NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
#सोशल_मीडिया : लोकसभा चुनावों पर फेसबुक का असर?
2013 में ही एक अध्ययन में यह दावा किया गया था कि फेसबुक 543 में से 160 लोकसभा सीटों पर नतीजे प्रभावित कर सकता है।
सिरिल सैम, परंजॉय गुहा ठाकुरता
05 Mar 2019
सांकेतिक तस्वीर

आईआरआईएस नॉलेज फाउंडेशन और इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने अप्रैल, 2013 में एक अध्ययन किया था। इसमें यह दावा किया गया था कि देश के कुल 543 लोकसभा सीटों में से 160 ‘उच्च प्रभाव’ वाली लोकसभा सीटें फेसबुक से प्रभावित हो सकती हैं।

उस वक्त कई लोगों ने इस दावे को खारिज किया था। लेकिन इस बात में किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि पिछले साढ़े पांच साल में सोशल मीडिया और खास तौर पर व्हाट्सएप के इस्तेमाल में काफी बढ़ोतरी हुई है। अब विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को यह लगता है कि सोशल मीडिया का न सिर्फ शहरी मतदाताओं बल्कि ग्रामीण मतदाताओं पर भी गहरा असर है।

सोशल मीडिया के प्रभावों को लेकर लोगों की अलग-अलग राय है। लेकिन यह बात स्थापित हो गई कि जिन सीटों पर मुकाबला करीबी होता है, उन सीटों पर चुनावी नतीजे सोशल मीडिया से प्रभावित हो रहे हैं। 

अर्थशास्त्री और पूर्व इंवेस्टमेंट बैंकर प्रवीण चक्रवर्ती 2014 लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी के डाटा विश्लेषक के तौर पर काम कर रहे थे। उन चुनावों में 543 सीटों में से भाजपा के 282 लोकसभा सीटें जीतने को उन्होंने अनापेक्षित परिणाम बताया।

भाजपा को उन चुनावों में 31.4 फीसदी वोट मिले थे। इनमें से 90 फीसदी वोट 60 फीसदी लोकसभा क्षेत्रों या स्पष्ट तौर पर कहें तो 299 संसदीय सीटों पर केंद्रित थे। भाजपा के बाकी के 10 फीसदी वोट 254 लोकसभा सीटों पर बिखरे हुए थे। 2019 के 17वें लोकसभा चुनावों को 2014 के मुकाबले और करीबी बताया जा रहा है। इससे इन चुनावों में सोशल मीडिया का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किए जाने की आशंका और बढ़ जाती है।

फेसबुक ने भारत में अपना पहला कार्यालय 2011 में खोला था। उस वक्त भारत में फेसबुक इस्तेमाल करने वालों की संख्या 1.5 करोड़ थी। उस वक्त तक फेसबुक ने व्हाट्सएप को भी नहीं खरीदा था। हैदराबाद के इसके कार्यालय में अधिकांश लोग सेल्स का काम देखते थे।

इसके साल भर बाद फेसबुक ने अन्खी दास को भारत में पॉलिसी डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किया। फेसबुक में आने से पहले वे माइक्रोसॉफ्ट इंडिया में कम्युनिकेशन हेड के तौर पर काम करती थीं। इस दौरान नेताओं, नौकरशाहों और नीति निर्धारकों से उनके बेहतरीन रिश्ते थे। इसलिए उन्हें फेसबुक ने अपने काम के लिए सबसे उपयुक्त समझा।

भारत में वह दौर सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता का था। 2011 में राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ था। 2012 में दिल्ली में एक युवा लड़की के सामूहिक बलात्कार के मामले ने भी मध्यम वर्ग के लोगों को सड़कों पर ला खड़ा किया था। देश ऐसा विरोध प्रदर्शन देख रहा था, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया था।

उस समय की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी संसद की कार्यवाही बाधित कर रही थी। मीडिया में उस समय की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार में शामिल लोगों के भ्रष्टाचार से संबंधित खबरें भरी रहती थीं। कई राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में मनमोहन सिंह की सरकार 2004 में सत्ता में आने के बाद से अपने सबसे बुरे दौर में थी।

 

हमारे सोशल मीडिया सीरीज़ के अन्य आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :-

क्या सोशल मीडिया पर सबसे अधिक झूठ भारत से फैलाया जा रहा है?

जब मोदी का समर्थन करने वाले सुषमा स्वराज को देने लगे गालियां!

फेसबुक पर फर्जी खबरें देने वालों को फॉलो करते हैं प्रधानमंत्री मोदी!

फर्जी सूचनाओं को रोकने के लिए फेसबुक कुछ नहीं करना चाहता!

#सोशल_मीडिया : क्या सुरक्षा उपायों को लेकर व्हाट्सऐप ने अपना पल्ला झाड़ लिया है?

#सोशल_मीडिया : क्या व्हाट्सऐप राजनीतिक लाभ के लिए अफवाह फैलाने का माध्यम बन रहा है?

#सोशल_मीडिया : क्या फेसबुक सत्ताधारियों के साथ है?

#सोशल_मीडिया : क्या नरेंद्र मोदी की आलोचना से फेसबुक को डर लगता है?

#सोशल_मीडिया : कई देशों की सरकारें फेसबुक से क्यों खफा हैं?

सोशल मीडिया की अफवाह से बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा

#socialmedia
#Facebook
Social Media
Real Face of Facebook in India
WhatsApp
Media and Politics
BJP
Narendra modi
General elections2019
2019 आम चुनाव

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • Banaras
    विजय विनीत
    EXCLUSIVE: जब बदहाल हैं तो कैसे कह दें कि मोदी वाले 'अच्छे दिन' आ गए!
    29 Dec 2021
    बनारस में गंगा घाटों के किनारे रहने वाले निषाद समाज की कई औरतों से "न्यूज़क्लिक" ने बातचीत की और यह भी जानने का प्रयास किया कि चुनावी जंग में हवा की रुख किधर मुड़ रहा है तो जवाब मिला, "औरतों की ओर।" …
  • VK
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड की पॉलिटिकल कॉमेडी/ट्रेजडी!: खूब हंसे हरक और धामी और ‘समंदर में तैरने’ निकले हरीश रावत
    29 Dec 2021
     एक बड़ी सी मेज़ के गार्जियन वाली चेयर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बैठे थे। बगल वाली कुर्सी पर, भाजपा हो या कांग्रेस की सरकार, मंत्री बने रहने वाले डॉ.
  • left
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संविधान और जनविरोधी रास्ते पर चल रही है शिवराज सरकार : माकपा
    29 Dec 2021
    माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा है कि विधानसभा सभा सत्र में भी साबित हो गया है कि यह सरकार किस प्रकार विधायकों के भी अभिव्यक्ति के अधिकार का हनन कर रही है।
  • (अ)धर्म संसद: “नरम हिंदुत्व की राजनीति के सहारे कांग्रेस नहीं लड़ सकती भाजपा की सांप्रदायिकता से”
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    (अ)धर्म संसद: “नरम हिंदुत्व की राजनीति के सहारे कांग्रेस नहीं लड़ सकती भाजपा की सांप्रदायिकता से”
    29 Dec 2021
    छत्तीसगढ़ माकपा ने कहा कि एक राजनीतिक पार्टी के रूप में अब कांग्रेस को यह समझ लेना चाहिए कि 'नरम हिंदुत्व' की राजनीति का सहारा लेकर, साधु-संतों की आवभगत करके और राम के नाम का जाप करके भाजपा की…
  • नया भारत-नई शिक्षा!: अमित शाह की ABCD के जवाब में अखिलेश की ABCD
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नया भारत-नई शिक्षा!: अमित शाह की ABCD के जवाब में अखिलेश की ABCD
    29 Dec 2021
    यूपी में अमित शाह समाजवादी पार्टी पर प्रहार करते हुए नई ABCD पढ़ा रहे हैं तो अखिलेश यादव भी उन्हीं के अंदाज़ में पलटवार कर रहे हैं। अब बच्चे कन्फ्यूज़ न हों इसलिए आप ही चुनाव में सही फ़ैसला लेकर उनका…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License