NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सफाई कर्मचारी और जाति का बोझ
राजधानी में सीवर लाइन और मैनहोल की सफाई करने के दौरान पिछले सात सालों में 31 सफाईकर्मियों की मौत हो गई।
सागरिका किस्सू
26 May 2018
 Sanitation Workers

नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) के ठेके पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों ने 24 मई को शास्त्री भवन और रेल भवन जैसे प्रमुख इमारतों के बाहर कचरा फेंक कर विरोध प्रदर्शन किया।

एनडीएमसी कर्मचारी जो कि दयनीय परिस्थितियों से जूझ रहें उन्होंने यह सुनिश्चित किया था कि सरकारी सर्वे 'स्वच्छ सर्वेक्षण 2018' में उनके नगर निकाय को सबसे स्वच्छ छोटे शहर के रूप में स्थान मिले। ठेके पर बहाल किए गए सफाई कर्मचारियों की मांग है कि उनके नौकरी को पक्का किया जाए और वेतन बढ़ाई जाए। एनडीएमसी के चेयरमैन नरेश कुमार द्वारा कार्रवाई का वादा करने के बाद कर्मचारियों ने 24 मई की शाम को विरोध प्रदर्शन ख़त्म कर दिया।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रविंद्र नाथ भारती ने कहा, "हमने विरोध प्रदर्शन वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर किया था। हम यह भी मांग कर रहे हैं कि क़रीब 6,000 अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी नौकरियां दी जानी चाहिए। लगभग 250 अनुबंध श्रमिकों को भी नियमित किया जाना चाहिए।"

हालांकि, स्वच्छता श्रमिकों के जीवन के अंधेरे में गहराई से मजदूरी से परे फैला हुआ है। पिछले सात सालों में राजधानी में सीवर लाइन और मैनहोल की सफाई के दौरान मैनुअल सफाई कर्मचारियों समेत 31 सफाईकर्मियों की मौत हो गई। ज़्यादातर मौत सीवर में प्रवेश करने के दौरान सफाई कर्मचारियों द्वारा हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया, मीथेन जैसे ज़हरीले गैस सांस के जरिए शरीर में जाने से हुई थी।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए एमसीडी स्वच्छता कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संजय गहलोत ने कहा, "ऐसे कई कर्मचारी हैं जो अनुबंध पर पिछले 20 वर्षों से काम कर रहे हैं और उन्हें अभी तक नियमित नहीं किया गया है। उन्हें समय पर मज़दूरी नहीं मिलती है, जिसके कारण वे ठीक से काम करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा, मज़दूरी भी इतना कम है कि वे दैनिक मजदूरों के रूप में काम करते हैं न कि स्थायी कर्मचारियों के रूप में।"

दस सफाई कर्मियों की मौत के बाद अगस्त 2017 में लेफ्टिनेंट-गवर्नर के कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया था:

"नियोक्ता को गैस मास्क, सुरक्षा बेल्ट, हेल्मेट और मशीनीकृत उपकरण प्रदान करना चाहिए, जैसा कि कानूनी रूप से भरे हुए भूमिगत सीवरों की सफाई के खतरनाक काम के लिए अनिवार्य है, और संबंधित दिशानिर्देशों का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए और कर्मचारियों की रक्षा और सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना चाहिए।"

लेकिन कर्मचारियों की स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि सफाई कर्मचारियों की कामकाजी और रहन-सहन की स्थिति बदतर हो रही है जबकि नियोक्ता अपने कर्तव्यों को बेशर्मी से अनदेखा करते हैं। हालांकि मैनुअल स्वेवेंजर्स एंड देयर रिहैविलिटेशन एक्ट 2013 के तहत हाथों से सफाई करने के काम पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, फिर भी इस तरह का काम हो रहा है।

गहलोत ने आगे कहा, "हो रही मौत को देखते हुए भी कर्मचारियों को दस्ताने और मास्क नहीं दिए जाते हैं। अक्सर वे सीवर में काम करते समय घायल हो जाते हैं, और कभी-कभी वे ज़हरीले गैसों के सांस के ज़रिए शरीर में चले के कारण भी मौत के शिकार हो जाते हैं। कोई सुरक्षा नहीं है और न ही कोई जवाबदेही है। अगर वे विरोध नहीं करेंगे, तो वे और क्या करेंगे? "

सफाई कर्मचारी निरंतर जातिगत भेदभाव के शिकार

एक सफाई कर्मचारी के कंधों पर बोझ उनकी जाति है जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। जब कोई कर्मचारी की मौत हो जाती है तो उसकी जाति का उल्लेख नहीं किया जाता है,लेकिन यह सार्वजनिक ज्ञान है जो जातियों से संबंधित है जिन्हें कभी "अस्पृश्य" माना जाता था।

सफाई काम में लगा कोई कर्मचारी 'उच्च' जातियों से कभी नहीं होता है। लेकिन कई पूर्व "अछूत", जो "बहिष्कृत" होते थे या दलित होते थे। वे अभी भी उस काम में फंसे हुए हैं जो सामंती समय से उन्हें सौंपा गया था।

गहलोत ने न्यूज़क्लिक को कहा, "आप इस काम में ब्राह्मणों को कभी नहीं पाएंगे, हमेशा कोई दलित ही होता है जो वाल्मीकि जाति है। सिर्फ उनकी जाति के कारण उनसे व्यवहार ऐसे तरीके से किया जाता है जो सिर्फ अशोभनीय ही नहीं बल्कि अमानवीय है। उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता है और उनकी उपस्थिति को नजरअंदाज कर दिया जाता है।"

जाति और उसके सामाजिक-आर्थिक पदानुक्रम का पिरामिड अभी भी मौजूद है और इस क्रम में दलित अभी भी सबसे निचले स्तर पर हैं।

जैसा कि डॉ बी.आर. अम्बेडकर ने एक बार कहा था, "जाति-बहिष्कृत जाति व्यवस्था का उप-उत्पाद है। जब तक जातियां होंगी तब तक जाति-बहिष्कृत होंगे। जाति व्यवस्था के समाप्त किए बिना जाति-बहिष्कृत बंधनमुक्त नहीं हो सकता।"

Sanitation Workers
NDMC
Manholes

Related Stories

जहांगीरपुरी में चला बुल्डोज़र क़ानून के राज की बर्बादी की निशानी है

संकट की घड़ी: मुस्लिम-विरोधी नफ़रती हिंसा और संविधान-विरोधी बुलडोज़र न्याय

दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कोर्ट ने पूछे कई गंभीर सवाल

जब जहांगीरपुरी में बुलडोज़र के सामने खड़ी हो गईं बृंदा करात...

दिल्ली: सफाई कर्मचारियों के संघर्ष की की बड़ी जीत, निकाले गए कर्मचारियों को वापस दी गईं नौकरियां!

दिल्ली सरकार के विश्वविद्यालय के सफ़ाई कर्मचारियों ने कपड़े उतार कर मुख्यमंत्री आवास पर किया प्रदर्शन!

दिल्ली सरकार के विश्वविद्यालय से निकाले गए सफ़ाईकर्मी, नई ठेका एजेंसी का लिया बहाना

चौथे दिन भी बिहार के सफ़ाई कर्मियों की हड़ताल जारी, बढ़ते जा रहे कूड़े के ढेर

उत्तराखंड में स्वच्छता के सिपाही सड़कों पर, सफाई व्यवस्था चौपट; भाजपा मांगों से छुड़ा रही पीछा

महामारी और अनदेखी से सफ़ाई कर्मचारियों पर दोहरी मार


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 11,499 नए मामले, 255 मरीज़ों की मौत
    26 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.28 फ़ीसदी यानी 1 लाख 21 हज़ार 881 हो गयी है।
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, पांचवां चरण: अयोध्या से लेकर अमेठी तक, राम मंदिर पर हावी होगा बेरोज़गारी का मुद्दा?
    26 Feb 2022
    पांचवें चरण के चुनावों में अयोध्या, प्रयागराज और चित्रकूट.... तीन-तीन धर्म नगरी शामिल हैं, जो हमेशा से चुनावों में भाजपा का बड़ा हथियार रही हैं, इसके बावजूद इस बार बेरोज़गारी और महंगाई भाजपा के लिए…
  • pak
    श्रिया सिंह
    पाकिस्तानी छात्रों का छात्र संगठन पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ जारी संघर्ष को सिंह प्रांत में मिली बड़ी जीत
    26 Feb 2022
    क़रीब 38 साल पहले जनरल ज़िया उल हक़ की सैन्य तानाशाही सरकार के दौरान छात्र संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया था। अब अगर सिंध के गवर्नर इमरान इस्माइल सिंध स्टूडेंट यूनियंस बिल 2019 पर हस्ताक्षर कर देते हैं…
  • human
    संदीपन तालुकदार
    सबसे बड़ा फ़ैमिली ट्री बनने से आसान हुई पलायन और वंशावली की खोज
    26 Feb 2022
    शोधकर्ताओं ने जेनेटिक्स का इस्तेमाल कर अब तक का सबसे बड़ा फ़ैमिली ट्री तैयार किया है। इसके बनने से पूर्वजों की जानकारी और अभी जो ज़िंदा हैं उनसे उनके संबंधों के बारे में जानकारी मिलना आसान हो गया है।
  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: उत्तर प्रदेश का आधे से ज़्यादा रास्ता तय, मणिपुर में भी वोट की जंग
    25 Feb 2022
    इस बार उत्तर ही नहीं पूर्वोत्तर में भी वोट की जंग है। उत्तर प्रदेश अपने चार चरण पूरे कर चुका है और 27 फरवरी को पांचवें चरण का वोट करेगा, जबकि पूर्वोत्तर का अहम राज्य मणिपुर पहले चरण के मतदान के लिए…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License