NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
सीवर में मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त, कहा- दुनिया में कहीं भी लोगों को गैस चैंबर में मरने नहीं भेजा जाता
शीर्ष अदालत ने हाथ से मैला साफ करने की परंपरा पर तल्ख टिप्पणियां करते हुये कहा कि देश को आजाद हुये 70 साल से भी अधिक समय हो गया है लेकिन हमारे यहां जाति के आधार पर अभी भी भेदभाव होता है। पीठ ने ये भी कहा, ‘‘आप उन्हें मास्क और ऑक्सीजन सिलेण्डर क्यों नहीं उपलब्ध कराते?
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Sep 2019
सीवर में मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त

 

देश में सीवर नालों की हाथ से सफाई के दौरान लोगों की मृत्यु होने पर बुधवार को गंभीर चिंता व्यक्त करते हुये उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दुनिया में कहीं भी लोगों को मरने के लिये गैस चैंबर में नहीं भेजा जाता है।

शीर्ष अदालत ने हाथ से मैला साफ करने की परंपरा पर तल्ख टिप्पणियां करते हुये कहा कि देश को आजाद हुये 70 साल से भी अधिक समय हो गया है लेकिन हमारे यहां जाति के आधार पर अभी भी भेदभाव होता है।

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने केन्द्र की ओर से पेश अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से सवाल किया कि आखिर हाथ से मल साफ करने और सीवर के नाले या मैनहोल की सफाई करने वालों को मास्क और ऑक्सीजन सिलेण्डर जैसी सुविधायें क्यों नहीं मुहैया करायी जाती हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘आप उन्हें मास्क और ऑक्सीजन सिलेण्डर क्यों नहीं उपलब्ध कराते? दुनिया के किसी भी देश में लोगों को गैस चैंबर में मरने के लिये नहीं भेजा जाता है। इस वजह से हर महीने चार पांच व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है।’’

पीठ ने कहा कि संविधान में प्रावधान है कि सभी मनुष्य समान हैं लेकिन प्राधिकारी उन्हें समान सुविधायें मुहैया नहीं कराते।

पीठ ने इस स्थिति को ‘अमानवीय’ करार देते हुये कहा कि इन लोगों को सुरक्षा के लिये कोई भी सुविधा नहीं दी जाती और वे सीवर और मैनहोल की सफाई के दौरान अपनी जान गंवाते हैं।
शीर्ष अदालत ने अनुसूचित जाति/जनजाति कानून के तहत गिरफ्तारी के प्रावधान को लगभग हल्का करने के न्यायालय के पिछले साल के फैसले पर पुनर्विचार के लिये केन्द्र की याचिका की सुनवाई के दौरान अनेक तल्ख टिप्पणियां कीं।

वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि देश में नागरिकों को होने वाली क्षति और उनके लिये जिम्मेदार लोगों से निबटने के लिये अपकृत्य कानून (लॉ ऑफ टॉर्ट) विकसित नहीं हुआ है और ऐसी घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेने का मजिस्ट्रेट को अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि सड़क पर झाडू लगा रहे या मैनहोल की सफाई कर रहे व्यक्ति के खिलाफ कोई मामला दायर नहीं किया जा सकता लेकिन उस अधिकारी या प्राधिकारी, जिसके निर्देश पर यह काम हो रहा है, उसको इसके लिये जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘यह मनुष्य के साथ इस तरह का व्यवहार सबसे अधिक अमानवीय आचरण है।’’
पीठ ने देश में अस्पृश्यता के पहलू पर भी टिप्पणियां कीं।

पीठ ने कहा, ‘‘संविधान में देश में अस्पृश्यता समाप्त करने के बावजूद मैं आप लोगों से पूछ रहा हूं क्या आप उनके साथ हाथ मिलाते हैं? इसका जवाब नकारात्मक है। इसी तरह का हम आचरण कर रहे हैं। इस हालात में बदलाव होना चाहिए। आजादी के बाद हम 70 साल का सफर तय कर चुके हैं लेकिन ये सब अभी भी हो रहा है।’’

आपको बता दें कि सरकार ने मैला सफाई करने वाले श्रमिकों की संख्या और उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति के संबंध में कोई सर्वेक्षण नहीं कराया है। लोकसभा में 4 अगस्त2015 को एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में सरकार द्वारा यह जानकारी दी गई कि 2011 की जनगणना के आंकड़े यह बताते हैं कि देश के ग्रामीण इलाकों में 180657 परिवार मैला सफाई का कार्य कर रहे थे। इनमें से सर्वाधिक 63713 परिवार महाराष्ट्र में थे। इसके बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा तथा कर्नाटक का नंबर आता है। यह संख्या इन परिवारों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में हाथ से मैला सफाई के 794000 मामले सामने आए हैं।

इसे पढ़ें : निर्मम समाज में स्वच्छता सेनानियों की गुमनाम शहादत

सीवर लाइन सफाई के दौरान होने वाली मौतों के विषय में भी राज्य सरकारें केंद्र को कोई सूचना नहीं देतीं। 2017 में 6 राज्यों ने केवल 268 मौतों की जानकारी केंद्र के साथ साझा की। सरकारी सर्वे के अनुसार तो 13 राज्यों में केवल 13657 सफाई कर्मी हैं।

नेशनल कमीशन फ़ॉर सफाई कर्मचारीज (एनसीएसके) के अनुसार वर्ष 2017 से हर पांचवें दिन कोई न कोई सफाई कर्मी सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मौत का शिकार बन जाता है। इन आंकड़ों में हाथ से मैला उठाने वाले वाल्मीकि समुदाय के स्त्री पुरुषों की विभिन्न रोगों के कारण हुई मृत्यु के आंकड़े सम्मिलित नहीं हैं। आपको मालूम होना चाहिए कि असुरक्षित ढंग से मैला और गंदगी उठाते उठाते इन्हें कितने ही संक्रामक रोग हो जाते हैं और इनकी औसत आयु चिंताजनक रूप से कम हो जाती है।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

manual schawenging
Supreme Court
supreme court on sewer deaths
sewer deaths in india

Related Stories

लंबे संघर्ष के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायक को मिला ग्रेच्युटी का हक़, यूनियन ने बताया ऐतिहासिक निर्णय

जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?

सुप्रीम कोर्ट को दिखाने के लिए बैरिकेड हटा रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा

बाहरी साज़िशों और अंदरूनी चुनौतियों से जूझता किसान आंदोलन अपनी शोकांतिका (obituary) लिखने वालों को फिर निराश करेगा

लखीमपुर खीरी : किसान-आंदोलन की यात्रा का अहम मोड़

अगर मामला कोर्ट में है, तब क्या उसके विरोध का अधिकार खत्म हो जाता है? 

कार्टून क्लिक: किसानों का गला किसने घोंटा!

करनाल हिंसा के ख़िलाफ़ वकीलों का सुप्रीम कोर्ट से लेकर हरियाणा भवन तक रोष मार्च

किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट की हैरान करने वाली चुप्पी

खोरी गांव : पुलिसिया दमन के बीच आज भी जारी रहा तोड़-फोड़, हरियाणा सरकार की पुनर्वास योजना हवा हवाई


बाकी खबरें

  • Neha Singh Rathore
    न्यूज़क्लिक टीम
    ‘यूपी में सब बा’ के जवाब में नेहा सिंह राठौर का ‘ यूपी में का बा’
    23 Jan 2022
    यूपी विधानसभा चुनाव में वोटरों को रिझाने के लिए सांसद और अभिनेता रवि किशन भाजपा की तारीफ़ में एक वीडियो लेकर आए, जिसके बोल हैं ‘ यूपी में सब बा’। भाजपा की उपलब्धियों का बखान वाला यह वीडियो घर-घर…
  • pm
    अजय कुमार
    दो टूक: मोदी जी, आप ग़लत हैं! अधिकारों की लड़ाई से देश कमज़ोर नहीं बल्कि मज़बूत बनता है
    23 Jan 2022
    75 वर्षों में हम सिर्फ़ अधिकारों की बात करते रहे हैं। अधिकारों के लिए झगड़ते रहे, जूझते रहे, समय भी खपाते रहे। सिर्फ़ अधिकारों की बात करने की वजह से समाज में बहुत बड़ी खाई पैदा हुई है: प्रधानमंत्री…
  • Ethiopia
    शिरीष खरे
    इथियोपिया : फिर सशस्त्र संघर्ष, फिर महिलाएं सबसे आसान शिकार
    23 Jan 2022
    इथियोपिया, अफ्रीका महाद्वीप का यह देश पिछले दो वर्षों से अधिक समय से सुखिर्यों में है, जहां नवंबर, 2020 से शुरू हुआ सशस्त्र संघर्ष अभी भी जारी है, जहां टिग्रे अलगाववादियों और उनके खिलाफ इथियोपियाई…
  • nehru and subhash
    एल एस हरदेनिया
    नेताजी की जयंती पर विशेष: क्या नेहरू ने सुभाष, पटेल एवं अंबेडकर का अपमान किया था?
    23 Jan 2022
    नरेंद्र मोदी का यह आरोप तथ्यहीन है कि नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस, डॉ. अंबेडकर और सरदार पटेल को अपेक्षित सम्मान नहीं दिया।
  • cartoon
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    …सब कुछ ठीक-ठाक है
    23 Jan 2022
    "क्यों, क्या सब ठीक-ठाक नहीं हैं? क्या सब ख़ैरियत से नहीं है? क्या हम हिंदू राष्ट्र नहीं बन रहे हैं? ठीक है भाई! बेरोज़गारी है, महंगाई है, शिक्षा बरबाद हो रही है और अस्पताल बदहाल। पर देश में क्या…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License