NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सीवर में ‘हत्याओं’ के खिलाफ एकजुटता, संसद के भीतर और बाहर लड़ाई का ऐलान
अल्टीमेटम दिया गया कि अगर एक महीने में इस दिशा में सरकार ने कोई कदम न उठाया, मौतों को लेकर कोई जवाबदेही तय नहीं की तो एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
मुकुल सरल
25 Sep 2018
एसकेए का आंदोलन

और एक बार फिर दिल्ली में संसद मार्ग पर मौत के कुओं (सेप्टिक टैंक और सीवर के पुतलों) में आग लगा दी गई, लेकिन क्या इससे हमारी संसद जागेगी, क्या हमारी सरकार जागेगी? क्या सीवर में मनुष्य को उतारा जाना बंद होगा? क्या सफाई के काम से जाति को अलग किया जाएगा? क्या दलितों को बराबरी का अधिकार मिलेगा? आज एक बार फिर ये सवाल अपनी पूरी ताकत से हमारे सामने उठे, और एक बार फिर अभी इनका जवाब तलाशना बाकी है।

और इसके लिए संसद के भीतर और बाहर लड़ाई का ऐलान किया गया। अल्टीमेटम दिया गया कि अगर एक महीने में इस दिशा में सरकार ने कोई कदम न उठाया, मौतों को लेकर कोई जवाबदेही तय नहीं की तो एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

ये अल्टीमेटम दिया सफाई कर्मचारी आंदोलन (एसकेए) ने। एसकेए के आह्वान पर ही आज मंगलवार, 25 सितंबर को देश की राजधानी दिल्ली में संसद मार्ग पर बड़ा जमावड़ा जुटा। और क्यों न जुटता क्योंकि दु:ख भी बड़ा था, दु:ख था पिछले एक सप्ताह में सीवर के भीतर 11 मौतें। एसकेए इन्हें मौत नहीं हत्याएं कहता है। और वाकई ये हत्याएं हीं क्योंकि जानबूझकर सफाईकर्मियों को सीवर और सेप्टिक टैंक के भीतर भेजा जा रहा है, जहां से अक्सर वे वापस नहीं लौटते। मैला प्रथा हमारे देश में गैरकानूनी घोषित हो चुकी है, इसलिए इस वजह से होने वाली मौतें सामान्य मौत नहीं कही जा सकती, इन्हें हत्या ही कहा जाएगा। इसीलिए नारा दिया गया था #StopKillingUs. एक आंकड़े के मुताबिक अभी तक करीब 1790 सफाई कर्मियों की सीवर साफ करते समय मौत हो चुकी है।

दु:ख बड़ा है तो हौसला भी बड़ा है, तभी तो जिन परिवारों ने अपने खोए हैं उनकी महिलाएं और अन्य परिजन इस प्रदर्शन में भाग लेने दिल्ली पहुंचे। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली के इन परिवारों खासकर महिलाओं ने सभा को अपनी व्यथा सुनाई।

इन परिवारों ने बताया कि किस तरह उनके पति, भाई या बेटों की सीवर ने जान ले ली। इसके अलावा दलित होने का दंश भी वे लगातार झेलते हैं। न समय से उचित मुआवज़ा मिलता है, न पुनर्वास। सफाई का काम छोड़ने पर भी ये समाज उन्हें स्वीकारता नहीं। इसलिए सफाई के काम को जाति से अलग किया जाना भी ज़रूरी है।

आपको बता दें कि सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर सफाई कर्मचारी आंदोलन यानी एसकेए इस दिशा में लंबे समय से काम कर रहा है। 2015 के अंत में इसी मुद्दे पर देशभर में भीम यात्रा निकाली गई थी जो देशभर की यात्रा के बाद अप्रैल, 2016 में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के मौके पर दिल्ली पहुंची थी। उस दौरान भी जंतर-मंतर पर सभा और प्रदर्शन हुआ था। ये सब मुद्दे उठे थे। उस समय भी सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की गई थी। प्रधानमंत्री से जवाब मांगा गया था लेकिन अफसोस सरकार ने इसका कोई जवाब न दिया न इस दिशा में कोई सकारात्मक कार्रवाई की। और मौतों का सिलसिला जारी रहा। यही वजह थी कि अब दिल्ली समेत आसपास के राज्यों में सात दिन के भीतर सीवर में 11 लोग जो भारत के ही नागरिक हैं, उनकी मौत हो गई, तब एसकेए ने एक बार फिर सभा और प्रदर्शन का कॉल दिया।

सभा में एसकेए के नेता बेजवाड़ा विल्सन ने ऐलान किया कि अगर एक महीने के भीतर इस मामले में कोई पुख्ता कदम न उठाया गया तो बड़ा आंदोलन होगा। सफाई कर्मचारियों की ओर से एसकेए ने सीवर में किसी भी व्यक्ति को उतारने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने अब तक हुई मौतों के प्रति जवाबदेही तय करने की मांग की। साथ ही सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के काम का पूरी तरह मशीनीकरण की भी करने की मांग की गई। इसके लिए एक समयबद्ध एक्शन प्लान की जरूरत पर जोर दिया गया और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। साथ ही और पीड़ित परिवारों को मुआवज़े और पुनर्वास की मांग दोहराई गई।  

इस मौके पर बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों खासकर वाम दलों और दलित संगठनों के नेता मौजूद रहे। अन्य प्रगतिशील संगठनों और नागरिकों ने भी बड़ी संख्या में इस आंदोलन में हिस्सा लिया।

सीपीआई नेता और राज्यसभा सांसद डी राजा, सीपीआई-एमएल के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, सीपीएम पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात, सुभाषिनी अली, लेखक और एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय, विधि विशेषज्ञ उषा रामनाथन, वरिष्ठ वकील वंद्रा गोवर, आरजेडी से राज्यसभा सदस्य मनोज झा, स्वराज अभियान के योगेंद्र यादव, वरिष्ठ पत्रकार पी. साईंनाथ, एपवा नेता कविता कृष्णन, पत्रकार और एक्टिविस्ट भाषा सिंह, निखिल डे, पॉल दिवाकर, अशोक भारती, दीप्ति, कौशल पवार, पूनम तुषामड़, छात्र नेता उमर खालिद, जेएनयू के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एन साई बालाजी ने इस मौके पर सभा को संबोधित किया और इस लड़ाई को आगे बढ़ाने में अपने पूरे समर्थन और सहयोग की बात कही।  

SKA
safai karmachari andolan
SEWER DEATH
manual scavenger

Related Stories

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

सीवर कर्मचारियों के जीवन में सुधार के लिए ज़रूरी है ठेकेदारी प्रथा का ख़ात्मा

ग्राउंड रिपोर्ट: ‘पापा टॉफी लेकर आएंगे......’ लखनऊ के सीवर लाइन में जान गँवाने वालों के परिवार की कहानी

सीवर में मौतों (हत्याओं) का अंतहीन सिलसिला

सीवर और सेप्टिक टैंक मौत के कुएं क्यों हुए?

मिशन-2021 : सफाई कर्मचारियों की स्वाभिमान यात्रा के मायने

सीवर में उतरे सफाईकर्मी की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत, मामला दर्ज

"सरकार इंसाफ करें, नहीं तो हमें भी गटर में मार दे"

बैंक यूनियनों का देशव्यापी प्रदर्शन, तमिलनाडु में जारी है सीवर में मौत का सिलसिला और अन्य

संसदीय समिति ने हाथों से मैला ढोने वालों के लिये बेहतर रोज़गार के अवसर पर ज़ोर दिया


बाकी खबरें

  • सबरंग इंडिया
    सद्भाव बनाए रखना मुसलमानों की जिम्मेदारी: असम CM
    17 Mar 2022
    हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि एक करोड़ से अधिक आबादी वाले राज्य में मुस्लिम आबादी का 35 प्रतिशत हैं, वे अब अल्पसंख्यक नहीं, बल्कि बहुसंख्यक हैं।
  • सौरव कुमार
    कर्नाटक : देवदासियों ने सामाजिक सुरक्षा और आजीविका की मांगों को लेकर दिया धरना
    17 Mar 2022
    कलबुर्गी, विजयपुरा, विजयनगर, रायचूर, दवेंगेरे, बागलकोट, बल्लारी, यादगीर और कोप्पल ज़िलों की लगभग 1500 देवदासियों ने पुनर्वास की मांग को लेकर बेंगलुरु शहर में धरना दिया।
  • UKRAIN
    क्लाउस उलरिच
    गेहूं के निर्यात से कहीं बड़ी है यूक्रेन की अर्थव्यवस्था 
    17 Mar 2022
    1991 में सोवियत संघ से स्वतंत्रता मिलने के बाद, यूक्रेन का आर्थिक विकास भ्रष्टाचार, कैपिटल फ्लाइट और सुधारों की कमी से बाधित हुआ। हाल ही में हुए सुधारों से अब देश में रूस के युद्ध की धमकी दी जा रही…
  • भाषा
    दिल्ली हिंसा में पुलिस की भूमिका निराशाजनक, पुलिस सुधार लागू हों : पूर्व आईपीएस प्रकाश सिंह
    17 Mar 2022
    ‘पुलिस के लिये सबसे सशक्त हथियार नागरिकों का भरोसा एवं विश्वास होता है । नागरिक आपके ऊपर भरोसा तभी करेंगे जब आप उचित तरीके से काम करेंगे । ऐसे में लोगों को साथ लें । सामान्य जनता के प्रति संवेदनशील…
  • तान्या वाधवा
    कोलंबिया में राष्ट्रपति पद के दौड़ में गुस्तावो पेट्रो
    17 Mar 2022
    अलग-अलग जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक़ कोलंबिया में आगामी राष्ट्रपति चुनावों के लिए प्रगतिशील नेता गुस्तावो पेट्रो पसंदीदा उम्मीदवार हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License