NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
यूरोप
सैन्य अभियान पूरा करने को लेकर रूसी सेना पहले से कहीं ज़्यादा प्रतिबद्ध
यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं को काफ़ी हद तक कमज़ोर करने के बाद मास्को उस विशेष अभियान को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, जिससे कि जीत हासिल की जा सके।

एम के भद्रकुमार
16 Mar 2022
russia

यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं को काफ़ी हद तक कमज़ोर करने के बाद मास्को उस विशेष अभियान को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, जिससे कि जीत हासिल की जा सके। मास्को ने इस लिहाज़ से संकेत भी दे दिये हैं।

सबसे अहम संकेत क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव की तरफ़ से आया है, जिन्होंने सोमवार को कहा था, "रूस के पास यूक्रेन में विशेष सैन्य अभियान चलाने की पर्याप्त क्षमता है। सैन्य अभियान मूल योजना के मुताबिक़ ही आगे बढ़ रहा है और यह अभियान अपने समय पर और पूर्णता के साथ पूरा होगा।

जैसा कि मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूं कि रूस की सैन्य रणनीति निश्चित रूप से उस दुष्प्रचार के उलट है, जो कि पश्चिम की तरफ़ से प्रचारित किया जा रहा है और वह यह कि विशेष अभियान "नाकाम" है। पेसकोव ने संकेत दिया कि सैन्य अभियान को समय से पहले रोके जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने पश्चिमी देशों के "युद्धविराम" के आह्वान के बीच में यह बात कही।

पेसकोव ने ख़ुलासा किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विशेष रूप से सशस्त्र बलों को कीव सहित बाक़ी शहरों पर तत्काल हमले से परहेज़ करने का आदेश दिया था, ताकि भारी संख्या में नागरिकों के हताहत को रोका जा सके। यही वजह है कि इस सैन्य अभियान ने इस ज़मीनी हक़ीक़त को ध्यान में रखा कि अतिवादी नव-नाज़ी समूह ने घनी आबादी वाले रिहायशी इलाक़ों में अपने हथियार तैनात किये हुए हैं।  

इसका मतलब यह था कि रणनीति की सीमा " एकदम सटीक निशाना लगाने वाले आधुनिक हथियारों के साथ काम करने और सिर्फ़ सैन्य और सूचना से सम्बन्धित बुनियादी सुविधाओं को तबाह करने" तक सीमित हो गयी थी। साफ़ तौर पर इसका तमलब यह भी था कि सैन्य अभियान की गति को धीमा करना था और लड़ाई की तीव्रता को भी कम रखना था, ताकि खामोशी के साथ इस लड़ाई को केंद्रित नहीं होने दिया जाये और बड़ी बस्तियों पर सामने से हमला करने के बजाय उन्हें घेर लेने की युक्ति का इस्तेमाल किया जाये।

हालांकि, पेसकोव ने कहा कि अब जबकि बड़ी बस्तियों को घेरा जा चुका है, ऐसे में सैन्य बलों ने यूक्रेन के इन शहरों को अपने "पूर्ण नियंत्रण" मे लेने की रणनीति से "बाहर नहीं" किया है। बहरहाल, रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोव ने रविवार को कहा, "कुल मिलाकर, यूक्रेनी सेना के 3,736 सुविधा समृद्ध बुनियादी ढांचे को बेकार कर दिया गया है, 100 विमान और 139 यूएवी तबाह कर दिये गये हैं, साथ ही साथ 1,234 टैंक और अन्य बख़्तरबंद वाहन, 122 मल्टीपल-लॉन्च रॉकेट सिस्टम , फ़ील्ड आर्टिलरी और मोर्टार के 452 हथियार और विशेष सैन्य हार्डवेयर की 1,013 इकाइयां को भी तबाह कर दिया गया है।  

पेसकोव ने उस पश्चिमी दुष्प्रचार रिपोर्टों का पूरी तरह खंडन किया है और बीजिंग ने भी उससे इनकार किया है कि मास्को ने चीनी सैन्य सहायता का अनुरोध किया था। रूसियों ने यह देखते हुए एक शानदार रणनीति तैयार की है कि 2003 में इराक़ पर कब्ज़ा करने के सिलसिले में भारी वायुशक्ति से लैस 177,194 सैनिकों के अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने चालीस दिनों का समय लिया था।

पश्चिम के सबसे बड़े रूस विरोधी आचोलकों ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि यूक्रेन में रूसी सेना ने अपनी ताक़त का बहुत कम इस्तेमाल किया है और यह भी कि सद्दाम हुसैन की सेना को 2003 में इराक़ पर हमला होने से पहले एक दशक की अवधि के दौरान अमेरिका की ओर से व्यवस्थित रूप से कमज़ोर किया गया था। 

यूक्रेन के लिहाज़ से वास्तव में मुश्किल दौर तो अब शुरू होने वाला है। मारियुपोल का दक्षिणी बंदरगाह शहर अब और नहीं टिक सकता। व्यावहारिक रूप से मारियुपोल के उपनगरों में नव-नाज़ियों के कब्ज़ा वाले तमाम स्थानों को तबाह कर दिया गया है। रूसी विशेष बलों ने शहर की परिधि के रिहायशी इलाकों में फंसे नव-नाज़ियों की बड़ी ताक़तों को ख़त्म कर दिया है।

मारियुपोल का पतन एक अहम मोड़ होगा। इससे रूसी सेना ज़ापोरिज़िया सिटी और नीप्रो पर आगे बढ़ने के लिए आज़ाद होगी, नीपर नदी पर स्थित लिंचपिन कीव की ओर जाने वाले दक्षिणी मोर्चे को नियंत्रित करता है। इसी तरह ख़ेरसॉन से मायकोलायिव की ओर रूसी हमले दक्षिण में ओडेसा को घेरने के लिए फिर से शुरू हो सकते हैं।ओडेसा काला सागर तट पर स्थित एक बेहद अहम मोर्चा है। 

इस बीच, पोलैंड की सीमा से 20 किमी से कम दूरी पर स्थित यूक्रेनी सैन्य अड्डे पर रविवार को अलसुबह किये गये क्रूज़ मिसाइल हमले के दौरान पश्चिमी भाड़े के सैनिकों को कड़वे स्वाद का सामना करना पड़ा था। (रूसी विवरण के मुताबिक़ 180 विदेशी भाड़े के सैनिक मारे गये)।

रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर-जनरल कोनाशेनकोव ने बाद में कहा, "हम यूक्रेन में रह रहे विदेशी भाड़े के सैनिकों वाले सभी जगहों को जानते हैं। उनके ख़िलाफ़ आगे भी सर्जिकल स्ट्राइक की जाती रहेंगी।" इसके पीछे का दूसरा विचार यह हो सकता है कि पश्चिमी देशों,ख़ासकर अमेरिका ने भाड़े के सैनिकों को भेजने के लिए यह दुस्साहस किया हो।

यह कहना पर्याप्त होगा कि इन सब घटनाक्रमों से वाशिंगटन सहित पश्चिमी देशों में यह अहसास बढ़ता जा रहा है कि इस रूसी सैन्य अभियान को अब नाकाम नहीं किया जा सकता और इस सिलसिले का आगे भी चलना तय है। यह बात सोमवार को फ़्रांसीसी टीवी पर फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉ की हालिया टिप्पणी से भी स्पष्ट है,उन्होंने कहा था:

“यूरोप अगर रूस के साथ बातचीत में शामिल नहीं होता है,तो वह सुरक्षित नहीं रह सकता । यह हमारा इतिहास है, यह हमारा भूगोल है। इसलिए, मैं आने वाले समय में राष्ट्रपति पुतिन के साथ बात करने का इरादा रखता हूं...पहले से ही शांति के लिए हालात तैयार करना ज़रूरी है, क्योंकि युद्ध तभी ख़त्म हो पायेगा, जब हर कोई मेज पर बैठेगा और यह तय करने का वक़्त आ जायेगा कि कौन क्या वादा करने के लिए तैयार है। इसलिए, तैयारी के लिए हमें पहले से ही तैयार हो जाना चाहिए।”

अगर थोड़े में कहा जाये, तो मैक्रॉ रूसी सैन्य अभियान के ख़त्म होने के बाद के उन हालात को देख रहे हैं "जब हर कोई मेज पर बैठे...यह तय करने के लिए कि कौन क्या वादा करने के लिए तैयार है।" ग़ौरतलब है कि मैक्रॉं यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के एक फ़ोन कॉल के कुछ घंटे बाद ही कह रहे थे।

इससे भी ज़्यादा अहम बात यह है कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने क्रेमलिन में पुतिन के सबसे क़रीबी राजनीतिक सहयोगियों में से एक और अपने रूसी समकक्ष निकोलाई पेत्रुशेव के साथ एक टेलीफ़ोनिक बातचीत की इच्छा जतायी है। 24 फ़रवरी को रूसी सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से वाशिंगटन का यह पहला ऐसा उच्च स्तरीय संपर्क है। 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/russian-forces-double-down-complete-operation

Russia
ukraine
China
USA
Russia Ukraine war

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

अमेरिकी आधिपत्य का मुकाबला करने के लिए प्रगतिशील नज़रिया देता पीपल्स समिट फ़ॉर डेमोक्रेसी

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात


बाकी खबरें

  • Biden and Boris
    जॉन पिलगर
    युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?
    19 Feb 2022
    हाल के हफ्तों और महीनों में युद्ध उन्माद का ज्वार जिस तरह से उठा है वह इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है
  • youth
    असद रिज़वी
    भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
    19 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
  • Bahubali in UP politics
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?
    19 Feb 2022
    चुनाव में माफ़िया और बाहुबलियों की अहमियत इसलिए ज्यादा होती है कि वो वोट देने और वोट न देने,  दोनों चीज़ों के लिए पैसा बंटवाते हैं। इनका सीधा सा फंडा होता है कि आप घर पर ही उनसे पैसे ले लीजिए और…
  • Lingering Colonial Legacies
    क्लेयर रॉथ
    साम्राज्यवादी विरासत अब भी मौजूद: त्वचा के अध्ययन का श्वेतवादी चरित्र बरकरार
    19 Feb 2022
    त्वचा रोग विज्ञान की किताबों में नस्लीय प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी ना केवल श्वेत बहुल देशों में है, बल्कि यह पूरी दुनिया में मौजूद है
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 22,270 नए मामले, 325 मरीज़ों की मौत
    19 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.59 फ़ीसदी यानी 2 लाख 53 हज़ार 739 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License