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भारत
राजनीति
#श्रमिकहड़ताल : हरियाणा 8-9 जनवरी की हड़ताल के लिए तैयार
हड़ताल की तैयारियों में राज्य में ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी संगठनों के राज्य व जिला स्तर पर कन्वेंशन हो चुके हैं और स्थानीय स्तर पर संयुक्त अभियान जारी हैं। असंगठित क्षेत्र में भी हड़ताल की ज़बरदस्त तैयारी है।
मुकुंद झा
07 Jan 2019
फाइल फोटो
Image Courtesy: Indian Express

हरियाणा पिछले वर्षों में अपने मज़दूर आंदोलन के लिए चर्चा में रहा है। इन आंदोलनों के कारण भाजपा सरकार  को मज़दूरों की बात सुननी पड़ी और अपनी मज़दूर विरोधी नीतियों को वापस लेना पड़ा। चाहे वो हरियाणा के स्कीम वर्कर का लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन हो, जिसके बाद उनके मानदेय में सरकार ने बढ़ोतरी की, चाहे बिजली विभाग का आंदोलन। हरियाणा सरकार ने  बिजली विभाग के निजीकरण का प्रयास किया परन्तु कर्मचारियों के सशक्त प्रतिरोध के कारण सरकार को यहाँ भी मुँह की खानी पड़ी थी। इतना ही नहीं हरियाणा ने कुछ महीने पहले ही अपने इतिहास की सबसे बड़ी रोडवेज़ हड़ताल देखी थी शायद ये सबसे खास बात थी कि राज्य के अन्य कर्मचारियों के साथ तकलीफ के बावजूद हरियाणा की आम जनता भी इन कर्मचारियों के साथ एकजुट थी। ये आंदोलन सरकार द्वारा रोड़वेज के निजीकरण के प्रयास के खिलाफ था। अंत में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ये हड़ताल ख़त्म हुई थी। इसके अलावा कई आंदोलन हुए चाहे वो गर्मी चौकीदार का या फिर निर्माण मजदूरों का, इन सभी को लेकर मज़दूरों ने एक लंबा संघर्ष किया है और कई में जीत भी हासिल की।

लेकिन अभी भी राज्य के मजदूर कर्मचारियों की परेशानियों का हल नहीं हुआ है, जिसको लेकर संघर्ष जारी है। चाहे वो ठेकेदारी प्रथा हो या लगातार श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है, इन सभी मांगों को लेकर हरियाणा के लाखों मजदूर 8-9 जनवरी को दस केन्द्रीय ट्रेड यूनियन की देशव्यापी हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। इस हड़ताल को लेकर हरियाणा में ट्रेड यूनियनों और सर्व कर्मचारी का कहना है की हड़ताल की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार की हड़ताल पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सफ़ल होगी।  इस हड़ताल में देश के लगभग 20 करोड़ मजदूर और कर्मचारी भाग लेंगे।

मज़दूर यूनियनों का कहना है कि हरियाणा सरकार ने पूंजीपतियों के हित में श्रम कानूनों में कुछ बदलाव मार्च 2017 में किए थे। इसके कई बुरे प्रभाव हरियाणा के श्रमिक पर पड़े जिसको लेकर श्रमिक वर्ग संघर्ष पथ पर है। हरियाणा के श्रमिक वर्ग के मुख्य मुद्दे :-

1. राज्य में तालाबंदी के बड़े मामले :- राज्य में लगातार बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में तालाबंदी की जा रही है जिससे हज़ारों की संख्या में मजदूरों का रोजगार छिन रहा है। पिछले वर्ष में 9 बड़ी कम्पनियाँ बंद हुई हैं। हाल ही में अभी मानसेर स्थित ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनी एंड्योरेंस पर आखिरकार दो जनवरी को ताला मर दिया गया। फैक्ट्री लॉकआउट के लिए एंड्योरेंस का प्रबंधन पिछले छह महीने से कोशिश कर रहा था। प्रबंधन ने 21 दिसम्बर 2018 को एक जनवरी 2019 तक शटडाउन का नोटिस लगा दिया। यहां के मज़दूरों का कहना है कि प्रबंधन की ये साजिश थी, इसी शटडाउन के दौरान 26 दिंसबर को पक्के कर्मचारियों के खाते में बकाया राशि डाल दी गई। इसके बाद कर्मचारियों के घर लॉकआउट का नोटिस भेज दिया गया, जिसके खिलाफ 2 जनवरी से कर्मचारी यूनियन और फैक्ट्री मजदूर फैक्ट्री गेट के बाहर बैठे हैं।

2. रेगुलर मजदूरों को हटाकर ठेका मजदूरों को रखा जा रहा है :-  उद्योग मालिक जिस यूनिट में रेगुलर मजदूर हैं उस यूनिट को बंद कर रहे हैं और नई यूनिट में पूरा काम ठेका मजदूरों से करवा रहे हैं। इसके अलावा स्थायी मजदूरों का हिसाब करके उसी यूनिट में ठेके के तहत काम शुरू कर रहे हैं। मज़दूर यूनियनों का कहना है कि आज निजी उद्योगों में करीब 75 प्रतिशत कार्य ठेके पर करवाया जा रहा है।

3. फैक्ट्री में मज़दूर यूनियन रजिस्ट्रेशन  का सवाल :-  मज़दूर यूनियन का कहना है कि पिछले लंबे समय से यूनियन रजिस्ट्रेशन के सवाल पर ही बड़े आंदोलन करने पड़ते हैं और कई आंदोलनों में मज़दूरों को भारी प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।

4. श्रम कानून का उल्लंघन :- पूरे देश में ही श्रम कानून का पालन कैसे होता है हम जानते हैं। हरियाणा भी इससे अछूता नहीं है। छोटे-उद्योगों में कोई श्रम कानून लागू नहीं है। अच्छी-खासी संख्या में उद्योग रजिस्टर्ड भी नहीं है, लेकिन वो अफसरों कि मिलीभगत से चल रहें हैं। वहाँ 12 घण्टे की पाली में मजदूर काम करते हैं।

5. मजदूरों कि सुरक्षा :-  बड़ी संख्या में औद्योगिक दुर्घटना होती है। मज़दूर मारे जाते हैं परंतु मज़दूरों को कोई भी नहीं पूछता और न ही उन्हें किसी प्रकार का कोई लाभ मिलता है क्योंकि फैक्टरी रजिस्ट्रड नहीं होती और अगर कोई फैक्ट्री मजदूर है तो मजदूर का नाम दर्ज नहीं होता।

6. आवास की भारी समस्या :- हरियाणा की फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों के लिए आवास की भारी समस्या है क्योंकि उद्योगों में कार्यरत 85-90 फीसदी मज़दूर प्रवासी हैं।

7.  नोटबंदी ने हज़ारों मजदूरों कि रोजी रोटी छीन ली :- नोटबंदी की बड़ी मार पड़ी है। टेक्सटाइल उद्योग में मजदूरों की बड़े पैमाने पर छंटनी हुई और बहुत यूनिट बंद हो गईं।

इन हालात में भी मजदूर आंदोलन की राह पर हैं। गुडगांव, रोहतक में कई बड़ी यूनिटों मे आंदोलन हुए। केंद्रीय ट्रेड यूनियन के मांगपत्र के साथ-साथ हरियाणा के मजदूरों के ये कुछ मुख्य मुद्दे हैं जिनको लेकर वो देशव्यापी हड़ताल में शामिल होंगे।

हरियाणा के मजदूर आंदोलन

सीटू के राज्य महासचिव जय भगवान ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि स्कीम वर्कर्स जिसमें आशा, आँगनवाड़ी, मिड डे मील वर्कर्स के बड़े आंदोलन हुए हैं, जिसके बाद सरकार को मानदेय में बढ़ोतरी करनी पड़ी। हमारे आंदोलन का ही परिणाम है कि देश में तीनों योजनाओं में सबसे ज्यादा मानदेय हरियाणा के कर्मचारी को मिलता है। इस तरह हमने ग्रामीण चौकीदारों के मानदेय में बढ़ोतरी कराई और  निर्माण मजदूरों के बड़े आंदोलन हुए और उनमें जीत हासिल की।

हड़ताल की तैयारी को लेकर बात करते हुए जय भगवान ने कहा की हड़ताल की तैयारियों में राज्य में ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी संगठनों के राज्य व जिला स्तर पर कन्वेंशन हो चुके हैं और स्थानीय स्तर पर संयुक्त अभियान जारी हैं। हरियाणा के बड़े औद्योगिक क्षेत्र गुड़गांव, रेवाड़ी, फरीदाबाद, सोनीपत में केंद्रीय श्रमिक संगठनों व उनसे संबंधित यूनियनों, स्वतंत्र यूनियनों की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इन जिलों में उद्योग वार यूनियनों ने अपने प्रबंधकों को हड़ताल के नोटिस दिए हैं। गुड़गांव में ट्रेड यूनियनों की ओर से कमिश्नर को भी हड़ताल का संयुक्त रूप से नोटिस दिया गया है।

उन्होंने बताया कि सीटू हरियाणा की राज्य इकाई हड़ताल को ऐतिहासिक रूप से कामयाब बनाने के लिए जुटी हुई है। औद्योगिक क्षेत्र में गेट मीटिंगों व शिफ्टों के दौरान मजदूरों को सम्बोधित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस हड़ताल की सबसे बड़ी बात है कि असंगठित क्षेत्र में भी हड़ताल की जबरदस्त तैयारी है। निर्माण मजदूरों में ब्लॉक व यूनिट के स्तर तक अभियान जारी है। स्कीम वर्कर जैसे आशा, आँगनवाड़ी, मिड डे मील की तमाम इकाइयां प्रत्येक वर्कर को हड़ताल में उतारने के लिए जुटी हुई हैं।

इसके साथ ही कई जिलों में सर्व कर्मचारी संघ के साथ मिलकर जत्थे की टीमें बनाकर बड़े गाँवों व कस्बों में आम सभाएं की जा रही हैं। ग्रामीण सफाईकर्मी, चौकीदार, भट्टा मजदूर, वन मजदूर, रेहड़ी-पटरी मजदूरों, ऑटो रिक्शा चालकों सहित मजदूरों की विभिन्न श्रेणियों में हड़ताल के लिए ज़ोरदार अभियान चल रहा है। हरियाणा में मज़दूरों की हिस्सेदारी के लिहाज से यह हड़ताल पुराने सारे रिकार्ड तोड़ने जा रही है।

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