NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
सोनभद्र नरसंहार : आदिवासियों के प्रति अमानवीय होते समाज और शासन की कहानी
जैसे-जैसे इस मामले की परत दर परत खुलकर सामने आ रही है, सियासत से इसका गाढ़ा संबंध और योगी आदित्यनाथ सरकार की लापरवाही सामने आ रही है।
प्रदीप सिंह
26 Jul 2019
Sonabhadra massacre
Sonabhadra massacre. Image Courtesy: Indian Express

आदिवासी समाज के प्रति हमारे शासन-प्रशासन का क्या नजरिया है यह सोनभद्र नरसंहार से समझा जा सकता है। आदिवासी समाज शासन-सत्ता पर आश्रित होने की बजाय जंगल-जमीन के ही आसरे जीवन यापन करता रहा है। सरकार से बहुत कम उम्मीद रखने के बावजूद जनजातियों के प्रति शासन का व्यवहार अमानवीय रहा है। सोनभद्र के नरसंहार ने हमारे समाज के सामूहिक चरित्र पर सवालिया निशान लगाया है। यकीन नहीं होता कि हम 21वीं सदी में रह रहे हैं। अपने को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहने वाले देश में दिन के उजाले में दस निर्दोष आदिवासियों की हत्या कर दी गई। उत्तर प्रदेश सरकार इस घटना का दोष पूर्व सरकारों के मत्थे मढ़ रही है।  

सोनभद्र नरसंहार के तत्काल बाद ही योगी सरकार सतर्क हो गई थी। विपक्ष इसे प्रदेश सरकार के कामकाज और प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा बनाए, इसके पहले ही प्रदेश सरकार ने इसे विपक्ष के खाते में डाल दिया। योगी सरकार ने विपक्ष को चित्त करने के लिए इस मुद्दे पर राजनीति न करने की सलाह भी दे डाली थी। लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में राजनीति करने का कोई अवसर छोड़ नहीं रहे हैं। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के सोनभद्र जाने पर सरकार ने खूब अड़ंगा लगाया और इस घटना के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा दिया था। लेकिन जैसे-जैसे इस मामले की परत दर परत खुलकर सामने आ रही है, सियासत से इसका गाढ़ा संबंध और योगी आदित्यनाथ सरकार की लापरवाही सामने आ रही है। सोनभद्र के दुद्घी क्षेत्र के विधायक ने जिस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाया है उससे पूरा मामला साफ हो गया है। योगी सरकार यदि समय रहते मामले में कार्रवाई की होती तो 10 लोगों को अपनी जान से हाथ न धोना पड़ता।

इसे भी पढ़ें : सोनभद्र आदिवासी जनसंहार : कौन है इसका ज़िम्मेदार?

सही बात तो यह है कि इस पूरे मामले को सियासत से अलग किया ही नहीं जा सकता है। प्रदेश के पूर्व राज्यपाल सीपीएन सिंह के बड़े भाई महेश प्रसाद नारायण सिंह ने सियासत के बल पर ही सदियों से आदिवासियों के उपयोग वाली जमीन को ट्रस्ट के नाम करा लिया था। और सियासत के कारण ही खूनी भिड़ंत की आहट के बावजूद योगी सरकार ने इस मुद्दे को नजरंदाज किया। ऐसा नहीं है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मामले से अनभिज्ञ थे। मामले की पैरवी भी हो रही थी और जमीन पर कब्जा करने से रक्तपात की भी आशंका थी। संभावित खून-खराबे की आहट को भांपते हुए सोनभद्र के दुद्धी के विधायक ने हरिराम चेरो ने 14 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उभ्भा गांव के आदिवासियों की पैतृक भूमि पर कथित रूप से भूमाफिया द्वारा कब्जा करने और उन्हें फर्जी मामले में फंसाकर परेशान करने की जानकारी दी थी। साथ ही उन्होंने 600 बीघा विवादित जमीन और उसे फर्जी सोसायटी बनाकर भूमि हड़पने के मामले की जांच उच्चस्तरीय एजेंसी से कराने की मांग की थी। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ने  कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

दुद्धी विधायक हरिराम चेरो कहते हैं, “भूमाफिया के दबाव में पुलिस और पीएसी के जवान आदिवासियों को प्रताड़ित करते हैं। ये मेरे विधानसभा का मामला नहीं है, लेकिन मैं आदिवासियों का नेता हूं, इसलिए वहां जन चौपाल लगाकर आदिवासियों ने अपनी समस्या बताई थी। जनसुनवाई के बाद मैंने आदिवासियों की समस्याओं को सीएम के समक्ष रखा था, लेकिन सीएम ने आदिवासियों की फरियाद को अनदेखा कर दिया था। अगर सीएम इस पर कार्रवाई करते तो ऐसी घटना नहीं घटती।”      

भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर भी उभ्भा गांव पहुंचे। नरसंहार में मारे गए लोगों के परिवार के लोगों से मिलने के बाद उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा, “ नरसंहार के बाद गोंड आदिवासी खौफ में जी रहे हैं। उन्हें काफी धमकियां मिल रही हैं। पीडि़तों को सुरक्षा मुहैया कराया जाए। अगर जिला प्रशासन सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकता तो यहां के ग्रामीणों को हथियार का लाइसेंस दिया जाए। ”

उम्भा गांव का यह नरसंहार आदिवासियों पर होने वाले जुल्म की पूरी तस्वीर नहीं है। पूरी तस्वीर बहुत ही भयावह है। अफसोस इस बात का है कि आदिवासियों पर रोज बेइंतहा जुल्म ढाए जा रहे हैं। आज समूचे देश में आदिवासियों के साथ जुल्म-ज्यादती और अन्याय आम बात है। उनकी जमीनों पर जबरन कब्जा करना या उन्हें नक्सली बता कर गोलियों से भून देने का सिलसिला कई दशकों से जारी है। अभी हाल ही में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बारेला समाज के आदिवासियों को जबरन उनके जमीन से बेदखल करने का प्रयास किया गया। भारी विरोध के बाद सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। छत्तीसगढ़ और झारखंड तो आदिवासियों के उत्पीड़न का प्रयोगशाला ही बन गया है। यह अजब संयोग है कि आदिवासी समाज की जहां-जहां बसावट है वहां प्रकृति की विशेष अनुकंपा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और यूपी-बिहार के जिन हिस्सों में आदिवासियों की आबादी है वहां खनिज और वन संपदा पर्याप्त मात्रा में है। आदिवासी वन संपदा के प्राकृतिक रखवाले हैं। लेकिन आज का समूचा विकास मॉडल प्राकृतिक संपदा और खनिजों पर आश्रित है। प्राकृतिक संपदा के अंधाधुंध दोहन में आदिवासी समाज आड़े आ रहा है। आजादी के बाद से ही हमारी सरकारें नौकरशाहों और भूमाफियायों के माध्यम से आदिवासियों को जंगल से बेदखल करके कारपोरेट को जमीन सौंपने का षडयंत्र कर रही है। ताजा घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि सदियों से जल- जंगल–जमीन के सहारे जीवन यापन करने वाले प्रकृति-पुत्रों को जंगल से बेदखल करने के लिए शासन-प्रशासन किसी हद तक जा सकता है।

अधिकारियों के माध्यम से नियम-कानून को धता बताते हुए आदिवासियों को बेदखल करने का खेल सोनभद्र में लंबे समय से चल रहा है। लेकिन इस खेल को समझने के बाद जब आदिवासी समाज ने सामूहिक एकता का परिचय दिया तो उनके सामूहिक नरसंहार को अंजाम दिया गया। पूरा मामला आदिवासियों के उपयोग में आने वाली जमीन पर अवैध कब्जा का है। इस मामले में भी आदिवासियों की पुश्तैनी कब्जा वाले जमीन पर रक्त की नदी बहाने की पटकथा एक नौकरशाह ने ही लिखी थी। पटकथा को अमलीजामा पहनाने के लिए जरुरत थी मन-मुताबिक सरकार के सत्तारूढ़ होने की। भाजपा सरकार के आने के बाद यह आसान हो गया।              

आदिवासियों के हितों के संरक्षण के लिए संविधान के पांचवी और छठी अनुसूची में विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही पी-पेसा कानून-1996 में भी आदिवासी क्षेत्र में स्वशासन का अधिकार दिया गया है। और वनाधिकार अधिनियम-2006 में जंगल के उत्पाद पर आदिवासियों का हक बताया गया है। उक्त तीनों कानूनों को सही तरीके से लागू करके आदिवासियों के हितों की रक्षा की जा सकती है। सोनभद्र की घटना किसी भी सभ्य समाज के माथे पर कलंक के समान है। इस मामले तो दोषियों को सजा मिले ही इसके साथ ही आदिवासियों के लिए बने कानून को सही तरीके से लागू किया जाए। जिससे फिर इस तरह की घटना न घटे। 

Sonabhadra massacre
sonbhadra
sonbhadra killings
tribal communities
sc-st
Uttar pradesh
Yogi Adityanath govt

Related Stories

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

उत्तर प्रदेश: इंटर अंग्रेजी का प्रश्न पत्र लीक, परीक्षा निरस्त, जिला विद्यालय निरीक्षक निलंबित

यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या

यूपी में मीडिया का दमन: 5 साल में पत्रकारों के उत्पीड़न के 138 मामले

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

पीएम को काले झंडे दिखाने वाली महिला पर फ़ायरिंग- किसने भेजे थे बदमाश?

यूपी: ललितपुर बलात्कार मामले में कई गिरफ्तार, लेकिन कानून व्यवस्था पर सवाल अब भी बरकरार!

यूपी: आज़मगढ़ में पीड़ित महिला ने आत्महत्या नहीं की, सिस्टम की लापरवाही ने उसकी जान ले ली!

सोनभद्र नरसंहार कांड: नहीं हुआ न्याय, नहीं मिला हक़, आदिवासियों के मन पर आज भी अनगिन घाव


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में न Modi magic न Yogi magic
    06 Mar 2022
    Point of View के इस एपिसोड में पत्रकार Neelu Vyas ने experts से यूपी में छठे चरण के मतदान के बाद की चुनावी स्थिति का जायज़ा लिया। जनता किसके साथ है? प्रदेश में जनता ने किन मुद्दों को ध्यान में रखते…
  • poetry
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'टीवी में भी हम जीते हैं, दुश्मन हारा...'
    06 Mar 2022
    पाकिस्तान के पेशावर में मस्जिद पर हमला, यूक्रेन में भारतीय छात्र की मौत को ध्यान में रखते हुए पढ़िये अजमल सिद्दीक़ी की यह नज़्म...
  • yogi-akhilesh
    प्रेम कुमार
    कम मतदान बीजेपी को नुक़सान : छत्तीसगढ़, झारखण्ड या राजस्थान- कैसे होंगे यूपी के नतीजे?
    06 Mar 2022
    बीते कई चुनावों में बीजेपी को इस प्रवृत्ति का सामना करना पड़ा है कि मतदान प्रतिशत घटते ही वह सत्ता से बाहर हो जाती है या फिर उसके लिए सत्ता से बाहर होने का खतरा पैदा हो जाता है।
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: धन भाग हमारे जो हमें ऐसे सरकार-जी मिले
    06 Mar 2022
    हालांकि सरकार-जी का देश को मिलना देश का सौभाग्य है पर सरकार-जी का दुर्भाग्य है कि उन्हें यह कैसा देश मिला है। देश है कि सरकार-जी के सामने मुसीबत पर मुसीबत पैदा करता रहता है।
  • 7th phase
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव आख़िरी चरण : ग़ायब हुईं सड़क, बिजली-पानी की बातें, अब डमरू बजाकर मांगे जा रहे वोट
    06 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ़ आख़िरी दौर के चुनाव होने हैं, जिसमें 9 ज़िलों की 54 सीटों पर मतदान होगा। इसमें नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत अखिलेश का गढ़ आज़मगढ़ भी शामिल है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License