NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सेक्शन 6 (A) का सवाल NRC को बर्बाद कर सकता है।
जो यह सोच रहे हैं कि भारत भी प्रवासियों से मिलकर बने हुए लोगों के भूगोल का नाम है फिर कुछ लोगों के साथ अवैध प्रवासी मानकर भेदभाव क्यों? उन्हें उनके सवालों का जवाब मिल सकता है। जो यह मानते हैं कि ब्रह्मपुत्र की घाटी में हर साल बाढ़ आता है ,उससे बचने के लिए कुछ किलोमीटर इधर से उधर हो जाना गलत नहीं है बल्कि गलत अवैध प्रवासी के नाम पर NRC का अपडेशन होना है, उन्हें अपनी मान्यता का जवाब मिल सकता है।
अजय कुमार
06 Aug 2018
NRC

इस समय असम में तकरीबन 40 लाख लोग एक ऐसे डर में जी रहे हैं, जिसे महसूस करना किसी देश के नशें में डूबे लोगों के बस की बात नहीं। देश के नशे में डूबे ऐसे ही लोगों के एक संगठन असम सनमिलिशिया ने असम की नागरिकता के कट ऑफ डेट की संवैधानिकता पर सवाल खड़ा करते हुए साल 2012  में सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की।  इनकी अपील थी कि असम समझौते से निकले सेक्शन 6 (a) को खारिज किया जाए। उनका कहना था कि यह असम के अवैध प्रवासियों से जुड़ी समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं करता है। 

नागरिकता अधिनियम की धारा 6 (a) असम समझौते के बाद नागरिकता अधिनियम में  किये गए संशोधन का  परिणाम है। इस संशोधन की वजह से प्रवास के आधार पर असम के लिए नागरिकता का प्रवाधान, शेष भारत के लिये नागरिकता के प्रावधान से अलग हो जाता है। शेष भारत में जहां पाकिस्तान से आये प्रवासियों के लिए नागरिकता हासिल करने की कट ऑफ डेट 19 जुलाई 1948 है, वहीं असम समझौते के बाद असम में आये प्रवासियों के लिए कट ऑफ डेट 24 मार्च 1971 है। यानि कि शेष भारत में केवल  19 जुलाई 1948 से पहले आये पाकिस्तान के लोगों को नागरिकता हासिल हो सकती है लेकिन असम  में 24 मार्च 1971 से पहले आये लोगों को भी नागरिकता हासिल हो सकती है। इस प्रावधान पर असम मिलिशिया संगठन का विरोध था। जिनका मानना था कि इस प्रावधान की वजह से  सारे अवैध प्रवासी बाहर नहीं किये जाएंगे। इसलिए इनके लिए भी कट ऑफ डेट 1948 होनी चाहिए। ये लोग खुद को असम की माटी का बेटा मानते हैं और असम में रह रहे अवैध प्रवासियों को घुसपैठियों की तरह देखते हैं।अपने विरोध को जायज ठहराने के लिए तर्क करते हैं  कि पूरे  असमिया समाज का प्रतिनिधित्व 'आसु  (AASU)' को कैसे हासिल है ? भारत का गृह मंत्रालय  'आसु' से कैसे समझौता कर सकता है ?असम के लिए शेष भारत से अलग कानून कैसे  हो सकता है ? क्या असम भारत से अलग है ? क्या भारत असम को अपने उपनिवेश की तरह देखता है?

दिसम्बर 2014 में सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई और आर आफ नरीमन ने इस याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई करते समय इनके सामने तकरीबन कुछ ऐसे सवाल उपज निकले जिनका सम्बन्ध मूल रूप से संविधान से जुड़ा था। इन सवालों में नागरिकता संशोधन अधिनियम, 1955 की सेक्शन 6 (a ) की संवैधानिकता का भी सवाल था। चूँकि यह सवाल तात्विक रूप से संविधान से जुड़े सवाल थे इसलिए  इन सवालों को 5 जजों के संवैधानिक बेंच के हवाले कर दिया गया। अप्रैल 2017 में संविधान बेंच ने इन सवालों  पर गौर तो किया लेकिन फैसला नहीं सुनाया। फरवरी 2018 में चीफ जस्टिस ने कहा कि इन सवालों के लिए एक नई संवैधानिक बेंच बनाई जाएगी।  

इस पूरी जानकारी में दबे हुए सवालों के जिन्न ऐसे हैं कि जो अगर न्याय की जमीन पर जवाब बनकर बाहर निकले तो असम के लिए की जा रही NRC अपडेशन की पूरी कार्रवाई कचड़े के डिब्बें में जा सकती है । NRC के अपडेशन के लिए तकरीबन 1200 करोड़ रूपये ,52000 सरकारी कर्मचारी,9000 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी,6000 बाहर से मंगवाए गए कर्मचारी से जुड़ा खर्चा और समय सब बर्बाद हो जाएगा। केवल उस मानसिक प्रताड़ना की जीत होगी,जो NRC से छंटनी के बाद 40 लाख लोगों को इस समय सहन करनी पड़ रही है।  

ऐसे में यह सवाल उठता है कि आख़िरकार इन सवालों की प्रकृति क्या है? इन सवालों में क्या है जो पूर्वोत्तर में प्रवास से जुड़े कई परेशानियों का जवाब बन सकती है। एक बार इसे समझने की कोशिश करते हैं |

 -क्या नागरिकता अधिनियम की धारा 6 (a) संविधान के अनुच्छेद 10, जिसमें भारत की नागरिकता के सम्बन्ध में प्रवाधान है,से असंगत है ? क्या संसद द्वारा नागरिकता के लिए बनाया हुआ कानून असम की नागरिकता के लिए लागू नहीं होगा। क्या असम में जन्म लेने के बाद ही कोई भारत का नागरिक नहीं बन सकता है? क्या असम में भारत की नागरिकता के लिए  भारत की जमीन पर जन्म लेते ही नागरिक बन जाने वाला सिद्धांत  लागू नहीं होगा।  सेक्शन 6 (a) से जुड़े ऐसे बहुत सारे सवाल है जो अनुच्छेद 10 के तहत पारित नागरिकता कानून के विरोध में जाते हैं। 

 -संविधान के अनुच्छेद 29 (1) का प्रारूप क्या है ? संविधान का अनुच्छेद 29(1) एक मौलिक अधिकार है जो भारत के नागरिक को अपनी संस्कृति के संरक्षण  के लिए कोशिश करने का अधिकार देता है। क्या यह अधिकार  'अब्सोल्युट' है यानि कि क्या इसपर किसी भी तरह की जरूरी रोक टोक नहीं लग सकती ? 'संस्कृति' और 'संस्कृति के संरक्षण' का मतलब क्या है? क्या  संस्कृति के संरक्षण के नाम पर किसी की नागरिकता छीन जा सकती है ? क्या सेक्शन 6 (a), अनुच्छेद 29 (1) से हासिल 'संस्कृति का संरक्षण'  के मूलाधिकार का उलंघन  करता है ?

- क्या सेक्शन 6 (a) से संविधान के अनुच्छेद 355 का उल्लंघन होता है? अनुच्छेद 355 बाहरी आक्रमण के आधार पर आपतकाल लगाने से जुड़ा प्रावधान है ।अनुच्छेद 355 का सही इन्टरपरटेशन क्या है? क्या अनुच्छेद 355 में वर्णित बाह्य आक्रमण (external aggression) का मतलब अवैध प्रवासियों से भी है? क्या अवैध प्रवासी होने पर आंतरिक सुरक्षा पर खतरे की सम्भावना बनती है?  अनुच्छेद 355 में वर्णित राज्य का मतलब क्या है ? राज्य का निर्धारण लोगों से होगा अथवा भौगोलिक सीमा से। क्या सांस्कृतिक तौर पर एक दूसरे से जुड़े लोग राज्य की भौगोलिक सीमा की वजह से राज्य का हिस्सा नहीं बन सकते ?

-क्या सेक्शन 6 (a ) रूल ऑफ़ लॉ की भावना का उल्लंघन करता है। क्या सेक्शन 6 (a) राजनीतिक फायदे के लिए रास्ता निकालने की वजह से आया है ? क्या राजनीतिक फायदे की वजह से रूल ऑफ़ लॉ का उल्लंघन हुआ है?

इन सवालों के जवाब से असम से जुड़ी अवैध प्रवासियों की पूरी कहानी बदल सकती है। प्रवास को संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न हिस्सा माने वाले लोग जीत हासिल कर  सकते हैं।  जो यह सोच रहे हैं कि भारत भी प्रवासियों से  मिलकर बने हुए लोगों के भूगोल का नाम है फिर कुछ लोगों के साथ अवैध प्रवासी मानकर भेदभाव क्यों? उन्हें उनके सवालों का जवाब मिल सकता है।  जो यह मानते हैं कि ब्रह्मपुत्र की घाटी में हर साल बाढ़ आता है ,उससे बचने के लिए कुछ किलोमीटर इधर से उधर हो जाना गलत नहीं है बल्कि गलत अवैध प्रवासी के नाम पर  NRC का अपडेशन होना है, उन्हें अपनी मान्यता का जवाब मिल सकता है। इन सब बातों का भविष्य में न्यायिक स्पष्टीकरण होना तय है। समय  के सफर में चलते-चलते इंसानों ने देश बनाये ,अब समय के सफर में लड़ते-लड़ते  इंसानों द्वारा  देश के लिए जायज हदबंदी के पैमाने बनेंगे।जब  यह पैमाने बनेंगे तो NRC के सारे पैमाने टूटेंगे  

 

Assam
NRC Assam
AASU
Citizenship
Supreme Court

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • Gauri Lankesh pansare
    डॉ मेघा पानसरे
    वे दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी या गौरी लंकेश को ख़ामोश नहीं कर सकते
    17 Feb 2022
    दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी और गौरी को चाहे गोलियों से मार दिया गया हो, मगर उनके शब्द और उनके विचारों को कभी ख़ामोश नहीं किया जा सकता।
  • union budget
    टिकेंदर सिंह पंवार
    5,000 कस्बों और शहरों की समस्याओं का समाधान करने में केंद्रीय बजट फेल
    17 Feb 2022
    केंद्र सरकार लोगों को राहत देने की बजाय शहरीकरण के पिछले मॉडल को ही जारी रखना चाहती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर 30 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 541 मरीज़ों की मौत
    17 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 30,757 नए मामले सामने आए है | देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 27 लाख 54 हज़ार 315 हो गयी है।
  • yogi
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः बिजली बिल माफ़ करने की घोषणा करने वाली BJP का, 5 साल का रिपोर्ट कार्ड कुछ और ही कहता है
    17 Feb 2022
    "पूरे देश में सबसे ज्यादा महंगी बिजली उत्तर प्रदेश की है। पिछले महीने मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) ने 50 प्रतिशत बिजली बिल कम करने का वादा किया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया। ये बीजेपी के चुनावी वादे…
  • punjab
    रवि कौशल
    पंजाब चुनाव : पुलवामा के बाद भारत-पाक व्यापार के ठप हो जाने के संकट से जूझ रहे सीमावर्ती शहर  
    17 Feb 2022
    स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ व्यापार के ठप पड़ जाने से अमृतसर, गुरदासपुर और तरनतारन जैसे उन शहरों में बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी पैदा हो गयी है, जहां पहले हज़ारों कामगार,बतौर ट्रक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License