NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
संविधान के अपराधी शंभू को क्यों हीरो बना रहे हैं कथित हिंदुत्ववादी?
एक अन्य यूज़र ने शंभू के परिवार को पैसा भेजने की कोशिश की, लेकिन खाता बंद होने की वजह से वो पैसे नहीं भेज सके।
सबरंग इंडिया
14 Dec 2017
राजसमन्द

नई दिल्ली। राजस्थान के राजसमंद में कथित लव जेहाद के नाम पर हैवानियत का नंगा खेल खेलने वाला शंभू रैगर कानून की नजर में भले ही अपराधी है लेकिन कुछ तथाकथित राष्ट्रवादी उसे हीरो मान रहे हैं। जिस राजस्थान में जातिवाद इतना भयंकर रूप में है कि दलितों के सरनेम पर सवाल उठाए जाते हैं वहीं उन्हें शादी में घोड़े पर बैठने की मनाही है वहीं शंभू भवानी को हीरो के रूप में देखा जा रहा है। 

मुसलमान होने की वजह से शंभू के हाथों मारा गए अफराजुल के परिवार के बजाय कथित हिंदुत्ववादी शंभू के परिवार को आर्थिक मदद भेज रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर शंभू का समर्थन करने वालों पर कड़ाई की जा रही है लेकिन इसके बावजूद भी कथित हिंदुत्ववादी लगातार पोस्ट डालकर शंभू को हीरो बताने में लगे हैं। 

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, फ़ेसबुक पर ऐसे कई पोस्ट किए गए हैं जिसमें लोगों ने शंभूलाल रैगर की पत्नी सीता रैगर के बैंक खाते में पैसे डालने का दावा किया है। हालांकि राजसमंद पुलिस ने सीता रैगर का बैंक खाता ज़ब्त कर बंद करवा दिया है। 

शंभूलाल के परिवार को आर्थिक मदद देने को जायज़ ठहराते हुए सुमंत भट्टाचार्य ने फ़ेसबुक पर लिखा, "वृद्ध माता-पिता और अबोध बच्चे की मदद करना धर्म सम्मत भी है और संविधान सम्मत भी।"

एक अन्य यूज़र ने शंभू के परिवार को पैसा भेजने की कोशिश की, लेकिन खाता बंद होने की वजह से वो पैसे नहीं भेज सके। स्वंय को कट्टर हिंदू और गौरक्षक बताने वाले गाज़ियाबाद के एक व्यक्ति ने फ़ेसबुक पर अपना पेटीएम नंबर साझा कर लोगों से शंभू रैगर के परिवार को आर्थिक मदद देने की अपील की है। लोग उनके पेटीएम नंबर पैसे भेजकर स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे हैं।

Courtesy: सबरंग इंडिया
rajsamand
Rajasthan sarkar
love jihad

Related Stories

चुनावी राज्यों में क्रमवार दंगे... संयोग या प्रयोग!

जोधपुर की घटना पर माकपा ने जताई चिंता, गहलोत सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग

आखिर क्यों है भाजपा के संकल्प पत्र में 'लव जिहाद' पर इतना जोर ?

यूपी चुनावः कानपुर में बांटे जा रहे पर्चे में लव जिहाद, धर्मांतरण और पलायन जैसे विवादित मुद्दे

राजस्थान: REET अभ्यर्थियों को जयपुर में किया गया गिरफ़्तार, बड़े पैमाने पर हुए विरोध के बाद छोड़ा

"लव जिहाद" क़ानून : भारत लड़ रहा है संविधान को बचाने की लड़ाई

केरलः भाजपा के ध्रुवीकरण-प्रयासों में सहायक है नारकोटिक जिहाद का बवाल

उत्तर प्रदेश में दरवाज़े पर पुलिस की दस्तक ही बन गया है जीवन

राजस्थान: एक सप्ताह के भीतर दुष्कर्म के आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज, गहलोत सरकार की क़ानून व्यवस्था फेल!

धर्म, साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद और अन्तर्धार्मिक विवाह


बाकी खबरें

  • नीलांजन मुखोपाध्याय
    यूपी: योगी 2.0 में उच्च-जाति के मंत्रियों का दबदबा, दलितों-पिछड़ों और महिलाओं की जगह ख़ानापूर्ति..
    02 Apr 2022
    52 मंत्रियों में से 21 सवर्ण मंत्री हैं, जिनमें से 13 ब्राह्मण या राजपूत हैं।
  • अजय तोमर
    कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह
    02 Apr 2022
    भारी संख्या में दिहाड़ी मज़दूरों का पलायन देश भर में श्रम के अवसरों की स्थिति को दर्शाता है।
  • प्रेम कुमार
    सीबीआई पर खड़े होते सवालों के लिए कौन ज़िम्मेदार? कैसे बचेगी CBI की साख? 
    02 Apr 2022
    सवाल यह है कि क्या खुद सीबीआई अपनी साख बचा सकती है? क्या सीबीआई की गिरती साख के लिए केवल सीबीआई ही जिम्मेदार है? संवैधानिक संस्था का कवच नहीं होने की वजह से सीबीआई काम नहीं कर पाती।
  • पीपल्स डिस्पैच
    लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया
    02 Apr 2022
    इज़रायल के क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों में और विदेशों में रिफ़्यूजियों की तरह रहने वाले फ़िलिस्तीनी लोग लैंड डे मनाते हैं। यह दिन इज़रायली क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ साझे संघर्ष और वापसी के अधिकार की ओर प्रतिबद्धता का…
  • मोहम्मद सज्जाद, मोहम्मद ज़ीशान अहमद
    भारत को अपने पहले मुस्लिम न्यायविद को क्यों याद करना चाहिए 
    02 Apr 2022
    औपनिवेशिक काल में एक उच्च न्यायालय के पहले मुस्लिम न्यायाधीश, सैयद महमूद का पेशेवराना सलूक आज की भारतीय न्यायपालिका में गिरते मानकों के लिए एक काउंटरपॉइंट देता है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License