NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
रेहड़ी पटरी दुकानदारों ने किया नगर निगम के खिलाफ धरना प्रदर्शन
दिल्ली में रेहड़ी-पटरी वालों ने गुरुवार को सिविक सेंटर पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने स्थायी जगह दिए जाने और पुलिसिया अत्याचार रोकने की मांग की।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
26 Sep 2019
redi patri workers

दिल्ली में रेहड़ी-पटरी वालों ने नगर निगम प्रशासन द्वारा उजाड़े जाने के विरोध में गुरुवार को सिविक सेंटर पर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व रेहड़ी पटरी खोमचा हॉकर्स यूनियन द्वारा किया गया। इसका संबंध मजदूर संगठन सीटू से है। प्रदर्शन के दौरान सबका एकमत से यही कहना था कि वे स्वाभिमान से काम कर रहे हैं लेकिन सरकार और प्रशासन उन्हें कमाने खाने नहीं दे रही है।

प्रदर्शन में शामिल 65 वर्षीय देव नारायण ने बताया, 'वह दूसरे जगह से दिल्ली रोजगार की तलाश में आए थे और 30 साल से पटरी पर दुकान लगा रहे हैं लेकिन अब सरकार उनकी रोजी रोटी छीन रही है।'

इसे भी पढ़े:दिल्ली-एनसीआर में रेहड़ी-पटरी वाले संकट में, नई नीति से भी कोई हल नहीं

कुछ ऐसा ही कहना विधवा शाहिना बेगम का भी है। वो रोते हुए कहती हैं,'अकेले ही सब्जी बेचकर अपने पूरे परिवार का पेट भरती हैं लेकिन अब पुलिस और स्थनीय गुंडों से परेशान हैं। कभी पुलिस उनका समान गाड़ी में भरकर ले जाती है, तो कही कोई दबंग आकर उनका सारा सामान सड़कों पर फेंक देता है। अब सरकार भी उनकी मदद की जगह अब उनके मुंह का निवाला छीन रही है।'
Capture_17.PNG
अजमेरी गेट में सब्जी बेचने वाली उजाला देवी भी रोते हुए कहती हैं कि बुधवार को पुलिस ने उनकी रेहड़ी समान सहित उठा लिया है और उसको छुड़ाने के लिए धक्के खा रही है। पुलिस अब उनसे हजारों रुपये का चालान भरने को कह रही है लेकिन उनके पास उतने पैसे नहीं है। उन्होंने कहा कि वो इससे परेशान हो गई है सरकार या तो उन्हें मेहनत से कमाने का अधिकार दे या उनके बच्चे और अपाहिज पति समेत सबको जहर दे।
IMG-20190926-WA0008_0.jpg
जामा मस्जिद में पटरी पर दुकान लगाने वाले इमरान ने बताया, 'हाई कोर्ट ने आदेश दिया था की वो लोग यहां पटरी पर दुकान लगा सकते हैं। इसके बावजूद अब निगम के अधिकारी उन्हें हटा रहे हैं।'

क्या है पूरा मामला?

आपको बात दें कि 2 सितबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में अवैध अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद से नगर निगम अधिकारियों ने दिल्ली के रेहड़ी पटरी वालों को हटाना शुरू कर दिया। इससे पहले भी निगम और पुलिस इन्हें परेशान करती थी लेकिन इस समय निगम के लोग अधिक आक्रामक दिख रहे हैं।

रेहड़ी पटरी यूनियन के नेताओं ने इस बात का पूरी तरह से खंडन किया कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी तरह के रेहड़ी पटरी वालों को हटाने का आदेश दिया है।

उन्होंने बताया कि कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली में हो रहे अवैध अतिक्रमण को हटाने की बात कही है जबकि रेहड़ी पटरी वाले कोई अतिक्रमण नहीं करते है। अतिक्रमण वो है जो बड़े-बड़े कोठी वाले अपने कोठियों के सामने गार्ड के लिए बॉक्स बनाते है, या सड़कों पर सीढ़िया या छत को बाहर निकालते हैं। लेकिन निगम के अधिकारी उस पर कार्रवाई करने के बजाय गरीबों को उजाड़ रही है।
IMG-20190926-WA0011_0.jpg
आपको बता दें कि रेहड़ी पटरी वालों को नियंत्रित और उन्हें एक जगह मिले इसके लिए पथ विक्रेता अधिनियम 2014 बना है। जिसके अनुसार सभी रेहड़ी पटरी वालों की पहचान कर उन्हें एक स्थाई जगह दी जाएगी। इस अधिनियम की धारा 3(3) के अनुसार टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) द्वारा सभी वर्तमान रेहड़ी पटरी वालों का सर्वे, रजिस्ट्रेशन, सर्टिफिकेशन का काम पूरा किया जाएगा। जब तक यह नहीं होता तब तक उन्हें हटाया नहीं जाएगा।

एक अनुमान के मुताबिक पूरे देश में 2.50 करोड़ और दिल्ली में लगभग 5 लाख रेहड़ी पटरी वाले हैं। इनकी समस्या को देखते हुए ही पूर्व यूपीए की सरकार में रेहड़ी पटरी आजीविका संरक्षण बिल 2013 में तैयार हुआ जिसने 2014 में संसद से पास होकर कानूनी रूप ले लिया। इस कानून के द्वारा रेहड़ी पटरी वालों पर पुलिस व नगर निगमों द्वारा होने वाले अत्याचारों पर भी लगाम लगाने का प्रयास किया गया।

इससे उम्मीद थी कि इनको काम करने में कुछ राहत मिलेगी लेकिन पिछले पांच साल में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और आम आदमी पार्टी की दिल्ली राज्य की सरकार इसे लागू करने में पूरी तरह से विफल रही है। अभी भी अक्सर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में ये देखा जाता है कि पुलिस से लेकर एमसीडी तक इन रेहड़ी पटरी वालों को अपनी जगह से हटा देती है। कभी भी इनके सामान को सड़क पर फैला देती है तो कभी गाड़ियों में भरकर अपने साथ ले जाती है।
citu.PNG
यूनियन के नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार पर बड़े पूंजीपतियों के इशारे पर हटने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार एकतरफ तो इन रेहड़ी पटरी को हटा रही है। वहीं, दूसरी तरफ खुदरा व्यापार में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश को छूट देने के बाद वालमार्ट जैसी बड़ी विदेशी कम्पनियों को खुदरा व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही। जबकि केंद्र सरकार को रेहड़ी पटरी वालों का आभार मानना चाहिए कि वे स्वरोजगार द्वारा देश में बेरोजगारी की समस्या से निपटने में सरकार की मदद कर रहे हैं।

इनके प्रदर्शन के बाद निगम के अधिकारी प्रदर्शन स्थल पर आये और उनकी समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। लेकिन नेताओं ने कहा इस तरह का आश्वासन उन्हें कई बार मिला है लेकिन उन्हें हल चाहिए। इस दौरन यूनियन नेताओं ने अपना एक मांग पत्र भी निगम के अधिकारियों सौंपा और कहा अगर जल्द ही उनकी मांगो पर ध्यान नहीं दिया गया तो और बड़ा और उग्र विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

इसे भी पढ़े:चुनाव 2019; दिल्ली : कौन सुनेगा रेहड़ी पटरी वालों की आवाज़?

CITU
CITU Workers Strike
Street trackshops
Protest on Civic center
delhi government
Arvind Kejriwal
Narendra modi
Modi government
capitalist

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • Gauri Lankesh pansare
    डॉ मेघा पानसरे
    वे दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी या गौरी लंकेश को ख़ामोश नहीं कर सकते
    17 Feb 2022
    दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी और गौरी को चाहे गोलियों से मार दिया गया हो, मगर उनके शब्द और उनके विचारों को कभी ख़ामोश नहीं किया जा सकता।
  • union budget
    टिकेंदर सिंह पंवार
    5,000 कस्बों और शहरों की समस्याओं का समाधान करने में केंद्रीय बजट फेल
    17 Feb 2022
    केंद्र सरकार लोगों को राहत देने की बजाय शहरीकरण के पिछले मॉडल को ही जारी रखना चाहती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर 30 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 541 मरीज़ों की मौत
    17 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 30,757 नए मामले सामने आए है | देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 27 लाख 54 हज़ार 315 हो गयी है।
  • yogi
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः बिजली बिल माफ़ करने की घोषणा करने वाली BJP का, 5 साल का रिपोर्ट कार्ड कुछ और ही कहता है
    17 Feb 2022
    "पूरे देश में सबसे ज्यादा महंगी बिजली उत्तर प्रदेश की है। पिछले महीने मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) ने 50 प्रतिशत बिजली बिल कम करने का वादा किया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया। ये बीजेपी के चुनावी वादे…
  • punjab
    रवि कौशल
    पंजाब चुनाव : पुलवामा के बाद भारत-पाक व्यापार के ठप हो जाने के संकट से जूझ रहे सीमावर्ती शहर  
    17 Feb 2022
    स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ व्यापार के ठप पड़ जाने से अमृतसर, गुरदासपुर और तरनतारन जैसे उन शहरों में बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी पैदा हो गयी है, जहां पहले हज़ारों कामगार,बतौर ट्रक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License