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भारत
राजनीति
रात में घुमने की भी आज़ादी
आर. नित्या
10 Aug 2014

७ फरवरी २०१३ से पहले शायद कभी आखरी बस लेने वाले इतने खुश देखे गए होगे। यह कार्यक्रम " रेक्लेम द नाईट" नाम से आयोजित किया गया था जिसमे गाना- बजाना और कविता पाठन शामिल था। 

मुख्यधारा की मीडिया जैसे जैसे १६ दिसम्बर की घटना से अपना मुह फेरते जा रही थी, उसके विरोध में आज यहाँ शिवाजी स्टेडियम बस टर्मिनल से कई लोगो ने अनेक जगह जाने के लिए ५ अलग और आखरी बस ली।  वे रास्ते भर प्रतिरोध के गीत गाते हुए गए। 

एक तरफ जब विरोध प्रदर्शनों में तोड़-फोड़ आम बात हो गई है जिसमे बसों को तोडना प्रमुख है, लोगो ने यह एक अनोखा विरोध करने का तरीका खोजा।  इसका उदेश्य सार्वजनिक परिवहन को आम जनता के लिए अधिक सुरक्षित बनाने और रात में बिना किसी भय के इनके प्रयोग को प्रेरित करना था।इस सामूहिक प्रयास के लिए जनम, एक्ट वन, जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति और बंगला मच ने कदम उठाये थे। 

शिवाजी टर्मिनस शहर का सबसे व्यस्त बस टर्मिनस में से एक है और यहाँ से आखिरी बस रात के 9:30 पे निकलती है।  योजना के अनुसार कुछ कलाकार हर बस में बैठे और जनता के साथ प्रतिरोध के गीत गाते हुए जिसमे कई फ़िल्मी गाने भी थे, इस सफ़र को पूरा किया।  

 

जन नाट्य मंच के सुधन्वा देशपांडे ने कहा कि," कार्यक्रम के पिच मुख्य उदेश्य सार्वजनिक परिवहनो के अधिक प्रयोग को प्रेरित करना, रात के सफ़र को और सुरक्षित बनाना और इस देर रात की बस को मनोरंजक बनाना था। 

असमान्य नाच गान, कविता पाठन और गिटार बजाने के आलावा यहाँ बाकी सब कुछ सामान्य था। कंडक्टर अपना काम कर रहे थे।  बस नंबर६२० के कंडक्टर योगेश वशिष्ठ ने कहा कि सामान्य तौर पर इतनी रात को बेहद कम महिलाएं बस का प्रयोग करती हैं।  केवल कुछ ही लड़कियां इंडिया गेट पर चढ़ती हैं और तीन मूर्ति भवन पर उतर जाती हैं।  रात का सफ़र महिलाओं के लिए उतना सुरक्षित नहीं होता और ऐसे प्रदर्शन लोगो को जागरूक और अपना स्वर बुलंद करने के लिए प्रेरित करते हैं। इस बस यात्रा ने रोजाना के यात्रियों के बीच बोलचाल को बढ़ाने और सहज बनाने का काम किया। 

बस नंबर ९१० के यातियों ने इस असमान्य गतिविधि में अपनी उत्सुकता दिखाई और कलाकारों का उत्साह बढ़ाने का काम किया। जन नाट्य मंच के माला हाशमी, सुधन्वा देशपांडे और कोमिता धाडा के कविता पाठन पर तालियाँ भी बजाई। इस कार्यक्रम को लोगो तक फेसबुक के माध्यम से पहुचाया गया जिसमे 9:30 की आखिरी बस के नाम एक इवेंट पेज बनाया गया था।  

 

"रेक्लेम डी नाईट" नामक विरोध प्रदर्शन दिल्ली गैंगरपे को सन्दर्भ में लेते हुए, महिलाओं के ऊपर बढती हिंसा के विरोध में आयोजित किया गया था। 

 

 

जन नाट्य मंच
निर्भया
दिल्ली गैंगरेप
एक्ट वन
जनसंस्कृति
जनवादी महिला संगठन
जनवादी लेखक संघ
डीटीसी

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