NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
#श्रमिकहड़ताल : हरियाणा 8-9 जनवरी की हड़ताल के लिए तैयार
हड़ताल की तैयारियों में राज्य में ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी संगठनों के राज्य व जिला स्तर पर कन्वेंशन हो चुके हैं और स्थानीय स्तर पर संयुक्त अभियान जारी हैं। असंगठित क्षेत्र में भी हड़ताल की ज़बरदस्त तैयारी है।
मुकुंद झा
07 Jan 2019
फाइल फोटो
Image Courtesy: Indian Express

हरियाणा पिछले वर्षों में अपने मज़दूर आंदोलन के लिए चर्चा में रहा है। इन आंदोलनों के कारण भाजपा सरकार  को मज़दूरों की बात सुननी पड़ी और अपनी मज़दूर विरोधी नीतियों को वापस लेना पड़ा। चाहे वो हरियाणा के स्कीम वर्कर का लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन हो, जिसके बाद उनके मानदेय में सरकार ने बढ़ोतरी की, चाहे बिजली विभाग का आंदोलन। हरियाणा सरकार ने  बिजली विभाग के निजीकरण का प्रयास किया परन्तु कर्मचारियों के सशक्त प्रतिरोध के कारण सरकार को यहाँ भी मुँह की खानी पड़ी थी। इतना ही नहीं हरियाणा ने कुछ महीने पहले ही अपने इतिहास की सबसे बड़ी रोडवेज़ हड़ताल देखी थी शायद ये सबसे खास बात थी कि राज्य के अन्य कर्मचारियों के साथ तकलीफ के बावजूद हरियाणा की आम जनता भी इन कर्मचारियों के साथ एकजुट थी। ये आंदोलन सरकार द्वारा रोड़वेज के निजीकरण के प्रयास के खिलाफ था। अंत में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ये हड़ताल ख़त्म हुई थी। इसके अलावा कई आंदोलन हुए चाहे वो गर्मी चौकीदार का या फिर निर्माण मजदूरों का, इन सभी को लेकर मज़दूरों ने एक लंबा संघर्ष किया है और कई में जीत भी हासिल की।

लेकिन अभी भी राज्य के मजदूर कर्मचारियों की परेशानियों का हल नहीं हुआ है, जिसको लेकर संघर्ष जारी है। चाहे वो ठेकेदारी प्रथा हो या लगातार श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है, इन सभी मांगों को लेकर हरियाणा के लाखों मजदूर 8-9 जनवरी को दस केन्द्रीय ट्रेड यूनियन की देशव्यापी हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। इस हड़ताल को लेकर हरियाणा में ट्रेड यूनियनों और सर्व कर्मचारी का कहना है की हड़ताल की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार की हड़ताल पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सफ़ल होगी।  इस हड़ताल में देश के लगभग 20 करोड़ मजदूर और कर्मचारी भाग लेंगे।

मज़दूर यूनियनों का कहना है कि हरियाणा सरकार ने पूंजीपतियों के हित में श्रम कानूनों में कुछ बदलाव मार्च 2017 में किए थे। इसके कई बुरे प्रभाव हरियाणा के श्रमिक पर पड़े जिसको लेकर श्रमिक वर्ग संघर्ष पथ पर है। हरियाणा के श्रमिक वर्ग के मुख्य मुद्दे :-

1. राज्य में तालाबंदी के बड़े मामले :- राज्य में लगातार बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में तालाबंदी की जा रही है जिससे हज़ारों की संख्या में मजदूरों का रोजगार छिन रहा है। पिछले वर्ष में 9 बड़ी कम्पनियाँ बंद हुई हैं। हाल ही में अभी मानसेर स्थित ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनी एंड्योरेंस पर आखिरकार दो जनवरी को ताला मर दिया गया। फैक्ट्री लॉकआउट के लिए एंड्योरेंस का प्रबंधन पिछले छह महीने से कोशिश कर रहा था। प्रबंधन ने 21 दिसम्बर 2018 को एक जनवरी 2019 तक शटडाउन का नोटिस लगा दिया। यहां के मज़दूरों का कहना है कि प्रबंधन की ये साजिश थी, इसी शटडाउन के दौरान 26 दिंसबर को पक्के कर्मचारियों के खाते में बकाया राशि डाल दी गई। इसके बाद कर्मचारियों के घर लॉकआउट का नोटिस भेज दिया गया, जिसके खिलाफ 2 जनवरी से कर्मचारी यूनियन और फैक्ट्री मजदूर फैक्ट्री गेट के बाहर बैठे हैं।

2. रेगुलर मजदूरों को हटाकर ठेका मजदूरों को रखा जा रहा है :-  उद्योग मालिक जिस यूनिट में रेगुलर मजदूर हैं उस यूनिट को बंद कर रहे हैं और नई यूनिट में पूरा काम ठेका मजदूरों से करवा रहे हैं। इसके अलावा स्थायी मजदूरों का हिसाब करके उसी यूनिट में ठेके के तहत काम शुरू कर रहे हैं। मज़दूर यूनियनों का कहना है कि आज निजी उद्योगों में करीब 75 प्रतिशत कार्य ठेके पर करवाया जा रहा है।

3. फैक्ट्री में मज़दूर यूनियन रजिस्ट्रेशन  का सवाल :-  मज़दूर यूनियन का कहना है कि पिछले लंबे समय से यूनियन रजिस्ट्रेशन के सवाल पर ही बड़े आंदोलन करने पड़ते हैं और कई आंदोलनों में मज़दूरों को भारी प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।

4. श्रम कानून का उल्लंघन :- पूरे देश में ही श्रम कानून का पालन कैसे होता है हम जानते हैं। हरियाणा भी इससे अछूता नहीं है। छोटे-उद्योगों में कोई श्रम कानून लागू नहीं है। अच्छी-खासी संख्या में उद्योग रजिस्टर्ड भी नहीं है, लेकिन वो अफसरों कि मिलीभगत से चल रहें हैं। वहाँ 12 घण्टे की पाली में मजदूर काम करते हैं।

5. मजदूरों कि सुरक्षा :-  बड़ी संख्या में औद्योगिक दुर्घटना होती है। मज़दूर मारे जाते हैं परंतु मज़दूरों को कोई भी नहीं पूछता और न ही उन्हें किसी प्रकार का कोई लाभ मिलता है क्योंकि फैक्टरी रजिस्ट्रड नहीं होती और अगर कोई फैक्ट्री मजदूर है तो मजदूर का नाम दर्ज नहीं होता।

6. आवास की भारी समस्या :- हरियाणा की फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों के लिए आवास की भारी समस्या है क्योंकि उद्योगों में कार्यरत 85-90 फीसदी मज़दूर प्रवासी हैं।

7.  नोटबंदी ने हज़ारों मजदूरों कि रोजी रोटी छीन ली :- नोटबंदी की बड़ी मार पड़ी है। टेक्सटाइल उद्योग में मजदूरों की बड़े पैमाने पर छंटनी हुई और बहुत यूनिट बंद हो गईं।

इन हालात में भी मजदूर आंदोलन की राह पर हैं। गुडगांव, रोहतक में कई बड़ी यूनिटों मे आंदोलन हुए। केंद्रीय ट्रेड यूनियन के मांगपत्र के साथ-साथ हरियाणा के मजदूरों के ये कुछ मुख्य मुद्दे हैं जिनको लेकर वो देशव्यापी हड़ताल में शामिल होंगे।

हरियाणा के मजदूर आंदोलन

सीटू के राज्य महासचिव जय भगवान ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि स्कीम वर्कर्स जिसमें आशा, आँगनवाड़ी, मिड डे मील वर्कर्स के बड़े आंदोलन हुए हैं, जिसके बाद सरकार को मानदेय में बढ़ोतरी करनी पड़ी। हमारे आंदोलन का ही परिणाम है कि देश में तीनों योजनाओं में सबसे ज्यादा मानदेय हरियाणा के कर्मचारी को मिलता है। इस तरह हमने ग्रामीण चौकीदारों के मानदेय में बढ़ोतरी कराई और  निर्माण मजदूरों के बड़े आंदोलन हुए और उनमें जीत हासिल की।

हड़ताल की तैयारी को लेकर बात करते हुए जय भगवान ने कहा की हड़ताल की तैयारियों में राज्य में ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी संगठनों के राज्य व जिला स्तर पर कन्वेंशन हो चुके हैं और स्थानीय स्तर पर संयुक्त अभियान जारी हैं। हरियाणा के बड़े औद्योगिक क्षेत्र गुड़गांव, रेवाड़ी, फरीदाबाद, सोनीपत में केंद्रीय श्रमिक संगठनों व उनसे संबंधित यूनियनों, स्वतंत्र यूनियनों की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इन जिलों में उद्योग वार यूनियनों ने अपने प्रबंधकों को हड़ताल के नोटिस दिए हैं। गुड़गांव में ट्रेड यूनियनों की ओर से कमिश्नर को भी हड़ताल का संयुक्त रूप से नोटिस दिया गया है।

उन्होंने बताया कि सीटू हरियाणा की राज्य इकाई हड़ताल को ऐतिहासिक रूप से कामयाब बनाने के लिए जुटी हुई है। औद्योगिक क्षेत्र में गेट मीटिंगों व शिफ्टों के दौरान मजदूरों को सम्बोधित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस हड़ताल की सबसे बड़ी बात है कि असंगठित क्षेत्र में भी हड़ताल की जबरदस्त तैयारी है। निर्माण मजदूरों में ब्लॉक व यूनिट के स्तर तक अभियान जारी है। स्कीम वर्कर जैसे आशा, आँगनवाड़ी, मिड डे मील की तमाम इकाइयां प्रत्येक वर्कर को हड़ताल में उतारने के लिए जुटी हुई हैं।

इसके साथ ही कई जिलों में सर्व कर्मचारी संघ के साथ मिलकर जत्थे की टीमें बनाकर बड़े गाँवों व कस्बों में आम सभाएं की जा रही हैं। ग्रामीण सफाईकर्मी, चौकीदार, भट्टा मजदूर, वन मजदूर, रेहड़ी-पटरी मजदूरों, ऑटो रिक्शा चालकों सहित मजदूरों की विभिन्न श्रेणियों में हड़ताल के लिए ज़ोरदार अभियान चल रहा है। हरियाणा में मज़दूरों की हिस्सेदारी के लिहाज से यह हड़ताल पुराने सारे रिकार्ड तोड़ने जा रही है।

#WorkersStrikeBack
#श्रमिकहड़ताल
workers protest
Formal sector workers
Informal sector workers
Anti Labour Policies
all india strike

Related Stories

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

"जनता और देश को बचाने" के संकल्प के साथ मज़दूर-वर्ग का यह लड़ाकू तेवर हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ है

मध्य प्रदेश : आशा ऊषा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से पहले पुलिस ने किया यूनियन नेताओं को गिरफ़्तार

झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी


बाकी खबरें

  • Hemant Soren
    अनिल अंशुमन
    झारखंड-बिहार: स्थानीय भाषा को लेकर विवाद कहीं महज़ कुर्सी की राजनीति तो नहीं?
    22 Sep 2021
    “किसी भी प्रदेश में वहां की स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलना संविधान सम्मत है। लेकिन अब इस पर भी राजनीति होना संदेह पैदा करता है कि कहीं ये विवाद भी कोई सांप्रदायिक ध्रुविकरण करा कर बुनियादी सवालों…
  • Varanasi
    विजय विनीत
    बदहाली: रेशमी साड़ियां बुनने वाले हाथ कर रहे हैं ईंट-पत्थरों की ढुलाई, तल रहे हैं पकौड़े, बेच रहे हैं सब्ज़ी
    22 Sep 2021
    बनारस से ग्राउंड रिपोर्ट: विश्वविख्यात बनारस की रेशमी साड़ियों का ताना-बाना बिखर रहा है। इसी ताने-बाने में सिसक रही है बुनकरों की जिंदगी। जानने के लिए आपको लिए चलते हैं बनारस की संकरी गलियों में..
  • school
    सौम्या गुप्ता, सी. सरतचंद
    स्कूलों को वक़्त से पहले खोलने की अनुमति क्यों नहीं दी जानी चाहिए
    22 Sep 2021
    केवल स्कूलों को फिर से खोलने से असमान शिक्षा प्रणाली अधिक समान नहीं हो जाएगी जब तक कि सरकारें शिक्षा पर अपने ख़र्च को नहीं बढ़ाती हैं स्थिति में बदलाव लाना असंभव है। स्कूल खोलने से कोविड म्यूटेशन का…
  • SCO
    एम. के. भद्रकुमार
    ईरान की एससीओ सदस्यता एक बेहद बड़ी बात है
    22 Sep 2021
    तेहरान का एससीओ में ज़ोरदार स्वागत के साथ शामिल किया जाना और इस संगठन का जल्दबाज़ी के साथ विस्तार किया जाना दिखाता है कि बीजिंग और मॉस्को के बीच ज़बरदस्त तालमेल है।
  • यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    22 Sep 2021
    योगी जी का विकास का सारा जश्न दरअसल अर्थव्यवस्था के ध्वंस और कोविड से हलकान, हैरान-परेशान जनता को मुंह चिढ़ाने और उसके जले पर नमक छिड़कने जैसा है। कुछ विश्लेषकों ने ठीक नोट किया है कि "यूपी विकासोत्सव…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License