NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
समाज
भारत
राजनीति
सीटू स्वर्ण जयंती का आह्वान : 'मज़दूर की वर्ग चेतना तेज़ करो, आंदोलन को मजबूत करो’
30 मई सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस की नींव रखे जाने के 50 साल को चिह्नित करती है। इसी वर्ष को श्रमिकों के संगठित संघर्ष की शुरुवात के लिए सौ वर्ष पहले पहली ट्रेड यूनियन के गठन के रूप में भी देखा जाता है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
31 May 2019
Translated by महेश कुमार
citu

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के गठन को 50 साल हो गए हैं – इसका गठन तब हुआ जब क्रांतिकारी ट्रेड यूनियन का एक वर्ग उस वक़्त मौजूद केंद्रीय ट्रेड यूनियन, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) से अलग हो गया था, एटक "वर्ग संघर्ष" के बजाय "वर्ग समझौतापरस्त और वर्ग सहयोग" की तर्ज पर चल पड़ी थी।

30 मई, 1970 को कोलकाता के रणजी स्टेडियम में चार दिन चले सम्मेलन के अंत में, जिसका नाम लेनिन नगर रखा गया था (यह लेनिन के जन्म का शताब्दी वर्ष था), वहां सीटू (CITU) का जन्म हुआ।

और इस साल 30 मई को, सीटू (CITU) ने अपनी स्वर्ण जयंती मनाई - और देश में मजदूरों के संगठित संघर्ष के सौ साल (पहली केंद्रीय ट्रेड यूनियन एटक की स्थापना 1920 में हुई थी) को भी मनाया – इस बाबत नई दिल्ली के मावलंकलर हॉल में एक कार्यक्रम किया गया। 500 से अधिक लोग शामिल हुए – जिसमें ट्रेड यूनियन, कार्यकर्ता, किसान नेता, आम कार्यकर्ता  शामिल थे – और ऑडिटोरियम भर गया था।

समारोह की शुरुवात थिएटर ग्रुप, जन नाट्य मंच के नाटक ‘मशीन’ के मंचन से हुई जो मज़दूरों की स्थिति पर लिखा गया एक पुराना नाटक है,जिसमें मशीनीकरण और औद्योगिक श्रमिक के शोषण को बेहतर ढंग से पेश किया गया।

इस मौके पर सीटू की अध्यक्षा के. हेमलता, महासचिव तपन सेन, पूर्व अध्यक्ष एके पद्मनाभन और अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के महासचिव हन्नान मोल्ला ने सभा को संबोधित किया।

इस अवसर को चिह्नित करते हुए, CITU ने कार्ल मार्क्स की 'वेज लेबर एंड कैपिटल' और 'वैल्यू प्राइस एंड प्रॉफिट' के विशेष संस्करण भी जारी किए – जो कि मार्क्सवादी राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर दो महत्वपूर्ण परिचयात्मक लेख हैं।

वक्ताओं ने आजादी के पहले से भारत में सीटू और ट्रेड यूनियन संघर्ष के इतिहास के बारे में बात की - साथ ही  देश में श्रमिकों, किसानों और ट्रेड यूनियनों के सामने मौजूद कार्यभार के बारे में भी बात की।

हेमलता ने रेखांकित किया कि संगठन और आंदोलन को आगे बढ़ाने वाला संदेश वही है जिसे 2013 में केरल के कन्नूर में आयोजित सीटू के 14वें सम्मेलन के दौरान दिया गया था। उनके पास पहुंच जहां अब तक नहीं पहुंचे। अर्थात्, सीटू के काम के साथ जुड़ी यूनियनों और अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से जुड़ी सभी यूनियनों को देश के सभी गैर-पंजीकृत कामगारों तक पहुँचने के लिए काम करना होगा - चाहे वे पहले से ही यूनियन में हों या न हों। उन्होंने कहा कि यूनियनों का सबसे महत्वपूर्ण कार्य हर प्रकार की शिक्षा के माध्यम से श्रमिकों की वर्ग चेतना को बनाए रखना है।

एआईकेएस के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने श्रमिकों और किसानों के बीच महत्वपूर्ण संबंध के साथ-साथ श्रमिक-किसान एकता को मजबूत करने के महत्व के बारे में बात की। यह नोट करते हुए कि एआईकेएस भी अपने 85वें वर्ष में है, उन्होंने भारत में वर्तमान कृषि संकट और किसानों के बढ़ते संकट के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि एकता और संघर्ष ही एकमात्र रास्ता है क्योंकि किसानों और श्रमिकों को आज की तारीख में पूंजीवाद के सबसे बुरे हमले का सामना करना पड़ रहा है।

सीटू महासचिव तपन सेन ने अतीत में सीटू द्वारा किए गए संघर्षों के इतिहास के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम में आम मज़दूरों द्वारा निभाई गई भूमिका के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि "संघर्ष" श्रमिकों की परंपरा रही है, और आने वाले वर्षों में विभाजनकारी शक्तियों के बीच सभी लोगों को एकजुट करने क विशाल काम मौजूद है। उन्होंने "एकता के लिए एकता नहीं, बल्कि संघर्ष के लिए एकता" पर जोर दिया।

सीटू के पूर्व अध्यक्ष एके पद्मनाभन ने सीटू और अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का ऐतिहासिक अवलोकन करते हुए कहा कि देश में अब तक की सबसे पहली ट्रेड यूनियन का गठन 1918 में मद्रास लेबर यूनियन के नाम से हुआ था, जबकि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की स्थापना 1919 में हुई थी। (सीपीआई (एम) नेता और बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री, दिवंगत ज्योति बसु के शब्दों में, जिसके कारण यूनियन नेता एटक से अलग होकर सीटू का गठन किया था वह "ऐतिहासिक जरूरत" थी।

पद्मनाभन ने सीटू के भविष्य के कार्यों के बारे में न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, कि “50 साल पहले दिया गया कार्यभार अभी भी जारी है।1991 के बाद स्थिति और खराब हो गई है। सीटू इसे बहुत ही स्पष्ट रूप से समझने में सक्षम है, आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत के बाद से लोगों पर जो प्रभाव इन नीतियों का पड़ेगा उससे वाकिफ हैं। "

"लेकिन यह हमारे देश के मजदूर वर्ग की साख है, कि जब नई आर्थिक नीतियों को पूरी तरह से जुलाई 1991 के बाद से लागू किया गया (हालाँकि इसकी शुरुआत 1980 के दशक में ही हो गई थी), लेकिन नवंबर तक - चार महीने के भीतर - इन नीतियों के खिलाफ 23 नवंबर, 1991 को पहला देशव्यापी आम हड़ताल की गई थी।” और इसके लिए अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के बीच सीटू को काफी श्रेय जाता है कि नवउदारवादी नीतियों के खिलाफ यह पहली देशव्यापी हड़ताल हुई थी।

“इसके बाद, केंद्रीय ट्रेड यूनियन और अन्य ट्रेड यूनियन, राष्ट्रीय फेडरेशन, वाम आंदोलन के मुख्य घटक एक साथ खड़े हुए और हमने 18देशव्यापी हड़तालें कीं। और उनमें से दो दो-दिवसीय हड़ताल थी।”

पद्मनाभन ने कहा कि ट्रेड यूनियनों को श्रमिकों और जनता को समझना पड़ता है कि हमें कुछ नीतियों के खिलाफ लड़ना होगा, क्योंकि आज हम जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, वे इन नीतियों का ही परिणाम हैं।

उन्होंने कहा “हमें श्रमिकों को पर्याप्त रूप से यह समझने की जरूरत है कि उनका दोस्त कौन है और दुश्मन कौन है, उनके हित में क्या है और क्या नहीं है। संदेश यही है कि जुदा भाषा, क्षेत्र, धर्म के बावजूद अपनी एकता को मजबूत बनाओ ... खुद को वर्ग के आधार पर एकजुट करो... श्रमिक वर्ग के आंदोलन में वर्ग चेतना को बढ़ाना और उसे मजबूत करना है, और वैचारिक रूप से हमें इस समाज को शोषणमुक्त समाज में बदलने के लिए काम करना चाहिए। इसके लिए मजदूरों, किसानों, कृषि श्रमिकों, छात्रों, युवाओं ... सभी शोषित वर्गों को आगे लाना होगा। इसमें,श्रमिक वर्ग के आंदोलन को एक अग्रणी भूमिका निभानी है। और सीटू खुद को, स्वर्ण जयंती के इस अवसर पर, इसे करने की प्रतिज्ञा कर रहा है।50 साल पहले कोलकाता में उठाए गए संघर्ष के इस झंडे को आगे बढ़ाया जाएगा। और संघर्षों को सफलतापूर्वक पूरा किया जाएगा।”

CITU
CITU in India
CPI(M)
CPIM
golden jubilee
50 years
50 years of citu
Central Trade Unions
trade unions

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर


बाकी खबरें

  • श्रुति एमडी
    ‘तमिलनाडु सरकार मंदिर की ज़मीन पर रहने वाले लोगों पर हमले बंद करे’
    05 Apr 2022
    द्रमुक के दक्षिणपंथी हमले का प्रतिरोध करने और स्वयं को हिंदू की दोस्त पार्टी साबित करने की कोशिशों के बीच, मंदिरों की भूमि पर रहने वाले लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 
  • भाषा
    श्रीलंका में सत्ता पर राजपक्षे की पकड़ कमज़ोर हुई
    05 Apr 2022
    "सरकारी बजट पर मतदान के दौरान गठबंधन के पास 225 सांसदों में से 157 का समर्थन था, लेकिन अब 50 से 60 सदस्य इससे अलग होने वाले हैं। इसके परिणामस्वरूप सरकार न सिर्फ दो-तिहाई बहुमत खो देगी, बल्कि सामान्य…
  • विजय विनीत
    एमएलसी चुनाव: बनारस में बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी के आगे दीन-हीन क्यों बन गई है भाजपा?
    05 Apr 2022
    पीएम नरेंद्र मोदी का दुर्ग समझे जाने वाले बनारस में भाजपा के एमएलसी प्रत्याशी डॉ. सुदामा पटेल ऐलानिया तौर पर अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर आरोप जड़ रहे हैं कि वो…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: आज दूसरे दिन भी एक हज़ार से कम नए मामले 
    05 Apr 2022
    देश में कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 24 लाख 96 हज़ार 369 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है। और एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 54 रह गयी है।
  • मुकुल सरल
    नफ़रत की क्रोनोलॉजी: वो धीरे-धीरे हमारी सांसों को बैन कर देंगे
    05 Apr 2022
    नज़रिया: अगर किसी को लगता है कि ये (अ)धर्म संसद, ये अज़ान विवाद, ये हिजाब का मुद्दा ये सब यूं ही आक्समिक हैं, आने-जाने वाले मुद्दे हैं तो वह बहुत बड़ा नादान है। या फिर मूर्ख या फिर धूर्त। यह सब यूं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License