NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सनातन संस्था पर कोई कार्यवाही नहीं
अब यह बात सबके सामने है कि यह संगठन चार राजनीतिक हत्याओं के पीछे था , लेकिन फिर भी न तो इसके मुखिया अठावले और न ही इसके दूसरे नेताओं पर कोई कार्यवाही की गयी है।
योगेश एस.
24 Aug 2018
sanatan sanstha

गोवा स्थित हिंदू आतंकवादी संगठन सनातन संस्था और इसके संस्थापक को महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दल (एटीएस), पुलिस, महाराष्ट्र और गोवा की राज्य सरकारें और केंद्र सरकार द्वारा अभी भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस सनातन संस्था का नाम विशेष जांच दल (एसआईटी) ने ही रखा है जो पत्रकार व कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या की जांच कर रही है। इसका नाम न केवल गौरी लंकेश की हत्या में सामने आया है बल्कि डॉ नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पांसारे और एमएम कलबूर्गी की हत्याओं में भी सामने आ चुका है। एसआईटी ने सनातन संस्था और उसके सहयोगियों की बड़े षड्यंत्र को भी सामने लाया है।

10 अगस्त, 2018 को सनातन संस्था के समर्थक और हिंदू गोवंश रक्षा समिति के सदस्य वैभव राउत को एटीएस ने गिरफ्तार कर लिया था। एटीएस ने उसके घर पर छापा माराऔर कम से कम आठ देसी बम और अन्य विस्फोटक सामग्रियों सहित सनातन संस्था का साहित्य बरामद किया। राउत के बयान पर एटीएस ने शरद कालस्कर और सुधनवा गोंढ़लेकर को ट्रैक किया जो विस्फोटक और विभिन्न हथियारों को ज़खीरा जमा कर रहे थे और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में इन विस्फोटकों को लगाने की योजना बनाई थी। एटीएस ने माना कि तीनों सनातन संस्था के सदस्य थे।

एटीएस की गिरफ्तारी और एसआईटी खुलासे के बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक और गोवा के नागरिक समाज इस आतंकवादी संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। हमारे सामने दो महत्वपूर्ण प्रश्न हैं: पहला यह कि, सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाना क्या समाधान है? अगर जवाब हां है, तो प्रतिबंध किस उद्देश्य पर होगा? और यदि उत्तर नहीं है,तो उभरते दृढ़ साक्ष्य इस संगठन को एक आतंकवादी संगठन के रूप में स्थापित करते हैं, ऐसे में इसके साथ क्या किया जाना चाहिए? और दूसरा प्रश्न यह कि, क्या मौजूदा सरकार एक हिंदू राष्ट्र की विचारधारा के प्रति निष्ठा के साथ, सनातन संस्था पर कार्रवाई करेगी, एक संगठन जिसमें से सत्तारूढ़ दल बीजेपी और इसकी जन्मदाता आरएसएस दोनों खुद को दूर कर रहे हैं? सनातन संस्था की संरचना, विचारधारा और कार्यप्रणाली पर नज़र डालने पर हमें इन दोनों सवालों के जवाब मिल जाएंगे।

ये संगठन "धर्म की सुरक्षा" और हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए एक उपकरण के रूप में हिंसा का समर्थन और वकालत करता है। अतीत में कई बम विस्फोट के मामलों में इस संगठन के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। सनातन संस्था को भी दोषी पाया गया था और उसके दो समर्थकों को 4 जून, 2008 को ठाणे में गडकरी रंगयातन ऑडिटोरियम में बम विस्फोटों के मामले में 10 साल जेल की सजा दी गई थी। यह एक फिल्म अम्ही पाचपूते के ख़िलाफ़ विरोध में किया गया था, उनका दावा था कि इसमें हिंदू देवताओं को नज़रअंदाज़ किया गया था। गिरफ्तार किए गए लोग वर्तमान में ज़मानत पर बाहर हैं।

गोवा पुलिस ने अक्टूबर 2009 में गोवा के मडगांव में हुए बम विस्फोट में शामिल छह सनातन संस्था के सदस्यों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक़ सनातन संस्था के दो समर्थक मलगोंडा पाटिल और योगेश नायक कथित रूप से मडगांव में नरकसुर प्रतिमा प्रतियोगिता के पास बम रखने के लिए अपने स्कूटर में बम ले जा रहे थे। दोनों की मौत समय से पहले बम विस्फोट के चलते हो गई थी।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मामले की जांच शुरू की। जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक सनातन संस्था का एक सदस्य जो एक इंजीनियरिंग छात्र था उसने इम्प्रोविज्ड विस्फोटक उपकरण (आईईडी) तैयार करने और विस्फोट के लिए डिटोनेटर्स और टाइमर उपकरणों को ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, सभी छः सदस्यों को बरी कर दिया गया वहीं कुछ सनातन संस्था के सदस्य अभी भी फरार हैं।

संगठन को प्रतिबंधित करने की पहली मांग साल 2011 में एटीएस द्वारा की गई थी, और फिर 2015 में की गई थी। साल 2011 में प्रतिबंध का अनुरोध करते हुए एटीएस रिपोर्टने कहा था,

"वासी , पनवेल , थाणे और गोवा की घटनाओं को देखते हुए यह ज़ाहिर होता है कि जिन्हे गिरफ्तार किया गया ,जिनकी तलाश है और जो आरोपी हैं उन्होंने एक गैर कानूनी संगठन बनाया जिससे आतंकी घटनाओं को बढ़ावा दिया जाए और अंजाम तक पहुँचाया जाए और विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच दुश्मनी पैदा की जाए। साथ ही राज्य की स्वायत्ता को चुनौती दी जाए या युवाओं को भड़काया जाए कि वह उन आईडीज़ के ज़रिये आतंकी गतिविधियां करें  जिनका खरीदा जाना , बेचा जाना और रखा जाना राज्य के कानून के खिलाफ है और इस तरह इन्होने भारत सरकार के खिलाफ जंग छेड़ने की कोशिश की है। "

केंद्र सरकार को विश्वास नहीं था कि सनातन संस्था एक आतंकवादी संगठन था। साल 2015 में, दाभोलकर, पांसारे और कालबूर्गि के मामलों की जांच में एटीएस ने एक बार फिर प्रतिबंध की मांग की एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। हालांकि, अब लगता है कि एटीएस ने अपनी स्थिति को बदल दिया है कि संगठन पर प्रतिबंध लगाने से कोई उद्देश्य प्राप्त नहीं होगा क्योंकि सनातन संस्था कोई 'एक संस्था' नहीं है।

सनातन संस्थान और इसके अवतार

सनातन संस्था की स्थापना और पंजीकरण एक हाईपोथेरेपिस्ट डॉक्टर जयंत बालाजी अठवाले ने किया था महाराष्ट्र के गृह विभाग के मुताबिक़, सनातन संस्था में बीस अन्य पंजीकृत संगठन हैं और इन सभी संगठनों में अलग-अलग इकाइयां हैं, और इन इकाइयों को स्वतंत्र रूप से पंजीकृत किया गया है। यह संगठन जो एक संस्था के रूप में पंजीकृत नहीं है बल्कि हर ज़िले और शहर में अलग इकाइयों के रूप में है, विभिन्न नामों के साथ केवल गोवा में विभिन्न आश्रम भी हैं। इसका मतलब यह है कि सनातन संस्था चारों तरफ फैली हुआ है। हिंदू जनजागृति समिति या हिंदू युवा सेना की तरह सनातन संस्था विभिन्न संगठनों के माध्यम से संचालित होता है। सनातन संस्था के इन असंख्य सहयोगी- जो एक संगठन के रूप में हिंदू धर्म को प्रचारित करने और 'हिंदू राष्ट्र' के लिए लड़ने का वचन देते हैं, पूरे ज़िला और शहर में हिंदू महोत्सव मनाते, या हिंदू राष्ट्र पर कार्यशालाओं का आयोजन करते हैं।

उदाहरण के लिए, सनातन संस्था ने हाल ही में नांदेड ज़िले के जालकोट में एक कार्यक्रम आयोजित किया था। वेबसाइट ने लिखा, "मार्गदर्शन के लिए सनातन संस्था के शुभचिंतकों और उसके विज्ञापन दाताओं और जलकोत पंचायत समिति के निर्माणाअध्यक्ष रमाकांत रायवार द्वारा सनातन संस्थान की अनीता बूंगे को भागवत सप्तह में आमंत्रित किया गया था। 'हिंदू धर्म, हिंदू राष्ट्र, धर्म शिक्षण' पर मार्गदर्शन से 500 भक्तों को लाभ हुआ।" वेबसाइट ने यह भी लिखा कि आरएसएस के स्वयंसेवक भी इस कार्यक्रम का हिस्सा थे।

sanatan sanstha

कोल्हापुर में जहां कॉमरेड गोविंद पांसारे की हत्या कर दी गई थी, सनातन संस्था और उसके सहयोगियों (अनामित) ने एक आयोजन कर के अपने संस्थापक अठवाले के जन्मदिन का जश्न मनाया था।

sanatan sanstha

एक अन्य रिपोर्ट में लिखा है कि उन्होंने "हिन्दू धर्म जागृति सभा" के संगठन में शामिल "भक्त हिंदुओं" के लिए अलीबाग में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।

sanatan sanstha

यदि सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, तो यह शायद ही कोई फर्क पड़ता है और इसकी आतंकवादी गतिविधियों को भी खत्म नहीं करेगा, क्योंकि इसके सहयोगी अभी भी अपनी चरमपंथी विचारधारा का प्रचार

यदि सनातन संस्था  पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, तो इससे शायद ही कोई फर्क पड़ेगा और यह इसकी आतंकवादी गतिविधियों को भी खत्म नहीं कर पाएगा, क्योंकि इसके सहयोगी अभी भी अपनी चरमपंथी विचारधारा का प्रचार जारी रखे हुए हैं और हिंसक गतिविधियों को बदस्तूर जारी रखे हुए हें। देश में तर्कवादियों और पत्रकारों की हत्या सिर्फ हत्याएं नहीं हैं बल्कि वे राजनीतिक हत्याएं हैं, और विचारधारा पर हमला है। सनातन संस्था विचारधारा की मूल विचारधारा हिंदू राष्ट्र है और संगठन उन सभी को मारने के लिए दृढ़ संकल्पित है जो इसका विरोध करते हैं। हालांकि यह अब स्थापित किया जा चुका है कि सनातन संस्था सभी चार राजनीतिक हत्याओं के पीछे थी और देश में बड़े षड्यंत्र में भी शामिल है, न तो अठावले, ओर  न ही संगठन के पदाधिकारियों से पूछताछ की गई है। जब एटीएस पहले से ही कह चुका है कि सनातन संस्था  पर प्रतिबंध लगाने से कोई उद्देश्य प्राप्त होगा, तो वे संगठन से पूछताछ करने में अनिच्छुक क्यों हैं? एटीएस, महाराष्ट्र की गोवा राज्य सरकार, पुलिस और केंद्र सरकार को इस सवाल का जवाब देना है।

Sanatan sanstha
Hindutva
Maharashtra
Govind Pansare

Related Stories

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा

ओटीटी से जगी थी आशा, लेकिन यह छोटे फिल्मकारों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा: गिरीश कसारावल्ली

ज्ञानवापी कांड एडीएम जबलपुर की याद क्यों दिलाता है

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

मनोज मुंतशिर ने फिर उगला मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर, ट्विटर पर पोस्ट किया 'भाषण'

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

बीमार लालू फिर निशाने पर क्यों, दो दलित प्रोफेसरों पर हिन्दुत्व का कोप

महाराष्ट्र : एएसआई ने औरंगज़ेब के मक़बरे को पांच दिन के लिए बंद किया

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 


बाकी खबरें

  • musahar
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित
    02 Mar 2022
    दलित आम तौर पर ऐसे मूक मतदाता माने जाते हैं, जो अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं का आसानी से इज़हार नहीं करते। हालांकि, इस चुनाव को नज़दीक से देखने पर इस बात के साफ़ संकेत मिल जाते हैं कि उनका झुकाव बसपा…
  • कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 7,554 नए मामले, 223 मरीज़ों की मौत
    02 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.20 फ़ीसदी यानी 85 हज़ार 680 हो गयी है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन युद्ध ने यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को ईरान सौदे पर सोचने को मजबूर किया
    02 Mar 2022
    क्या नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) के विस्तार पर अमेरिका-रूस टकराव और यूक्रेन के आसपास बने हालात वियना में चल रही ईरान परमाणु वार्ता को पटरी से उतार देगी?
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी; सोवियत संघ का हिस्सा रहे राष्ट्रों से दूर रहे पश्चिम, रूस की चेतावनी
    02 Mar 2022
    रूसी बलों ने मंगलवार को यूक्रेन के घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर हमले तेज करते हुए यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर के मध्य स्थित एक मुख्य चौराहे और कीव के मुख्य टीवी टावर पर बमबारी की। वहीं भारत ने…
  • बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन
    02 Mar 2022
    पालीगंज विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि वह सीटेट और बीटेटट उत्तीर्ण सभी अभ्यर्तियों के लिए सातवें चरण की बहाली के लिए 2014-21 तक सभी रिक्तियों को जोड़कर मार्च महीने में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License