NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सरदार सरोवर बांध के बढ़ते जल स्तर के विरोध में 'नर्मदा चुनौती सत्याग्रह'
विस्थापितों के उचित पुनर्वास और बांध के गेट खोलने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के नेतृत्व में 25 अगस्त रविवार से छोटा बड़दा में नर्मदा चुनौती सत्याग्रह शुरू हो गया है। मेधा पाटकर अन्य पांच लोगों के साथ अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं और दूसरी ओर छह लोग क्रमिक अनशन कर रहे हैं।
सोनिया यादव
27 Aug 2019
sardar sarovar bandh
Image courtesy: NDTV

बारिश जहां एक ओर राहत लेकर आती है तो वहीं दूसरी ओर इसकी अधिकता भीषण तबाही का मंज़र भी दिखाती है। नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के लगातार बढ़ते जलस्तर ने हजारों परिवारों के जीवन को संकट में डाल दिया है। इंदिरा सागर परियोजना और ओंकारेश्वर परियोजना के बांधों से छोड़े गए पानी का सीधा असर बड़वानी जिले के सरदार सरोवर डूब क्षेत्र पर देखने को मिल रहा है। यहां खेत, मकान, दुकान धीरे-धीरे पानी के जद में आते जा रहे हैं। इसी को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े लोगों और डूब प्रभावितों ने मध्य प्रदेश, गुजरात और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

विस्थापितों के उचित पुनर्वास और बांध के गेट खोलने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के नेतृत्व में 25 अगस्त रविवार से छोटा बड़दा में 'नर्मदा चुनौती सत्याग्रह' शुरू हो गया है। मेधा पाटकर अन्य पांच लोगों के साथ अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं और दूसरी ओर छह लोग क्रमिक अनशन कर रहे हैं।

नर्मदा बचाओ आंदोलन के महेंद्र तोमर ने इस संबंध में न्यूज़क्लिक को बताया, 'अभी भी नर्मदा घाटी में 32 हजार ऐसे परिवार हैं जिनका पुनर्वासन बाकी है। मध्य प्रदेश की पूर्व बीजेपी सरकार ने इसे मानने से इंकार कर दिया था, उनका कहना था की सभी परिवारों का पुनर्वास हो चुका है। हालांकि वर्तमान कमलनाथ सरकार ने इस बात को स्वीकार किया है कि नर्मदा घाटी के 6,000 लोगों का अभी भी पुनर्वास नहीं हुआ है। इन सबके बावजूद गुजरात सरकार और केंद्र सरकार बांध के गेट को बंद रखे हुए है। जिससे जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बगैर पुनर्वास डूब कराना अनुचित और असंवैधानिक है।"

महेंद्र आगे कहते हैं कि, डूब क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पुनर्वास शिविरों को लगाया जाना चाहिए। क्योंकि ऐसे कई हजार परिवार हैं जिन्हें सरकार ने पहले डूब क्षेत्र से बाहर करार दे दिया था लेकिन वास्तव में वो अभी भी डूब क्षेत्र में हैं सरकार उन्हें भी उचित सुविधाएं प्रदान करे, क्योंकि उन इलाकों के हालात खराब हैं।
imsge 2.jpg
मध्यप्रदेश में लगातार बारिश का दौर जारी रहने से नर्मदा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। वहीं दूसरी ओर गुजरात सरकार द्वारा पानी की निकासी न किए जाने से बांध का जलस्तर 133.5 मीटर को पार कर गया है। इसके चलते बांध का पानी अलिराजपुर, धार और बड़वानी के गांवों तक पहुंच रहा है।

इस सत्याग्रह में हिस्सा ले रहे राहुल ने न्यू़ज़क्लिक को बताया, ‘अगर गुजरात सरदार सरोवर को तय लक्ष्य यानी 138 मीटर तक भरता है तो 192 गांवों और एक कस्बे के पूरी तरह डूबने की संभावना है। सरकार ने इन गांवों के लोगों की पुनर्वास प्रक्रिया पूरी नहीं की है और उन्हें डुबाया जा रहा है।’

गौरतलब है कि इसी माह की शुरुआत में जब सरदार सरोवर बांध का जलस्तर 131. 5 मीटर किया गया था, तब 31 गांवों तक पानी पहुंच गया था। इसके विरोध में राजघाट पर आंदोलन हुआ और बाद में गुजरात ने सरदार सरोवर के गेट खोलकर पानी की निकासी की थी, जिससे गांवों में भरा पानी कम हो गया था।

आंदोलनकारियों का कहना है कि 133 मीटर के ऊपर जल स्तर को नहीं बढ़ाया जाए और सरदार सरोवर बांध के गेट को खोल दिया जाए क्योंकि गुजरात राज्य में भी बारिश के चलते सभी बांध भरे जा चुके हैं, जिससे कि गुजरात को पानी को लेकर कोई समस्या नहीं होना है। मध्यप्रदेश भी बिजली को लेकर खुद ही सक्षम है। इन सभी बातों को मद्देनजर रखते हुए न तो गुजरात को पानी की जरूरत है और न ही मध्य प्रदेश को। इसके अलावा पूर्ण पुनर्वास अब तक नहीं हो पाया है ऐसे में सरदार सरोवर बांध के गेट को खोलकर मध्यप्रदेश के ग्रामीणों को डूब से बचाना चाहिए।

प्रदर्शन स्थल पर संवाददाताओं से बातचीत में मेधा पाटकर ने कहा, 'हमने राज्य सरकार को अपने मुद्दों से अवगत करा दिया है। डूब क्षेत्र के विभिन्न गांवों में पुर्नवास शिविरों को लगाया जाना चाहिए। इस बांध के विस्थापितों का अब तक ठीक से पुनर्वास नहीं किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि पुनर्वास का मतलब प्रभावित परिवार को पांच लाख रुपये देना नहीं है। उन्हें आजीविका भी प्रदान की जानी चाहिए। एनबीए नेता ने कहा कि छोटा बड़दा गांव के कम से कम 1,000 लोग अब भी उचित पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, "यहां के लोग (छोटा बड़दा) अब भी सरकार द्वारा अपनी जमीन के अधिग्रहण का इंतजार कर रहे हैं।’’

इस बीच, जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय ने सोमवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर डूब प्रभावितों की स्थिति पर चिंता जताई और बांध का जलस्तर 122 मीटर किए जाने की मांग की है।

पत्र में कहा गया है, ‘नर्मदा घाटी के सरदार सरोवर के हजारों विस्थापित परिवार गांव-गांव में डूब का सामना कर रहे हैं। इस डूब का सामना करने के दौरान अब तक निमाड़ और आदिवासी क्षेत्र के तीन गरीब किसानों की मृत्यु हो चुकी है। जलाशय में 139 मीटर तक पानी भरने का विरोध आपकी सरकार द्वारा भी किया गया है, फिर भी गुजरात और केंद्र शासन से ही जुड़े नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने न विस्थापितों के पुनर्वास की, न ही पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की परवाह की है, और न ही सत्य रिपोर्ट या शपथ पत्र पेश किए हैं।’

पत्र में आगे कहा गया है, ‘हजारों परिवारों का सम्पूर्ण पुनर्वास भी मध्य प्रदेश में अधूरा है। पुनर्वास स्थलों पर सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में विस्थापित अपने मूल गांव में खेती, आजीविका डूबते देख संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में आज की मध्य प्रदेश सरकार लोगों का साथ नहीं छोड़ सकती। ऐसा हमारा विश्वास है।’

बता दें कि, 27 मई, 2019 को मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव ने पत्र लिखकर नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण को बताया था कि 76 गांवों में 6000 परिवार डूब क्षेत्र में निवासरत हैं। 8500 सामान्य अर्जियां तथा 2952 खेती से संबंधित अर्जियां लंबित हैं। अगर सिर्फ सरकारी आंकड़ों को माने, तो भी ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि सरकार इतने परिवारोें की जिंदगी कैसे दांव पर लगा सकती है। 

इसे भी पढ़ें : मध्य प्रदेश : आज भी जारी है नर्मदा की लड़ाई, बिना पुनर्वास हटने से इंकार

Sardar sarovar Dam
Narmada challenge satyagraha
Displaced people
heavy rains
Narmada Bachao Andolan
Mahendra Tomar
Madhya Pradesh

Related Stories

परिक्रमा वासियों की नज़र से नर्मदा

कड़ी मेहनत से तेंदूपत्ता तोड़ने के बावजूद नहीं मिलता वाजिब दाम!  

मनासा में "जागे हिन्दू" ने एक जैन हमेशा के लिए सुलाया

‘’तेरा नाम मोहम्मद है’’?... फिर पीट-पीटकर मार डाला!

कॉर्पोरेटी मुनाफ़े के यज्ञ कुंड में आहुति देते 'मनु' के हाथों स्वाहा होते आदिवासी

एमपी ग़ज़ब है: अब दहेज ग़ैर क़ानूनी और वर्जित शब्द नहीं रह गया

मध्यप्रदेशः सागर की एग्रो प्रोडक्ट कंपनी से कई गांव प्रभावित, बीमारी और ज़मीन बंजर होने की शिकायत

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग


बाकी खबरें

  • Women Hold Up More Than Half the Sky
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    महिलाएँ आधे से ज़्यादा आसमान की मालिक हैं
    19 Oct 2021
    हाल ही में जारी हुए श्रम बल सर्वेक्षण पर एक नज़र डालने से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली 73.2% महिला श्रमिक कृषि क्षेत्र में काम करती हैं; वे किसान हैं, खेत मज़दूर हैं और कारीगर हैं।
  • Vinayak Damodar Savarkar
    डॉ. राजू पाण्डेय
    बहस: क्या स्वाधीनता संग्राम को गति देने के लिए सावरकर जेल से बाहर आना चाहते थे?
    19 Oct 2021
    बार-बार यह संकेत मिलता है कि क्षमादान हेतु लिखी गई याचिकाओं में जो कुछ सावरकर ने लिखा था वह शायद किसी रणनीति का हिस्सा नहीं था अपितु इन माफ़ीनामों में लिखी बातों पर उन्होंने लगभग अक्षरशः अमल भी किया।
  • Pulses
    शंभूनाथ शुक्ल
    ‘अच्छे दिन’ की तलाश में, थाली से लापता हुई ‘दाल’
    19 Oct 2021
    बारिश के चलते अचानक सब्ज़ियों के दाम बढ़ गए हैं। हर वर्ष जाड़ा शुरू होते ही सब्ज़ियों के दाम गिरने लगते थे किंतु इस वर्ष प्याज़ और टमाटर अस्सी रुपए पार कर गए हैं। खाने के तेल और दालें पहले से ही…
  • migrant worker
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कश्मीर में प्रवासी मज़दूरों की हत्या के ख़िलाफ़ 20 अक्टूबर को बिहार में विरोध प्रदर्शन
    19 Oct 2021
    "अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद घाटी की स्थिति और खराब हुई है। इससे अविश्वास का माहौल कायम हुआ है, इसलिए इन हत्याओं की जिम्मेवारी सीधे केंद्र सरकार की बनती है।”
  • Non local laborers waiting for train inside railwaysation Nowgam
    अनीस ज़रगर
    कश्मीर में हुई हत्याओं की वजह से दहशत का माहौल, प्रवासी श्रमिक कर रहे हैं पलायन
    19 Oct 2021
    30 से अधिक हत्याओं की रिपोर्ट के चलते अक्टूबर का महीना सबसे ख़राब गुज़रा है, जिसमें 12 नागरिकों की हत्या शामिल हैं, जिनमें से कम से कम 11 को आतंकवादियों ने क़रीबी टारगेट के तौर पर मारा है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License