NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
रघुबर सरकार से आर-पार की लड़ाई के मूड में झारखंड के पारा शिक्षक
15 से 17 दिसंबर के बीच झारखंड में तीन पारा शिक्षकों की मौत हुई है। पिछले एक महीने में नौ पारा शिक्षकों की जान गई है। इनमें दो महिला भी हैं।
शाहनवाज़ अख़्तर
24 Dec 2018
jharkhand para teacher
(Anti-clockwise) पारा शिक्षक जीनत खातून, कंचन दास, उदय शंकर पांडेय, शिवलाल सोरेन। फोटो : eNewsroom

रांची: बीते 17 दिसंबर को देवघर के पारा शिक्षक उज्ज्वल राय ने आखिरी सांस ली। 15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री रघुबर दास के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उज्ज्वल चोटिल हो गए थे। इससे ठीक एक दिन पहले दुमका के पारा शिक्षक कंचन कुमार दास की तब ठंड लगने से मौत हो गई जब वो मंत्री लुईस मरांडी के घर के बाहर धरना दे रहे थे। स्थापना दिवस पर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए हजारीबाग के पारा शिक्षक सूर्यदेव ठाकुर भी जिंदगी की जंग हार गए और 15 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। कंचन कुमार दास पारा शिक्षकों के ‘घेरा डालो डेरा डालो’ आंदोलन का हिस्सा थे जिसके तहत ये शिक्षक, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के आवास के बाहर धरना दे रहे हैं ताकि सरकार पर दबाव बन सके।

15 से 17 दिसंबर के बीच झारखंड में तीन पारा शिक्षकों की मौत हुई है। पिछले एक महीने में नौ पारा शिक्षकों की जान गई है। इनमें दो महिला भी हैं। एक, रामगढ़ की जीनत खातून और दूसरी छतरा की प्रियंका कुमारी। यहां गौर करने वाली बात ये भी है कि रांची में 15 नवंबर को लाठीचार्ज की घटना के बाद से शिवलाल सोरेन नाम के एक पारा शिक्षक अभी तक लापता हैं।

पारा शिक्षकों का आंदोलन क्या है ?

पारा शिक्षकों का मौजूदा आंदोलन करीब एक महीने पहले झारखंड के स्थापना दिवस के मौके पर 15 नवंबर से शुरू हुआ था स्थापना दिवस के जश्न के दौरान रांची के मोराबादी मैदान में भारी संख्या में पारा शिक्षक पहुंचे थे। ये लोग नौकरी स्थायी करने की मांग कर रहे थे जैसा कि छत्तीसगढ़ में हो चुका है। झारखंड में करीब 70 हजार की तादाद में पारा शिक्षक हैं जो अस्थायी तौर पर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं।

पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने बताया कि, पारा शिक्षकों के सहायक शिक्षक के तौर पर स्थायी नौकरी मिलने की उम्मीदें तब बढ़ गईं जब झारखंड सरकार के छह सचिवों ने संयुक्त रूप से इसकी मंजूरी दी। हालांकि अभी ये मामला मुख्यमंत्री रघुबर दास के पास लंबित है।

पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के नारायण महतो ने ई-न्यूजरूम को बताया कि ‘अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव डालने के मकसद से हजारों पारा शिक्षकों ने 15 नबंवरको झारखंड के स्थापना दिवस पर रांची पहुंचने की योजना बनाई थी।’ लेकिन उस दिन हुई पुलिसिया कार्रवाई और लाठीचार्ज के बाद, पारा शिक्षकों बेमियादी हड़ताल पर चले गए।

पारा शिक्षकों के आंदोलन पर सरकार की चुप्पी

नारायण महतो के मुताबिक, 15 नवंबर को 297 पारा शिक्षकों को गिरफ्तार किया गया और उसके बाद जो आंदोलन शुरू हुआ उसमें पारा शिक्षकों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया। लेकिन एक महीने बाद भी रघुबर दास सरकार ने मौजूदा हालात पर कोई ध्यान नहीं दिया है।

जिन और पारा शिक्षकों की मौत हुई है उनमें राजकुमार पासवान (हजारीबाग), उदय शंकर पांडेय (गढ़वा), जगदेव यादव (चतरा) और रघुनाथ हेम्ब्रम (बोकारो) के नाम शामिल हैं।

पारा शिक्षक चाहते क्या हैं ?

नौकरी को स्थायी करना और वेतन में इजाफा, इन पारा शिक्षकों की मुख्य मांग है। फिलहाल अप्रशिक्षित पारा शिक्षक (प्राथमिक) को महज 7800 रुपए महीने मिलते हैं वहीं प्रशिक्षित को 8200 रुपए मेहनताना मिलता है। मध्य विद्यालयों में प्रशिक्षित पारा शिक्षकों को 8800 रुपए मिलते हैं और जिन लोगों ने टीईटी परीक्षा पास की है वो 9200 रुपए पाते हैं।

लंबे समय तक सेवा देने के बाद भी इन पारा शिक्षकों की तनख्वाह में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ है। नारायण महतो को ही लें, पिछले 15 साल से पारा शिक्षक के तौर पर काम कर रहे हैं लेकिन बहुत मामूली मेहनताना पा रहे हैं।

नारायण महतो कहते हैं कि “70 हजार प्रदर्शनकारी पारा शिक्षकों में से अधिकतर के पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। हमने अपना बहुमूल्य समय झारखंड के शिक्षा विभाग को दिया है। लेकिन दुख की बात है कि आज की तारीख में हमारे पास स्थायी नौकरी नहीं है और तनख्वाह के नाम पर भी मामूली पैसे ही मिलते हैं। अगर मान लें कि हम में से किसी की मौत हो जाती है तो हमारे परिजनों को अनुकम्पा के आधार पर नौकरी मिलने का कोई प्रावधान भी नहीं है।”

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा समेत कई सांसदों और विधायकों ने सार्वजनिक तौर पर माना है कि पारा शिक्षकों की मांग जायज है लेकिन ये जनप्रतिनिधि भी प्रदर्शनकारी पारा शिक्षकों और सरकार के बीच समझौता करा पाने में नाकाम रहे हैं।

पारा शिक्षकों के साथ खड़ा है विपक्ष

झारखंड की तमाम विपक्षी पार्टियों ने पारा शिक्षकों के आंदोलन का समर्थन किया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष हेमंत सोरेन ने 17 दिसंबर को ट्वीट कर कहा कि तीन पारा शिक्षकों की मौत के बाद अब रघुबर दास सरकार में नैतिकता नाम की कोई चीज नहीं बची है इसीलिए सरकार गहरी नींद में सो रही है।

पारा शिक्षकों को लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ भाकपा-माले ने कई बार प्रदर्शन किया है। माले नेता विनोद सिंह कहते हैं कि ‘सभी प्रशिक्षित पारा शिक्षकों को तत्काल शिक्षक के तौर पर सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। जहां तक अप्रशिक्षित शिक्षकों की बात है तो उन्हें गैर-शिक्षण कार्य में स्थानी नौकरी मिलनी चाहिए।’

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बेहतरीन सुधार लाने वाली आम आदमी पार्टी का मानना है कि झारखंड की बीजेपी सरकार की मंशा शिक्षा में सुधार लाने की नहीं रही है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि झारखंड सरकार के पास गिरती हुई शिक्षा-व्यवस्था में सुधार करने की न तो कोई नीति है और न ही ये सरकार शिक्षकों का सम्मान करती है। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि झारखंड सरकार लोककल्याण के मकसद को पूरा करने में नाकाम रही है।

आम आदमी पार्टी के झारखंड संयोजक जयशंकर चौधरी ने कहा कि ‘रघुबर दास सरकार शिक्षा को प्राइवेट हाथों में सौंपना चाहती है। सांसदों-विधायकों के विरोध के बावजूद सरकार ने सूबे के कई सरकारी स्कूलों को बंद भी कर दिया है।’

अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार का हवाला देते हुए जयशंकर चौधरी कहते हैं कि वहां सरकार ने कई शिक्षकों को स्थायी नौकरी दी है और उनकी सैलरी में भी अच्छी-खासी वृद्धि की है। उनका कहना है कि ‘दिल्ली में शिक्षकों का भरपूर सम्मान होता है, उन पर न तो लाठीचार्ज होता है और न ही उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।

(साभार : eNewsroom, शाहनवाज़ अख़्तर की अंग्रेजी की मूल रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद संदीप कुमार ने किया है।)

Jharkhand
jharkhand para teacher
Jharkhand government
para teacher protest
raghubar govt

Related Stories

झारखंड: भाजपा काल में हुए भवन निर्माण घोटालों की ‘न्यायिक जांच’ कराएगी हेमंत सोरेन सरकार

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला


बाकी खबरें

  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में सात चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद अब नतीजों का इंतज़ार है, देखना दिलचस्प होगा कि ईवीएम से क्या रिजल्ट निकलता है।
  • moderna
    ऋचा चिंतन
    पेटेंट्स, मुनाफे और हिस्सेदारी की लड़ाई – मोडेरना की महामारी की कहानी
    09 Mar 2022
    दक्षिण अफ्रीका में पेटेंट्स के लिए मोडेरना की अर्जी लगाने की पहल उसके इस प्रतिज्ञा का सम्मान करने के इरादे पर सवालिया निशान खड़े कर देती है कि महामारी के दौरान उसके द्वारा पेटेंट्स को लागू नहीं किया…
  • nirbhaya fund
    भारत डोगरा
    निर्भया फंड: प्राथमिकता में चूक या स्मृति में विचलन?
    09 Mar 2022
    महिलाओं की सुरक्षा के लिए संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है, लेकिन धूमधाम से लॉंच किए गए निर्भया फंड का उपयोग कम ही किया गया है। क्या सरकार महिलाओं की फिक्र करना भूल गई या बस उनकी उपेक्षा कर दी?
  • डेविड हट
    यूक्रेन विवाद : आख़िर दक्षिणपूर्व एशिया की ख़ामोश प्रतिक्रिया की वजह क्या है?
    09 Mar 2022
    रूस की संयुक्त राष्ट्र में निंदा करने के अलावा, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों में से ज़्यादातर ने यूक्रेन पर रूस के हमले पर बहुत ही कमज़ोर और सतही प्रतिक्रिया दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा दूसरों…
  • evm
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: नतीजों के पहले EVM को लेकर बनारस में बवाल, लोगों को 'लोकतंत्र के अपहरण' का डर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में ईवीएम के रख-रखाव, प्रबंधन और चुनाव आयोग के अफसरों को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। उंगली गोदी मीडिया पर भी उठी है। बनारस में मोदी के रोड शो में जमकर भीड़ दिखाई गई, जबकि ज्यादा भीड़ सपा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License