NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
सीईएल को बेचने की कोशिश: सरकार द्वारा निजीकरण को बढ़ावा
"एक तरफ सरकार सरकारी कंपनियाँ बंद करवाने की पूरी कोशीश कर रही है, दूसरी तरफ कॉरपोरेट कंपनियों को रियायत पर रियायत दे रही हैI" 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Nov 2018
CEL protest

साहिबाबाद में चल रहे आंदोलन के 40 दिनों के बाद सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) के 500 से अधिक कर्मचारियों ने दिल्ली के सड़कों पर आज अपना विरोध प्रदर्शन किया। आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बाहर विरोध करते हुए टी के थॉमस ने कहा कि, "एक तरफ सरकार सरकारी कंपनियाँ बंद करवाने की पूरी कोशीश कर रही है, दूसरी तरफ कॉरपोरेट कंपनियों को रियायत पर रियायत दे रही हैI" 

केंद्र सरकार वर्तमान में कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का 100 प्रतिशत बेचने के लिए बोली लगाने के लिए आवेदन आमंत्रित कर रही है, जिससे प्रबंधन का पूरी तरह कायापलट हो सके| वर्तमान में, प्रस्ताव जमा करने की समय सीमा तीसरी बार 31 नवंबर तक बढ़ा दी गई है।

सेंटर ऑफ़ इन्डियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के महासचिव तपन सेन ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि, "सीईएल को बेचने के प्रयास को एकलौती घटना की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, यह मोदी सरकार द्वारा निजी कम्पनी को लाभ पहुँचाने की एक बड़ी षड्यंत्र का हिस्सा है। यह श्रमिकों के संघर्षों के कारण है जिस का परिणाम हमें ज़मीन पर दिख रहा हैं, कर्मचारियों द्वारा बनाए गए दबाव के कारण निजी खिलाड़ी को कंपनी में अपनी रुचि कम ले रहे हैं, जिसके कारण सरकार को समय सीमा बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा  था कल प्रस्तावों को जमा करने का आखिरी दिन था । "

निजीकरण के प्रयासों से कंपनी के 1,000 से अधिक श्रमिकों को उनके परिवारों सहित हाशिये पर धकेला जा रहा है। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए, सीईएल में संघ के अध्यक्ष शिव नारायण पटेल ने कहा कि, "हमारी कंपनी को बेचने के प्रयासों के लिए यह कारण दिया जा रहा है कि हम (सीईएल) लाभ नहीं कमा रहे हैं, यह सच नहीं है क्योंकि हमारी कंपनी एक राष्ट्रीय संपत्ति है और लगातार मुनाफा कमा रहा है, 2017 में कंपनी का कारोबार 21 करोड़ से अधिक था और हमारे पास महाराष्ट्र सरकार के साथ 1,000 करोड़ रुपये की आगामी परियोजना है।"

1974 में स्थापित कंपनी गाजियाबाद के प्रमुख स्थान पर हैं और भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल) के साथ इस क्षेत्र में एकमात्र सार्वजनिक क्षेत्र उद्दम (पीएसयू) है।

CEL protest 1.jpg

तपन सेन ने कहा, "बड़ी कंपनियों की तुलना में सीईएल केवल 50 करोड़ रुपये के कारोबार के साथ ही एक छोटी-सी कंपनी है, इससे यह ध्यान रखना दिलचस्प हो जाता है कि सरकार इसे बेचने पर क्यों तुली है। उन्होंने कहा कि, "सीईएल सौर ऊर्जा सब्सिडी देने वाले एक पीएसयू को केंद्र सरकार द्वारा निजी हितों को बेचने का मतलब यह होगा कि इन सब्सिडी को खत्म कर दिया जाएगा।" 

मोदी सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र को तोड़ने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों में सीईएल का बंद किया जाना भी अब शामिल है। थॉमस ने कहा कि, "पीएसयू में नकदी की कमी का मुख्य रूप से कारण है कि सरकार कॉर्पोरेट हितों को लाभ पहुँचाना चाहती हैI उदाहरण के लिए, ओएनजीसी से, जिसके साथ हमने काफी काम किया है, नकद जानबूझकर निकाला गया और उनका अनुबंध को खत्म कर दिया गया। सीईएल और बीईएल दोनों को इसी तरह की स्थिति में लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एचएएल के मामले में भी वही हुआ - राफले सौदे के मामले में अंबानी को लाभ पहुँचाने के लिए उनका अनुबंध हटा दिया गया।"

दिलचस्प बात यह है कि सरकार द्वारा आमंत्रित प्रस्तावों में कोई तकनीकी मानदंड निर्दिष्ट नहीं होता है - 50 करोड़ के कारोबार के साथ कोई भी कंपनी सीईएल हासिल कर सकती है। लाभ बनाने वाले पीएसयू का निजीकरण करने के प्रयास उत्तर प्रदेश में आगामी डिफेंस कोरीडोर के प्रकाश में देखना चाहिए, जहाँ केंद्र कंपनीयों को निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, ज़मीन, बिजली आदि पर सब्सिडी दे रहा है।

CEL
PSUs
Narendra modi
Privatisation
Modi government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या
    19 Mar 2022
    कुछ दिनों में यूपी की सत्ता पर बीजेपी की योगी सरकार दूसरी बार काबिज़ होगी। ऐसे में बीते कार्यकाल में 'बेहतर कानून व्यवस्था' के नाम पर सबसे ज्यादा नाकामी का आरोप झेल चुकी बीजेपी के लिए इसे लेकर एक बार…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 
    19 Mar 2022
    दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी ट्रेड यूनियन जुट गए हैं। देश भर में इन संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठकों का सिलसिला जारी है।
  • रवि कौशल
    पंजाब: शपथ के बाद की वे चुनौतियाँ जिनसे लड़ना नए मुख्यमंत्री के लिए मुश्किल भी और ज़रूरी भी
    19 Mar 2022
    आप के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने बढ़ते क़र्ज़ से लेकर राजस्व-रिसाव को रोकने, रेत खनन माफ़िया पर लगाम कसने और मादक पदार्थो के ख़तरे से निबटने जैसी कई विकट चुनौतियां हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    अल्ज़ाइमर बीमारी : कॉग्निटिव डिक्लाइन लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी का प्रमुख संकेतक है
    19 Mar 2022
    आम तौर पर अल्ज़ाइमर बीमारी के मरीज़ों की लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी 3-12 सालों तक रहती है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    स्लोवेनिया : स्वास्थ्य कर्मचारी वेतन वृद्धि और समान अधिकारों के लिए कर रहे संघर्ष
    19 Mar 2022
    16 फ़रवरी को स्लोवेनिया के क़रीब 50,000 स्वास्थ्य कर्मचारी काम करने की ख़राब स्थिति, कम वेतन, पुराने नियम और समझौते के उल्लंघन के ख़िलाफ़ हड़ताल पर चले गए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License