NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
‘रुन्नीसैदपुर चलो’ : महादलितों को ज़मीन से बेदख़ल करने के ख़िलाफ़ सीपीएम का आह्वान
सीपीएम का कहना है की सरकार और भू-माफिया के गठजोड़ के खिलाफ 22 जनवरी को विशाल आम सभा का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सभी महादलितों को ज़मीन का पर्चा नहीं मिल जाता है।
मुकुंद झा
20 Jan 2019
महादलितों के हक़ के लिए आंदोलन

बिहार के सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर में 316 महादलित परिवार करीब डेढ़ दशक से रह रहे हैं, लेकिन अब प्रशासन द्वारा उन्हें इस ज़मीन से जबरन बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। इसके खिलाफ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के स्थानीय नेतृत्व की अगुआई में किए जा रहे विरोध प्रदर्शन पर भूमाफिया ने पेट्रोल बम से हमला भी किया जिसमें दो लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं।

इस पूरे मामले को लेकर सीपीएम के राज्य नेतृत्व ने 22 जनवरी को रुन्नीसैदपुर चलो का नारा दिया है। सीपीएम का कहना है की सरकार और भू-माफिया के गठजोड़ के खिलाफ  22 जनवरी को विशाल आम सभा का आयोजन किया जाएगा जिसमें पार्टी के केंद्रीय कमेटी सदस्य एवं किसान सभा के महासचिव अशोक धवले एवं राज्य सचिव अवधेश कुमार एवं अन्य नेतागण शामिल होंगे।

IMG-20190120-WA0019_0.jpg

क्या है पूरा मामला?

आपको बता दें कि  रून्नीसैदपुर की जमीन रविंद्रनाथ मेहता की सेलिंग से फालतू  जमीन है। आप सोच रहे होंगे कि ये सेलिंग क्या है ? सेलिंग कानून बिहार में एक तरह का भू हदबंदी का कानून है। इसके मुताबिक आप एक हद से अधिक भूमि अपने स्वामित्व में नहीं रख सकते हैं। इसी 16 एकड़ जमीन में से 10 एकड़ 700 डिसमिल जमीन पर 2003 से भूमिहीन लोग अपना घर बना कर रहे हैं।

स्थानीय नेता देवेंद्र यादव के नेतृत्व में लोग आवासीय पर्चा यानी एक तरह का प्रमाण पत्र जिससे वहाँ रहे लोगो को क़ानूनी वैधता मिले, इसके  लिए  लगातार संघर्ष कर रहे थे। इसी संघर्ष के दबाव में सर्किल ऑफिसर (सीओ) द्वारा लंबी जांच के बाद 316 परिवार को पर्चा देने की बात तय हुई। इस बीच सीओ बीमार होकर छुट्टी पर चले गए और सीओ का प्रभार बीडीओ सरोज बैठा को मिला।

सारा मामला यहीं से बिगड़ा। कब्जेदारों जो कि भूमिहीन हैं उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें अब उनका वैधानिक हक़ मिलने वाला है लेकिन ऐसा न हो पाया। ग्रामीणों का कहना था कि साज़िश के तहत अचानक 10 जनवरी  को सैकड़ों कि संख्या में पुलिस बल ने स्थनीय भूमाफिया के साथ गांव पर धावा बोल दिया और बीडीओ ने गांव वालों से कहा कि लिस्ट में शामिल लोगों जिन्हें प्रमाण पत्र मिलना था उनकी फिर से जांच की जाएगी।

इससे ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया और सीपीएम नेता देवेन्द्र यादव के नेतृत्व में इसका प्रतिरोध शुरू हो गया। इस दौरान गाँव की महिलाओं के साथ मारपीट की गई। इस पूरे घटनाक्रम के विरोध में स्थानीय सीपीएम नेतृत्व द्वारा 11 जनवरी से 51 लोगों ने आमरण अनशन शुरू किया।

हत्या की साज़िश का आरोप

सीपीएम का कहना है कि इस बीच एक गहरी साज़िश के तहत बीडीओ और भूमाफिया ने मिलकर आंदोलन के नेता कामरेड देवेंद्र यादव की हत्या की योजना बनाई थी। इसी योजना के तहत देवेंद्र यादव को वार्ता के लिए न्योता दिया गया लेकिन वार्ता के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता मदन सिंह व अन्य दो साथी गये। अपनी योजना को असफल होता देख हत्यारों ने धरने पर बैठे लोगों को संबोधित कर रहे देवेंद्र यादव को पेट्रोल बम का निशाना बनाया लेकिन वह बीच में ही फट गया और उसकी जद में बिंदा साहनी एवं दलित महिला अनारी देवी आ गईं। बिंदा साहनी पीएमसीएच में गंभीर स्थिति में हैं, जबकि अनारी देवी मुजफ्फरपुर के जिला अस्पताल में भर्ती हैं। अनारी देवी एक विधवा महिला हैं। 

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे है सीपीएम के अंचल सचिव देवेन्द्र यादव ने कहा कि ये सिर्फ यहीं नही, आज पूरे राज्य में गरीबों को उनके आवासीय परिसरों से खदेड़ा जा रहा है क्योंकि आज जमीन की कीमत आसमान छू रही है और सामंतो एवं भू माफिया की आंखें इन ‘सोने के टुकड़ों’ में अटकी हुई हैं। पार्टी ने ज़मीन से बेदखली के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन करने का निर्णय लिया है। हमने इन सबके खिलाफ थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई है जिसमें बीडीओ सरोज कुमार बैठा व अंचल निरीक्षक विजय कुमार समेत रुन्नीसैदपुर निवासी चांद, किशन पासवान, बहेरा (नानपुर) के अताउर्रहमान व रामपुर निवासी रंजीत मंडल को नामजद किया गया है। शुरू में तो पुलिस आनाकानी कर रही थी परन्तु दबाव को बढ़ता देख एफआईआर दर्ज की है।

एसएचओ को बड़ी मुश्किल से याद आया!

न्यूज़क्लिक ने रुन्नीसैदापुर थाने के एसएचओ गौरव से इस मामले में बात की। एसएचओ गौरव ने शुरू में तो इस पूरे मामले से अनजान बनने की कोशिश की, परन्तु जब हमने उनके सामने पूरा मामला दोहराया तो उन्हें ‘याद’ आया और उन्होंने ग्रमीणों के सभी आरोपों को ख़ारिज़ कर दिया। उन्होंने यह माना कि जमीन देने के लिए सीओ ने जाँच की थी  लेकिन उन्होंने कहा कि इस जाँच में कुछ गलती थी इसलिए पुन: जाँच करने का निर्णय लिया गया जिसका प्रतिरोध वहाँ के नागरिक कर रहे थे लेकिन अब सबकुछ ठीक हो गया है।

आगे बातचीत में  उन्होंने हत्या कि साज़िश को गलत बताया और कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है। किसी भी प्रकार का हमला नहीं हुआ। लेकिन जब हमने लोगों के घायल होने को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि वो एक हादसा था। इस पूरी बातचीत में ऐसा साफ झलक रहा था कि एसएचओ एक पक्ष को बचाने की कोशिश कर रहे थे।

बीडीओ, सीओ से नहीं हो पाई बात

हमने इस मामले में बीडीओ और सीओ से भी बात करने की कोशिश की। लेकिन बीडीओ ने कई बार फ़ोन करने के बाद भी कोई उत्तर नहीं दिया जबकि सीओ का फोन लगातार बंद आ रहा था।

अस्पताल में घायलों को कंबल तक नहीं दिया गया : अवधेश कुमार

सीपीएम के राज्य सचिव अवधेश कुमार ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बताया कि हम घायल धरनार्थियों की स्थिति का जायजा लेने गए  तो हमने देखा कि अस्पताल में न डॉक्टर उपस्थित थे और न बीमार की देखभाल करने वाले लोग। यहाँ तक कि  इस भीषण ठंड के मौसम में घायलों को कंबल भी नहीं दिया गया था।

अवधेश कुमार ने कहा कि ये सब प्रशासन और भू माफिया की मिलीभगत से हुआ है। उन्होंने बीडीओ और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि दोनों ही बहुत भ्रष्ट हैं। ये भू माफियाओं को बचाने कि कोशिश कर रहे हैं। 

सीपीएम के शीर्ष नेतृत्व के घटनास्थल पर पहुंचने के बाद धरना खत्म हो गया हैं लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना था कि संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सभी को ज़मीन का पर्चा नहीं मिल जाता है।

Bihar
Sitamarhi
mahadalit
महादलित
jdu-bjp
Nitish Kumar
CPI(M)
Protest
रुन्नीसैदपुर चलो

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान


बाकी खबरें

  • leather industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    बंद होने की कगार पर खड़ा ताज नगरी का चमड़ा उद्योग
    10 Feb 2022
    आगरा का मशहूर चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कारीगर परेशान है। इनका कहना है कि सरकार इनकी तरफ ध्यान नही दे रही जिसकी वजह से पॉलिसी दर पॉलिसी इन्हें नुकसान पे नुक्सान हो रहा है।
  • Lakhimpur case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर कांड: मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत
    10 Feb 2022
    केंद्रीय मंत्री के बेटे की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा था कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उसने किसानों को कुचलने के लिए घटना में शामिल वाहन के चालक को उकसाया था।
  • uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : टिहरी बांध से प्रभावित गांव आज भी कर रहे हैं न्याय की प्रतीक्षा!
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड के टिहरी ज़िले में बने टिहरी बांध के लिए ज़मीन देने वाले ग्रामीण आज भी बदले में ज़मीन मिलने की आस लगाए बैठे हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
  •  Bangladesh
    पीपल्स डिस्पैच
    बांग्लादेश: सड़कों पर उतरे विश्वविद्यालयों के छात्र, पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ उपजा रोष
    10 Feb 2022
    बांग्लादेश में शाहजलाल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद, देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र एकजुटता की लहर दौड़ गई है। इन प्रदर्शनकारी छात्रों ने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वैश्विक निरक्षरता के स्थिर संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ
    10 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र ने नोट किया कि 'दुनिया भर में 150 करोड़ से अधिक छात्र और युवा कोविड-19 महामारी के कारण बंद स्कूल और विश्वविद्यालयों से प्रभावित हो रहे हैं या प्रभावित हुए हैं'; कम से कम 100 करोड़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License