NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
स्वास्थ्य का अधिकार: केरल और तमिलनाडु ने पेश की मिसाल 
केरल और तमिलनाडु, दोनों राज्यों ने हाल ही में कोविड-19 संबंधित चिकित्सा उपकरणों की कीमतों की सीमा तय कर दी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रदेश के नागरिकों के स्वास्थ्य सेवा के अधिकार का उल्लंघन न हो और उनको ज़रूरी समान ऊँची दरों पर न ख़रीदने पड़ें जैसा कि अन्य प्रदेशों में हो रहा है।
महेश हयाती
10 Jun 2021
Translated by महेश कुमार
स्वास्थ्य का अधिकार: केरल और तमिलनाडु ने पेश की मिसाल 

भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार अध्याय के भीतर स्वास्थ्य सेवा के अधिकार की जानकारी का पता लगाते हुए और बताते हुए कि इसमें क्या-क्या शामिल है, महेश हयाती लिखते हैं कि देश के अन्य राज्यों को केरल और तमिलनाडु के उदाहरण का पालन करना चाहिए, क्योंकि दोनों ने हाल ही में कोविड-19 से संबंधित चिकित्सा उपकरणों की कीमतों की हद तय कर दी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके निवासियों के स्वास्थ्य सेवा के अधिकार का उल्लंघन न हो।

—-

पूरी दुनिया एक कठिन दौर से गुजर रही है, एक ऐसी महामारी जिसकी गति काफी तेज है और इसने सिस्टम की खामियों को उजागर करके रख दिया है। महामारी के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से किसी भी किस्म का सरकारी हस्तक्षेप अच्छी तरह से जांचा-परखा होना चाहिए, क्योंकि इसके दूरगामी परिणाम होते हैं। जहां तक हुकूमत का संबंध है, महामारी के कारण एक भी मौत कोविड-19 की घातक घटनाओं के बारे में प्रकाशित होने वाले किसी दैनिक बुलेटिन की संख्या हो सकती है, लेकिन यह मृतक के परिवार को तबाह करके रख देती है।

महामारी ने सभी की परीक्षा ली है। चुनी हुई सरकार की योग्यता, कार्यपालिका की दक्षता, लोक कल्याण में न्यायपालिका की सक्रियता, मीडिया की विश्वसनीयता और साथ ही कानून के प्रति जनता की निष्ठा जांच के दायरे में आ गई है। कौन किसकी कीमत पर इस इम्तिहान को पास करेगा, एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर शायद आत्मनिरीक्षण और जवाबदेही से ही मिल सकता है।

स्वास्थ्य का अधिकार एक मौलिक अधिकार है

भारत का संविधान, जिसमें मौलिक अधिकारों का प्रावधान है वह हुकूमत की कार्रवाई की हदें तय करता है, इन कठिन समय में उसका और भी अधिक महत्व हो जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की परिकल्पना की गई है। सुने जाने के अधिकार के प्रति उदारता के साथ-साथ विभिन्न न्यायिक निर्देशों ने अनुच्छेद 21 के दायरे के विस्तार से  मौलिक अधिकारों के साथ कई अधिकारों को मान्यता दी है।

महामारी के दौरान सामने आए मौलिक अधिकारों में से एक स्वास्थ्य का अधिकार है, जिसे पंडित परमानंद कटारा बनाम भारतीय यूनियन और अन्य, 1989 एससीआर (3) 997 के मामले में मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने बाद के कई फैसलों में इसे दोहराया है।

संविधान द्वारा आश्वस्त मौलिक अधिकारों के रूप में किसी भी अधिकार को मान्यता देने का मतलब यह है कि वह न्यायसंगत हो जाता है, अर्थात इसे कानून की अदालतों के माध्यम से लागू किया जा सकता है। किसी अधिकार की न्यायसंगतता ही उसे अर्थपूर्ण बनाती है। आम तौर पर, एक मौलिक अधिकार किसी व्यक्ति को कानूनी अधिकार प्रदान करता है, और हुकूमत को उस अधिकार के उल्लंघन होने से रोकती है।

सकारात्मक और नकारात्मक अधिकार

अधिकारों को दो तरीकों से समझा जा सकता है: नकारात्मक और सकारात्मक अधिकार। नकारात्मक अधिकारों के मामले में हुकूमत और अन्य संस्थाओं को उनकी कार्यवाहियों के माध्यम से, अपने अधिकार का दावा करने वाले व्यक्तियों की क्षमता का उल्लंघन करने से रोकने की जरूरत होती है। इसका मतलब यह है कि हुकूमत जनता को अपने अधिकारों का आनंद उठाने में हस्तक्षेप न करे और जिस अधिकार पर सवाल उठा है उसका सम्मान करे और उसकी रक्षा करने के लिए बाध्य हो।

दूसरी ओर, सकारात्मक अधिकारों में न केवल सम्मान और सुरक्षा शामिल है, बल्कि इस तरह के अधिकार के इस्तेमाल को सक्रिय रूप से पूरा करना और सुविधा प्रदान करना भी शामिल है। ऐसा ही एक अधिकार स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार है। यह अधिकार हुकूमत को एक कर्तव्य देता है कि वह अपने नागरिकों को स्वास्थ्य देखभाल के अधिकार के इस्तेमाल को सुविधाजनक बनाए और सस्ती कीमत पर चिकित्सा सहायता प्रदान करे।

क्यों कोविड संबंधित वस्तुओं की कीमतों को सीमित किया जाना चाहिए?

पिछले कई महीनों से, और विशेष रूप से महामारी की वर्तमान दूसरी लहर के दौरान, हमने साधारण चिकित्सा जरूरतों के साक्षी हैं कि ऐसी सभी वस्तुओं को स्टॉक करने की सलाह दी गई थी, जैसे कि ऑक्सीमीटर, एन-95 मास्क और थर्मामीटर, दूसरों अन्य चीज़ें जिन्हे बाज़ार में बेचा जा रहा है, उपरोक्त सभी सामन को निजी मेडिकल स्टोर महंगे दामों पर बेच रहे हैं और ये मेडिकल स्टोर जनता को लूट रहे हैं।

यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि हुकूमत अपने नागरिकों के लिए आवश्यक चिकित्सा किटों की कीमतों को नियंत्रित करे और अपना कर्तव्य निभाए, जिसके विफल होने से हुकूमत की तरफ से अपने कर्तव्य के निर्वहन में अवहेलना होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि अदालतों ने लगातार इस बात को माना है कि लोगों को उनकी वित्तीय बदहाली के कारण स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा उपकरणों तक पहुंच से वंचित नहीं किया सकता है। 

केरल और तमिलनाडु ने दिखाया रास्ता 

पिछले महीने, केरल सरकार ने केरल एसेंसियल आर्टिकल कंट्रोल एक्ट, 1986 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए, कोविड के इलाज़ में साहायक पंद्रह चिकित्सा उपकरणों (जैसे कि पीपीई किट, एन-95 मास्क, हैंड सैनिटाइज़र, ऑक्सीजन मास्क, ऑक्सीमीटर और अन्य) की कीमतों की हद तय करने वाला एक आदेश पारित किया था, जिससे जनता को सस्ती कीमतों पर चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हो सके।

पिछले हफ्ते, तमिलनाडु सरकार ने भी तमिलनाडु इसका अनुसरण किया और एक आदेश जारी कर आवश्यक वस्तु नियंत्रण और मांग अधिनियम, 1949 के तहत आदेश जारी करते हुए, पंद्रह चिकित्सा उपकरणों की अधिकतम खुदरा कीमतों को तय किया था।

उपरोक्त आदेश चिकित्सा उपकरणों तक पहुंच के अधिकार को साकार करने में एक लंबा रास्ता तय करेंगे, जो स्वास्थ्य सेवा के अधिकार के व्यापक दायरे में आता है। अन्य राज्यों को केरल और तमिलनाडु सरकार के निर्णयों से सबक लेना चाहिए, और चिकित्सा किट की कीमतों को उचित रूप से तय करना चाहिए, अन्यथा स्वास्थ्य सेवा का अधिकार केवल कागज पर ही सिमट कर रह जाएगा, और एक निष्क्रिय राष्ट्र में गौरवशाली मौलिक अधिकार बिना ऑक्सीजन की आपूर्ति के मर जाएगा।

ऑक्सीजन की कमी लोगों की जान ले सकती है लेकिन मुफ्त या सस्ती दरों पर उचित स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में हुकूमत का उदासीन रवैया सिस्टम में लोगों के विश्वास को खत्म कर सकता है, जो कि अधिक खतरनाक और संक्रामक हो सकता है।

(महेश हयाती, हरनहल्ली लॉ पार्टनर्स, बैंगलोर से जुड़े एक वकील हैं। व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।)

यह लेख मूल रूप से द लीफ़लेट में प्रकाशित हो चुका है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

Right To Health: Follow Kerala and Tamil Nadu That Capped Prices of COVID-19 Essentials

Right to Health
Kerala and Tamil Nadu
COVID-19 essentials
COVID-19 fatalities
Fundamental right
Kerala Essential Articles Control Act

Related Stories

हिमाचल : माकपा ने कहा सरकार की टीका नीति पूर्णतः भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक

कोविड-19 में पेटेंट और मरीज़ के अधिकार: क्या किसी अधिकार विशेष के बजाय यह पूरी मानवता का सवाल नहीं है ?


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License