NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शहर नियोजन के लिए बनी बहुत सारी प्राधिकरणों का फायदा क्या - सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस मदन लोकुर ने कहा कि हजारों बिल्डिंगें असुरक्षित हैं और भ्रष्टाचार के दलदल की वजह से कई निर्दोषों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
अजय कुमार
25 Aug 2018
building

बिल्डिंग गिरी और लोग मर गए। छह मंज़िला बिल्डिंग से सटी एक चार मंजिला बिल्डिंग थी। छह मंजिला बिल्डिंग चार मंजिला बिल्डिंग पर गिरी और लोग मर गए। बिल्डिंग में आग लगी लेकिन बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था और लोग मर गए। बिल्डिंग से निकलने वाले पानी के लिए सही तरह का निकासी तंत्र नहीं था। बिल्डिंग के नीचे ही पानी का जमाव हो रहा था। जिससे बिल्डिंग का आधार कमज़ोर हुआ और बिल्डिंग गिर गयी और लोग मर गए। जिस जमीन  पर बिल्डिंग बनी थी, वह अनाधिकृत थी, अनाधिकृत जमीन पर धड़ल्ले से बिल्डिंगें बनती रहीं, अचनाक से ऐसा हुआ कि कुछ बिल्डिंगें गिर गयी और लोग मर गए।  बिल्डिंग की संरचना में मौजूद गड़बड़ियों की शिकायत प्रशासन से की गयी, प्रशासन ने अनदेखा किया और नतीजा बिल्डिंग गिरी और लोग मर गए। ऐसी तमाम खबरों से हमारा वास्ता आये दिन होता रहता है और हम यह सोचकर चुप रह जाते हैं कि आख़िरकार अनहोनी को कौन टाल सकता है? 

अनाधिकृत भवन निर्माण की सीलिंग के संरक्षण से सम्बंधित दिल्ली के  कानून पर सुनवाई करते समय जस्टिस मदन लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने कुछ ऐसी चिंताएं व्यक्त की,जो इस सम्बन्ध में गौर करने लायक है। हाल में ही मुंबई के परेल इलाके में क्रिस्टल टावर में लगी आग का हवाला देते हुए जस्टिस मदन लोकुर ने कहा कि 'मुंबई की हजारों बिल्डिंगें असुरक्षित हैं और भ्रष्टाचार के दलदल की वजह से कई निर्दोषों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इस मुंबई में कई लोग लोग मर रहें हैं और हम यहां लोगों के मरने के बारें में बातें कर रहे हैं। अभी हाल में ही कमला मिल में आग लगी और हमने इस घटना से कुछ भी नहीं सीखा। यह हालत कब तक बनी रहेगी और अभी कितने निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ेगी। दिल्ली में तकरीबन 51000 बिल्डिंगों का इस्तेमाल कमर्सियल इरादें से किया जा रहा है।कमर्सियल और रिहायशी उद्देश्यों के लिए बिल्डिंगों का किया जा रहा इस्तेमाल रिहायशी लोगों के जोखिम को बढ़ा देता है।' 

जस्टिस गुप्ता ने चिंता व्यक्त की कि 'हर चीज तबाह हो रही है ,पहले आप कानून बनाते हैं और फिर इन कानूनों की धज्जियां उड़ाई जाती है।' सोलह मंजिला क्रिस्टल टावर के ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें थीं, पहले तीन फ्लोर पर पार्किंग थी।  बिल्डिंग में आग लगी, चार लोगों की मौत हो गयी,तेईस लोग घायल हो गए और तीन फायरमैन बुरी तरह से चोटिल हो गए। जस्टिस मदन लोकुर ने केंद्र की तरफ से मौजूद एडिशनल सोलिस्टर जनरल नदकर्णी से पूछा कि हम केवल दिल्ली की निगरानी कर रहे हैं लेकिन सारे देश का क्या होगा ? नदकर्णी ने जवाब दिया कि शहरी नियोजन राज्य का विषय था और सम्बंधित राज्य के हाई कोर्ट को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। जस्टिस मदन लोकुर ने इस पर जवाब दिया कि एक व्यक्ति एक घर खरीदने के लिए तकरीबन 50 लाख रूपये से ज्यादा की रकम खर्च करता है और उससे कहा जाता है कि उसका घर गैरकानूनी है और वह वहां नहीं रह सकता। आखिरकार उस व्यक्ति को क्या करना चाहिए? केंद्र यह नहीं कह सकता कि इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है और न ही अपने हाथ बाँध सकता है। जब कुछ किया ही नहीं जा सकता तो बहुत सारे प्राधिकरणों के होने का क्या फायदा। 

शहर नियोजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की यह चिंताएं बहुत जायज है। इन चिंताओं के साथ उन प्रवृत्तियों को भी देखते हैं जिसका समाना एक व्यक्ति घर खरीदने के वक्त करता है। मध्यवर्गीय नौकरीशुदा व्यक्ति एक घर खरीदने निकलता है। उसकी मनः स्थिति साफ सुथरी दिखने वाली सोसाइटी में रहने के सपने बुन चुकी होती है।उसके पास इतने पैसे होते हैं ,जिससे वह घोर गैरबराबरी वाले समाज में अपने लिए एक साफ सुथरी जगह पर खरीद ले। घर दिलाने वाले बिचौलिए और बिल्डर इस मन:स्थिति का फायदा उठाते हैं। कम दाम पर घर उपलब्ध करवाने का वायदा करते है। भूकंप रोधी, बेहतर इंजीनियरों के जरिए बनी, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और बेहतर माहौल से संपन्न बिल्डिंग में फ्लैट दिलाने जैसे मार्केटिंग के तरीके अपनाकर ग्राहक को फांसते हैं।ऐसा भी होता है कि बिल्डिंगों में फ्लैट के लिए  प्री बुकिंग होती है और खरीददार से यह कहा जाता है कि 5,6 महीने के भीतर सड़क से लेकर ड्रेनेज सिस्टम का बंदोबस्त हो जाएगा। लेकिन यह 5,6 महीना कब पूरा होगा ,इसका पता नहीं चलता। एडवांस ले लिया जाता है, किस्त भरा जाता है लेकिन बिल्डिंग से जुड़े जरूरी काम कभी पूरा नहीं होते। खरीददार परेशान होता है लेकिन करे भी तो क्या करें उसके जीवन की गाढ़ी कमाई उस फ्लैट के सपने को हकीकत में बदलने के लिए  लग चुकी होती है।  इसके साथ बैंक और बिल्डरों के बीच का भी एक नेक्सस चलता है। बैंक बिल्डिंग का  प्रचार करते हैं और एजेंटों के माध्यम से  फ्लैट बिकवाने का काम करते हैं। बैंक द्वारा फलैट खरीदने के लिए खरीददार को लोन भी  दिया जाता है। एक वकील और एक सिविल इंजीनियर की मौजूदगी में बिल्डिंग की हालत का जायजा लिया जाता है और बैंक का मैनेजर लोन दे देता है।  इसके बाद एक दिन अचानक से एक बिल्डिंग गिरती है और यह बात सामने आने लगती है कि बिल्डिंग अनाधिकृत इलाके में बनी थी। ऐसे में एक व्यक्ति  की जीवन की पूरी कमाई एक साथ डूब जाती है और उसका  सरकारों से पूरी तरह भरोसा उठा जाता है। वहां पर आकर जस्टिस मदन लोकुर की चिंता सही लगने लगती है कि इतने सारे प्राधिरणों का फायदा क्या जब कुछ किया ही नहीं जा सकता ।

building collapse
municipality
government policies

Related Stories

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

LIC IPO: कैसे भारत का सबसे बड़ा निजीकरण घोटाला है!

मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का दिखा दम !

LIC आईपीओ: सोने की मुर्गी कौड़ी के भाव लगाना

देश में बढ़ती बेरोज़गारी सरकार की नीयत और नीति का नतीज़ा

फरीदाबाद : 'घर में ही रहें' की नसीहत के बीच खोरी गांव के 10 हज़ार परिवार को बेघर करने की तैयारी!

मुंबई : चार मंजिला इमारत ढही, आठ बच्चों सहित 11 की मौत,सात लोग घायल, मकान मालिक व ठेकेदार पर दर्ज हुआ केस

महंगाई एक ऐसा टैक्स है जिसे सरकार बिना किसी क़ानून के ज़रिए लगाती है!

देश में पोषण के हालात बदतर फिर भी पोषण से जुड़ी अहम कमेटियों ने नहीं की मीटिंग!

यूपी: आख़िर कब UPSSSC अभ्यर्थियों की ज़िंदगी होगी रौशन, 2 बरस से लटकी भर्तियां पूरी होंगी?


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    दूसरी लहर में 1 करोड़ भारतीय बेरोज़गार, दिल्ली के प्रवासी मज़दूरों को नहीं मिल रहा राशन और अन्य ख़बरें
    01 Jun 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हम बात करेंगे सीएमआईई के आंकड़े के अनुसार 1 करोड़ भारतीय हुए बेरोज़गार, दिल्ली में मज़दूरों को राशन नहीं और अन्य ख़बरों के बारे में।
  • छत्तीसगढ़ : “विकास के नाम पर पुनर्वास बिना दोबारा विस्थापन स्वीकार नहीं”
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    छत्तीसगढ़ : “विकास के नाम पर पुनर्वास बिना दोबारा विस्थापन स्वीकार नहीं”
    01 Jun 2021
    छत्तीसगढ़ किसान सभा ने कहा राज्य सरकार की पुनर्वास नीति लागू करे एसईसीएल
  • पिता की सैलरी रोके जाने पर कश्मीरी युवा ने खुदकुशी की, राजनीतिक पार्टियों की तरफ से जांच की अपील 
    अनीस ज़रगर
    पिता की सैलरी रोके जाने पर कश्मीरी युवा ने खुदकुशी की, राजनीतिक पार्टियों की तरफ से जांच की अपील 
    01 Jun 2021
    एक वीडियो में, 24 वर्षीय युवक ने दावा किया कि उसका परिवार अत्यधिक संकट में है, क्योंकि प्रशासन ने उसके पिता की दो वर्षों से सैलरी रोक रखी है, जो एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। 
  • वॉरियर मेट में कोयला कर्मचारियों की हड़ताल को 2 महीने पूरे हुए
    पीपल्स डिस्पैच
    वॉरियर मेट में कोयला कर्मचारियों की हड़ताल को 2 महीने पूरे हुए
    01 Jun 2021
    वॉरियर मेट कोल द्वारा सामना किए जाने वाले विरोध और कठिनाइयों के बावजूद अलबामा के सबसे बड़े मेटालर्जिकल कोल प्रोड्यूसर में लगभग 1,100 कर्मचारियों ने उचित अनुबंध के लिए अपनी हड़ताल जारी रखी है।
  • सीनियर एडवोकेट की पदवी देने में हाईकोर्ट कर रहे हैं सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा जयसिंह केस में दिए गए फ़ैसले की अवहेलना
    इंदिरा जयसिंह
    सीनियर एडवोकेट की पदवी देने में हाईकोर्ट कर रहे हैं सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा जयसिंह केस में दिए गए फ़ैसले की अवहेलना
    01 Jun 2021
    दिल्ली हाईकोर्ट, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा हाल में ‘सीनियर एडवोकेट’ की पदवी दिए जाने के लिए जो व्यक्तिनिष्ठ प्रक्रिया अपनाई गई, उस पर प्रतिक्रिया देते हुए इंदिरा जयसिंह, न्यायपालिका से उन दिशा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License