NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
भारत
स्मृति शेष : जनवादी आंदोलन की मुखर आवाज़ थे अमित सेनगुप्ता
सेनगुप्ता वैज्ञानिक और तार्किक सोच को जनता तक ले जाने के पक्षधर थे और देश भर में जन जन तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने के लिए काम करते रहे।
न्यूज़क्लिक टीम
29 Nov 2018
DR. AMIT SENGUPTA

डॉ. अमित सेनगुप्ता के आक्समिक निधन पर हम अत्यंत पीड़ा महसूस कर रहे हैं। वह हमारे साथी और सहयोगी थे। डॉ. अमित सेनगुप्ता ऑल इंडिया पीपल्स साइन्स नेटवर्क के पूर्व महासचिव थे और जन स्वास्थ्य अभियान के संयोजक भी थे। साथ ही वह लगातार न्यूज़क्लिक के लिए लिखते रहे और हमें इंटरव्यू भी देते रहे।

सेनगुप्ता वैज्ञानिक और तार्किक सोच को जनता तक ले जाने के पक्षधर थे और देश भर में जन जन तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने के लिए काम करते रहे। बुधवार, 28 नवंबर को भारत के जनवादी आंदोलन ने एक बहुत महत्वपूर्ण आवाज़ को खो दिया।

-    न्यूज़क्लिक संपादकीय 

(हमने पिछले दिनों डॉ. अमित सेनगुप्ता से आयुष्मान भारत योजना पर विस्तार से बात की। इस इंटरव्यू को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं।)

 

DR. AMIT SENGUPTA
AIPSN
PEOPLE HEALTH MOVEMENT
JAN SWASTHYA ABIYAN
ALL INDIA PEOPLE'S SCIENCE NETWORK

Related Stories

केंद्र सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों में टीके का उत्पादन फौरन बढ़ाए: अखिल भारतीय पीपल्स साइंस नेटवर्क

केंद्र ले मौजूदा कोरोना संकट की ज़िम्मेदारी, राज्यों के साथ साझेदारी की ज़रूरत : एआईपीएसएन


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!
    27 Mar 2022
    पुनर्प्रकाशन : यही तो दिन थे, जब दो बरस पहले 2020 में पूरे देश पर अनियोजित लॉकडाउन थोप दिया गया था। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं लॉकडाउन की कहानी कहती कवि-पत्रकार मुकुल सरल की कविता- ‘लॉकडाउन—2020’।
  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    लीजिए विकास फिर से शुरू हो गया है, अब ख़ुश!
    27 Mar 2022
    ये एक सौ तीस-चालीस दिन बहुत ही बेचैनी में गुजरे। पहले तो अच्छा लगा कि पेट्रोल डीज़ल की कीमत बढ़ नहीं रही हैं। पर फिर हुई बेचैनी शुरू। लगा जैसे कि हम अनाथ ही हो गये हैं। जैसे कि देश में सरकार ही नहीं…
  • सुबोध वर्मा
    28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?
    27 Mar 2022
    मज़दूर और किसान आर्थिक संकट से राहत के साथ-साथ मोदी सरकार की आर्थिक नीति में संपूर्ण बदलाव की भी मांग कर रहे हैं।
  • अजय कुमार
    महंगाई मार गई...: चावल, आटा, दाल, सरसों के तेल से लेकर सर्फ़ साबुन सब महंगा
    27 Mar 2022
    सरकारी महंगाई के आंकड़ों के साथ किराना दुकान के महंगाई आकड़ें देखिये तो पता चलेगा कि महंगाई की मार से आम जनता कितनी बेहाल होगी ?
  • जॉन पी. रुएहल
    क्या यूक्रेन मामले में CSTO की एंट्री कराएगा रूस? क्या हैं संभावनाएँ?
    27 Mar 2022
    अपने सैन्य गठबंधन, सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के जरिये संभावित हस्तक्षेप से रूस को एक राजनयिक जीत प्राप्त हो सकती है और अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उसके पास एक स्वीकार्य मार्ग प्रशस्त…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License