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सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाः त्रिपुरा की स्थिति गुजरात से 'चार गुना' बेहतर
बीजेपी शासित गुजरात या मध्यप्रदेश की तुलना में वाम दल शासित त्रिपुरा में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा की स्थिति काफ़ी बेहतर है।

सुबोध वर्मा
25 Jan 2018
tripura elections

त्रिपुरा में सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना के तहत कवरेज राज्य की कुल आबादी का 57-58% तक पहुंच गया जो गुजरात में उपलब्ध स्वास्थ्य कवरेज की तुलना में क़रीब साढ़े तीन गुना ज़्यादा है। गुजरात कि काफ़ी धनी राज्य माना जाता है और इसे अक्सर विकास के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। आँकड़ों से साफ़ है कि गुजरात में स्वास्थ्य योजनाओं के तहत सार्वजनिक सुविधा की स्थिति बदतर है। त्रिपुरा की स्वास्थ्य संबंधी सुविधा में वृद्धि की ये रिपोर्ट 2015-16 के राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) -4 के नवीनतम आँकड़ों से सामने आई है।

 

किसी योजना/ बीमा के तहत कवरेज का मतलब स्वास्थ्य पर क्षमता से अधिक ख़र्च में काफ़ी कमी होना। सरकार प्रायोजित योजनाएं ग़रीब परिवारों के लिए बहुत बड़ी मदद होती है क्योंकि हेल्थ इमरजेंसी और डिलीवरी जैसे नियमित घटनाओं को निजी डॉक्टरों और अस्पतालों के मुक़ाबले परिवारों को बहुत कम ख़र्च में मुहैय्या कराया जाता है। दुनिया भर में सरकार समर्थित हेल्थकेयर कवरेज को लोक उन्मुख कल्याणकारी राष्ट्र के तौर पर देखा जाता है।

 

त्रिपुरा में क़रीब 25 वर्षों से वाम दलों की सरकार है। यहां माणिक सरकार 20 वर्षों से मुख्यमंत्री के पद पर हैं। उधर गुजरात में भी पिछले 20 वर्षों से लगातार बीजेपी की ही सरकार है।

 

गुजरात के अलावा दूसरा राज्य मध्य प्रदेश है जहां बीजेपी लंबे समय से शासन कर रही है। यहां स्वास्थ्य योजना या बीमा के अंतर्गत कवरेज कुल आबादी का सिर्फ़11-12% है।

 

त्रिपुरा का यह रिकॉर्ड सराहनीय है क्योंकि यह सीमावर्ती राज्य होने और काफी हद तक कृषि पर निर्भर के बावजूद राष्ट्रीय औसत लगभग 29% कवरेज से काफ़ी ज़्यादा है। इतना ही नहीं यहां कनेक्टिविटी और सड़क की समस्या भी अधिक है। त्रिपुरा में लगभग 31% जनजातीय आबादी है और 66% क्षेत्र में वन है।

 

स्वास्थ्य योजना या बीमा के तहत कवरेज

राज्य

% महिला

% पुरूष

त्रिपुरा

57.5

58.5

गुजरात

16.4

18.5

मध्य प्रदेश

10.9

12.6

 

Source: NFHS-4, 2015-16

राज्य प्रायोजित स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत इस व्यापक कवरेज के प्रभाव विभिन्न स्तरों पर स्पष्ट हैं। उदाहरण स्वरूप गुजरात की तुलना में लोगों की पोषण संबंधी स्थिति त्रिपुरा में बेहतर है। त्रिपुरा में आबादी का 65% से ज़्यादा लोगों में सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) है वहीं गुजरात में 49% और मध्य प्रदेश में 58% है। बीएमआई वजन और ऊंचाई के माप का एक संयोजन है जिसे समग्र पोषण संबंधी स्थिति को दर्शाने के लिए परिकलित किया जाता है। उदाहरणस्वरूप बहुत दुबले-पतले या बहुत मोटे क्रमशः कम या अधिक बीएमआई वाले लोगों के शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता कम होती है।

महिलाओं की पोषण संबंधी स्थिति (%)

राज्य

सामान्य बीएमआई (18.5-24.9)

त्रिपुरा

65

गुजरात

49

मध्य प्रदेश

58

 

Source: NFHS-4, 2015-16

समान रूप से व्यापक स्वास्थ्य देखभाल आधारभूत संरचना से जुड़े स्वास्थ्य कवरेज के साथ बड़ी आबादी की उपस्थिति परिवार के खर्च को कैसे प्रभावित करेगा। ये प्रसव मामले में साफ़ दिखाई देता है। एनएफएचएस -4 की रिपोर्ट के मुताबिक़ किसी निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान औसतन 16,522 रुपए खर्च होता है जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा में प्रसव के लिए निजी अस्पतालों में होने वाले ख़र्च का पांचवां हिस्सा अर्थात सिर्फ 3,198 रुपए ख़र्च होगा। त्रिपुरा में होने वाले कुलप्रसव का दो तिहाई से ज़्यादा प्रसव सार्वजनिक अस्पतालों में होता है जबकि गुजरात में सिर्फ एक तिहाई प्रसव ही सार्वजनिक सुविधा केंद्रों में होता है।

त्रिपुरा में भारत के सभी राज्यों की तुलना में सार्वजनिक स्वास्थ्य आधारभूत संरचनाओं का सबसे ज़्यादा विस्तार देखा गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आँकड़ों के मुताबिक़ त्रिपुरा में वर्ष 2005 से स्वास्थ्य उप केंद्रों की संख्या 92%, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 29% और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या में 10% की वृद्धि हुई है जबकि पूरे भारत में इन केंद्रों की औसत वृद्धि क्रमशः 6%, 9% और 65% ही हुई।

इसके अलावा त्रिपुरा में कई नई योजनाएं शुरू की गई है ताकि राज्य के मरीज़ों को ज़़ालिम निजी अस्पतालों को लूटने के लिए छोड़ने के बजाय उन्हें बेहतर मददकी जा सके। इन योजनाओं में मुफ़्त जांच, सभी अस्पतालों में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में सस्ती जेनेरिक दवाईयां, ज़रूरत पड़ने पर राज्य से बाहर इलाज के लिए मरीज़ को भेजने के लिए परिवहन और चिकित्सीय संरक्षण, कैंसर रोगियों के लिए ख़र्च की भरपाई, मुफ्त डायलिसिस आदि शामिल है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा के इस बड़े पैमाने पर विस्तार से बाल स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ा है। इस विषय पर एक लेख न्यूज़क्लिक द्वारा पहले प्रकाशित किया जा चुका है।

निस्संदेह त्रिपुरा सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा के मामले में 'मॉडल गुजरात' से काफ़ी बेहतर है।

त्रिपुरा सरकार
Manik Sarkar
BJP
CPI(M)
Hospitals
health care facilities

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