NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
स्टेच्यू ऑफ यूनिटी: निर्माण के लिए कई पीएसयू के सीएसआर फंड का किया दुरुपयोग
सीएसआर के नाम पर पीएसयू द्वारा किये गये भारी व्यय कंपनी अधिनियम में सूचीबद्ध विनिर्देशों का पालन नहीं करते।
सुमेधा पाल
08 Nov 2018
Translated by महेश कुमार
statue of unity

सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति या स्टेच्यू ऑफ यूनिटी (एकता की प्रतिमा) की 182 मीटर ऊंची मूर्ति नकदी की कमी झेल रहे पीएसयू (सार्वजानिक क्षेत्र इकाइयों) के लिए दिए गये सामाजिक फण्ड का दुरुपयोग कर बनायी गयी हैI 7 अगस्त 2018 को संसद में पेश की गयी सीएजी (भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक) की एक रिपोर्ट ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमपीएनजी) के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत पीएसयू द्वारा सामाजिक जिम्मेदारी निधि (सी.एस.आर.) के उपयोग में गंभीर अनियमितताएँ पायी।

रिपोर्ट के मुताबिक, पांच पीएसयू ने - जिनमें तेल और प्राकृतिक गैस निगम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और ऑयल इंडिया लिमिटेड शामिल हैं- ने एक साथ मिलकर 146.83 करोड़ रुपये का योगदान दियाI इसमें (ओएनजीसी: 50 करोड़ रुपये, आईओसीएल: 21.83 रुपये करोड़ रुपये, बीपीसीएल, एचपीसीएल, तेल: 25 करोड़ रुपये प्रत्येक) योगदान रहा। वित्त पोषण कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के लिए निर्धारित राशि से यह राशी के लिए व्यय दी गयी थी। इसके अलावा, गुजरात की 14 पीएसयू ने इसी परियोजना के लिए सीएसआर के तहत 104.88 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि सीएसआर के नाम पर कंपनियों द्वारा किए गए भारी व्यय कंपनी अधिनियम में सूचीबद्ध विनिर्देशों से मेल नहीं खाते हैं।

सीएसआर नीति में कंपनियों द्वारा शामिल की जा सकने वाली गतिविधियां निम्नलिखित हैं:

(i) अत्यधिक भूख, गरीबी और कुपोषण उन्मूलन से संबंधित गतिविधियां, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छता सहित स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना (स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा स्थापित भारत सरकार कोष में योगदान सहित) और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करवाने हेतु;

(ii) शिक्षा को बढ़ावा देना, जिसमें विशेष शिक्षा और रोज़गार जो कौशल में वृद्धि करे विशेष रूप बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों, और दिव्यांगों की आजीविका वृद्धि परियोजनाओं को आगे बढ़ाए आदि शामिल है;

(iii) लिंग समानता को बढ़ावा देना, महिला सशक्तिकरण, महिलाओं और अनाथों के लिए घरों और छात्रावास बनाना; वृद्ध आयु के लोगों के लिए आश्रम बनाना, डे केयर सेंटर और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसी अन्य सुविधाएं स्थापित करना और सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों द्वारा सामना की जाने वाली असमानताओं को कम करने के उपाय करना;

(iv) पर्यावरणीय स्थिरता, पारिस्थितिकीय संतुलन, वनस्पतियों और जीवों की सुरक्षा, पशु कल्याण, कृषि वानिकी, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और मिट्टी, वायु और पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए (केन्द्रीय स्वच्छ गंगा फंड में योगदान सहित) गंगा नदी के कायाकल्प के लिए जिसे सरकार ने स्थापित किया है);

(v) ऐतिहासिक विरासत और कला के कार्यों की इमारतों और स्थलों की बहाली सहित राष्ट्रीय विरासत, कला और संस्कृति की सुरक्षा; सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना; पारंपरिक और हस्तशिल्प के प्रचार और विकास के लिए:

(vi) सशस्त्र बलों के दिग्गजों, युद्ध विधवाओं और उनके आश्रितों के लाभ के लिए उपाय करना;

 (vii) ग्रामीण खेल, राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त खेल, पैरालीम्पिक खेल और ओलंपिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण देना;

(viii) प्रधान मंत्री की राष्ट्रीय राहत निधि या सामाजिक-आर्थिक विकास और अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के लिए राहत और कल्याण के लिए केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किसी भी अन्य फंड में योगदान देना;

 (ix) शैक्षणिक संस्थानों के भीतर स्थित प्रौद्योगिकी इनक्यूबेटर को प्रदान किए गए योगदान या धन जो केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित हैं;

 (एक्स) ग्रामीण विकास परियोजनाएं; तथा

(xi) झोपड़पट्टी क्षेत्र का विकास शामिल है।

2,989 करोड़ रुपये की परियोजना के उद्‍घाटन ने सीएसआर के पैसे के उपयोग के लिए दिशानिर्देशों में की गयी कल्पना के से काफी अलग परिणाम दिखाए हैं। 75,000 से अधिक आदिवासियों के लिए जो अपनी आजीविका के खोने के डर से, जिन्होंने मूर्ति के निर्माण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए, मोदी की असाधारणता का प्रदर्शन स्थानीय जनजातीय आबादी के लिए शोक का दिन था।

पीएसयू ने सामाजिक जिम्मेदारी निधि को क्यों दिया?

रिपोर्ट के अनुसार, पहले से ही नकदी की कमी से परेशान पीएसयू केंद्रीय और राज्य सरकारों दोनों द्वारा मूर्ति के निर्माण की दिशा में धन के योगदान करने के लिए भारी दबाव में थे। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए, भारत सरकार की पूर्व सचिव ई ए एस शर्मा ने कहा, "सरदार पटेल का भारत की एकता में योगदान है, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन वे खुद अपनी मूर्ति बनाने के लिए सार्वजनिक धन के इतने बड़े खर्च का समर्थन नहीं करते। जैसा कि सीएजी ने बताया है, संबंधित पीएसयू के हिस्से में सीएसआर के तहत इस तरह के व्यय को लेकर अनियमितता है, जैसा कि कंपनी अधिनियम की धारा 135 के तहत प्रस्तावित है। यह आश्चर्य की बात है कि न तो इनमें से किसी भी पीएसयू की ऑडिट समिति, न ही स्वतंत्र निदेशकों, और न ही अन्य निदेशकों ने इस तरह के अनियमित व्यय पर सवाल उठाया है, जाहिर है कि अधिकारियों के प्रतिशोध के डर से उन्होने ऐसा नही किया। "

सरकार द्वारा पीएसयू की बांह-मोड़ने के कृत्य से ऊपर उल्लिखित 19 पीएसयू के कॉर्पोरेट शासन की प्रक्रियाओं में पूरी तरह से टूटन में स्पष्ट हो जाता है। प्रक्रियात्मक रूप से, ऑडिट समितियां संबंधित प्रबंधन को मोदी सरकार के सामने झुकने से रोकने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग कर सकती थीं। हालांकि, ऐसा नहीं किया गया। कंपनी अधिनियम की धारा 149 के तहत, स्वतंत्र निदेशकों को शेयरधारकों के हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी है, लेकिन वे इस मामले में ऐसा करने में असफल रहे।

ओएनजीसी ने यह कहकर योगदान को उचित ठहराया कि परियोजना में शिक्षा को बढ़ावा देने, और नर्मदा नदी के तटों के विकास जैसी गतिविधियां शामिल हैं। बीपीसीएल, एचपीसीएल और आईओसीएल के प्रबंधन ने सीएजी को उनके जवाब में कहा कि परिपत्र सं. 21/2014 एमसीए द्वारा जारी किए गए, उन्होंने कंपनी अधिनियम 2013 की अनुसूची VII में उल्लिखित विषयों के सार को लेते हुए उदारतापूर्वक गतिविधि की व्याख्या की। इसके जवाब में, सरकारी लेखा परीक्षक ने स्पष्ट रूप से स्पष्ट किया कि 'सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता' में योगदान गुजरात सरकार की 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' परियोजना के लिए ट्रस्ट (एसवीपीआरईटी) परियोजना राष्ट्रीय विरासत, कला और संस्कृति (कंपनी अधिनियम 2013 की अनुसूची VII के अनुसार अनुमोदित सीएसआर गतिविधि) की रक्षा के उद्देश्य से एक परियोजना के लिए योगदान के रूप में इस्तेमाल नहीं की जा सकती है, क्योंकि यह विरासत की संपत्ति नहीं थी। पीएसयू पर पिछले कुछ महीनों से यह मामला बनाया जा रहा था। एक एजेंडा नोट जिसे अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक द्वारा अनुमोदित किया गया था, और अप्रैल में ओएनजीसी बोर्ड द्वारा अनुमोदित किया गया था, ने बताया कि तेल और प्राकृतिक गैस कॉर्प (ओएनजीसी) और इंडियन ऑयल कॉर्प (आईओसी) अपने सीएसआर में से प्रत्येक को 50 करोड़ रुपये का योगदान देगा। अन्य लाभकारी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को 25 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। मार्च 2017 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सभी तेल और गैस कंपनियों को "सहयोगी मोड" में परियोजना का समर्थन करने के लिए निर्देश दिए थे। सीएजी रिपोर्ट मोदी सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर करने के पैटर्न को उजागर करती है। पीएसयू की बाँह मोड़ने की प्रकृति और मूर्ति के लिए सार्वजनिक धन क इस्तेमाल बिना किसी दण्ड के डर से किया गया दुरुप्योग गंभीर आपत्तियां आमंत्रित करता है।

कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय अब चर्चा में है, क्योंकि संबंधित पीएसयू प्रबंधन के साथ-साथ ऑडिट समितियों और स्वतंत्र निदेशकों के खिलाफ निवारक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय पर दबाव बनाया जा रहा है।

*यह एक विकसित होती खबर है।

statue of unity
CSR funds
PSUs
Narendra modi
Modi government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License