतों से हर रोज जूझ रही है और तभी अचनाक मंदिर मस्जिद का मसला सामने आकर खड़ा हो जाता है। जैसे कि ज्ञानवापी मस्जिद से…
  • अजय सिंह
    ‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार
    20 May 2022
    मौजूदा निज़ामशाही में असहमति और विरोध के लिए जगह लगातार कम, और कम, होती जा रही है। ‘धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना’—यह ऐसा हथियार बन गया है, जिससे कभी भी किसी पर भी वार किया जा सकता है।
  • India ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेता
    20 May 2022
    India Ki Baat के दूसरे एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, भाषा सिंह और अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे हैं ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेताओं की। एक तरफ ज्ञानवापी के नाम…
  • gyanvapi
    न्यूज़क्लिक टीम
    पूजा स्थल कानून होने के बावजूद भी ज्ञानवापी विवाद कैसे?
    20 May 2022
    अचानक मंदिर - मस्जिद विवाद कैसे पैदा हो जाता है? ज्ञानवापी विवाद क्या है?पक्षकारों की मांग क्या है? कानून से लेकर अदालत का इस पर रुख क्या है? पूजा स्थल कानून क्या है? इस कानून के अपवाद क्या है?…
  • भाषा
    उच्चतम न्यायालय ने ज्ञानवापी दिवानी वाद वाराणसी जिला न्यायालय को स्थानांतरित किया
    20 May 2022
    सर्वोच्च न्यायालय ने जिला न्यायाधीश को सीपीसी के आदेश 7 के नियम 11 के तहत, मस्जिद समिति द्वारा दायर आवेदन पर पहले फैसला करने का निर्देश दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License