NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सोहराबुद्दीन मामला : “सीबीआई अदालत ने न्यायहित में काम नहीं किया है”
सीबीआई की विशेष अदालत ने सोहराबुद्दीन शेख, तुलसीराम प्रजापति मुठभेड़ और कौसर बी दुष्कर्म व हत्या मामले में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Dec 2018
Sohrabuddin

“सीबीआई अदालत ने न्यायहित में काम नहीं किया है”। यह कहना है सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन का।

आपको बता दें कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने संतोषजनक गवाहों और सबूतों के अभाव में शुक्रवार को सोहराबुद्दीन शेख, तुलसीराम प्रजापति मुठभेड़ और कौसर बी दुष्कर्म व हत्या मामले में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया। विशेष अदालत के न्यायाधीश एस.जे. शर्मा ने कहा, "2005 के मुठभेड़ मामलों में साजिश और हत्या का जुर्म साबित करने के लिए पेश सबूत और गवाह संतोषजनक नहीं हैं।"

अदालत ने कहा कि मामलों में परिस्थिजन्य साक्ष्य ठोस नहीं हैं।

सोहराबुद्दीन और उसके सहयोगी प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ों के बाद सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में 12 साल बाद यह फैसला आया है।

गुजरात-राजस्थान पुलिस के 21 निचले दर्जे के अधिकारियों सहित 22 आरोपियों को बरी कर दिया गया है, जिसमें एम.एल. परमार, रमन सिंह, नारायणसिंह धाबी, श्याम सिंह, अब्दुर रहमान, हिमांशु सिंह राजावत, बालकृष्ण चौबे, राजूभाई जीरावाला, अजय परमार, शांतिराम शर्मा, युद्धवीर सिंह, करतार सिंह, नारायण सिंह जाट, विजयकुमार राठौड़, सी.पी.श्रीनिवास राव, जेतु सोलंकी, किरण सिंह चौहान, विनोद लिंबाचिया, कांजीभाई कच्छी, करण सिंह सिसोदिया, आशीष पांड्या और नरेश चौहान शामिल रहे। 

अभियोजन पक्ष के अनुसार, गुजरात के आतंकवाद-रोधी दल (एटीएस) ने 26 नवंबर, 2005 को सोहराबुद्दीन को कथित मुठभेड़ में मार गिराया था।

प्रजापति भी इसी तरह के हालात में 28 दिसंबर, 2006 को मारा गया था। वहीं, कौसर बी जो अपने पति सोहराबुद्दीन के अपहरण की गवाह थी, उसकी दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी।

इन हत्याओं के कारण गुजरात में तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार विवादों में फंस गई थी, क्योंकि इसमें राजनीति सहित भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों और अन्य अधिकारियों के नाम शामिल थे।

अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि सोहराबुद्दीन के लश्कर-ए-तैयबा और अन्य आतंकवादी समूहों के साथ संबंध थे और वह गुजरात के एक बड़े नेता संभवत: तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, जो अब प्रधानमंत्री हैं, की हत्या की साजिश रच रहे थे। 

इस मामले में पहले कुल 37 आरोपी थे। इनमें से 16 जिसमें अधिकांश राजनेता और आईपीएस अधिकारी थे, को बाद में मुंबई में विशेष सीबीआई और उसके बाद बम्बई उच्च न्यायालय ने आरोपमुक्त कर दिया था। इस मामले में शुरुआत में बरी हुए नामों में गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह (मौजूदा भाजपा अध्यक्ष), राजस्थान के तत्कालीन गृहमंत्री जी.सी. कटारिया, उच्चस्तर के एटीएस अधिकारी व डीआईजी डी.जी. वंजारा, पुलिस अधीक्षक एम.एन. दिनेश और आर.के. पांड्या सहित अन्य शामिल हैं। 

इस मामले में न्यूज़क्लिक से बात करते हुए सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने कहा कि जिस तरह से ट्रायल चला वो पूरी तरह निष्पक्ष नहीं था। उन्होंने कहा “सीबीआई और सीबीआई जज ने इस मामले में अभियुक्तों को पूरी तरह बचाने का काम किया।” इस तरह का आरोप वे क्यों लगा रहे हैं, यह पूछने पर रुबाबुद्दीन ने कहा कि इस मामले में रमन पटेल का धारा 164 के तहत बयान था लेकिन कोर्ट ने उन्हें भी गवाही के लिए नहीं बुलाया। क्योंकि उन्होंने आरोपियों के खिलाफ बयान दिया था। इतना ही नहीं इस मामले की जांच करने वाले एटीएस के आईजी रजनीश राय को भी कोर्ट नहीं बुलाया गया।”

आपको बता दें कि गुजरात कैडर के 1992 आईपीएस अधिकारी रजनीश राय को केंद्र सरकार ने निलंबित कर दिया है। गृह मंत्रालय ने 18 दिसंबर को इस आशय का आदेश जारी किया। इसकी ख़बर आज ही बाहर आई। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृति (वीआरएस) के लिए आवेदन दिया था और उसके खारिज होने के बाद सेंट्रल केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में अपील की थी।

सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने कहा तुलसीराम प्रजापति की मां नर्मदा बाई को भी इस मामले में कोर्ट में नहीं बुलाया गया। इस तरह महत्वपूर्ण गवाहों को कोर्ट में बुलाया ही नहीं गया और मुकरने वाले गवाहों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

आपको बता दें कि मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के करीब 92 गवाह मुकर गए।

रुबाबुद्दीन ने कहा कि वे इस मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमें न्याय व्यवस्था में पूरा भरोसा है। निचली अदालत में हमें इंसाफ नहीं मिला लेकिन ऊपरी अदालत में हमें ज़रूर न्याय मिलेगा।

(कुछ इनपुट आईएएनएस)

Sohrabuddin Sheikh
Sohrabuddin encounter
kausar bi
TULSIRAM PRJAPATI
cbi court
CBI
Gujrat
Narendra modi
Amit Shah

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

सरकारी एजेंसियाँ सिर्फ विपक्ष पर हमलावर क्यों, मोदी जी?


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License