NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
श्रम विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ मज़दूरों का हल्ला बोल... देशभर में हड़ताल का व्यापक असर
हड़ताल के चलते देश के विभिन्न हिस्सों में फैक्ट्रियों और अन्य संस्थानों में ताले पड़े हैं और मज़दूर-कर्मचारी सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Jan 2019
#WorkersStrikeBack

सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के विरोध में 10 श्रमिक संघों के कर्मचारी आज से 2 दिन की हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल का पूरे देश में व्यापक असर देखने को मिल रहा है।

शिक्षा, स्वास्थ्य, टेलीकॉम, कोल, स्टील, बैंकिंग, बीमा और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के मज़दूर-कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं। इनके अलावा कृषि श्रमिक, बागान श्रमिक भी हड़ताल के समर्थन में हैं। श्रमिक संघों का दावा है कि इस हड़ताल में 20 करोड़ मज़दूर-कर्मचारी शामिल हैं।

भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC), अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), हिंद मजदूर सभा (HMS), भारतीय व्यापार संघों (CITU), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC) ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन कमेटी (TUCC), सेल्फ एम्प्लॉइड वुमेन्स एसोसिएशन (SEWA), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC) ने मजदूरों के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद सितंबर 2018 को आयोजित किया गया था,जिसके बाद दो दिवसीय हड़ताल की घोषणा की गई।

श्रमिकों की प्रमुख मांगों में आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाना, नई और अच्छी नौकरियों को पैदा करना, न्यूनतम मजदूरी 18,000 रूपये प्रति माह करना और सबको न्यूनतम 6,000 रुपये प्रति माह पेंशन देना, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेचने के लिए सभी कदमों पर रोक लगाना और विभिन्न मार्गों के माध्यम से शेयरों को बेचना और एकमुश्त निजीकरण पर रोक लगाना, सभी के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज, श्रम कानूनों को सख्ती से लागू करना और उनके कमजोर करने की कोशिशों पर रोक लगाना, ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करना आदि मांगें शामिल हैं।

हड़ताल के चलते देश के विभिन्न हिस्सों में फैक्ट्रियों और अन्य संस्थानों में ताले पड़े हैं और मज़दूर-कर्मचारी सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं। आमतौर पर पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण है लेकिन कुछ जगहों से झड़प की भी खबरें सामने आई हैं।

देश की राजधानी दिल्‍ली में भी हड़ताल समर्थकों ने पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया में प्रदर्शन किया।

हड़ताल का सबसे ज़्यादा असर केरल, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में देखने को मिल रहा है। 

पश्चिम बंगाल में मज़दूर-कर्मचारियों ने राजधानी कोलकाता सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले फूंके। कुछ जगह ट्रेनें भी रोकीं गईं। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कई जगह हड़ताली मज़दूरों को रोकने की कोशिश की। पश्चिम बंगाल के पहावड़ा, सिलीगुड़ी, वर्द्धमान, बीरभूम, उत्तर और दक्षिण 24 परगना में तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं और हड़ताल समर्थकों के बीच झड़पें हुईं हैं। राज्य के कुछ इलाकों में पुलिस ने भी हड़ताल समर्थकों को डराने की कोशिश की। दक्षिण कोलकाता के जादवपुर इलाके में वरिष्ठ सीपीएम नेता सुजान चक्रवर्ती के साथ कई अन्य हड़ताल समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

केरल में भी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। केरल के कोच्चि और त्रिवेंद्रम में केंद्रीय श्रमिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। केरल में हड़ताल के दौरान तिरुवनंतपुरम, शोरनुर और अन्य रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों को रोका गया। बस कर्मचारी भी आज हड़ताल में शामिल हुए और बसें सड़कों पर नहीं उतरीं। इसी तरह ऑटो रिक्शा भी नहीं चल रहे हैं जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। सबरीमाला मंदिर के श्रद्धालु हड़ताल से प्रभावित न हों, इसलिए केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) विभिन्न स्थानों से पम्बा के लिए बसें चला रही है। हालांकि, केएसआरटीसी की बसें अन्य मार्गों पर नहीं चल रही हैं।

ओडिशा में भी हड़ताल का प्रभाव देखा जा रहा है। राज्‍य की राजधानी भुवनेश्‍वर में हड़ताल समर्थकों के प्रदर्शन के कारण राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 16 पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ।

कर्नाटक में कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की बसें भी नहीं चल रही हैं। मैसूर बेंगलुरु, हुबली-धारवाड़ सहित अन्य स्थानों पर हड़ताल का मिलाजुला असर रहा। कई जिलों में स्कूल और कॉलेजों की छुट्टी कर दी गई और परीक्षाएं भी रद्द कर दी गईं।

मुंबई में बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति और यातायात (बेस्ट) के 33,000 से अधिक कर्मचारी अपनी कई मांगों को लेकर मध्यरात्रि से हड़ताल पर चले गए जिससे शहर में बस सेवा ठप पड़ गई। कर्मचारी बेहतर वेतन, घाटे में चल रही बेस्ट का बजट बृहन्मुंबई महानगर पालिका में जोड़े जाने और नए भत्ते समझौते पर विचार-विमर्श सहित अनेक मांगें कर रहे हैं।

देशभर में बैंक कर्मचारी भी दो दिन इस हड़ताल में शामिल हैं।

उधर, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर ने दावा किया, 'असम, मेघालय, कर्नाटक, मणिपुर, बिहार, राजस्‍थान, पंजाब, गोवा, झारखंड, छत्‍तीसगढ़ और हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में हड़ताल का पूरा असर है।' उन्‍होंने कहा क‍ि इस हड़ताल को कुछ राज्‍यों के ट्रांसपोर्ट विभाग, टैक्‍सी चालक और जेएनयू के छात्र भी अपना समर्थन दे रहे हैं।

केंद्रीय श्रमिक संगठन न्‍यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू करने की मांग कर रहे हैं। ये संगठन सार्वजनिक और सरकारी क्षेत्र में निजीकरण का भी विरोध कर रहे हैं।

दो दिवसीय हड़ताल को उन आंदोलनों की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है जो देश भर में श्रमिक वर्ग के नेतृत्व में हुए हैं। 2 सितंबर, 2015 और 2 सितंबर, 2016 के आंदोलन सफलता के तौर पर देखे जा रहे हैं। इसके बाद, 9 से 11 नवंबर, 2017 को तीन दिवसीय महापड़ाव का आयोजन किया गया था, जिसमें देश भर में मजदूर बड़ी संख्या में एकत्रित हुए थे। 17 जनवरी, 2018 को फिर से, लगभग 80 लाख स्कीम वर्कर ने नौकरी की नियमितीकरण और 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन द्वारा सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर एक आम हड़ताल की थी जिसमें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और श्रमिकों की स्थिति शामिल थी। इनके अलावा, विभिन्न क्षेत्रों में यूनियनों ने कई आंदोलनों को गति दी है।

#WorkersStrikeBack
#श्रमिकहड़ताल
Workers Strike
workers protest
Anti Labour Policies
Narendra modi
Modi government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • indian economy
    अजय कुमार
    क्या 2014 के बाद चंद लोगों के इशारे पर नाचने लगी है भारत की अर्थव्यवस्था और राजनीति?
    18 Nov 2021
    क्या आपको नहीं लगता कि चंद लोगों के पास मौजूद बेतहाशा पैसे की वजह से भारत की पूरी राजनीति चंद लोगों के हाथों की कठपुतली बन चुकी है।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    निर्माण कार्य बंद होने पर मज़दूरों ने की मुआवज़े की मांग, श्रीनगर एनकाउंटर और अन्य ख़बरें
    17 Nov 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी मज़ार रहेगी निर्माण कार्य बंद होने पर मज़दूर संकट में, श्रीनगर एनकाउंटर और अन्य ख़बरों पर।
  •  कॉप-26 के इरादे अच्छे, पर गरीब देशों की आर्थिक मदद पर कुछ नहीं
    न्यूज़क्लिक टीम
    कॉप-26 के इरादे अच्छे, पर ग़रीब देशों की आर्थिक मदद पर कुछ नहीं
    17 Nov 2021
    न्यूज़क्लिक की इस ख़ास पेशकश में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह और न्यूज़क्लिक के मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्थ ने कॉप-26 में जलवायु परिवर्तन पर किए गए एग्रीमेंट पर चर्चा की है।
  • congress
    सुहित के सेन
    राहुल जहां हिंदुत्व को धर-दबोचने में सफल, लेकिन कांग्रेस सांगठनिक तौर पर अभी भी कमज़ोर
    17 Nov 2021
    जहाँ एक तरफ विचारधारा चुनावों में सफलता पाने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार है, वहीं इसके लिए एक सांगठनिक नींव अपनेआप में अपरिहार्य है।
  • judge
    भाषा
    लखीमपुर हिंसा: एसआईटी जांच की निगरानी पूर्व न्यायाधीश राकेश कुमार जैन करेंगे
    17 Nov 2021
    पीठ ने राज्य सरकार द्वारा दिए गए आईपीएस अधिकारियों के नामों पर भी गौर किया और जांच के लिए गठित एसआईटी में तीन आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License