NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
"सांप्रदायिकता साम्राज्यवादी ताक़तों का सबसे मज़बूत हथियार"
बा-बापू की डेढ़ सौवीं जयंती वर्ष पर दिल्ली विश्वविद्यालय का राजधानी कॉलेज तीन दिनों तक देश के शीर्ष गाँधीवादी विचारकों के विचार-मंथन का गवाह बना। विचार मंथन में न सिर्फ़ समस्याओं को रेखांकित किया गया बल्कि इस निष्कर्ष पर भी पहुंचा गया कि गाँधीमार्ग से वैश्विक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
प्रदीप सिंह
28 Sep 2019
Gandhi jyanti

“आज भारत ही नहीं समूचा विश्व हिंसा की चपेट में है। राजनीतिज्ञों के साथ-साथ धार्मिक प्रतिष्ठान भी अपना हित साधने के लिए हिंसा और छल-छद्म का सहारा लेने से नहीं हिचक रहे हैं। वैश्विक स्तर पर कॉर्पोरेट का नियंत्रण बढ़ता जा रहा है। जिसका मक़सद अधिक से अधिक लाभ कमाना है। राजनीति सेवा का नहीं बल्कि सत्ता पाने और धन इकट्ठा करने का साधन बन गया है। सत्ता और कॉर्पोरेट की मिलीभगत से प्राकृतिक संसाधनों की लूट मची है।

प्रकृति के अंधाधुंध दोहन से पर्यावरण को भारी नुक़सान हो रहा है तो सदियों से प्रकृति के सहारे अपना जीवन यापन कर रहा आदिवासी समाज दर-दर की ठोकरें खा रहा है। ऐसी परिस्थिति में आम जनता बेबस है तो युवा निराश हैं। बेरोज़गारी से जूझ रहे युवा हिंसक और अतिवादी संगठनों के लिए आसान चारा बन गए हैं। विश्व भर में स्थापित सत्ता प्रतिष्ठानों के ख़िलाफ़ आक्रोश बढ़ रहा है। इस राजनीतिक और आर्थिक स्थिति से लड़ने में विश्व समुदाय ख़ुद को असहाय पा रहा है।”

बा-बापू की डेढ़ सौवीं जयंती वर्ष पर दिल्ली विश्वविद्यालय का राजधानी कॉलेज तीन दिनों तक देश के शीर्ष गाँधीवादी विचारकों के विचार-मंथन का गवाह बना। विचार मंथन में न सिर्फ़ समस्याओं को रेखांकित किया गया बल्कि इस निष्कर्ष पर भी पहुंचा गया कि गाँधीमार्ग से वैश्विक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

आज धर्म, संप्रदाय और जाति से जुड़े झगड़े बढ़ रहे हैं। आईआईटी (दिल्ली) के प्रोफ़ेसर विपिन त्रिपाठी ने कहा, “लंबे समय से संसार में सांप्रदायिकता और नस्लवाद साम्राज्यवादी शक्तियों के हाथ का सबसे मज़बूत हथियार रहा है। साम्राज्यवादी ताक़तों ने उपनिवेशों में सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया। गाँधी जानते थे कि यदि हम धर्म, जाति और नस्ल के झगड़े में फंसे रहे तो साम्राज्यवादी ताक़तें हमें ग़ुलाम बनाए रहेंगी।”

IMG-20190925-WA0197.jpg

आज फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद का ज़ोर है। जबकि यह सच्चाई है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ‘नेशन स्टेट’ यानी ‘राष्ट्र-राज्य’ का कोई मतलब नहीं रह गया है। सब बाज़ार की शक्तियां तय कर रही हैं। आज बहुराष्ट्रीय कम्पनियां इतनी शक्तिशाली हो गयी हैं कि वे अपने अनुसार कई देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तय करती हैं। इसके बाद भी उस देश को गुमान रहता है कि हम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री चुन रहे हैं।  

गाँधीवादी राधा बहन भट्ट ने कहा, “आज समाज औऱ राजनीति में हिंसा बढ़ती जा रही है। अभी कुछ दिनों पहले की बात है, मैक्सिको सिटी में हिंसा का आलम यह हो गया है कि वहाँ राह चलते लोगों का अपहरण कर लिया जाता है और शरीर के अंगों को निकाल कर बेच दिया जाता है। वहां पर मानव अंगों की तस्करी और ड्रग्स का व्यापार चरम पर है। मैक्सिको में अब गाँधी के रास्ते पर चल कर इस बुराई को समाप्त करने की पहल हो रही है।”  

डॉ. राजेश गिरि ने कहा, “भारत ही नहीं विश्व इतिहास में गाँधी अविवादित शख़्सियत रहे हैं। गाँधी आज भी युवाओं के नायक हैं। आधी धोती पहन कर उन्होंने देश को यह संदेश दिया कि जब तक हम पूरे देश के शरीर को ढंकने के लिए वस्त्र नहीं पूरा कर लेते, मैं पूरे कपड़े नहीं पहनूंगा।”

युवा कार्यकर्ता वैभव श्रीवास्तव ने कहा गाँधी लिंग संवेदनशीलता के प्रति कितने सजग थे या महिलायों के प्रति उनके मन में कितना सम्मान था, यह उन्होंने कस्तूरबा से सीखा था। महिलाओं के प्रति गाँधी जी की जो भी सोच या नज़रिया है उसमें कस्तूरबा की बड़ी भूमिका है। इस तरह हम बा को पहली स्त्रीवादी कह सकते हैं।

IMG-20190926-WA0200.jpg

आज बेरोज़गारी बढ़ रही है। विकास की इस व्यवस्था में रोज़गार नहीं है। हम कॉलेज और विश्वविद्यालयों से डिग्री लेकर रोज़गार की तलाश में पागलों की तरह चक्कर काट रहे हैं। आधुनिक विश्व के विकास मॉडल को गाँधी जी विनाश का रास्ता कहते थे। हिन्द स्वराज में गाँधी ने कहा है, “आज हम जिस विकास की तरफ़ जा रहे हैं वह हमें विनाश की तरफ़ ले जाने वाली पागल-अंधी दौड़ है। हमें इस विकास को छोड़ना होगा।" गाँधी जी कहते थे कि अगर इस विकास के ख़िलाफ़ कोई और मेरा समर्थन नहीं करेगा तो भी मैं इस विकास मॉडल का विरोध करता रहूंगा।

गाँधीवादी रामचंद्र राही कहते हैं, “गाँधी को विज्ञान, टेक्नोलॉजी का विरोधी बताया गया। अफ़वाह फैलाई गई कि गाँधी मशीनीकरण के विरोधी हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि गाँधी विज्ञान और तकनीक के विरोधी नहीं थे। वो ऐसी मशीन के विरोधी थे जो आदमी को बेरोज़गार बनाती हो। कौशल आधारित मशीनों का वे समर्थन करते थे। गाँधी कहते थे कि हमे ऐसी मशीन चाहिए जो हमे काम में सहायता करे, न कि लोगों का रोज़गार छीन कर उन्हें बेरोज़गार बनाए।”  

गाँधी शांति प्रतिष्ठान (दिल्ली) के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने कहा, “आज भारत में 18 करोड़ शिक्षित बेरोज़गार हैं। गाँधी की नज़र में रोज़गार और नौकरी में अंतर है। नौकरी आपको दूसरों पर आश्रित करती है और रोज़गार आपको कौशल से युक्त करता है। शिक्षा के क्षेत्र में गाँधी विचार को बुनियादी तालीम के नाम से जाना जाता है। गाँधी के बुनियादी तालीम में कौशल पर ज़ोर दिया गया है। ऐसे में हमें भी कौशल पर ज़ोर देकर रोज़गार को पैदा करने की कोशिश करनी चाहिए।”

IMG-20190925-WA0182 (1).jpg

समाजसेवी फ़ैसल ख़ान ने गाँधी के सर्वधर्म संभाव पर कहा, “गाँधी के आदर्श भगवान राम थे और आदर्श व्यवस्था रामराज्य थी। तुलसी के रामचरित मानस को पढ़ने से पता चलता है कि रामराज्य में लोग एक दूसरे से झगड़ा नहीं करते थे और सामाजिक विषमता नहीं थी। इसलिए हमें सामाजिक विषमता और नफ़रत को समाप्त करना है।”

“संस्कृति, कला और गाँधी” विषय पर प्रो. रमेश भारद्वाज ने कहा, “गाँधी जी सिर्फ़ राजनीति और समाज को लेकर ही चिंतित नहीं थे। संस्कृति, साहित्य, कला और संगीत से उनका गहरा सरोकार था। संस्कृति पर गाँधी का विचार भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण का विचार है। वे भारतीय कला और साहित्य की महान विरासत को पुनर्जाग्रत करने में लगे थे। गाँधी की निगाह में कला जीवन और मनुष्यता को बेहतर बनाने की कला है।”

वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने कहा, “आज तो गाँधी और नेहरू को सारी समस्याओं का जड़ बताया जा रहा है। लेकिन मैं उन्हें दो सदी के सर्वश्रेष्ठ हिन्दू कहता हूं।”

कुमार प्रशांत ने गाँधी के प्रासंगिकता के सवाल पर कहा, “गाँधी को मारने वाले भी जानते हैं कि 30 जनवरी 1948 को तीन गोली लगने के बाद भी गाँधी मरे नहीं हैं। इसलिए वे हमेशा इस कोशिश में लगे रहते हैं कि गाँधी को मारने का कोई अवसर जाने न पाए। लेकिन गाँधी को मारने वाले यह जान लें कि जब तक मनुष्य के अंदर मनुष्यता पाने की चाहत बनी रहेगी, तब तक गाँधी ज़िंदा रहेंगे।”

Mahatma Gandhi
Gandhi's 150th Jubilee
Delhi University
Gandhian thinkers
Gandhian ideology
Communalism
Indian culture

Related Stories

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?

नफ़रत की क्रोनोलॉजी: वो धीरे-धीरे हमारी सांसों को बैन कर देंगे

कार्टून क्लिक: आधे रास्ते में ही हांफ गए “हिंदू-मुस्लिम के चैंपियन”

हम भारत के लोगों की असली चुनौती आज़ादी के आंदोलन के सपने को बचाने की है

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

विचार: राजनीतिक हिंदुत्व के दौर में सच्चे साधुओं की चुप्पी हिंदू धर्म को पहुंचा रही है नुक़सान

रवांडा नरसंहार की तर्ज़ पर भारत में मिलते-जुलते सांप्रदायिक हिंसा के मामले

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं


बाकी खबरें

  • Modi
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक
    27 Apr 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,927 नए मामले सामने आए हैं। इसमें से क़रीब 60 फ़ीसदी मामले दिल्ली और हरियाणा से सामने आए है।
  • SATAN
    जॉन दयाल
    एनआईए स्टेन स्वामी की प्रतिष्ठा या लोगों के दिलों में उनकी जगह को धूमिल नहीं कर सकती
    27 Apr 2022
    स्टेन के काम की आधारशिला शांतिपूर्ण प्रतिरोध थी, और यही वजह थी कि सरकार उनकी भावना को तोड़ पाने में नाकाम रही।
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    नागरिकों से बदले पर उतारू सरकार, बलिया-पत्रकार एकता दिखाती राह
    26 Apr 2022
    वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बताया कि चाहे वह दलित विधायक जिग्नेश मेवानी की दोबारा गिरफ्तारी हो, या मध्यप्रदेश में कथित तौर पर हिंदू-मुस्लिम विवाह के बाद मुसलमान की दुकान और घर पर चला बुल्डोज़र, यह सब…
  • सत्यम् तिवारी
    रुड़की : डाडा जलालपुर गाँव में धर्म संसद से पहले महंत दिनेशानंद गिरफ़्तार, धारा 144 लागू
    26 Apr 2022
    27 अप्रैल को होने वाली 'धर्म संसद' का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी उत्तराखंड पुलिस को निर्देश दिये थे। 26 अप्रैल की शाम को पुलिस ने डाडा जलालपुर गाँव से महंत दिनेशानंद को गिरफ़्तार कर लिया।
  • अजय कुमार
    एमवे के कारोबार में  'काला'  क्या है?
    26 Apr 2022
    साल 2021 में इस सम्बन्ध में उपभोक्ता संरक्षण नियम बने। इसके तहत नियम बना कि कोई भी डायरेक्ट सेलिंग कंपनी यानी वैसी कम्पनी जो उपभोक्ताओं को सीधे अपना माल बेचती हैं, वह कमीशन देने की शर्त पर अपना माल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License