NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
रविदास मंदिर : केंद्र सरकार के प्रस्ताव से सहमत नहीं मंदिर समिति, कहा- हमें हमारा पूरा हक़ चाहिए
मंदिर ट्रस्ट समिति के सहकोषाध्यक्ष रमेश ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा कि हम सरकार के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं। हमें मंदिर परिसर की पूरी जमीन चाहिए। उधर, भीम आर्मी भी इस पर राज़ी नहीं है। इस बीच ख़बर है कि भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर की ज़मानत के आदेश जारी हो गए हैं।
सोनिया यादव
19 Oct 2019
ravidas mandir

पिछले कई दिनों से लगातार चर्चा में रहे संत रविदास मंदिर मामले में शुक्रवार 18 अक्तूबर को केंद्र सरकार एक नए समाधान के साथ सामने आई। मंदिर संबंधित पुनर्निर्माण याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता और श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए सरकार तुगलकाबाद में उसी जगह पर जहां मंदिर स्थित था, 200 वर्ग मीटर की जमीन कुछ शर्तों के साथ मंदिर निर्माण के लिए देने को तैयार है।

हालांकि मंदिर समिति और दलित समुदाय सरकार के इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं है। रविदास समाज के लोगों का कहना है कि हमें हमारा पूरा हक़ चाहिए, किसी की भीख नहीं चाहिए। सरकार हमारी आस्था का मजाक बना रही है, ये हमें स्वीकार नहीं है।

मंदिर ट्रस्ट समिति के सहकोषाध्यक्ष रमेश ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा कि हम सरकार के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं। हमें मंदिर परिसर की पूरी जमीन चाहिए। सरकार हमें गुमराह नहीं कर सकती। अगर सरकार हमारी मांग नहीं मानती तो हम फिर से संघर्ष और आंदोलन करेंगे।

इसे भी पढ़े:संत रविदास मंदिर पर बवाल का ज़िम्मेदार कौन?

ये पूछे जाने पर की समिति कितनी जमीन की मांग करती है, रमेश का कहना है, ‘रविदास मंदिर परिसर की जमीन लगभग 10326 वर्ग मीटर है और इस पूरी जमीन पर पहले की तरह ही भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण होना चाहिए'।

खबरों के अनुसार कागज़ों की मानें तो 11293 वर्ग मीटर के क्षेत्र में संत रविदास का मंदिर स्थित था। जिसके कॉम्प्लेक्स में 20 कमरे और एक बड़ा हॉल था। लेकिन ज़मीन के दावों के तथ्य अलग-अलग हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता और भीम आर्मी प्रमुख के वकील महमूद प्राचा ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, ‘सिकंदर लोदी ने 100 एकड़ जमीन (4,04,686 वर्ग मीटर) मंदिर निर्माण के लिए दी थी। जिसके हमारे पास साक्ष्य मौजूद हैं। हम जमीन भीख में नहीं मांग रहे, सरकार मात्र 200 वर्ग मीटर जमीन देकर हम पर एहसान जताने की कोशिश कर रही है। ये हमें मंजूर नहीं है।'

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश हुए अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि जिन पांच याचिकाकर्ता ने मंदिर के विध्वंस के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था, उनमें से सरकार के प्रस्ताव पर केवल दो ही सहमत हैं। इसपर जस्टिस अरुण मिश्रा और एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने कहा कि कोर्ट असहमत याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को सुनने के बाद आदेश पारित करेगा।

फिलहाल कोर्ट ने अटार्नी जनरल के प्रस्ताव को दर्ज कर लिया है और मंदिर के निर्माण की मांग कर रहे पक्षकारों से कहा कि यदि उन्हें कोई आपत्ति है तो वे सोमवार 21 अक्तूबर तक इसे दर्ज कराएं। मामले की अगली सुनवाई भी सोमवार को ही प्रस्तावित है।

अब तक क्या-क्या हुआ?

ग़ौरतलब है कि 10 अगस्त, 2019 को दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी डीडीए द्वारा गुरु रविदास मंदिर गिरा दिया गया था, जिसका असर दिल्ली से लेकर पंजाब तक देखने को मिला है। मंदिर गिराने के विरोध में 13 अगस्त को पंजाब बंद रहा तो वहीं 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली की सरकारों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इस मुद्दे पर राजनीतिक रूप से या प्रदर्शनों के दौरान क़ानून व्यवस्था संबंधी कोई स्थिति उत्पन्न न हो।

इसे भी पढ़े:रविदास मंदिर गिराए जाने के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर उतरा दलित समुदाय  

21 अगस्त को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल दलित जन सैलाब देखने को मिला। नीली टोपी पहने और झंडे लिए प्रदर्शनकारियों ने अंबेडकर भवन से रामलीला मैदान तक मार्च किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच झड़प की ख़बरें भी आईं, जिसके बाद क़रीब 96 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। इसके बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों पर दंगा फैलाने, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आगजनी करने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप है।

इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा ने बताया कि सभी गिरफ्तार भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं को ज़मानत मिल गई है। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर की भी 18 अक्तूबर को ज़मानत अर्जी स्वीकार कर ली गई। जिसके बाद आज 19 अक्तूबर को चंद्रशेखर के ज़मानत के आदेश जारी हो गए हैं।

बता दें कि दो पूर्व सांसदों-अशोक तंवर और प्रदीप जैन आदित्य द्वारा 27 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में मंदिर पुनर्निर्माण की याचिका दायर गई थी। याचिका में उन्होंने अपने पूजा के अधिकार को लागू करने की अनुमति मांगी थी।

इसे भी पढ़े:रविदास मंदिर : सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव से सहमत नहीं दलित समुदाय, कहा- आस्था नहीं, हक़ का मामला

4अक्टूबर को मंदिर संबंधित पुनर्निर्माण याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील विकास सिंह ने दलील दी कि मामला मंदिर में पूजा के अधिकार का है। तब बेंच ने कहा कि हम लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं लेकिन कानून का पालन तो करना ही होगा। पीठ ने इस प्रकरण से जुड़े पक्षकारों से कहा था कि वे वैकल्पिक स्थान के बारे में ऐसा समाधान निकालें जो सभी के लिए ठीक हो। इस मामले में बेहतर उपाय के लिए प्रयास किया जाना चाहिए। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वह अटॉर्नी जनरल से बात करें और समस्या के समाधान लेकर सामने आएं।

हालांकि भीम आर्मी सरकार के इस समाधान के फैसले से सहमत नहीं है। भीम आर्मी का कहना है कि हम भव्य मंदिर का निर्माण चाहते हैं और इसके लिए पूरी जमीन जो पहले मंदिर परिसर की थी, वो मिलनी चाहिए।

भीम आर्मी के सदस्य नंदु गौतम ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, "मंदिर वहीं बनेगा और पूरी जमीन पर बनेगा, यही हमारा संघर्ष है। ये मामला हमारी सच्चाई, आस्था और सम्मान से जुड़ा है। हमें किसी सरकार का एहसान नहीं चाहिए। तुगलकाबाद का स्थान पवित्र है, क्योंकि जब गुरु रविदास बनारस से पंजाब की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने इस स्थान पर आराम किया था। हमारी मांग है कि मंदिर का पुनर्निमाण वहीं उसी स्थान पर हो और हमें पूरा हक मिले। अगर ऐसा नहीं हुआ तो, फिर से आंदोलन होगा।"

Guru Ravidas temple
Ravidas trust
Dalit atrocities
bheem army
Ravidas Temple Demolition
Ravidas community

Related Stories

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

लखनऊ: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत के साथ आए कई छात्र संगठन, विवि गेट पर प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

यूपी चुनाव: दलितों पर बढ़ते अत्याचार और आर्थिक संकट ने सामान्य दलित समीकरणों को फिर से बदल दिया है

राजस्थान: घोड़ी पर चढ़ने के कारण दलित दूल्हे पर पुलिस की मौजूदगी में हमला

यूपी: ‘प्रेम-प्रसंग’ के चलते यूपी के बस्ती में किशोर-उम्र के दलित जोड़े का मुंडन कर दिया गया, 15 गिरफ्तार 

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: कई गठबंधन बदल चुकी पीएमके के पास स्पष्ट दृष्टिकोण की कमी

दिल्ली : डीडीए ने रविदास मंदिर के पुनर्निर्माण को दी मंज़ूरी


बाकी खबरें

  • Hemant Soren
    अनिल अंशुमन
    झारखंड-बिहार: स्थानीय भाषा को लेकर विवाद कहीं महज़ कुर्सी की राजनीति तो नहीं?
    22 Sep 2021
    “किसी भी प्रदेश में वहां की स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलना संविधान सम्मत है। लेकिन अब इस पर भी राजनीति होना संदेह पैदा करता है कि कहीं ये विवाद भी कोई सांप्रदायिक ध्रुविकरण करा कर बुनियादी सवालों…
  • Varanasi
    विजय विनीत
    बदहाली: रेशमी साड़ियां बुनने वाले हाथ कर रहे हैं ईंट-पत्थरों की ढुलाई, तल रहे हैं पकौड़े, बेच रहे हैं सब्ज़ी
    22 Sep 2021
    बनारस से ग्राउंड रिपोर्ट: विश्वविख्यात बनारस की रेशमी साड़ियों का ताना-बाना बिखर रहा है। इसी ताने-बाने में सिसक रही है बुनकरों की जिंदगी। जानने के लिए आपको लिए चलते हैं बनारस की संकरी गलियों में..
  • school
    सौम्या गुप्ता, सी. सरतचंद
    स्कूलों को वक़्त से पहले खोलने की अनुमति क्यों नहीं दी जानी चाहिए
    22 Sep 2021
    केवल स्कूलों को फिर से खोलने से असमान शिक्षा प्रणाली अधिक समान नहीं हो जाएगी जब तक कि सरकारें शिक्षा पर अपने ख़र्च को नहीं बढ़ाती हैं स्थिति में बदलाव लाना असंभव है। स्कूल खोलने से कोविड म्यूटेशन का…
  • SCO
    एम. के. भद्रकुमार
    ईरान की एससीओ सदस्यता एक बेहद बड़ी बात है
    22 Sep 2021
    तेहरान का एससीओ में ज़ोरदार स्वागत के साथ शामिल किया जाना और इस संगठन का जल्दबाज़ी के साथ विस्तार किया जाना दिखाता है कि बीजिंग और मॉस्को के बीच ज़बरदस्त तालमेल है।
  • यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    22 Sep 2021
    योगी जी का विकास का सारा जश्न दरअसल अर्थव्यवस्था के ध्वंस और कोविड से हलकान, हैरान-परेशान जनता को मुंह चिढ़ाने और उसके जले पर नमक छिड़कने जैसा है। कुछ विश्लेषकों ने ठीक नोट किया है कि "यूपी विकासोत्सव…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License