NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सी.एस.डी.एस. सर्वेक्षण के अनुसार भाजपा का नारा “सबका साथ, सबका विकास” से लोग अब प्रभावित नहीं
सर्वेक्षण में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के खिलाफ बढ़ रहे असंतोष को दर्ज किया है और आँकड़े यह भी बताते हैं कि एक बड़ा गठबंधन एनडीए को सत्ता से बहार का रास्ता दिखा सकता है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
26 May 2018
Translated by महेश कुमार
BJP

क्या 2019 के आम चुनावों के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए)  केंद्र में अपनी सत्ता बरकरार रख पायेगा?

आज की तारीख में, इस देश में ऐसे लोग बड़ी संख्या में हैं जो नहीं चाहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) एनडीए के भेस में फिर से सत्ता में लौटे, यह संख्या मोदी के चाहने वालों से ज़्यादा है - राष्ट्र के इस मूड के बारे में हाल में हुए नवीनतम दौर (एमओटीएन) के सर्वेक्षण से पता चला जिसे लोकनीति, सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज़ (सीएसडीएस), दिल्ली द्वारा किया गया जोकि एक शोध संस्थान।

28 अप्रैल और 17 मई के बीच किए गए इस सर्वेक्षण में 15,859 उत्तरदाता भारत के 19 राज्यों में 175 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों से (जोकि प्रत्येक एक अलग लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से है) शामिल हैं।

सर्वेक्षण के निष्कर्षों के मुताबिक, 47 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना था कि मोदी सरकार एक और मौका नहीं दिया जाना चाहिए, जबकि 39 प्रतिशत लोगों ने सोचा कि वह दूसरी पारी का हकदार है, और बाकी 14 फीसदी किसी भी और प्रतिबद्ध नहीं थे। एनडीए के लिए ये संख्या जुलाई 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की उस वक्त की स्थिति के लिए 2014 के चुनाव से नौ महीने पहले ऐसे ही दर्ज की गई थी।

नरेंद्र मोदी के शासन के पिछले चार वर्षों में उसके कार्यकाल से और 2014 के चुनाव अभियान के दौरान किए गए अपने वादे को पूरा करने में बीजेपी की पूरी तरह विफलता हो गई है, देश में विभिन्न समुदायों - किसानों, श्रमिकों, छात्रों, महिलाओं के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर अभूतपूर्व संघर्ष भी हुए। और अन्य उत्पीड़ित वर्ग भी इसमें शामिल हुए। इस परिदृश्य को प्रतिबिंबित करते हुए, सर्वेक्षण के केवल 30 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि सभी वर्गों के लिए विकास हुआ है, 42 प्रतिशत का मानना है कि वादा किया गया गरीबों को और विकास केवल अमीरों को लाभ पहुंचाने के लिए सीमित रहा। कुल मिलाकर, सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग दो-तिहाई मतदाता अब एनडीए शासन के तहत किए गए विकास की तरफ नकारात्मक राय रखते हैं।

भाजपा विरोधी लहर बढ़ रही है

सर्वेक्षण में मौजूदा शासन के खिलाफ बढ़ती विरोधी लहर की भावना मिली है, क्योंकि बीजेपी के लिए समर्थन आधार कम हो रहा है। बीजेपी शासन का समर्थन करने वाले मतदाता पिछले साल मई में 39 प्रतिशत (पहले एमओटीएन सर्वेक्षण) से घटकर 32 प्रतिशत रह गया यानी सात प्रतिशत की गिरावट आई है। यदि आज चुनाव होत्ते हैं, तो सर्वेक्षण के अनुसार एनडीए को कुल वोटों में से 37 प्रतिशत मिलेगा, और कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए को राष्ट्रीय स्तर पर 31 प्रतिशत वोट मिलेंगे, जबकि अन्य पक्षों को 32 प्रतिशत वोट मिलेगा ( गैर-एनडीए और गैर-यूपीए)। कर्नाटक चुनावों के बाद, जहां कांग्रेस को जेडी (एस) में एक नया सहयोगी मिला है, उससे साथ ही साथ भविष्य में एक बड़े गठबंधन के लिए संकेत मिलता है, लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए जमीन खो रहां  हैं।

बेरोजगारी, जीएसटी

सर्वेक्षण में पाया गया कि बेरोजगारी मतदाताओं की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। यह पाया गया है कि लगभग 57 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि पिछले तीन से चार वर्षों में उनके क्षेत्र में नौकरियां तलाशना अधिक कठिन हो गया है। जनवरी में किए गए अंतिम एमओटीएन सर्वेक्षण के दौरान यह आंकड़ा आठ अंकों के मुकाबले 49 फीसदी कम था। बेरोजगारी के अलावा, उत्पाद और सेवा कर (जीएसटी) की अलोकप्रियता केवल बढ़ रही है। 40 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने महसूस किया कि जीएसटी कठोर है, जो पिछले आयोजित (जनवरी) सर्वेक्षण से 11 प्रतिशत अधिक है।

इस बीच, व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति के विषय पर, सर्वेक्षण में पाया गया कि लोगों की संख्या जो महसूस करती है कि उनकी कुल घरेलू आय उनकी जरूरतों को पूरा करने में कम हो गयी है, जनवरी में वह 14 प्रतिशत से दोहरी होकर  27 प्रतिशत हो गई है।

क्षेत्रीय स्थिति

दक्षिण भारत वह क्षेत्र है जहां बीजेपी का प्रतिशत केवल 18 प्रतिशत वोट शेयर है, जबकि उत्तर भारत में भी मतदाताओं को पांच महीने पहले के मुकाबले अब बीजेपी की तरफ झुकाव कम लगता है। सर्वेक्षण में पाया गया कि एनडीए यूपीए के मुकाबके देश के पश्चिमी और मध्य भारत एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थिर जमीन बनाए रखे हुए है। हालांकि, सर्वेक्षण भविष्यवाणी करता है कि कांग्रेस मध्यप्रदेश में भाजपा से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। राजस्थान में, हालांकि बीजेपी कांग्रेस पर अपनी बढ़त बनाए हुए है, लेकिन बाद के पिछले पांच महीनों में यूपीए को काफी लाभ हुआ है।

निम्नलिखित तालिका देश के विभिन्न हिस्सों में जनता के मतदान के इरादे को दिखाती हैं:

bjp

BJP
Sabka Saath Sabka Vikas
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • RSS
    न्यूज़क्लिक टीम
    "गाँधी के हत्यारे को RSS से दूर करने का प्रयास होगा फेल"
    21 Feb 2022
    1930 से लेकर 1940 तक देश में हुए उतार चढ़ाव ने ही गाँधी के मृत्यु की रचना रची और उस घटना की आज के भारत से सीधी प्रासंगिकता है। "गाँधी के हत्यारे की छवि को सुधारने की जो प्रक्रिया जारी है, वह कभी भी…
  • Scheme Workers
    न्यूज़क्लिक टीम
    अधिकारों की लड़ाई लड़ रही स्कीम वर्कर्स
    21 Feb 2022
    देश भर में तमाम स्कीम वर्कर्स यानी आंगनवाड़ी, आशा, मिड डे मील आदि केंद्र सरकार की स्कीमों में काम करने वाली महिलाएँ लम्बे समय से अपने अधिकारों के लिए सरकार से संघर्ष करती आ रही हैंI फ़िलहाल हरियाणा…
  • mamta
    भाषा
    छात्र नेता अनीश खान की मौत के मामले की जांच करेगी एसआईटी: ममता बनर्जी
    21 Feb 2022
    गृह विभाग का भी प्रभार संभाल रहीं ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईटी 15 दिनों के भीतर उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
  • DBC workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली : स्थाई पद की मांग को लेकर डीबीसी कर्मचारियों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
    21 Feb 2022
    हड़ताली कर्मचारियों ने साफ़ किया कि आम आदमी पार्टी हो या बीजेपी जो भी नगर निगम चुनाव से पहले उनके लिए काम करेगा उनका वोट उसी को जाएगा।
  • Colombia
    लौरातो रिवारा
    कोलंबिया में चुनाव : बदलाव की संभावना और चुनावी गारंटी की कमी
    21 Feb 2022
    कोलंबिया में आने वाले वक़्त में विधान परिषद और राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में यह देखा जाना बाक़ी है कि क्या लैटिन अमेरिका में सबसे पुराना लोकतंत्र हाल में हासिल की गई बेहद जटिल शांति को आगे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License