NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शिकागो में सामने आया संघ का फासीवादी चेहरा!
“मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ जब इतने लोगों ने मेरे ऊपर एक साथ हाथ छोड़ा हो। उनकी प्रतिक्रिया में हिंसा की तीव्रता को देखकर हम केवल अवाक रह गए थे। एक शख्स ने अपने हाथों से मेरी गर्दन पकड़ ली थी और उसे दबाना शुरू कर दिया।”
जनचौक
11 Sep 2018
RSS

नई दिल्ली। शिकागो में हुए विश्व हिंदू कांग्रेस में संघ की विचारधारा के प्रति अपना विरोध दर्ज कराने आए 6 छात्र-छात्राओं पर बर्बर हमला किया गया। ये सभी छात्र शिकागो के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम की दर्शक दीर्घा में बैठे हुए थे।

दि टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक वे जानते थे कि आरएसएस मुखिया मोहन भागवत के भाषण के दौरान जब वो नारे लगाएंगे तो बहुत लोग नाराज हो जाएंगे। लेकिन वो ये नहीं जानते थे कि वो इतने नाराज होंगे कि हिंसा पर उतर आएंगे और उनकी पिटाई शुरू कर देंगे।

छह प्रदर्शनकारियों में पांच लड़कियां और एक पुरुष शामिल था। ये सभी शिकागो साउथ एशियिन फॉर जस्टिस के सदस्य थे। ये संगठन खुद को अमेरिका और भारत समेत दुनिया में बढ़ रही फासीवादी प्रवृत्ति का विरोधी बताता है। उन्होंने हिंदू कांग्रेस में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की योजना बनायी थी।

उन्होंने लोगों से खचाखच भरे हाल में दो तरफ अपनी पोजीशन ले रखी थी। एक तरफ दो लोग थे जबकि दूसरी तरफ 4 लोग मौजूद थे। एक तरफ “आरएसएस वापस जाओ” का नारा लगाया गया जबकि दूसरी तरफ “हम तुम्हें अपने शहर में नहीं चाहते हैं” का। उन्होंने इस मौके पर एक बैनर भी लहराने की कोशिश की जिस पर लिखा हुआ था, “हिंदू फासीवाद पर रोक लगाओ।”

मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि अभी इन लोगों ने नारे शुरू ही किए होंगे कि उसके चंद सेकेंड बाद श्रोताओं का एक हिस्सा उन पर टूट पड़ा और अपने नारों से उनके नारों को दबा दिया।

“मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ”

विश्वविद्यालय के छात्र ने “दि टेलीग्राफ” को बताया कि “मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ जब इतने लोगों ने मेरे ऊपर एक साथ हाथ छोड़ा हो। उनकी प्रतिक्रिया में हिंसा की तीव्रता को देखकर हम केवल अवाक रह गए थे। एक शख्स ने अपने हाथों से मेरी गर्दन पकड़ ली थी और उसे दबाना शुरू कर दिया।”

एक 26 साल की महिला जो प्रदर्शनकारियों में शामिल थी उसे कुर्सी से उठाकर फेंक दिया गया और उसके चेहरे पर एक जोरदार का घूंसा मारा गया। उसने बताया कि “मैंने सुना कि लोग मुझे कुतिया, कुतिया कह रहे हैं... एक आदमी ने कहा कि मेरी मां की हत्या कर दी जानी चाहिए थी जिससे मैं पैदा ही नहीं होती। एक दूसरे ने मुझे गंदी मुस्लिम कह कर बुलाया।”

बाद में यहां तक कि जब उसको पुलिस द्वारा हथकड़ी लगायी गयी थी तो एक शख्स उसकी तरफ गया और उसके चेहरे पर एक झापड़ मारा। हालांकि उसके खिलाफ भी मामला दायर किया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

शिकागो साउथ एशियन फॉर जस्टिस गठबंधन ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि “भीड़ की प्रतिक्रिया ने डब्ल्यूएचसी और हिंदुत्व विचारधारा के तहत चल रहे फासीवाद के मुखौटे का पर्दाफाश कर दिया है।”

प्रदर्शनकारियों का नारा और जिस तरह से उन्होंने हिंसा का सामना किया वो अमेरिका में एनआरआई समुदायों के बीच वैचारिक आधार पर विभाजन को परिलक्षित करता है।

गठबंधन ने स्टेट सीनेटर राम विल्लीवलम और शिकागो अल्डरमैन अमिया पवार को डब्ल्यूएचसी के निमंत्रण को ठुकराने, आयोजन को खारिज करने और गठबंधन के विरोध-प्रदर्शन से अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए धन्यवाद दिया।

लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधि राजा कृष्णमूर्ति जिन्होंने न केवल कार्यक्रम में हिस्सा लिया बल्कि वहां बोला भी, ने बयान जारी कर वहां हुई हिंसा और पूरी घटना की जमकर मजम्मत की।

स्टेट सीनेटर राम विल्लीवलम ने डब्ल्यूएचसी से पहले एक बयान जारी किया था: “मैं किसी ऐसे संगठन द्वारा आयोजित किसी कार्यक्रम का समर्थन नहीं करता जो अल्पसंख्यकों को डराता हो, भेदभाव को बढ़ाने का काम करता हो, नस्ल या फिर जातीय पृष्ठभूमि के आधार पर आतंक फैलाता हो, नफरती भाषण को बढ़ावा देता हो और आस्था आधारित राष्ट्रवाद में विश्वास करता हो।”

गठबंधन के सदस्य बताते हैं कि कुछ भाषण देने वालों ने डब्ल्यूएचसी में “ परेशान करने वाले अपने राजनीतिक दर्शन को फिर से दोहराया जिसमें सैन्यवाद, उत्कृष्ट प्रजनन की पक्षधरता और असहिष्णुता के संदेश शामिल थे।”

दि टेलीग्राफ द्वारा डब्ल्यूएचसी के आयोजक शैलेश राजपूत के पास  भेजे गए एक ईमेल का कोई जवाब नहीं आया। शिकागो में रहने वाले एक आयोजक ने फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझा।

गठबंधन के सदस्यों ने अमेरिका में आयोजित होने वाले दूसरे विरोध-प्रदर्शनों में भी हिस्सा लिया है। और एक बार तो डोनाल्ड ट्रंप की एक रैली को ही तहस-नहस कर दिया था। मानक प्रोटोकाल के तहत प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा बलों द्वारा तेजी से बाहर निकाल लिया जाता है।

लेकिन डब्ल्यूएचसी में प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनके नारे पर भीड़ की प्रतिक्रिया ने डब्ल्यूएचसी और हिंदुत्व के जरिये चल रही बेहद गहरी और खतरनाक विचारधारा का पर्दाफाश कर दिया है।

प्रदर्शनकारी चाहते थे कि उनका नाम सामने न आने पाए क्योंकि वो खुद को इससे सुरक्षित रखना चाहते थे जिसके बारे में उनका विश्वास है कि निश्चित तौर पर ऐसे लोगों द्वारा पलट कर वार किया जाएगा जो हमला, चोट पहुंचाना और यहां तक संभावित तौर पर उनकी हत्या कर देना चाहता है।

उन्होंने कहा कि हम एक बार फिर इस बात को दोहरा देना चाहते हैं कि हममें से बहुत सारे हिंदू परिवारों से हैं जो जातीय विशेषाधिकार के साथ हिंदुत्व के सैन्यवादी राष्ट्रवाद को पहचानते हैं और उसे खारिज करते हैं।

chicago
BJP-RSS
RSS
Mohan Bhagwat

Related Stories

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

कांग्रेस का संकट लोगों से जुड़ाव का नुक़सान भर नहीं, संगठनात्मक भी है

कार्टून क्लिक: पर उपदेस कुसल बहुतेरे...

पीएम मोदी को नेहरू से इतनी दिक़्क़त क्यों है?

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License