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घटना-दुर्घटना
राजनीति
सड़क से संसद तक हंगामें के बीच भी नहीं थम रही महिला उत्पीड़न की घटनाएं
महिला उत्पीड़न से जुड़ी एक और दर्दनाक घटना सामने आयी है। चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अंकित मित्तल ने बताया कि करीब 26 साल की एक अज्ञात युवती का शव बरगढ़ थाना क्षेत्र में इलाहाबाद राजमार्ग के किनारे पुलिस सेवा केंद्र से बरामद हुआ। युवती के सिर में दो गोली मारे जाने के निशान पाए गए हैं और पहचान मिटाने के मकसद से उसका चेहरा पत्थर से कुचला गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
04 Dec 2019
stop rape
Image courtesy: Al Jazeera

महिला उत्पीड़न की घटानाएं लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। अभी देश हैदराबाद की घटना से गमगीन ही था कि एक के बाद एक कई घटनाएं सामने आ रही हैं। जिसका असर सड़क से लेकर संसद और सोशल मीडिया पर खूब देखने को मिल रहा है। कई जगह गुस्से में जन सैलाब सड़कों पर उतर आया है तो वहीं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल राजघट पर आमरण अनशन पर बैठी हैं। लेकिन बावजूद इसके सूरत बदलती नज़र नहीम आ रही है।

ताजा मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के बरगढ़ थाना क्षेत्र से सामने आया है। जहां एक अज्ञात युवती की मंगलवार, 3 दिसंबर 2019 को गोली मार कर हत्या कर दी गयी। पुलिस को संदेह है कि युवती से बलात्कार के बाद उसकी हत्या की गई।

भाषा की खबर के अनुसार चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अंकित मित्तल ने बताया कि करीब 26 साल की एक अज्ञात युवती का शव बरगढ़ थाना क्षेत्र में इलाहाबाद राजमार्ग के किनारे पुलिस सेवा केंद्र से बरामद हुआ। युवती के सिर में दो गोली मारे जाने के निशान पाए गए हैं और पहचान मिटाने के मकसद से उसका चेहरा पत्थर से कुचला गया है।

उन्होंने कहा, ‘'बलात्कार के बाद हत्या किए जाने की आशंका है, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही स्थिति स्पष्ट होगी।'

वहीं उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रहीं बलात्कार और अत्याचार की घटनाओं को “दिल दहलाने” वाला बताते हुए समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से यह अब तक का “सबसे बुरा दौर” है।

अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, 'प्रदेश की बहन-बेटियों के साथ जिस प्रकार दुष्कर्म, अत्याचार व हत्याओं की ख़बरें आ रही हैं वे दिल दहलानेवाली हैं। सुरक्षा की दृष्टि से प्रदेश में लड़कियों और महिलाओं के लिए यह आज तक का सबसे ख़राब दौर है। यह घोर निंदनीय है।''

उधर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उन्नाव बलात्कार मामले को लेकर बुधवार, 4 दिसंबर को उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 45 दिन में सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया था लेकिन 80 दिन बीत जाने के बाद भी यह नहीं हो सका।

उन्होंने ट्वीट किया, ''उन्नाव मामले में उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया था कि 45 दिन में ट्रायल पूरा किया जाए। 80 दिन बीत चुके हैं। अभी तक ट्रायल पूरा नहीं हुआ।''

प्रियंका ने दावा किया, "महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है। अपराधियों के खिलाफ मामले ही नहीं दर्ज होते। और अगर मामला रसूख वाले भाजपा विधायक का है तो पहले प्राथमिकी दर्ज करने में देरी होती है, फिर गिरफ़्तारी में और अब ट्रायल लटका पड़ा है।'' जैसे कि उन्नाव मामले में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंग सेंगर मुख्य आरोपी हैं।

महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार पर देश में कई जगह प्रदर्शन देखने को मिले लेकिन इसी बीच मुंबई के कुर्ला क्षेत्र में छह साल की बच्ची के यौन शोषण की खबर सामने आई, जिसके आरोप में पड़ोस में रहने वाले 61 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।

इस संबंध में पुलिस अधिकारी ने कहा कि आरोपी ने रविवार से मंगलवार तक पीड़िता को चॉकलेट देने के बहाने अपने घर पर बुलाया और उसका यौन शोषण किया।

उन्होंने कहा कि पीड़िता ने मंगलवार की शाम अपने अभिभावकों को घटना के बारे में बताया जिसके बाद विनोबा भावे नगर पुलिस थाने में एक शिकायत दर्ज कराई गयी। चिकित्सकीय परीक्षण में नाबालिग के यौन शोषण की पुष्टि हुई। आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पाक्सो कानून की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

उधर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कुछ मीडिया प्रतिष्ठानों द्वारा हैदराबाद बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर बुधवार को केंद्र से जवाब मांगा।मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने केंद्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और दिल्ली की सरकारों के साथ ही कुछ मीडिया प्रतिष्ठानों और सोशल नेटवर्किंग मंचों को भी नोटिस जारी किया।

याचिका में मीडिया प्रतिष्ठानों और उन व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया गया है जिन्होंने बलात्कार पीड़िता की पहचान कथित तौर पर उजागर की है। किसी बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करना कानूनन अपराध है।

अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 16 दिसंबर तय की है।भारतीय दंड संहिता की धारा 228ए, बलात्कार समेत कुछ अपराधों के पीड़ित की पहचान को उजागर करना दंडनीय बनाती है जिनके लिए दो साल तक की कैद और जुर्माने की सजा मिल सकती है।

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