NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
‘साइकिल’ पर सवार होकर राज्यसभा जाएंगे कपिल सिब्बल
वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कांग्रेस छोड़कर सपा का दामन थाम लिया है और अब सपा के समर्थन से राज्यसभा के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया है।
रवि शंकर दुबे
25 May 2022
sibal

इंडियन नेशनल कांग्रेस के पुराने और भरोसेमंद नेताओं की पार्टी से रुखसती लगातार जारी है। लंबे वक्त से नाराज़ चल रहे कपिल सिब्बल ने भी आख़िरकार ख़ुद को पंजे से छुड़ा ही लिया और अखिलेश यादव का हाथ पकड़कर सपा की साइकिल पर सवार हो लिए। कपिल सिब्बल ने बुधवार यानी 25 मई को समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। इस दौरान पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ रामगोपाल यादव भी मौजूद रहे।

#WATCH | Kapil Sibal filed nomination for Rajya Sabha elections, with the support of SP, in presence of party chief Akhilesh Yadav & party MP Ram Gopal Yadav

He says, "I've filed nomination as Independent candidate. I have always wanted to be an independent voice in the country" pic.twitter.com/HLMVXYccHR

— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) May 25, 2022

आपको बता दें कि सिब्बल कांग्रेस हाईकमान खासकर राहुल गांधी पर सवाल उठा चुके हैं, ऐसे में माना जा रहा था कि कांग्रेस उन्हें शायद ही राज्यसभा भेजे। इन्ही सब गुत्थियों के बीच ख़ुद का राजनीतिक अस्तित्व खोता देख कपिल सिब्बल ने समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ने का फैसला किया।

नामांकन दाखिल करने के बाद सिब्बल ने कहा कि वे 16 मई को ही कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। सिब्बल अभी उत्तर प्रदेश से कांग्रेस कोटे से सांसद हैं, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश  में पार्टी के पास इतने ही विधायक नहीं हैं, जो उन्हें फिर से राज्यसभा भेज सकें। लिहाजा, सिब्बल के फ्यूचर को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, अब समाजवादी पार्टी के टिकट पर नामांकन दाखिल कर उन्होंने तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया।

सिर्फ समाजवादी पार्टी ही नहीं बल्कि बिहार की आरजेडी और झारखंड की झामुमो की नज़रें भी कपिल सिब्बल पर पिछले कई दिनों से थीं। इसके बावजूद कांग्रेस हाईकमान की ओर से सिब्बल के लिए कोई सकारात्मक बात नहीं किया जाना बताता है कि फिलहाल कांग्रेस कपिल सिब्बल को राज्यसभा भेजने के मूड में नहीं थी। ख़ुद की नज़रअंदाज़गी को देखते हुए सिब्बल ने भी सपाके साथ उत्तर प्रदेश में ही रहना चुना जहां से वो फिलहाल राज्यसभा में हैं।

कपिल ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ खोला था मोर्चा

आपको बताते चलें कि UP, पंजाब समेत 5 राज्यों की विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद कपिल सिब्बल ने गांधी परिवार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। एक इंटरव्यू में सिब्बल ने कहा कि घर की कांग्रेस नहीं अब सबकी कांग्रेस होगी। उन्होंने कहा- कांग्रेस में अध्यक्ष ना होते हुए भी फैसला राहुल गांधी ले रहे हैं, जबकि हार की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। राहुल के रहते कांग्रेस कई चुनाव हार चुकी है, ऐसे में नए लोगों को नेतृत्व दिया जाना चाहिए।

सिब्बल उन 23 नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने दो साल पहले सोनिया गांधी को तीखा पत्र लिखा था, जिसमें संगठनात्मक चुनावों और इसके नेतृत्व के पूर्ण परिवर्तन की मांग की गयी थी।

क्योंकि कपिल सिब्बल ऐसे वक्त में राज्य कांग्रेस का साथ छोड़कर गए हैं जब राज्यसभा के लिए नामांकन की शुरुआत हो चुकी है, ऐसे में वर्तमान में कांग्रेस की स्थिति राज्यसभा में क्या है ये जानना बेहद ज़रूरी है। फिलहाल हम सिर्फ उन 10 सीटों की बात करेंगे जहां कांग्रेस को जीत की उम्मीद है। इसमें राजस्थान और छत्तीसगढ़ की 2-2 सीटें, झारखंड, मध्यप्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु की एक-एक सीट शामिल हैं। हालांकि इन 10 सीटों के लिए भी कांग्रेस में दावेदारों की लंबी लाइन हैं, जिसमें पी चिदंबरम, गुलाम नबी आज़ाद, आनंद शर्मा, अविनाश पांडे, अंबिका सोनी, विवेक तन्खा, सुबोध कांत सहाय और रणदीप सुरजेवाला जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं।

इन नामों में एक कपिल सिब्बल भी थे, लेकिन फिलहाल कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश में इतने विधायक ही नहीं है कि वो अपने किसी नेता को राज्यसभा के लिए भेज सके। यानी कपिल सिबब्ल के लिए कांग्रेस को किसी दूसरे राज्य में जगह बनानी पड़ती। जिससे दूसरों नेताओं का पत्ता कटता और वे नाराज़ हो सकते थे। दूसरा ये कि कपिल सिब्बल की बग़ावत ने भी हाईकमान का मन मार दिया। शायद सिब्बल को नज़रअंदाज़ करने का ये भी बड़ा कारण हो सकता है।

कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण थे सिब्बल

कपिल सिब्बल की बात करें तो वो सिर्फ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ही नहीं बल्कि एक वरिष्ठ वकील भी हैं। जो सोनिया और राहुल गांधी पर चल रहे नेशनल हेराल्ड मामले की पैरवी कर रहे हैं। नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी समेत पांच नेताओं पर आरोप है कि हेराल्ड की संपत्तियों का अवैध ढंग से इस्तेमाल किया गया है। जिसमें दिल्ली का हेराल्ड हाउस और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। इस मामले में फिलहाल सोनिया और राहुल ज़मानत पर हैं।

कपिल सिब्बल में हमेशा कांग्रेस की भूमिका बेहद अहम रही है। साल 2004 से लेकर 2014 तक चली मनमोहन सरकार में कपिल सिब्बल केंद्रीय मंत्री रहे हैं। सिब्बल वीपी सिंह की सरकार में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं। वहीं साल 2016 में कांग्रेस ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा था।

फिलहाल कपिल सिब्बल की रुसवाई का ख़ामियाज़ा कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है, क्योंकि वो सिर्फ एक नेता ही नहीं बल्कि कानूनी मामलों के जानकार और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील भी हैं।

Kapil Sibal
Congress
Rajyasabha Election
AKHILESH YADAV
SP

Related Stories

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

कांग्रेस के चिंतन शिविर का क्या असर रहा? 3 मुख्य नेताओं ने छोड़ा पार्टी का साथ

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?


बाकी खबरें

  • BJP
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: भाजपा के घोषणा पत्र में लव-लैंड जिहाद का मुद्दा तो कांग्रेस में सत्ता से दूर रहने की टीस
    11 Feb 2022
    “बीजेपी के घोषणा पत्र का मुख्य आकर्षण कथित लव जिहाद और लैंड जिहाद है। इसी पर उन्हें वोटों का ध्रुवीकरण करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घोषणा पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया में लव-लैड जिहाद को…
  • LIC
    वी. श्रीधर
    LIC आईपीओ: सोने की मुर्गी कौड़ी के भाव लगाना
    11 Feb 2022
    जैसा कि मोदी सरकार एलआईसी के आईपीओ को लांच करने की तैयारी में लगी है, जो कि भारत में निजीकरण की अब तक की सबसे बड़ी कवायद है। ऐसे में आशंका है कि इस बेशक़ीमती संस्थान की कीमत को इसके वास्तविक मूल्य से…
  • china olampic
    चार्ल्स जू
    कैसे चीन पश्चिम के लिए ओलंपिक दैत्य बना
    11 Feb 2022
    ओलंपिक का इतिहास, चीन और वैश्विक दक्षिण के संघर्ष को बताता है। यह संघर्ष अमेरिका और दूसरे साम्राज्यवादी देशों द्वारा उन्हें और उनके तंत्र को वैक्लपिक तंत्र की मान्यता देने के बारे में था। 
  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : जंगली जानवरों से मुश्किल में किसान, सरकार से भारी नाराज़गी
    11 Feb 2022
    पूरे राज्य के किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, मंडी, बढ़ती खेती लागत के साथ ही पहाड़ों में जंगली जानवरों का प्रकोप और लगातार बंजर होती खेती की ज़मीन जैसे तमाम मुद्दे लिए अहम हैं, जिन्हें इस सरकार ने…
  • Uttarakhand
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तराखंड चुनाव : क्या है युवाओं के मुद्दे
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड चुनाव के बीच हमने गढ़वाल के सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दौरा किया और नौजवानों से उनके मुद्दे जानने चाहे ?गढ़वाल के सेंट्रल यूनिवर्सिटी एक तरह से इस राज्य का शिक्षा का केन्द्र है यहां राज्य के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License