NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
भारत
राजनीति
‘सहिष्णु देश’ में स्टैंडअप कॉमेडी की भी जगह नहीं!
सूरत में Standup Comedian कुनाल कामरा का शो ये कह कर कैंसिल कर दिया गया कि कुछ लड़कों ने उसमें हंगामे की धमकी दी है। ये लड़के किस संगठन से थे ये बताया नहीं गया है। ग़ौरतलब ये है कि वो कुनाल की कॉमेडी को "देश विरोधी" और "हिन्दू विरोधी" कह रहे थे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Aug 2019
kunal kamra

“हम बेहद सहिष्णु हैं” ये दावा उस सरकार का और उस विचारधारा का है जो आज 80 प्रतिशत राज्यों में सरकार बना कर बैठी है। ये वो विचारधारा है जो दावा करती है कि सिर्फ़ वही देश के बारे में सोचा करती है और बाक़ी हर कोई देशद्रोही है, देश-विरोधी है। ये वही विचारधारा है जो इतनी सहिष्णु है कि उसे किसी के खाने से दिक़्क़त है, किसी के कपड़ों से दिक़्क़त है, किसी की दाढ़ी से दिक़्क़त है और यहाँ तक कि ‘व्यंग्य’ और ‘चुटकुलों’ से भी दिक़्क़त है। हाल की ख़बर है सूरत की, जहाँ Standup Comedian कुनाल कामरा का एक शो ये कह कर कैंसिल कर दिया गया कि कुछ लड़कों ने उसमें हंगामे की धमकी दी है।

ये लड़के किस संगठन से थे ये बताया नहीं गया है। लेकिन ग़ौरतलब बात ये है कि वो कुनाल की कॉमेडी को "देश विरोधी" और "हिन्दू विरोधी" कह रहे थे। पुलिस का कहना ये है कि जो लोग इस शो को आयोजित कर रहे थे, उनके पास पर्मिशन नहीं थी। पुलिस ने ये नहीं बताया कि पर्मिशन न होने पर उनसे पहले आसपास के कुछ लड़के क्यों आ गए? और क्यों पुलिस को पहली शिकायत उन लड़कों की तरफ़ से गई? कुनाल की तरफ़ से इस घटना पर कोई बयान नहीं आया है। लेकिन आयोजक ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा है कि 9 बजे से शो शुरू होने वाला था और 7 बजे कुछ लड़के आ गए और शो न करवाने की धमकी देने लगे। लड़कों ने ये भी कहा कि अगर शो करवाया गया तो वो अंडों और टमाटरों से हमले करेंगे। 

ये पहली बार नहीं है जब ऐसा कुछ हुआ है। पिछले साल अगस्त के महीने में ही कुनाल कामरा का एक शो वडोदरा के एक विश्वविद्यालय में होने वाला था, जिसे तब कैंसिल किया गया जब कुछ पास आउट छात्रों ने कुनाल पर "देश विरोधी" होने का इल्ज़ाम लगाया था। छात्रों ने ये भी कहा था, कि कुनाल लोकसभा चुनावों से पहले वडोदरा के लड़कों का "माइंड वॉश" करने के लिए आए हैं। 

इसके अलावा गाहे-ब-गाहे कुनाल कामरा और उनके साथ के तमाम कोमेडियन को गालियाँ दी ही जाती हैं। कुनाल कामरा राजनीतिक कॉमेडी करते हैं, और सत्ताधारी पार्टी पर व्यंग्य करते हैं।

ये बात सिर्फ़ कुनाल कामरा का शो कैंसिल होने की नहीं है। ये दरअसल एक पैटर्न बन चुका है कि सरकार-विरोधी लोगों को टार्गेट किया जाए और उन्हें देश विरोधी बता दिया जाए। देश में 2014 के बाद से आए दिन लोकतंत्र का जश्न मनाया जा रहा है। लेकिन लोकतंत्र की प्रमुख शर्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोज़ ही कुचला जा रहा है और असहमति की जगह लगातार कम होती जा रही है। 

kunal kamra
Tolerant
nationalist
anti-nationalist
Hindutva
democracy
Modi government
BJP

Related Stories

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

मनोज मुंतशिर ने फिर उगला मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर, ट्विटर पर पोस्ट किया 'भाषण'

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

जहांगीरपुरी हिंसा में अभी तक एकतरफ़ा कार्रवाई: 14 लोग गिरफ़्तार

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

जनतंत्र पर हिन्दुत्व का बुल्डोजर और अंबेडकर की भविष्यवाणी

मुस्लिम जेनोसाइड का ख़तरा और रामनवमी


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!
    27 Mar 2022
    पुनर्प्रकाशन : यही तो दिन थे, जब दो बरस पहले 2020 में पूरे देश पर अनियोजित लॉकडाउन थोप दिया गया था। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं लॉकडाउन की कहानी कहती कवि-पत्रकार मुकुल सरल की कविता- ‘लॉकडाउन—2020’।
  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    लीजिए विकास फिर से शुरू हो गया है, अब ख़ुश!
    27 Mar 2022
    ये एक सौ तीस-चालीस दिन बहुत ही बेचैनी में गुजरे। पहले तो अच्छा लगा कि पेट्रोल डीज़ल की कीमत बढ़ नहीं रही हैं। पर फिर हुई बेचैनी शुरू। लगा जैसे कि हम अनाथ ही हो गये हैं। जैसे कि देश में सरकार ही नहीं…
  • सुबोध वर्मा
    28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?
    27 Mar 2022
    मज़दूर और किसान आर्थिक संकट से राहत के साथ-साथ मोदी सरकार की आर्थिक नीति में संपूर्ण बदलाव की भी मांग कर रहे हैं।
  • अजय कुमार
    महंगाई मार गई...: चावल, आटा, दाल, सरसों के तेल से लेकर सर्फ़ साबुन सब महंगा
    27 Mar 2022
    सरकारी महंगाई के आंकड़ों के साथ किराना दुकान के महंगाई आकड़ें देखिये तो पता चलेगा कि महंगाई की मार से आम जनता कितनी बेहाल होगी ?
  • जॉन पी. रुएहल
    क्या यूक्रेन मामले में CSTO की एंट्री कराएगा रूस? क्या हैं संभावनाएँ?
    27 Mar 2022
    अपने सैन्य गठबंधन, सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के जरिये संभावित हस्तक्षेप से रूस को एक राजनयिक जीत प्राप्त हो सकती है और अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उसके पास एक स्वीकार्य मार्ग प्रशस्त…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License