NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
अर्थव्यवस्था
सतत विकास के पैरोकारों को अर्थशास्त्र का नोबेल
येल यूनिवर्सिटी के 77 साल के अर्थशास्त्री विलियम डी नोर्दहॉस और स्टर्न स्कूल ऑफ़ बिजनेस के 62 साल के अर्थशास्त्री पॉल रोमर को अर्थशास्त्र की दुनिया में दीर्घकालीन विश्लेषण के लिए नोबेल दिए जाने की घोषणा की गयी है।
अजय कुमार
10 Oct 2018
अर्थशास्त्र के नोबेल विजेता।
Image Courtesy: ndtv

तकरीबन सभी मानते हैं कि दुनिया के विकास की दिशा अर्थव्यवस्था की चाल-ढाल पर निर्भर करती है। इसलिए अगर दुनिया को सही दिशा में मोड़ना है तो यह जरूरी है कि अर्थव्यवस्था को सही तरह से नियंत्रित किया जाए। साल 2018 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिया जाने वाला नोबेल पुरस्कार भी इसी सोच से जुड़ा है।

अर्थशास्त्र में दो लोगों को नोबेल दिए जाने की घोषणा कि गयी है। एक हैं येल यूनिवर्सिटी के 77 साल के अर्थशास्त्री विलियम डी नोर्दहॉस और दूसरे हैं स्टर्न स्कूल ऑफ़ बिजनेस के 62 साल के अर्थशास्त्री पॉल रोमर। इनमें एक का काम जलवायु परिवर्तन से जुड़ा हुआ है और एक का काम टेक्नोलॉजी से जुड़ा हुआ है। ये दोनों ही अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं। इन्हें अर्थशास्त्र की दुनिया में दीर्घकालीन विश्लेषण के लिए नोबेल दिए जाने की घोषणा की गयी है।

विलियम को उनके जलवायु परिवर्तन पर किये गए काम  के लिए जाना जाता है। तकरीबन साल 1972 से विलियम ग्रीन एकाउंटिंग पर काम कर रहे हैं। यानी अर्थव्यवस्था की खाता-बही में पर्यावरण को भी शामिल किया जाए। यह समझने की कोशिश की जाए की आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण नुकसान कितना हो रहा है। इस समझ तक पहुँचने के लिए पर्यावरणीय नुकसान को मापने के लिए पैमाना बनाना बहुत मुश्किल है। विलियम ने अपने साथी के साथ पहली बार इस नुकसान को मापने के लिए डायनामिक इंटीग्रेटेड क्लाइमेट- इकॉनमी मॉडल पैमाना बनाया। पहली बार यह बताने की कोशिश की कि दुनिया के आर्थिक विकास के साथ होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की लागत क्या होती है। विलियम की कोशिशों की वजह से ही पर्यावरण के अंतःसरकारी पैनल में ग्रीन एकाउंटिंग की बात शामिल की गयी। इसके साथ विलियम ने ही सबसे पहली बार पर्यावरण को बचाने के लिहाज से ग्रीन टैक्स की बात कही थी। उस समय इस पुरस्कार की उपयोगिता और अहम हो जाती है, जब विश्व स्तर पर पर्यावरण की अन्तः सरकारी पैनल ने यह रिपोर्ट पेश की हो कि दुनिया का तापमान अगर औद्योगिक काल से पहले के तापमान से डेढ़ डिग्री से अधिक हुआ तो दुनिया के जलवायु के मिजाज पर भयंकर खतरा पैदा होने की पूरी संभवना है। ऐसे समय में विलियम को दिया गया यह पुरस्कार जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को प्रतीकात्मक तौर पर दर्शाता है।

पॉल की कहानी भी कुछ ऐसी है। पॉल को अर्थव्यवस्था और इनोवेशन के बीच बनने वाले सम्बन्ध को विश्लेषित करने के लिए इस साल का नोबेल दिया जा रहा है। पॉल कहते हैं कि टेक्नोलॉजी की वजह से लोगों की जिन्दगी में अहम बदलाव आये हैं। टेक्नोलॉजी की वजह से जो कुछ भी हो सकता है, वह हमारे नियंत्रण में हो सकता है, अगर उस ख़ास टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दें जिसकी सबको जरूरत है, जिसकी वजह से सभी की जिन्दगी में जरूरी बदलाव आ सकते हैं। इसके लिए सामूहिक तौर पर काम करना जरूरी होगा, सभी के लिए एक जैसा नियम बनाने की जरूरत होगी, सभी तक शिक्षा पहुँचाने की जरूरत होगी। ऐसा करने पर सभी के जीवन में तेजी से बदलाव आएंगे। इसके लिए यह भी जरूरी है कि टेक्नोलॉजी का प्रसार दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने में बिना किसी रोक टोक के होता रहे। उदाहरण के तौर पर यह सोचकर देखिये कि अगर फर्मासुटिकल (दवा क्षेत्र) में होने वाले विकास दुनिया के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में न पहुंचे तो क्या हो। इसलिए यह जरूरी है कि हर देश के नीति निर्माता इस पर भी काम करें कि आखिरकार वह क्या बाधाएं हैं, जिनकी वजह से जरूरी टेक्नोलॉजी एक देश से दूसरे देश में नहीं पहुंचते हैं। इसके साथ पॉल रोमर चार्टर सिटी के विचार के लिए भी जाने जाते हैं। पॉल कहते हैं कि दुनिया में ऐसे आर्थिक क्षेत्र भी होने चाहिए जो पूरी तरह से कानून के नियम से संचालित हो और जिन कानूनों का निर्माण सभी के हित को ध्यान में रखकर किया जाए। जैसे बिजली की जरूरत सबको है तो ऐसा कानून बनें जिससे बिजली सबको मिल पाए।

इस तरह से कहा जा सकता है कि इस साल का अर्थशास्त्र का नोबेल उन्हें दिया गया है जो आर्थिक विकास के बजाय सतत विकास पर काम कर रहे हैं। जिनकी मान्यताओं में अर्थशास्त्र तो है लेकिन ऐसा अर्थशास्त्र नहीं है जो केवल कुछ लोगों के लिए हो बल्कि ऐसा अर्थशास्त्र है जिसमें अभी से लेकर आने वाले मानवीय पीढ़ियों तक सभी की जरूरतें पूरी होती रहे।

2018 nobel prize in economic science
economics nobel
Paul Romer
william nordhaus
green economy
climate change

Related Stories

विश्व खाद्य संकट: कारण, इसके नतीजे और समाधान

जलवायु परिवर्तन : हम मुनाफ़े के लिए ज़िंदगी कुर्बान कर रहे हैं

लगातार गर्म होते ग्रह में, हथियारों पर पैसा ख़र्च किया जा रहा है: 18वाँ न्यूज़लेटर  (2022)

दुनिया भर की: गर्मी व सूखे से मचेगा हाहाकार

जलविद्युत बांध जलवायु संकट का हल नहीं होने के 10 कारण 

संयुक्त राष्ट्र के IPCC ने जलवायु परिवर्तन आपदा को टालने के लिए, अब तक के सबसे कड़े कदमों को उठाने का किया आह्वान 

आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा

समय है कि चार्ल्स कोच अपने जलवायु दुष्प्रचार अभियान के बारे में साक्ष्य प्रस्तुत करें

जलवायु शमन : रिसर्च ने बताया कि वृक्षारोपण मोनोकल्चर प्लांटेशन की तुलना में ज़्यादा फ़ायदेमंद

विश्व जल दिवस : ग्राउंड वाटर की अनदेखी करती दुनिया और भारत


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन संकट, भारतीय छात्र और मानवीय सहायता
    01 Mar 2022
    यूक्रेन में संकट बढ़ता जा रहा है। यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने मंगलवार को छात्रों सहित सभी भारतीयों को उपलब्ध ट्रेन या किसी अन्य माध्यम से आज तत्काल कीव छोड़ने का सुझाव दिया है।
  • Satellites
    संदीपन तालुकदार
    चीन के री-डिज़ाइंड Long March-8 ने एक बार में 22 सेटेलाइट को ऑर्बिट में भेजा
    01 Mar 2022
    Long March-8 रॉकेट चीन की लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी की अकादमी में बना दूसरा रॉकेट है।
  • Earth's climate system
    उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: अब न चेते तो कोई मोहलत नहीं मिलेगी
    01 Mar 2022
    आईपीसीसी ने अपनी रिपोर्ट में साफ़ कहा है कि जलवायु परिवर्तन से आर्थिक दरार गहरी होगी, असमानता में इजाफ़ा होगा और ग़रीबी बढ़ेगी। खाने-पीने की चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ेंगे और श्रम व व्यापार का बाजार…
  • nehru modi
    डॉ. राजू पाण्डेय
    प्रधानमंत्रियों के चुनावी भाषण: नेहरू से लेकर मोदी तक, किस स्तर पर आई भारतीय राजनीति 
    01 Mar 2022
    चुनाव प्रचार के 'न्यू लो' को पाताल की गहराइयों तक पहुंचता देखकर व्यथित था। अचानक जिज्ञासा हुई कि जाना जाए स्वतंत्रता बाद के हमारे पहले आम चुनावों में प्रचार का स्तर कैसा था और तबके प्रधानमंत्री अपनी…
  • रवि शंकर दुबे
    पूर्वांचल की जंग: यहां बाहुबलियों के इर्द-गिर्द ही घूमती है सत्ता!
    01 Mar 2022
    यूपी में सत्ता किसी के पास भी हो लेकिन तूती तो बाहुबलियों की ही बोलती है, और पूर्वांचल के ज्यादातर क्षेत्रों में उनका और उनके रिश्तेदारों का ही दबदबा रहता है। फिर चाहे वो जेल में हों या फिर जेल के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License