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भारत
राजनीति
रफ़ाल सौदे पर नए खुलासे से हंगामा, मोदी सीधे तौर पर कठघरे में, इस्तीफे की मांग
रफ़ाल सौदे को लेकर संसद के दोनों सदनों में शुक्रवार को भारी हंगामा हुआ। विपक्ष ने एक बार फिर एकजुट होकर जेपीसी जांच और प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की मांग की।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Feb 2019
सांकेतिक तस्वीर

रफ़ाल सौदे का मुद्दा शुक्रवार को लोकसभा में छाया रहा जहां विपक्ष ने एकजुट होकर एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मामले की जांच संयुक्त संसदीय समित (जेपीसी) से कराने तथा प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की। राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर हंगामा हुआ। वहीं सरकार ने आरोप लगाया कि विपक्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निहित स्वार्थ से जुड़े तत्वों के हाथों में खेल रहा है और उसका प्रयास गड़े मुर्दे उखाड़ने जैसा है।

आपको बता दें कि अंग्रेज़ी अखबार ‘द हिंदू’ की ख़बर के मुताबिक रफ़ाल मामले में रक्षा मंत्रालय सौदे को लेकर बातचीत कर रहा था, उसी दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) भी अपनी ओर से फ्रांसीसी पक्ष से 'समानांतर बातचीत' में लगा था। अखबार के मुताबिक 24 नवंबर 2015 को रक्षा मंत्रालय के एक नोट में कहा गया कि पीएमओ के दखल के चलते बातचीत कर रहे भारतीय दल और रक्षा मंत्रालय की स्थिति कमज़ोर हुई।

इस रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की ओर सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने इसमें घोटाला किया है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फ्रांस के साथ लड़ाकू जेट राफेल सौदे में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि वह इस सौदे में समानांतर वार्ता कर रहे थे। राहुल गांधी ने यहां अकबर रोड स्थित पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हम एक साल से अधिक समय से कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री राफेल घोटाले में सीधे तौर पर शामिल हैं।"

उन्होंने कहा, "आज द हिंदू अखबार ने भी साफ शब्दों में यही खुलासा किया है। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री स्वयं फ्रांस के साथ समानांतर वार्ता कर रहे थे।"

युवाओं और सशस्त्र बलों को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, "यह आपका पैसा है और यह आपके भविष्य के बारे में है। और, यहां यह स्पष्ट है कि मोदी ने आपके पैसे में से 30,000 करोड़ रुपये चुराये हैं और इसे अपने दोस्त (एक भारतीय उद्योगपति) को दे दिया।" 

राहुल ने यह टिप्पणी 'द हिंदू' द्वारा शुक्रवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद की जिसमें अखबार ने कहा, "रक्षा मंत्रालय ने रफ़ाल वार्ता को कमजोर करने के लिए पीएमओ का विरोध किया था।"

उन्होंने एक पत्र को पढ़ते हुए कहा, "अब मंत्रालय ने खुद कहा है कि हम (प्रधानमंत्री कार्यालय) को सलाह दे सकते हैं कि जो भी अधिकारी भारतीय निगोशिएटिंग टीम का हिस्सा नहीं हैं वे समानांतर वार्ता से बच सकते हैं।"

तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को संबोधित रक्षा सचिव के पत्र का हवाला देते हुए राहुल ने कहा कि 'रक्षा अधिकारी भी इस तरह की वार्ता के खिलाफ थे'।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला अब इससे अधिक और स्पष्ट नहीं हो सकता। यह एकदम साफ नजर आ रहा मामला है जिसमें रक्षा मंत्रालय कह रहा है कि प्रधानमंत्री ने खुद एक समानांतर वार्ता की थी।

आपको बता दें कि न्यूज़क्लिक ने भी रक्षा मामलों के विशेषज्ञ रवि नायर की एक रिपोर्ट (अंग्रेजी में 6 फरवरी और हिन्दी में 7 फरवरी) को प्रकाशित की थी। जिसमें बताया गया है कि सार्वजनिक डोमेन में मौजूद सभी सूचनाओं की घटनाओं के अनुक्रम जोड़े, तो यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल इस सौदे को तय किया बल्कि रफ़ाल की कीमत भी खुद ही तय की।

पढ़ें : क्या मोदी ने अप्रैल 2015 में रफ़ाल की कीमत खुद ही तय की थी? 

लोकसभा में शुक्रवार को रक्षा मंत्रालय से जुड़े ताजा खुलासे को लेकर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया। सदन के शुरू होने के तुरंत बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस व तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्य लोकसभा अध्यक्ष के आसन के सामने एकत्र हो गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

सदस्य ‘चौकीदार चोर है’ की नारेबाजी करते सुने गए और वह हाथों में प्लेकार्ड लेकर रक्षा सौदे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की। लेकिन आंदोलन कर रहे सदस्यों ने प्रदर्शन जारी रखा।

इस हंगामे पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने अखबार पर सवाल उठाते हुए कहा, "एक समाचार पत्र ने रक्षा सचिव की नोटिंग को प्रकाशित किया। अगर कोई समाचार पत्र एक नोटिंग को छापता है, तो पत्रकारिता की नैतिकता की मांग है कि तत्कालीन रक्षामंत्री का जवाब भी प्रकाशित किया जाए।"

राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर हंगामा हुआ जिसके बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई। विपक्षी सांसदों ने सदन में नियम 267 (सस्पेंशन ऑफ बिजनेस) के तहत राफेल सौदे और विश्वविद्यालय की भर्तियों में 13-सूत्रीय रोस्टर पर चर्चा करने के लिए नोटिस पेश किए। लेकिन अध्यक्ष एम. वेंकैया नायडू ने दोनों नोटिस खारिज कर दिए। 

इसके बाद विपक्षी नेताओं ने हंगामा शुरू कर दिया और नायडू ने 11 फरवरी तक के लिए सदन स्थगित कर दिया है।

(कुछ इनपुट आईएएनएस)

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