NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
RTI खुलासा: देश की कुल 496 यूनिवर्सिटी में मात्र 48 वीसी ही एससी, एसटी या ओबीसी
आरक्षण होने के बाद भी दलित पिछड़ों की हालत कितना बदली है उसकी जानकारी पाकर आप चौंक जाएंगे.
सबरंग इंडिया
16 Jan 2018
University

नई दिल्ली. देश को आजाद हुए 70 साल हो गए. आए दिन लोग आरक्षण को लेकर भ्रामक प्रचार करते रहते हैं. लेकिन आरक्षण होने के बाद भी दलित पिछड़ों की हालत कितना बदली है उसकी जानकारी पाकर चौंक जाएंगे. सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) से मिली एक जानकारी से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. आरटीआई में खुलासा हुआ है कि देश की तमाम यूनिवर्सिटी में 496 वीसी हैं जिनमें मात्र 48 वीसी ही एससी, एसटी या ओबीसी हैं.

ट्विटर पर यह जानकारी साझा करते हुए स्वराज इंडिया के अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव लिखते हैं, ‘एससी+एसटी+ओबीसी की जनसंख्या 70 प्रतिशत है लेकिन इसके 10 प्रतिशत से भी कम वाइस चांसलर हैं, इनकी संख्या 496 में सिर्फ 48 है. क्या यही सामाजिक न्याय है?’ योगेंद्र यादव ने इस जानकारी को आधिकारिक बताते हुए शेयर किया है.

आरटीआई में जो आंकड़े बताए गए हैं उनके अनुसार साल 2015-16 में यूनिवर्सिटीज में कुल 496 वाइस चांसलर हैं. इनमें 6 एससी, 6 एसटी और 36 ओबीसी हैं. यह जानकारी 5 जनवरी 2018 को भेजी गई है. जिसपर 4 जनवरी को सीनियर स्टेटिकल ऑफिसर एल एन नायक के सिग्नेचर हैं. आरटीआई में जवाब मांगा गया था कि देश में कुल वाइस चांसलर में से कितने एससी एसटी और ओबीसी हैं. इसी सवाल के जवाब में यह जानकारी मिली है.
 

So, it’s official: SC+ST+OBC= 70% in population, but less than 10% among Vice Chancellors (48 out of 496). Social justice? pic.twitter.com/8BolikQ6FH

— Yogendra Yadav (@_YogendraYadav) January 13, 2018

आरक्षण के बावजूद यूनिवर्सिटीज में वाइस चांसलरों की संख्या काफी चौंकाने वाली है. नब्बे के दशक में मंडल कमीशन लागू होने के बाद भी ओबीसी वीसी की संख्या सिर्फ 36 तक पहुंची है जबकि एससी एसटी को आरक्षण संविधान लागू होने के बाद से ही मिला हुआ है. इस संख्या के बारे में एक फैक्टर योग्यता का भी लिया जा सकता है लेकिन एससी एसटी और ओबीसी के उच्च शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. अकसर सामाजिक न्याय के लिए आंदोलन भी समय समय पर चलते रहे हैं. इसके बावजूद शैक्षणिक संस्थानों में उच्च स्तर तक एससी एसटी ओबीसी की भागीदारी उस अनुपात में नहीं हो पाई जितना जरूरत है.

Courtesy: Sabrang India
University
Reservation
RTI
Education Sector

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बच्चे नहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा शिक्षा का स्तर

ओडिशा: अयोग्य शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षित होंगे शिक्षक

उत्तराखंड : ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में बंद होते सरकारी स्कूल, RTE क़ानून की आड़ में निजी स्कूलों का बढ़ता कारोबार 

केवल आर्थिक अधिकारों की लड़ाई से दलित समुदाय का उत्थान नहीं होगा : रामचंद्र डोम

हिंदुत्व की गोलबंदी बनाम सामाजिक न्याय की गोलबंदी

2024 में बढ़त हासिल करने के लिए अखिलेश यादव को खड़ा करना होगा ओबीसी आंदोलन

सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUCET) सतही नज़र से जितना प्रभावी गहरी नज़र से उतना ही अप्रभावी

बिहार विधानसभा में महिला सदस्यों ने आरक्षण देने की मांग की

मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भर्ती विज्ञापन में आरक्षण का नहीं कोई ज़िक्र, राज्यपाल ने किया जवाब तलब


बाकी खबरें

  • अभिलाषा, संघर्ष आप्टे
    महाराष्ट्र सरकार का एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर नया प्रस्ताव : असमंजस में ज़मीनी कार्यकर्ता
    04 Apr 2022
    “हम इस बात की सराहना करते हैं कि सरकार जांच में देरी को लेकर चिंतित है, लेकिन केवल जांच के ढांचे में निचले रैंक के अधिकारियों को शामिल करने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता”।
  • रवि शंकर दुबे
    भगवा ओढ़ने को तैयार हैं शिवपाल यादव? मोदी, योगी को ट्विटर पर फॉलो करने के क्या हैं मायने?
    04 Apr 2022
    ऐसा मालूम होता है कि शिवपाल यादव को अपनी राजनीतिक विरासत ख़तरे में दिख रही है। यही कारण है कि वो धीरे-धीरे ही सही लेकिन भाजपा की ओर नरम पड़ते नज़र आ रहे हैं। आने वाले वक़्त में वो सत्ता खेमे में जाते…
  • विजय विनीत
    पेपर लीक प्रकरणः ख़बर लिखने पर जेल भेजे गए पत्रकारों की रिहाई के लिए बलिया में जुलूस-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव
    04 Apr 2022
    पत्रकारों की रिहाई के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए संयुक्त पत्रकार संघर्ष मोर्चा का गठन किया है। जुलूस-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आंचलिक पत्रकार भी शामिल हुए। ख़ासतौर पर वे पत्रकार जिनसे अख़बार…
  • सोनिया यादव
    बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
    04 Apr 2022
    बीएचयू में प्रशासन और छात्र एक बार फिर आमने-सामने हैं। सीएचएस में प्रवेश परीक्षा के बजाए लॉटरी सिस्टम के विरोध में अभिभावकों के बाद अब छात्रों और छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।
  • टिकेंदर सिंह पंवार
    बेहतर नगरीय प्रशासन के लिए नई स्थानीय निकाय सूची का बनना ज़रूरी
    04 Apr 2022
    74वां संविधान संशोधन पूरे भारत में स्थानीय नगरीय निकायों को मज़बूत करने में नाकाम रहा है। आज जब शहरों की प्रवृत्तियां बदल रही हैं, तब हमें इस संशोधन से परे देखने की ज़रूरत है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License