NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सोमनाथ दा : अवाम की बहुमूल्य धरोहर
सोमनाथ दा भारतीय संसद के सर्वकालीन श्रेष्ठों में से एक हैं । दस बार लोकसभा चुनाव जीते एक अनुभवी सांसद, तार्किक और प्रखर वक्ता, एक साथ आक्रामक किन्तु संयत। ईमानदारी और जन प्रतिबद्दता की मिसाल ; भारतीय राजनीति में यह विरल मेल सिर्फ एक धारा के पास है ; वाम की धारा के पास।
बादल सरोज
13 Aug 2018
somnath

वे अखिलभारतीय हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा एक जमाने के धाकड़ बैरिस्टर और लोकसभा सदस्य एन सी चटर्जी के बेटे थे।  यह उनकी बेमिसाल अध्ययनशीलता और मानवीय तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति लगाव था जिसने उन्हें पहले दमन-उत्पीड़न के शिकार कम्युनिस्टों के मुफ्त के वकील के रूप में बंगाल के आंदोलन के साथ जोड़ा, फिर मार्क्सवादी बनाया और उसके बाद कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य होते हुये इसके शीर्ष  नेतृत्व केंद्रीय समिति तक पहुंचाया  । उनकी यह निष्ठा, कुछ अप्रिय स्थितियों वाले बाद के दिनों में भी शिथिल नहीं हुयी-कमजोर नहीं पडी।  वे बंगाल में सीपीएम और वामपंथ चुनाव अभियान की सभाओं में बोलते रहे - ममता बनर्जी की तानाशाही और बर्बरता की मुखरता के साथ निंदा-भर्त्सना-लानत मलामत करते रहे। संसद की तरह संसद से बाहर भी मजदूरों-किसानो इस तरह अवाम के सवाल उठाते रहे। 

उनके निधन के बाद उनके असाधारण योगदान से अधिक उनके राजनीतिक उत्तरार्ध के एक हादसे को तूल दिया जाएगा।  कुछ शुभचिंतक इसे संदर्भ से काट कर वक्रोक्ति के रूप में याद दिलायेंगे तो अशुभकामी तो सोमनाथ दा को ही उनके मिशन के विरुध्द औजार के रूप में इस्तेमाल करने पर आमादा-ए-फसाद नजर आएंगे।   

हमे उनके साथ सीपीएम की केंद्रीय समिति में रहने का अवसर मिला। उस बैठक में भी रहने का जिस बैठक ने उनसे एक अनुरोधपूर्वक सर्वसम्मत आग्रह किया था। 

राजनैतिक-सांगठनिक जीवन में कई मर्तबा द्वैत उपस्थित होता है और इस द्वैत के साथ द्वंद्व के मौके आते हैं। कामरेड सोमनाथ चटर्जी के जीवन में भी आये। 

बहुत मुश्किल पल होते हैं वे ; हर कम्युनिस्ट के जीवन में उसे ऐसी स्थितियों से दो-चार होना पड़ता है। व्यक्ति की राय और और आंकलन सामूहिक राय और स्वीकृत आंकलन से भिन्न होता है। सोचने-विचारने वाली राजनीतिक जमात में ऐसा होना बहुत सहज और स्वाभाविक है। इस द्वैत से बाहर आने में पार्टी सदस्यों की मदद करने के और ऐसी स्थितियों से बाहर आने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी ने माकूल इंतजाम किये हुए हैं।   

कम्युनिस्ट पार्टी इस तरह की भिन्नताओं के प्रति सकारात्मक रुख अपनाती है। उन्हें दबाती या हड़काती नहीं है, उलटे उन्हें प्रोत्साहित करती है। असाधारण लोकतांत्रिकता के साथ उन पर मंथन करती है और पूरे विचार-विमर्श के बाद नतीजे पर पहुँचती है ; जिसे सब स्वीकार करते हैं और पूरी ताकत से अमल में लाने में भी जुट जाते हैं। जनवादी केन्द्रीयता इसी का नाम है। 

कम्युनिस्ट आंदोलन के इतिहास में इसकी अनगिनत मिसालें हैं।  बड़े बड़े दिग्गज और कुर्बानियो के प्रतीक नेताओं द्वारा अपनी भिन्न राय के बाद भी समष्टि को व्यक्ति के ऊपर, बहुमत को अल्पमत के ऊपर और देश-जनता और पार्टी हितों को अपने निजी हित और पसंद-नापसंद से ऊपर रखने के न जाने कितने उदाहरण हैं।  भविष्य में भी इस तरह के मौके आएंगे। 

अकेला विचार परिवर्तन नहीं करता, नहीं कर सकता। उसके अनुरूप संगठन और उस संगठन के साथ करोड़ों अवाम की संलग्नता अपरिहार्य होती है।  कहते हैं कि विचार वही ज़िंदा रहता है जिसके लिए लोग मरने के लिए तत्पर होते हैं। यह मरना हमेशा दैहिक कुर्बानी नहीं होता। व्यवहार में इसका अर्थ सामूहिकता में निजता का का लोप होता है। व्यक्ति का समष्टि में विलीनीकरण एक नए तरह के रसायन को जन्म देता है - यही रसायन है जो बदलाव के इंजन का ईंधन है।  तत्व कितने भी मौलिक और शुध्द, कीमती और दुर्लभ क्यों न हो यौगिक तभी बनता है जब रासायनिक क्रिया होती है।  ऊर्जा और नवोन्मेष दोनों की जरूरी शर्त यही है। 

सीपीएम का संविधान अद्भुत रूप से मानवीय और कमाल का लोकतांत्रिक है।  यह कहता है कि कामरेडों के बारे में राय किन्ही इक्कादुक्का घटनाओं के आधार पर नहीं उसके पार्टी सेवा के पूरे रिकॉर्ड और समग्र योगदान के आधार पर बनाई जाएगी।  सोमनाथ दा समकालीन भारतीय राजनीति के क्षितिज के चमकते सितारे थे। सीपीएम के प्रिय और बड़े नेताओ में से एक, अवाम की बहुमूल्य धरोहर। वे दैहिक रूप से आज नहीं रहे मगर नैतिक रूप से हमेशा रहेंगे। 

                                           कामरेड सोमनाथ चटर्जी को लाल सलाम  

 

somnath chatterjee
CPIM
Communist Government
communist

Related Stories

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन मामले को सुनियोजित रूप से ज्ञानवापी मस्जिद-मंदिर के विवाद में बदला गयाः सीपीएम

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम

जम्मू-कश्मीर: अधिकारियों ने जामिया मस्जिद में महत्वपूर्ण रमज़ान की नमाज़ को रोक दिया

कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च


बाकी खबरें

  • कहीं आपकी भी यह समझ तो नहीं कि मुसलमानों की बढ़ती आबादी हिंदुओं को निगल जाएगी!
    अजय कुमार
    कहीं आपकी भी यह समझ तो नहीं कि मुसलमानों की बढ़ती आबादी हिंदुओं को निगल जाएगी!
    15 Jul 2021
    योगी सरकार की नई जनसंख्या नियंत्रण नीति का असली मकसद चुनावी राजनीति में ध्रुवीकरण के लिए हिंदू-मुस्लिम दीवार को और गहरा बनाना है।
  • मोदी की काशी यात्रा: बदहाल ‘विकास’ की हक़ीक़त परदे से ढांपने की कोशिश
    विजय विनीत
    मोदी की काशी यात्रा: बदहाल ‘विकास’ की हक़ीक़त परदे से ढांपने की कोशिश
    15 Jul 2021
    प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के समय नौकरशाही ने बनारस शहर के चेहरे पर चस्पा दाग़ को ढंकने के लिए पूरे शहर में जगह-जगह पैबंद लगा दिए। जितने भी खुले नाले थे, जिसकी बदबू और सड़ांध से समूचा शहर परेशान रहता…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोरी गांव में घरों का तोड़े जाना जारी, राजद्रोह क़ानून पर मुख्य न्यायाधीश के अहम सवाल और अन्य ख़बरें
    15 Jul 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हम बात करेंगे खोरी गांव में जारी मकानों के गिराए जाने, राजद्रोह पर भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा उठाए सवाल और अन्य ख़बरों के बारे में।
  • भारत का संचालन किसके हाथ — शास्त्र/धर्मपुस्तकें या संविधान?
    सुभाष गाताडे
    भारत का संचालन किसके हाथ — शास्त्र/धर्मपुस्तकें या संविधान?
    15 Jul 2021
    विगत कुछ सालों के विभिन्न अदालतों के फैसलों की थोड़ी-सी बेतरतीब चर्चा करते हुए हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि अदालतों ने किस तरह समय-समय पर कानून की हिफाजत का काम किया है।
  • खोरी गांव : पुलिसिया दमन के बीच आज भी जारी रहा तोड़-फोड़, हरियाणा सरकार की पुनर्वास योजना हवा हवाई
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    खोरी गांव : पुलिसिया दमन के बीच आज भी जारी रहा तोड़-फोड़, हरियाणा सरकार की पुनर्वास योजना हवा हवाई
    15 Jul 2021
    फरीदाबाद खोरी गांव में लोग रोते रहे, चिल्लाते-बिलखते रहे किंतु प्रशासन एवं नगर निगम द्वारा चल रही तोड़फोड़ जारी रही। आज यानि गुरुवार को लगभग 1700 घरों को तोड़ दिया गया है। इसका विरोध कर रहे कुल 9 लोगों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License