NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
रोज़गार - सरकार का उलझा जाल
ईपीएफओ की लीक हुए आँकड़ों और ट्रक और बसों और डॉक्टरों और इंजीनियरों के बारे में लंबी कहानियों ही थीं लोकसभा में दिए प्रधानमंत्री के भ्रामक भाषण मेंI
सुबोध वर्मा
24 Jul 2018
Translated by महेश कुमार
मोदी सरकार रोज़गार

दो सदी पहले सर वाल्टर स्कॉट ने लिखा, "ओह, जब हम पहली बार धोखेबाजी करते हैं तो हम उलझा जाल बुनते हैं।" मोदी सरकार ने गैर-मौजूदा नौकरियों पर डेटा बनाने के प्रयास से इस सत्य की पुष्टि की है।

पिछले साल से, एक तेजी से चिंतित सरकार। यह साबित करने के लिए वह हर साल 1 करोड़ नौकरियां पैदा करने के अपने चुनाव वादे को पूरा करने में सभी तरह के अध-पके 'डेटा' का प्रदर्शन कर रही है। इन निर्मित तर्कों में से एक कर्मचारी नामांकन डेटा पर आधारित है जो अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा किया जा रहा है। इन ईपीएफओ के नामांकन में काफी बढ़ोतरी हुयी है, इन संख्याओं के मुताबिक - और सरकार के अनुसार - नौकरियों में भारी वृद्धि हुई है।

लेकिन ये संख्याएं एक फिसलन के गुच्छे से ज्यादा कुछ नहीं हैं। सितंबर 2017 से मार्च 2018 की अवधि के लिए ईपीएफओ ने पहली बार 39.35 लाख नामांकन की शुद्ध वृद्धि की घोषणा की। यह 25 मई 2018 को की गयी थी। उसके बाद आंकड़े संशोधित किए गए और एक महीने बाद (25 जून को) शुद्ध घोषणा के रूप में 34.4 लाख दिखाए गए। आखिरकार, एक और महीने बाद, 20 जुलाई को आंकड़े 30.55 लाख तक नीचे थे! उसी अवधि लेकिन डेटा लगातार गिरा रहा था।

कुल मिलाकर, दो महीने में, सितंबर 2017 से मार्च 2018 तक ईपीएफओ के तहत तथाकथित शुद्ध नया नामांकन 22 प्रतिशत या लगभग 9 लाख अधिक बढ़ गया। यह डेटा के साथ खिलवाड़ का नाटकीय पक्ष है - यह सिर्फ खिलाड़ियों के हाथों ही बाहर निकल सकता है।

EPFO 1.png

इस गड़बड़ डेटा का मतलब यह है कि सरकार चट्टानों से पानी को निचोड़ने की कोशिश कर रही है। ईपीएफओ नामांकन नए रोजगार का कोई उपाय नहीं है। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं जो पहले काम कर रहे हैं और हाल ही में ईपीएफ योजना के तहत कवर किए गए हैं। इसमें क्षणिक श्रमिक शामिल हैं। सरकार की घोषणा कि वह ईपीएफ योगदान के नियोक्ता के हिस्से का भुगतान करेगा, इस बारे में अनिश्चितता है कि इसका लाभ के लिये नए कर्मचारियों को नामांकित किया जायेगा या पहले से ही मौजूदा कर्मचारी इसके कवर में रहेंगे। कुछ ने इस बारे में संदेह भी किये हैं कि क्या किसी कर्मचारी को कवर किया जा रहा है या नियोक्ता सिर्फ नए कर्मचारियों का दावा करते हुए सरकार के पैसे को डकार रहे हैं।

जो कुछ भी हो, प्रधानमंत्री मोदी के अविश्वास प्रस्ताव के जवाब में लोकसभा में हालिया भाषण ने इस संदिग्ध ईपीएफओ डेटा पर भारी दावा किया है कि सरकार ने एक साल में एक करोड़ नौकरियां पैदा करने अपना वादा पूरा कर लिया है। जिसमें से इन आंकड़ों में एक करोड़ के दावे में  45 लाख (या 45 प्रतिशत) इस आँकड़े पर आधारित है।

मोदी द्वारा बचे 55 लाख (1 करोड़ घटा 45 लाख) का दावा राष्ट्रीय पेंशन योजना नामांकन (5.68 लाख) द्वारा साबित किया गया; डॉक्टर, सीए और वकीलों जिन्होंने इस दौरान काम करना शुरू किया (6 लाख से अधिक हैं); और ऑटो-रिक्शा, वाणिज्यिक वाहनों और यात्री वाहनों की बिक्री के आधार पर परिवहन क्षेत्र में 20 लाख हैं। [ये केवल 32 लाख होते हैं न कि 55 लाख, लेकिन कौन परवाह करता है!]

यह भी पढ़ें: संसदः किसानों, श्रमिकों और नौकरियों का क्या?

यहां तक कि यह तर्क भी नकली है क्योंकि इनमें से किसी भी नए कर्मचारी को ईपीएफओ के तहत कवर नहीं किया गया है और  न पहले गिना जाता था। यह प्रत्येक श्रेणी के लिए मान्यताओं को बनाता है जो वास्तविक सर्वेक्षण से किसी भी डेटा या साक्ष्य द्वारा समर्थित नहीं हैं। मोदी का तर्क है कि ऑटोरिक्शा, दो शिफ्ट में चलते  हैं, इस प्रकार दो ऑटो तीन नौकरियों में वृद्धि करते हैं। कौन कहता है? कई ऑटो मालिकों द्वारा एक ही शिफ्ट तक चलाए जाते हैं। ट्रक और वाणिज्यिक वाहनों और उनके ड्राइवरों और कंडक्टर के बारे में शानदार धारणाएं भी इसी तरह की हैं। मोदी ने अपने पिछवाड़े मैं एक हसीन झूठ से भरी कहानियाँ जड़ ली हैं जो सच से बहुत परे है।

इस बीच, अगर किसी अन्य डेटा पर नज़र डालें, जो कि एक बहुत अधिक मजबूत है। 2017-18 में, वास्तविक जीवीए वृद्धि पिछले वर्ष की 7.1 प्रतिशत % की तुलना में 6.5 प्रतिशत के साथ धीमी हो गई थी। ऐसा नहीं है कि सकल घरेलू उत्पाद या जीवीए विकास स्वयं नौकरी निर्माण का संकेत है (जैसा कि यूपीए के एक दशक के तहत देश का अनुभव दिखाया गया है) लेकिन विकास धीमा होने के साथ निश्चित रूप से रोजगार बढ़ते नहीं  है। लेकिन इससे ज्यादा कुछ और भी है।

निवेश अनुपात तेजी से दिखा रहा है कि उद्योगपति नई उत्पादक क्षमता को बढ़ाने में रूचि नहीं ले रहे हैं (जो नई नौकरियों को पैदा करता करेगा)। सीएमआईई का अनुमान है कि पिछले साल 2011-12 से 28.5 प्रतिशत  का निवेश अनुपात सबसे कम था। पिछले साल की तुलना में नई निवेश परियोजनाओं में 38.4 प्रतिशत  की गिरावट आई और 2017-18 में नई परियोजनाओं की पूर्ति 26.8 प्रतिशत घट गई। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 15 प्रतिशत नीचे गिर गया।

अधिक सीधे, सीएमआईई अनुमान से संकेत मिलता है कि 2017-18 में देश में कुल रोजगार 40.62 करोड़ था, जो 2016-17 के अनुमानित 40.67 करोड़ से कम था। अंतर केवल 0.1 प्रतिशत का है, इसलिए यह केवल एक सांख्यिकीय ब्लिप हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह है कि नौकरियों में कोई वृद्धि नहीं है।

चालू वर्ष (2018-19) में सीएमआईई अनुमानों के मुताबिक हालत खराब हो रही हैं। पहली तिमाही में, कुल रोजगार 40.19 करोड़ था, श्रम भागीदारी दर 42.7 प्रतिशत तक गिर गई और बेरोजगारी 5.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। सीएमआईई ने कहा कि ये सभी संकेतक एक साल पहले की तिमाही के दौरान और पिछले तिमाही के दौरान उनके संबंधित मूल्यों से कम हैं।

इसलिए, असली दुनिया में, देश के लोग अभी भी मोदी के रंगीन चशमें के माध्यम से नौकरियों की तलाश में हैं, वे केवल वाणिज्यिक वाहन चला रहे, डॉक्टरों या इंजीनियरों के सहायक बन रहे हैं या कुछ अन्य औपचारिक नौकरियां प्राप्त कर रहे हैं।

यह डेटा युद्ध केवल 2019 के आम चुनावों में ही तय होगा क्योंकि केवल तभी लोग बताएंगे कि वे सरकार पर विश्वास करते हैं या नहीं। संख्याएं - या वास्तविक जीवन।

modi sarkar
rozgaar
unemployment
EPFO

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

ज्ञानव्यापी- क़ुतुब में उलझा भारत कब राह पर आएगा ?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा


बाकी खबरें

  • लव पुरी
    क्या यही समय है असली कश्मीर फाइल को सबके सामने लाने का?
    04 Apr 2022
    कश्मीर के संदर्भ से जुडी हुई कई बारीकियों को समझना पिछले तीस वर्षों की उथल-पुथल को समझने का सही तरीका है।
  • लाल बहादुर सिंह
    मुद्दा: क्या विपक्ष सत्तारूढ़ दल का वैचारिक-राजनीतिक पर्दाफ़ाश करते हुए काउंटर नैरेटिव खड़ा कर पाएगा
    04 Apr 2022
    आज यक्ष-प्रश्न यही है कि विधानसभा चुनाव में उभरी अपनी कमजोरियों से उबरते हुए क्या विपक्ष जनता की बेहतरी और बदलाव की आकांक्षा को स्वर दे पाएगा और अगले राउंड में बाजी पलट पायेगा?
  • अनिल अंशुमन
    बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध
    04 Apr 2022
    भाकपा माले विधायकों को सदन से मार्शल आउट कराये जाने तथा राज्य में गिरती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों के विरोध में 3 अप्रैल को माले ने राज्यव्यापी प्रतिवाद अभियान चलाया
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक हज़ार से भी कम नए मामले, 13 मरीज़ों की मौत
    04 Apr 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 597 हो गयी है।
  • भाषा
    श्रीलंका के कैबिनेट मंत्रियों ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया
    04 Apr 2022
    राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से सरकार द्वारा कथित रूप से ‘‘गलत तरीके से निपटे जाने’’ को लेकर मंत्रियों पर जनता का भारी दबाव था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License