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"एएलबीए मूल रूप से साम्राज्यवाद विरोधी है": सच्चा लोरेंटी
एएलबीए मूवमेंट्स की तीसरी कंटिनेंटल असेंबली के दौरान संबद्ध मंचों ने एकता स्थापित करने और साम्राज्यवाद व पूंजीवाद के ख़िलाफ़ एक साथ लड़ने की अहमियत के बारे में चर्चा की।
पीपल्स डिस्पैच
02 May 2022
Camille Chalmers
एएलबीए मूवमेंट्स की तीसरी असेंबली के दौरान एक पैनल पर बोलते हुए असेंबली ऑफ़ कैरेबियन पीपल्स के केमिली चाल्मर्स । फ़ोटो: एएलबीए मूवमेंट्स

एएलबीए मूवमेंट्स की तीसरी कंटिनेंटल असेंबली में एक मुख्य चर्चा उन चुनौतियों को लेकर थी, जिनका सामना इन आंदोलनों को मध्यम और दीर्घावधि में करना है। पिछले कुछ सालों में एएलबीए मूवमेंट्स की प्रमुख रणनीतियों में से एक रणनीति यह रही है कि न सिर्फ़ इस पूरे महाद्वीप में इस मूवमेंट्स के काम में शामिल संगठनों के साथ एकजुटता का निर्माण किया जाय, बल्कि इन आंदोलनों और संगठनों को उन दूसरे मंचों के साथ भी काम करना चाहिए, जो पूंजीवाद और साम्राज्यवाद का विरोध कर रहे हैं।

इन जुड़े हुए मंचों के काम को सामने रखने और मिलजुलकर एकजुटता और एकता को किस तरह बेहतर तरीक़े से आगे बढ़ाया जाये, इस पर चर्चा करने के लिए आयोजित इस असेंबली के दौरान एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इन परिचर्चाओं में हिस्सा लेने वालों ने जिन नेताओं को सुना,उनमें शामिल थे- एएलबीए-टीसीपी के कार्यकारी सचिव साचा लोरेंटी, इंडिजेनस एंड पीजेंट ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इक्वाडोर (FEI)-यानी सीएलओसी ला वाया कैम्पेसिना के विल्मन सारंगो, ट्रेड यूनियन फ़ेडरेशन ऑफ़ अमेरिका और प्लेटफ़ॉर्म फ़ॉर डेमोक्रेसी एंड अगेंस्ट नीओलिब्रेलिज़्म के इवान गोंजालेज, सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ जाम्बिया और इंटरनेशनल पीपल्स असेंबली(IPA) की अकेंडे चुंडामा और कैरेबियन पीपुल्स असेंबली और हैती नेता केमिली चल्मर्स।

एफ़ईआई इक्वाडोर के विल्मन सारंगो ने 500 से ज़्यादा सालों से चल रही औपनिवेशिक और गणतंत्र प्रणाली के ख़िलाफ़ किसानों के संघर्ष को याद करते हुए इस परिचर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा, "हम, देशी लोग विरोध का यह संघर्ष इसलिए कर रहे हैं,ताकि विजेताओं ने हमारी जिस ज़मीन को हमसे छीन लिया था,उसे वापस हासिल किया जाये।"  

इस किसान नेता ने बताया कि इन लोकप्रिय आंदोलनों की चुनौती "पूंजीवादी, वित्तीय और संसाधनों को निचोड़ने वाली व्यवस्था के ख़िलाफ़ एक मानवतावादी और समाजवादी व्यवस्था के निर्माण के संघर्ष का नेतृत्व करना है।"

सारंगो ने एएलबीए मूवमेंट्स के निर्माण में इक्वाडोर चैप्टर की प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की और एएलबीए के काम को मज़बूत करने के प्रस्ताव दिये।उन्होंने कहा, "हमें इस वर्ग के स्व-संगठन को उच्चतम स्तर पर अहमियत देनी चाहिए; वर्ग चेतना के निर्माण के लिए ज़रूरी सांस्कृतिक संघर्ष करना चाहिए, एक ऐसा विशेषज्ञ समूह स्थापित करना चाहिए, जो संकट की स्थिति पैदा होने पर उसकी सटीक व्याख्या कर सके; एक ऐसा महाद्वीपीय आंदोलन का निर्माण करना चाहिए, जो किसान संगठनों और आम लोगों के आंदोलनों के संघर्ष को एक साथ लाता हो, वैचारिक लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक शिक्षा स्कूलों का निर्माण करना चाहिए; हमारे हितों के पक्ष में आम मीडिया का विकास करना चाहिए और एएलबीए,यूएनएएसयूआर और सीईएलएजी के बीच समन्वय की नीतियों को विकसित करना चाहिए।

एएलबीए-टीसीपी के कार्यकारी सचिव, सच्चा लौरेंट ने आंदोलनों के मंच और एएलबीए-टीसीपी सदस्य देशों के बीच समन्वय बढ़ाने को लेकर काम करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दुहराया।

उन्होंने कहा, “इस संगठन का विस्तार तेज़ी से होना ज़रूरी है, महामारी में हमने देखा है कि सिस्टम कैसे काम करता है, हमने देखा है कि मास्क, श्वासयंत्र और टीकों की जमाखोरी के लिए किस तरह लूट की तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। जहां कुछ देश बहुत सारे टीके जमा कर लिए हैं,वहीं अफ़्रीका जैसे अन्य क्षेत्रों में उस मात्रा में टीकों की उपलब्धता बिल्कुल नहीं है। एएलबीए ने दुनिया को संगठित करने का एक और रास्ता दिखा दिया है, एक ऐसी दुनिया, जिसमें देशों के बीच कहीं ज़्यादा एकजुटता है।”

वैश्विक संदर्भ में किये गये अपने उस विश्लेषण में लोरेंटी ने कहा कि "असमानता मानवता के सामने पेश आने वाले खतरों में से एक है" और उन्होंने सवाल किया कि हम इन चुनौतियों का सामना कैसे कर सकते हैं ? अपनी बात को आगे रखते हुए उन्होंने कहा, “सबसे पहले तो हमें कारणों को समझना होगा, और ये उत्पादन के पूंजीवादी मॉडल के नतीजे हैं। अगर हम पूंजीवादी उत्पादन के इस तंत्र को बदलने का लक्ष्य नहीं रखते, तो हम इस प्रणाली की ढांचागत स्थितियों को नहीं बदल पायेंगे।”

लोरेंटी ने अपनी बातें पूरी करते हुए कहा "एएलबीए मूल रूप से एक साम्राज्यवाद विरोधी मंच है। आज हम क्षेत्रीय वामपंथ की स्थिति को देख रहे हैं, जहां उन कुछ साथियों,जिन्होंनें खुद को वामपंथ का हिस्सा घोषित किया है, साम्राज्यवाद विरोधी इस बैनर को नीचे कर दिया है, और साम्राज्यवाद का पूंजीवाद के लिए कार्य करने का यह एक तरीक़ा है।"

कैरेबियन पीपुल्स असेंबली के केमिली चाल्मर्स ने कैरिबियाई लोगों के लिए चुनौतियों और महाद्वीप के साथ इसके काम की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा," लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई लोगों के लिए इस मुश्किल वक़्त में एएलबीए के प्रति आंदोलन का काम सबसे अहम रणनीतिक महत्व का है।”

उन्होंने कहा कि "कैरिबियाई क्षेत्र कई मायनों में एक रणनीतिक स्थान है। कैरेबियाई नियंत्रण को लेकर एक बहुत ही अहम संघर्ष होता रहा है। लेकिन, क्यूबा और बोलिवेरियन क्रांतियों की बदौलत ही साम्राज्यवादी ताक़तें इन कैरिबियाई  इलाक़ों को नियंत्रित नहीं कर सकतीं।

इसी तरह, उन्होंने कहा कि क्षेत्र के वर्चस्व को लेकर एक बार फिर विदेशी क़र्ज़ का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा,"हम फ़िदेल कास्त्रो की तरह कहते हैं: हम भुगतान नहीं कर सकते, हमें भुगतान नहीं करना चाहिए, हम भुगतान नहीं करना चाहते।"

उन्होंने आख़िर में लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई एकता का आह्वान किया और कहा कि साम्राज्यवादी वर्चस्व के स्पष्ट समाधान और समाजवादी राजनीतिक मुहिम के बिना यह काम मुमकिन नहीं है।उन्होंने कहा, "हम एक ऐसे दौर में हैं, जहां दुनिया विश्व आधिपत्य के लिहाज़ से एक संक्रमण के दौर से गुज़र रही है और यह यह वही पल है,जब अमेरिकी साम्राज्यवाद कहीं ज़्यादा हमलावर है, वे हमारी संस्कृतियों और हमारे लोगों को तबाह करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में इस क्षेत्र की मौजूदा प्रगतिशील सरकारों की हिफ़ाज़त ज़रूरी है।”

इस बीच सीएसए और प्लेटफ़ॉर्म फ़ॉर डेमोक्रेसी एंड अगेंस्ट नियोलिबरलिज़्म के इवान गोंजालेज़ ने कहा, "हम लोकतंत्र की हिफ़ाज़त और लोगों की संप्रभुता की ज़रूरत की पुष्टि करते हैं, लेकिन हमें लोकतंत्र की हिफ़ाज़त से आगे जाने के लिए भी ख़ुद को चुनौती देना चाहिए। हमें अपने क्षेत्रों में लोकतंत्र की अभिव्यक्ति की ज़रूरत है।"

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, "आम लोगों की तरफ़ से इस जवाब की तैयारी ज़रूरी है। सरकारों को यह समझना चाहिए कि आम लोग उन जवाबों का हिस्सा हैं।"

इन चुनौतियों के बीच उन्होंने इस बात पर चर्चा करने का आह्वान किया, “हम अपने देशों के लिए किस तरह का एकीकरण चाहते हैं। हमें सरकारों के नज़रियों पर चर्चा करना चाहिए और उन ग़लतियों से सीखना चाहिए, जो प्रगतिशील सरकारों की पहली लहर के साथ हुई थीं।”

इंटरनेशनल पीपुल्स असेंबली और जाम्बिया की सोशलिस्ट पार्टी की अकेंडे चुंडामा ने इस परिचर्चा का समापन किया और इस बात पर रौशनी डाली कि नवउदारवाद ने बार-बार दिखा दिया है कि यह हमारी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता है।उन्होंने कहा, "सब कुछ वैसे के वैसे ही रख दिया जाता है और पहले ही की तरह हमें यह समझाने की कोशिश की जाती है कि कोई विकल्प ही नहीं है। वे हमें यह सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं कि पूंजीवाद के अंत के बनिस्पत दुनिया के अंत को लेकर सोचना आसान है।”

उन्होंने आगे कहा, "इस स्थिति में यह अहम हो जाता है कि हम पूंजीवाद को ख़त्म करने के लिए अपनी ताक़तों को एकजुट करें। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह चुनौती तो यही रही है कि अपने संघर्षों को एकजुट कर पाना मुश्किल रहा है, हम सभी अलग-अलग लड़ रहे हैं, और इंटरनेशनल पीपुल्स असेंबली की बदौलत हम अपने संघर्षों को एकजुट कर पाने में कामयाब रहे हैं।”

पूंजीवाद के नतीजों के हल के रूप में उन्होंने एक समाजवादी परियोजना के निर्माण का आह्वान किया। उन्होंने अपनी बात यह कहकर ख़त्म की,"सिर्फ़ समाजवाद ही पूंजीवाद के परिणामों का समाधान कर सकता है। हमें पूंजीवाद, साम्राज्यवाद और नवउदारवाद को हराना है और इसके लिए हमें मिलजुलकर काम करना है, क्योंकि यही हमारे संघर्ष का सार है।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

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