NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कटाक्ष: खाली कुर्सियों का डर न कहो इसको!
अब यह तो विपक्ष वालों की सरासर बेईमानी है कि पीएम जी के संदेश में से थैंक्यू को छोडक़र, ‘जिंदा लौट आया’ को ही पकडक़र बैठ गए हैं।… और प्लीज, पीएम जी की नहीं हुई सभा में खाली कुर्सियों के ताने मारना बंद करें।
राजेंद्र शर्मा
09 Jan 2022
कटाक्ष: खाली कुर्सियों का डर न कहो इसको!

ये तो विरोधियों की घनघोर टाइप की ज्यादती है। कह रहे हैं कि मोदी जी ने पंजाब का अपना दौरा बीच में ही छोड़ा तो छोड़ा, पर हवाई अड्डे  पर लौटकर, पंजाब के सीएम को अपने जिंदा भठिंडा हवाई  अड्डे  पहुंच जाने के लिए थैंक्यू क्यों कहलवाया?

मोदी जी से नफरत में ये विरोधी और कितने नीचे गिरेंगे। अब क्या मोदी जी के शिष्टाचार का पालन करने पर भी विवाद खड़ा किया जाएगा। मोदी जी पंजाब गए थे। माना कि सीएम से मुलाकात नहीं हुई, शहीदों की श्रद्धांजलि भी नहीं हुई और तो और चुनावी मीटिंग भी नहीं हुई यानी बैरंग लौटना पड़ा, मगर इसका मतलब यह तो नहीं है कि पीएम अपने  शिष्टाचार  को छोड़ देते। पंजाबियों ने भले ही अपना दिल छोटा कर लिया हो, पर मोदी जी ने तो सामान्य से भी बढक़र  शिष्टाचार निभाया और सीएम को बिना कुछ करे-धरे, घर बैठे थैंक्यू भिजवाया! इसके लिए पीएम का थैंक्यू करने के बजाए, इतनी हाय-तौबा क्यों हो रही है, भाई!

अब यह तो विपक्ष वालों की सरासर बेईमानी है कि पीएम जी के संदेश में से थैंक्यू को छोडक़र, ‘जिंदा लौट आया’ को ही पकडक़र बैठ गए हैं। और इसमें पंजाब, पंजाबियत, पंजाब सरकार और न जाने किस-किस को बदनाम करने की कोशिश खोज लाए हैं। एक सिंपल धन्यवाद ज्ञापन में इस तरह बाल से खाल निकालना, पंजाब वालों को शोभा नहीं देता है। बात बिल्कुल सिंपल है। पीएम जी ने सीएम जी को सिर्फ धन्यवाद भिजवाया है।

हां! सीएम जी को अजीब न लगे कि उनने तो कुछ किया ही नहीं फिर भी थैंक्यू किसलिए, बस इसीलिए साथ में पीएम जी ने बता दिया कि थैंक्यू, मेरे जिंदा लौट आने के लिए! इसमें यह खोजना पीएम जी के साथ ज्यादती है कि उन्होंने अपनी जान के लिए खतरे की कोई बात कही है। और इसके बाद यह साबित करने के पीछे पड़ जाना तो और भी ज्यादती है कि पीएम की जान के लिए खतरा तो छोड़ो, उनके बालों की सैटिंग बिगड़ने तक का कोई खतरा नहीं था। भक्तों-भक्तिनों की बात अलग है, पर जब पीएम जी ने अपने मुंह से जान के खतरे की कोई बात ही नहीं कही, तो फिर भाई लोग जान का कोई खतरा नहीं होना साबित करने पर ही क्यों पिले पड़े हैं? इसके बहाने से कहीं इसका इशारा करने की कोशिश तो नहीं की जा रही है कि एसपीजी के 3000 जवानों और साढ़े सात सौ रुपये के बजट की, कोई जरूरत ही नहीं है? पीएम जी के 8,000 करोड़ के उडऩ खटोले और 12 करोड़ की कार तरह, यह कहीं इसे भी तो फिजूल खर्ची बताने की कोशिश नहीं है!

और बार-बार यह क्यों कहा जा रहा है कि पीएम जी को रास्ता रुकने की वजह से पंद्रह-बीस मिनट एक फ्लाई ओवर पर इंतजार करना ही पड़ गया तो, ऐसा क्या हो गया? पब्लिक तो हर रोज बल्कि दिन में कई-कई बार, ऐसे जाम में फंसती है। और यह भी कि किसान तो साल भर दिल्ली के बार्डरों पर सर्दी, गर्मी, बारिश में खुले में बैठे इंतजार करते रहे थे, पीएम के ही पंद्रह-बीस मिनट इंतजार करने में ऐसा क्या आसमान गिर पड़ा? इस तरह की दलीलें देने वाले क्यों भूल जाते हैं कि वे किस के फ्लाईओवर पर पंद्रह-बीस मिनट अटके रहने की बात कर रहे हैं। ये एक सौ तीस करोड़ भारतीयों के प्रधान सेवक की बात है। सेवक का पुंछल्ला लगने से प्रधान की प्रधानता कोई कम नहीं हो जाती है और यह पूरे एक सौ तीस करोड़ के, प्रधान के पंद्रह-बीस मिनट की बात है! पंद्रह-बीस मिनट में जरा एक सौ तीस करोड़ का गुणा कर के देखिए और तब बताइए कि क्या यह किसी मामूली आदमी के मामूली ट्रैफिक में अटकने की मामूली बात है या राष्ट्र की सुरक्षा में गंभीर चूक का मामला।

और इसे जो प्रधान सेवक के सिर्फ पंद्रह-बीस मिनट खराब होने का मामला बनाने की कोशिश की जा रही है, वह सरासर चीटिंग है। प्रधान सेवक जी फ्लाई ओवर पर भले ही सिर्फ पंद्रह-बीस मिनट अटके रहे हों, लेकिन यह सोचना सही नहीं है कि उनके सिर्फ वही दस पंद्रह मिनट खराब हुए हैं। दिल्ली से सज-संवरकर निकलने से लेकर, वहां तक पहुंचने के उनके वक्त का क्या? और जो हुसैनी वाला में शहीद स्मारक पर जाने से लेकर, फिरोजपुर में चुनाव सभा में हजारों करोड़ रुपये की योजनाओं की घोषणा के कार्यक्रम तक रद्द करने पड़ गए, उनका क्या? चुनाव वाले नुकसान का हिसाब छोड़ भी दिया जाए तब भी, आने-जाने का सारा टैम मिलाकर यह प्रधान सेवक का, जी हां एक सौ तीस करोड़ के प्रधान सेवक का, एक पूरा दिन, खराब होने का मामला तो बनता ही है। पंजाब वालो, तुमने इस महान राष्ट्र के प्रधान सेवक का एक दिन खराब करने का, उसे खाली हाथ लौटाने का गुनाह किया है--नये इंडिया में इस जुर्म की सजा तो जरूर मिलेगी।

और प्लीज, पीएम जी की नहीं हुई सभा में खाली कुर्सियों के ताने मारना बंद करें। ये खाली कुर्सियों के खतरे का मामला हर्गिज नहीं है। खाली कुर्सियां-खाली कुर्सियां का शोर मचाने वाले यह क्यों भूल रहे हैं कि एक बस भर के कार्यकर्ता तो उस फ्लाईओवर पर मोदी जी की जयजयकार ही कर रहे थे, पार्टी के झंडे लिए। मोदी जी अगर रास्ते में से नही लौट जाते तो, कम से कम इतनी खाली कुर्सियां तो और भर ही जातीं। वैसे भी कुर्सियां खाली रहने से नुकसान तो पंजाब वालों का ही हुआ। चुनाव के टैम पर कम से कम घोषणाएं तो मिल जातीं। पर न वे मोदी जी की सभा में आए, न मोदी जी की घोषणाएं आयीं। पंजाब से खतरे की चेतावनियां और कड़ी कार्रवाई की धमकियां आ रही हैं, सो ऊपर से। सिर्फ एक भाषण से इतना डर--पंजाबियो, डर से बड़े घाटे का सौदा किया है तुमने।

और हां! प्रधानमंत्री का ‘जिंदा लौट आया’ का संदेश सुनते ही, जगह-जगह भक्तों ने प्रधानमंत्री की आयु बढ़ाने के लिए, महा-मृत्युंजय मंत्र का जो जाप कराया है, उसके बाद एनएसजी की छुट्टी कर दिए जाने की बात सरासर फेक न्यूज है। मंत्र-जाप वाली सुरक्षा, यह,पीएम जी की अतिरिक्त निजी सुरक्षा है। खतरों का खिलाड़ी शो के लिए, सुरक्षा जितनी ज्यादा हो, उतनी ही भली! इसमें दर-वर कोई न खोजे।  

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

Satire
PM security lapse case
Punjab Farmers
Punjab Elections
PM MODI
fazilka flyover

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कानपुर हिंसा: दोषियों पर गैंगस्टर के तहत मुकदमे का आदेश... नूपुर शर्मा पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं!

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

पंजाब: आप सरकार के ख़िलाफ़ किसानों ने खोला बड़ा मोर्चा, चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डाला डेरा

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!


बाकी खबरें

  • gandhi ji and sawarkar
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    गांधी बनाम सावरकरः हिंद स्वराज बनाम हिंदुत्व
    18 Oct 2021
    असली सवाल महात्मा गांधी बनाम सावरकर का नहीं है। असली सवाल उन दो दृष्टियों का है जो एक दूसरे से भिन्न हैं और जिनकी नैतिकता में जमीन आसमान का अंतर है। यह अंतर्विरोध रहेगा और ‘अमृत महोत्सव’ में इस पर…
  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मंत्री अजय मिश्रा की बर्ख़ास्तगी की मांग को लेकर किसानों का ‘रेल रोको’ आंदोलन
    18 Oct 2021
    एसकेएम के मुताबिक आज का रेल रोको आंदोलन कुल 6 घंटे का रहेगा। इस दौरान पूरे देश में रेल सेवाएं सुबह 10 से शाम 4 बजे तक बाधित की जाएंगी। रेल संपत्ति को बिना क्षति पहुंचाए, रेल रोको शांतिपूर्ण रहेगा।…
  • Coal
    प्रबीर पुरकायस्थ
    बिजली की मौजूदा तंगी सरकारी नियोजन में आपराधिक उपेक्षा का नतीजा है
    18 Oct 2021
    जहां तक बिजलीघरों में पर्याप्त कोयला न रहने के वर्तमान संकट का सवाल है, यह नियोजन के अभाव और सरकार की घोर अक्षमता के योग का नतीजा है। 
  • Putin
    जेम्स डब्ल्यू कार्डेन
    रूस किस तरह का ख़तरा है?
    18 Oct 2021
    रूसी खतरे के अलावा किसी भी विषय पर द्विदलीय सहमति इतनी अचल नहीं है।
  • Russia Draws Red Lines for US
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस ने अमेरिका के सामने खींची लाल लकीर 
    18 Oct 2021
    मान्यता देने से पहले हम कुछ क्षेत्रीय पहल की उम्मीद कर सकते हैं। मान्यता के लिए मानदंड आमतौर पर पूरे देश पर सरकार का प्रभावी नियंत्रण होना ज़रूरी होता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License