NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
श्रम विधेयकों के ख़िलाफ़ देशव्यापी प्रदर्शन, 25 को किसान-मज़दूर एक साथ करेंगे हल्ला बोल
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTU), स्वतंत्र संघों और महासंघों के आह्वान पर 23 सितंबर को मजदूर विरोधी और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ एक लाख से अधिक जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Sep 2020
gh

देश भर में 23 सितंबर को मजदूर विरोधी और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ एक लाख से अधिक जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। इस प्रदर्शन का आह्वान केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTU) और स्वतंत्र संघों और महासंघों ने किया था। इसके अलावा देशभर के सभी किसान संगठनों ने संयुक्त रूप से 25 सिंतबर को प्रदर्शन का आह्वान किया है।

यह प्रदर्शन संसद द्वारा तीन श्रम विधेयकों को मंजूरी देने ख़िलाफ़ हुए। इसमें औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक 2020, सामाजिक सुरक्षा 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तों कोड, 2020 पर संहिता बिल शामिल है।

इस विधेयकों को शनिवार 19 सितंबर को लोकसभा में पेश किया गया था और इसे मंगलवार को पास कर दिया था। जिसके बाद राज्यसभा में बुधवार को पेश किया गया था वहां भी सरकार ने इसे पास करा लिया। अब इस विधयेक पर राष्ट्रपति की अंतिम मुहर लगनी है, इसके बाद यह विधयेक क़ानून के रूप में लागू होंगे। इस विधेयक के खिलाफ ही देश भर के मज़दूर ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे है।

राष्ट्रीय राजधानी में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के नेता अशोक सिंह; ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अमरजीत कौर; हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू; सीटू की हेमलता; ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस के आरके शर्मा; स्व कर्मचारी महिला संघ की लता; ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस की राजीव डिमरी; लेफ्ट प्रोग्रेसिव फ्रंट के जेपी सिंह और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस के आरएस डागर समेत अपना विरोध दर्ज कराने के लिए जंतर-मंतर के पास सैकड़ों कार्यकर्ता इकट्ठा हुए।

ट्रेड यूनियन के नेताओं ने इस सरकार की तुलना औपनिवेशिक काल के शासन से की और कहा कि "बीजेपी सरकार ब्रिटिशों के नक्शेकदम पर चल रही है, असंवैधानिक साधनों का उपयोग करके फिर से श्रमिकों और किसानों को कॉरपोरेट के हितों के लिए गुलाम बनाया जा रहा और यह श्रमिकों और किसानों का कर्तव्य है कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए सरकार को उसके मनसूबे में हरा दें। ”

निचले सदन में तीन विधेयकों के पारित होने के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया था कि, "केंद्र सरकार की ये नीतियां देश के मेहनतकश लोगों के हितों के खिलाफ हैं।"

आपको बता दें कि श्रमिक कोड को कृषि बिलों के पारित होने के बाद पेश किया गया था।

सीटू ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि “फार्म बिल और लेबर बिल कुछ भी नहीं है, बल्कि ब्रजेन एक्ट कामगार वर्ग को 19 वीं सदी की तरह ही गुलामी की स्थिति में धकेलने के लिए हैं, यह हमारे छोटे और मध्यम किसानों को कॉर्पोरेट कृषि व्यवसाय में धकलने की साज़िश है। यह एक प्रकार से थोक के भाव सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण कर हमारी आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और किसान मज़दूर को मौत के कुऍं में धकेलने जैसा है।"

बुधवार को विरोध प्रदर्शन की सफलता पर कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए, सीटू ने कहा, “कोरोना के बढ़ने के बावजूद मज़दूरों ने भारी भीड़ के माध्यम से, मज़दूर वर्ग ने घोषणा की है कि वे इन विनाशकारी नीतियों को नहीं चलने देगा। "

 

Image removed.

ReplyForward

 

kisan bill protest
all india potest by mazdoor kisan
all india protest on 25 september

Related Stories


बाकी खबरें

  • समीना खान
    ज़ैन अब्बास की मौत के साथ थम गया सवालों का एक सिलसिला भी
    16 May 2022
    14 मई 2022 डाक्टर ऑफ़ क्लीनिकल न्यूट्रीशन की पढ़ाई कर रहे डॉक्टर ज़ैन अब्बास ने ख़ुदकुशी कर ली। अपनी मौत से पहले ज़ैन कमरे की दीवार पर बस इतना लिख जाते हैं- ''आज की रात राक़िम की आख़िरी रात है। " (राक़िम-…
  • लाल बहादुर सिंह
    शिक्षा को बचाने की लड़ाई हमारी युवापीढ़ी और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई का ज़रूरी मोर्चा
    16 May 2022
    इस दिशा में 27 मई को सभी वाम-लोकतांत्रिक छात्र-युवा-शिक्षक संगठनों के संयुक्त मंच AIFRTE की ओर से दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आयोजित कन्वेंशन स्वागत योग्य पहल है।
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: किसानों की दुर्दशा बताने को क्या अब भी फ़िल्म की ज़रूरत है!
    16 May 2022
    फ़िल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी का कहना है कि ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि किसान का बेटा भी एक फिल्म बना सके।
  • वर्षा सिंह
    उत्तराखंड: क्षमता से अधिक पर्यटक, हिमालयी पारिस्थितकीय के लिए ख़तरा!
    16 May 2022
    “किसी स्थान की वहनीय क्षमता (carrying capacity) को समझना अनिवार्य है। चाहे चार धाम हो या मसूरी-नैनीताल जैसे पर्यटन स्थल। हमें इन जगहों की वहनीय क्षमता के लिहाज से ही पर्यटन करना चाहिए”।
  • बादल सरोज
    कॉर्पोरेटी मुनाफ़े के यज्ञ कुंड में आहुति देते 'मनु' के हाथों स्वाहा होते आदिवासी
    16 May 2022
    2 और 3 मई की दरमियानी रात मध्य प्रदेश के सिवनी ज़िले के गाँव सिमरिया में जो हुआ वह भयानक था। बाहर से गाड़ियों में लदकर पहुंचे बजरंग दल और राम सेना के गुंडा गिरोह ने पहले घर में सोते हुए आदिवासी धनसा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License