NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
भारत
राजनीति
A से अच्छे दिन, B से भक्त
देखिए क्या-क्या है नई ए बी सी डी में
सबरंग इंडिया
05 Jan 2017
A से अच्छे दिन, B से भक्त

बीते साल सरकार और उनकी नीतियों ने बचपन में पढ़े ए बी सी डी के मायने को बदलकर रख दिया। पूरे साल पीएम मोदी और सरकार की नीतियों की ही चर्चा होती रही। सोशल मीडिया पर पूरे साल लोगों ने देश के तमाम मुद्दों को अलग-अलग नजरिए से देखा और उन पर कटाक्ष किया। 

क्या इनमें से कुछ मुद्दे साल 2017 पर भी असर डालेंगे? यह देखना दिल्चस्प होगा...
 
A- ए से अच्छे दिन। अच्छे दिन जो ‘भक्तों’ (देखें B) की पहुंच से अब तक दूर हैं। अगर आप भक्त नहीं हैं तो आप A से एंटी-नेशनल साबित किए जा सकते हैं।

B- बी से भक्त। जिनके लिए उनकी आस्था ही दुनिया का सबसे बड़ा सच है। भक्त तार्किक विचारों से चिढ़ जाते हैं और ऊल-जुलूल हरकतें करने लगते हैं। आप चाहें तो बी से ब्लैक मनी भी पढ़ सकते हैं लेकिन इससे आप आयकर के शिकंजे में फंस सकते हैं इसलिए बचें तो बेहतर। बीते बात बी का मतलब बीफ भी रहा लेकिन इससे गोरक्षक आपकी जान के दुश्मन हो सकते हैं। अगर आप ब्रिटिश टच चाहते हैं तो बी से ब्रेक्जिट पढ़ सकते हैं।

C- सी से कैश। कैश यानी नकद जिससे हर भारतीय को प्यार है, खासकर गुजरातियों को। साल 2016 में सी से कैशलेस भी हो गया। साल 2016 से पहले कैशलेस होना गरीबी का प्रतीक था लेकिन अब ये राष्ट्रसेवा बन चुका है।

D- डी से डीमोनेटाइजेशन। डीमोनेटाइजेशन (विमुद्रीकरण/नोटबंदी) एक ऐसा जादुई शब्द है जिससे आम लोगों की जेब पैसे निकलकर बैंक में पहुंच गए। ये पैसे उसी जादुई तरीके से एक दिन वापस आपके मोबाइल वैलेट में पहुंच जाएंगे।

E- ई से इकोनॉमी। भारतीय राजनीति में सालों साल तक ई से इलेक्शन ही रहा है कि लेकिन अब पश्चिमी देशों की तरह भारत में ई से इकोनॉमी भी होने लगी है। जाहिर है ये भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता की निशानी है।

F- एफ से फार्मर (किसान)। वही किसान जिनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के कष्ट सहने के लिए तारीफ की। ये अलग बात है कि नोटबंदी के कारण खेती में मददगार सहकारी बैंक पर सरकार की तिरछी नजर के कारण किसानों को बुआई में काफी मुश्किल झेलनी पड़ी। कहना न होगा किसानी अब अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी नहीं रही। साल 2016 में एफ से एफसीआरए भी रहा। बीते साल ये पता चला कि केंद्र सरकार जब चाहे जिसका विदेशी चंदा बंद करा सकती है। बस राजनीतिक पार्टियों का छोड़कर।

G- जी फॉर ग्रोथ (विकास)। नोटबंदी से पहले इस शब्द को लगभग मिथकीय दर्जा प्राप्त हो गया था। बीते साल जी से गोस्वामी (अरनब गोस्वामी) भी रहा। टीवी की सबसे ऊँची आवाज। अब वो अपने टीवी चैनल रिपब्लिक के साथ वापस आने वाले हैं।

H- एच से हैदराबाद यूनिवर्सिटी। बीते साल एंटी-नेशनल होने के मामले में हैदराबाद यूनिवर्सिटी जेएनयू से आगे निकल गई। 16 जनवरी को रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद देश की राजनीति में एक नई चेतना का बीज पड़ा।

I- आई से इंडियन। एक ऐसा जीनियस जिसे लेकर दुनिया को गलतफहमी है। उसने प्लास्टिक सर्जरी और हवाई जहाज बनाया लेकिन कभी उसका श्रेय नहीं लिया। बाद में वो हालात के हाथों मजबूर हो गया जिसके लिए मार्क्सवादी, माओवादी, नेहरू और गांधी जिम्मेदार हैं।

J- जे से जुमला। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनावी जीत हासिल करने में जुमले ने जो भूमिका निभायी है उससे इसका महत्व अभूतपूर्व ढंग से बढ़ गया है। बीते साल जे से जेएनयू भी रहा जो देश की राजधानी दिल्ली में एंटी-नेशनल का मजबूत गढ़ है। जे से बीते साल जवान भी रहा जो देश की रक्षा में जान देता रहा। ये अलग बात है कि नोटबंदी के बाद क़तार में लगे जवान को तकलीफ भी सहनी पड़ी।

K- के से कश्मीर। हमेशा की तरह। आजादी के बाद से भारतीय शब्दकोश में K का यही मतलब रहा है। पिछले साल कश्मीर कुछ ज्यादा ही खबरों में रहा। ज्यादातर बुरी खबरों में।

L- एल से लॉन्ड्रिंग। लॉन्ड्रिंग वो कला है जिससे पलक झपकते ही पैसे का रंग बदल जाता है। वो काले से सफेद हो जाता है। भारत में पिछले ढाई दशकों से एल से लिबरलाइजेशन हुआ करता है लेकिन अब ये कमजोर पड़ने लगा है शायद इसलिए क्योंकि इसका जन्म कांग्रेसी शासनकाल में हुआ था।

M- एम से मोबाइल। अब यह आपका बैंक भी है, बटुआ भी। हो सकता है कि आने वाले वक्त में आपके पास केवल मोबाइल बैंक और मोबाइल बटुआ ही बचे इसलिए इसे लेकर जागरूक बनें।

N- एन से नेशनलइज्म (राष्ट्रवाद)। भारत में एक मात्र मान्यताप्राप्त विचारधारा। बीते साल एन से नेहरू भी रहा जो नोटबंदी को छोड़कर इस देश में होने वाली हर चीज के लिए जिम्मेदार ठहराए गए।

O- ओ से आह। गरीब, बीमार, मजबूर लोगों की आह जो क़तारों में लगे रहे। ओ से ओलंपिक या पैराओलंपिक भी जिससे भारतीयों को दिल्ली सरकार के ऑड-ईवन के खेल से ज्यादा खुशी मिली।

P- पी से पाकिस्तान और पुतिन। बीते साल दोनों ने एशिया की राजनीति में अपनी पुरानी चाल नहीं बदली। पी से पाकिस्तानी एक्टर भी हो सकते हैं जिन्हें भारत में एंटी-नेशनल घोषित कर दिया गया है। पी से पैलेट गन भी रहा जिन्हें सैकड़ों नागरिकों को सहना पड़ा। लेकिन बीते साल का सबसे बड़ा पी रहा पेटीएम जिसने नोटबंदी का सबसे ज्यादा जश्मन मनाया। पी से पतंजलि भी रहा। हमारा अपना देसी वालमार्ट। पी से प्रॉहिबिशन (शराबबंदी) भी।

Q- क्यू से क्यू (क़तार)। क़तार जिसमें देश के हर जरूरतमंद को लगना पड़ा। करीब 100 नागरिकों की क़तार में खड़े होने के दौरान जान चली गई। कई जगह मारपीट हो गई। देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली में क़तार में बने रहने के दौरान अनुशासन  की तारीफ की।

R- आर से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया। एक समय काफी सम्मानित लेकिन नोटबंदी के बाद सवालों के घेरे में।

S- एस से सर्जिकल स्ट्राइक। केंद्र सरकार द्वारा लोकप्रिय बनाया गया जुमला।  लेकिन आठ नवंबर को नोटबंदी लागू होने के बाद लोग इसे भूलने लगे हैं।

T- टी से टैक्समैन (टैक्स अधिकारी)। इस साल टी से टैक्सवाले सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। पीएम मोदी ने वादा किया है कि ये टैक्सवाले इस साल भी लोगों का पीछा करते रहेंगे। बीते साल टी से ट्रंप और टाटा भी रहे।

U- यू से उर्जित पटेल। भारतीय रिजर्व बैंक के मौजूदा गवर्नर जिनके कार्यकाल में नोटबंदी जैसा ऐतिहासिक फैसला लिया गया। यू से यूएसएसडी (अनस्ट्रक्चर्ड सप्लिमेंट्री सर्विस डाटा) भी जिससे फोनवाले वित्तीय सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे।

V- वी से वेनेजुएला। लातिन अमेरिकी देश जिसने भारत के बाद नोटबंदी का फैसला लिया लेकिन जनता के उग्र विरोध के बाद इसे वापस ले लिया।

W- वी से वेडिंग। भारतीय शादियां जिन पर नोटबंदी की गहरी मार पड़ी। कुछ की शादी टूट गई, कुछ की टल गई तो कुछ की ज्यों-त्यों पूरी की गई।

X- एक्स से प्लैनेट एक्स। नेप्चून के आकार का ग्रह जो प्लूटो के कक्षा में परिक्रमा करता है। कैलटेक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बीते साल इसे खोजने का दावा किया।

Y- वाई से यस्टरडे (बीता हुआ कल)। ऐसा दिन जहां हमारी सारी मुश्किलें पीछे छूट चुकी होती हैं।  वाई से यादव परिवार भी रहा जिसने अपना नाटकीय घटनाक्रमों से टीवी धारावाहिकों को चुनौती दी है।  वाई से सबसे अहम है यू (आप) जिसके विचार और फैसलों से देश का भविष्य तय होना है।

Z- जेड़ से ज़िप (बंद करना)। बीते साल चुप रहने को राष्ट्रवाद की सबसे बड़ी पहचान माना गया। अगर आप चुप रहते हैं तभी माना जाएगा कि आप एंटी-नेशनल नहीं हैं।

अच्छे दिन
नरेंद्र मोदी
भाजपा
नोटबंदी

Related Stories

हर्षवर्धन ने स्टीफन हॉकिंग पर टिप्पणी केवल यह दिखता है कि भारतीय विज्ञान बुरे दौर से गुज़र रहा है

2जी केस : घोटाला भया के नाहीं

गुजरात की पर्दापोशी करने के लिए कुपोषण सर्वे के आंकड़े दबाए

विकसित गुजरात की कुपोषित सच्चाई

संघी मिथक का विज्ञान पर प्रहार

आईपी पर समर्पण: कभी वापस न लौटने की तरफ


बाकी खबरें

  • aicctu
    मधुलिका
    इंडियन टेलिफ़ोन इंडस्ट्री : सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ख़राब नियोक्ताओं की चिर-परिचित कहानी
    22 Feb 2022
    महामारी ने इन कर्मचारियों की दिक़्क़तों को कई गुना तक बढ़ा दिया है।
  • hum bharat ke log
    डॉ. लेनिन रघुवंशी
    एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता
    22 Feb 2022
    सभी 'टूटे हुए लोगों' और प्रगतिशील लोगों, की एकता दण्डहीनता की संस्कृति व वंचितिकरण के ख़िलाफ़ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि यह परिवर्तन उन लोगों से ही नहीं आएगा, जो इस प्रणाली से लाभ उठाते…
  • MGNREGA
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    ग्रामीण संकट को देखते हुए भारतीय कॉरपोरेट का मनरेगा में भारी धन आवंटन का आह्वान 
    22 Feb 2022
    ऐसा करते हुए कॉरपोरेट क्षेत्र ने सरकार को औद्योगिक गतिविधियों के तेजी से पटरी पर आने की उसकी उम्मीद के खिलाफ आगाह किया है क्योंकि खपत की मांग में कमी से उद्योग की क्षमता निष्क्रिय पड़ी हुई है। 
  • Ethiopia
    मारिया गर्थ
    इथियोपिया 30 साल में सबसे ख़राब सूखे से जूझ रहा है
    22 Feb 2022
    इथियोपिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 70 लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है क्योंकि लगातार तीसरी बार बरसात न होने की वजह से देहाती समुदाय तबाही झेल रहे हैं।
  • Pinarayi Vijayan
    भाषा
    किसी मुख्यमंत्री के लिए दो राज्यों की तुलना करना उचित नहीं है : विजयन
    22 Feb 2022
    विजयन ने राज्य विधानसभा में कहा, ‘‘केरल विभिन्न क्षेत्रों में कहीं आगे है और राज्य ने जो वृद्धि हासिल की है वह अद्वितीय है। उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक हितों के साथ की गयी अनुचित टिप्पणियों के तौर पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License