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सारण 'लिंचिंग' : मृत युवक के परिजन अपनी होने वाली बहू की कराएंगे शादी
लड़के के घरवालों को सरकार से मुआवजा मिलने की उम्मीद है। लेकिन सरकार और प्रशासन ने इस घटना को "लिंचिंग" मानने से इनकार किया है और किसी भी तरह का मुआवज़ा देने की घोषणा नहीं की है।
उमेश कुमार राय
18 Aug 2019
paigambarpur village
लिंचिंग का शिकार हुए तीनों लोग पैगम्बरपुर गांव के रहनेवाले थे। (फोटो: उमेश कुमार राय)

पिछली 19 जुलाई को तड़के सारण (छपरा) ज़िला मुख्यालय से क़रीब 30 किलोमीटर दूर बनियापुर थाना क्षेत्र के एक गांव में मवेशी चोरी के संदेह में भीड़ ने तीन लोगों की हत्या कर दी थी। इस वीभत्स घटना ने तीनों मृतकों के परिवार को कभी न ख़त्म होने वाला सदमा दे दिया। लेकिन, इन परिवारों के अलावा एक और परिवार है, जिस पर इस घटना से दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

दरअसल, उस दिन भीड़ का शिकार हुए तीन लोगों में एक विदेश नट (20) की जल्द ही शादी होने वाली थी। उसके लिए क़रीब40 किलोमीटर दूर एक गांव में लड़की देखी गई थी। दोनों पक्षों को लड़का और लड़की पसंद थे। मंगनी तक हो गई थी। दान-दहेज भी दिया जा चुका था। लड़की के पिता रमेश नट ने न्यूजक्लिक को बताया, “लड़के को चेन, अंगूठी और मोटरसाइकिल दे दी गई थी। बस शादी की तारीख़ तय होनी बाक़ी थी। हम लोग सितंबर में शादी करना चाहते थे। जल्दी ही तारीख़ निकलवाने वाले थे।”

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विदेश नट की शादी तय हो गई थी। सितंबर महीने में शादी की तारीख निकाली जा रही थी। (फोटो: उमेश कुमार राय)

रमेश नट के पास अपनी ज़मीन नहीं है। वह ताड़ व खजूर से ताड़ी उतारते हैं और उनका बेटा मज़दूरी करता है। शादी की बात शुरू हुई थी, तो लड़का व लड़की दोनों ने एक दूसरे को देखा था और वे एक दूसरे को पसंद भी करते थे। विदेश नट ने मोटरसाइकिल की मांग की थी, तो रमेश इसके लिए तैयार हो गए थे।

उन्होंने कहा, “शादी के लिए मैंने क़र्ज़ लिया था और मंगनी से लेकर भोज-भात तक और गहन-ज़ेवरों पर दो लाख रुपए ख़र्च किया था।” लिंचिंग की घटना के बाद रमेश इस कदर सदमाग्रस्त हो गए थे कि उन्होंने विदेश नट के पिता गफ़ूर नट को यह तक कह दिया था कि वह उसे (बेटी को) अपने घर में विधवा बनाकर रख लें, क्योंकि उनके पास क़र्ज़ लेकर दोबारा शादी के लिए लड़का देखने की आर्थिक हैसियत नहीं है।

गफ़ूर नट ने न्यूज़क्लिक से कहा, “रमेश नट ने हमसे कहा था कि लड़की को विधवा बना कर अपने पास ही रख लें, लेकिन हम ऐसा कैसे कर सकते थे, सो हमने ये तय किया कि हम लोग ही उसकी (लड़की) शादी करवा देंगे।”

लिचिंग में विदेश की मौत और रमेश नट की आर्थिक हैसियत को देखते हुए गफ़ूर नट ने अपने समाज के लोगों से विचार-विमर्श किया। इसमें तय हुआ कि गफ़ूर नट लड़की की शादी का ज़िम्मा अपने ऊपर ले लें। विदेश के भाई शैलेश नट ने बताया, “हम लोगों ने लड़की के पिता से बात की है। हम लोगों ने फ़ैसला लिया है कि हम ही उसकी शादी करवाएंगे। उसके लिए ख़ुद लड़का देखेंगे और जितना भी ख़र्च होगा, हम लोग देकर उसकी शादी करवा देंगे।”

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विदेश नट के भाई शैलेश नट का कहना है कि उसका भाई निर्दोष था। (फोटो: उमेश कुमार राय)

नट आदिवासी समुदाय के अंतर्गत आते हैं। इनका मूल पेशा मवेशी की ख़रीद फ़रोख्त है। इनके पास अपनी ज़मीन नहीं है। विदेश नट का घर पैग़म्बरपुर में है। पैग़म्बर में नट समुदाय के क़रीब 16 घर हैं और सभी मवेशियों की ख़रीद-बिक्री करते हैं।

19 जुलाई की घटना के संबंध में मृतकों के परिजनों का कहना है कि वे लोग मवेशी लाने के लिए ही पैग़म्बरपुर से क़रीब पांच किलोमीटर दूर पिठौरी गांव के नंदलाल टोले में गए थे। शैलेश नट के मुताबिक़, उनके चाचा राजू नट ने पिठौरी गांव के एक व्यक्ति से भैंस ख़रीदने का क़रार किया था और एडवांस के रूप में 15 हज़ार रुपए भी दे दिए थे। 19 जुलाई की सुबह क़रीब4.30 बजे राजू नट और विदेश नट उसी गांव के पिकअप वैन मालिक नौशाद आलम के साथ पिकअप वैन लेकर पिठौरी गांव गए थे। वहां भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया और पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने नंदलाल टोला निवासी बुध राम के घर के सामने से तीनों को ख़ून से लथपथ पाया था। उनके हाथ पीछे की तरफ़ बंधे हुए थे।

इस घटना को लेकर बनियापुर थाने में दो शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। पहली शिकायत बुध राम की तरफ़ से की गई थी,जिसमें तीनों को मवेशी चोर बताया गया था।

बुध राम ने अपनी शिकायत में कहा था कि वे लोग उनकी भैंस को खूंटे से खोल रहे थे, उसी वक़्त उनकी नींद खुल गई। उन्होंने शोर मचाया, तो क़रीब 100 लोग इकट्ठा हो गए और तीनों को पीटने लगे।

बुध राम ने शिकायत में ये भी लिखा था कि भैंस चुराते हुए पकड़े जाने पर वे घर में गए, तो देखा कि दो बकरियां भी ग़ायब हैं। शिकायत में ये दावा भी किया गया कि तीनों ने बकरियां चुराने की बात स्वीकार कर ली थी।

दूसरी तरफ़, नौशाद आलम, राजू नट और विदेश नट की तरफ़ से बनियापुर थाने में दर्ज शिकायत में कहा गया है कि तीनों मवेशी ख़रीदने के लिए नंदलाल टोला गए थे, जहां भीड़ ने बेरहमी से पीट कर उनकी हत्या कर दी।

इस मामले में पुलिस भी यही मान कर चल रही है कि तीनों मवेशी चोर थे। सारण के एसपी हरि किशोर राय ने पत्रकारों के साथ बातचीत में स्पष्ट तौर पर कहा था कि वे लोग मवेशी चोर थे और मवेशी चुराने के लिए उस गांव में गए थे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मॉब लिंचिंग की घटनाओं में अलग-अलग राज्यों की सरकारों ने मुआवज़े की अलग-अलग रकम तय कर रखी है। बिहार के संदर्भ में देखें, तो नीतीश सरकार मॉब लिंचिंग का शिकार हुए लोगों के परिजनों को तीन लाख रुपए मुआवज़ा देती है। इस हिसाब से देखा जाए तो राजू, विदेश और नौशाद आलम के परिजनों को तीन-तीन लाख रुपए मुआवज़ा दिया जाना चाहिए।

विदेश नट के पिता गफ़ूर नट ने विदेश की शादी जिस लड़की से तय थी, उसकी शादी अपने ख़र्च से अन्यत्र करने पर सहमति जताई है, उसकी बुनियाद में मुआवज़े की उम्मीद है। शैलेश नट कहते हैं, “मेरा भाई बेक़सूर था। उसकी हत्या कर दी गई। हमें इसका मुआवज़ा मिलना चाहिए। सरकार मुआवज़ा देगी, तो उसी के पैसे से हम लड़की की शादी करवाएंगे।”

हालांकि, सरकार की तरफ़ से ऐसी कोई घोषणा अभी तक नहीं हुई है। शैलेश नट ने भी कहा कि ऐसी कोई बात सरकार की तरफ़ से नहीं कही गई है। असल में एसपी हरि किशोर राय से लेकर थाना प्रभारी और सीएम तक इस बर्बर घटना को मॉब लिंचिंग मानने से ही इनकार कर रहे हैं।

सीएम नीतीश कुमार ने घटना के तुरंत बाद कहा था, “यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, लेकिन इसे मॉब लिंचिंग की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। जिन्हें मारा गया वे नट समुदाय से आते हैं और जिन्होंने मारा, वे पिछड़े वर्ग के हैं। यह घटना तब हुई, जब तीनों मवेशी चोरी करते हुए रंगेहाथ पकड़े गए। इससे ग़ुस्साए ग्रामीणों ने उनकी पिटाई की,जिससे उनकी मौत हो गई।” इसी तरह एसपी ने भी इसे मॉब लिंचिंग मानने से इनकार करते हुए कहा था कि लिंचिंग तब कहा जाता है, जब अफ़वाह फैला कर किसी को मार दिया जाए, लेकिन इस घटना में ऐसा नहीं था।

इस तरह यह साफ़ तौर पर दिख रहा है कि पूरा प्रशासन इस घटना को मॉब लिंचिंग मानने से इनकार कर रहा है, तो ज़ाहिर सी बात है कि मृतकों के परिजनों को लिंचिंग के तहत मुआवज़ा मिलने की कोई संभावना भी नहीं है।

इधर, विदेश नट के परिजन व उसके गांव के लोगों ने मुआवज़े और दोषियों को सज़ा दिलवाने की मांग को लेकर ज़िला मुख्यालय के सामने प्रदर्शन भी किया है, लेकिन कहीं से कोई आश्वासन उन्हें नहीं मिला है। अलबत्ता, पारिवारिक लाभ योजना के तहत तीनों मृतकों के परिजनों को 20-20 हज़ार रुपये का चेक दिया गया है।

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विदेश नट का घर। (फोटो: उमेश कुमार राय)  

मुआवज़े की मांग को लेकर मृतकों के परिजन पटना भी गए थे। शैलेश नट ने कहा, “हम लोग पटना भी गए थे। ज़रूरी दस्तावेज़ भी जमा किए, ताकि मुआवज़ा मिल जाए, लेकिन अभी तक मुआवज़े की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।”

प्रखंड स्तरीय अधिकारियों ने भी इस घटना को लिंचिंग मानने से इनकार किया। बनियापुर के बीडीओ सुदामा प्रसाद सिंह ने न्यूज़क्लिक को बताया, “ये लिंचिंग नहीं थी। इस घटना को एक हादसे के तौर पर ही देखा जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि20-20 हज़ार की सहायता राशि दे दी गई है और अब किसी भी अन्य प्रकार का मुआवज़ा उनके स्तर पर नहीं मिलने जा रहा है।

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