NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सुकुमा “मुठभेड़ कांड”: ये किसका लहू है, कौन मरा?
विश्व आदिवासी दिवस से मात्र तीन दिन पहले 6 अगस्त को छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल्य इलाके सुकुमा ज़िले के नुलकातुंग गांव में पुलिस से “मुठभेड़” में 15 आदिवासी युवाओं के मारे जाने की खबर आईI
अनिल अंशुमन
22 Aug 2018
Chhattisgarh fake encounters
Image Used For Representation Purpose Only. Image Courtesy: Amar Ujala

यदि सुप्रीम कोर्ट ने ‘सुकुमा मुठभेड़ काण्ड’ पर दायर याचिका की सुनवाई का संज्ञान न लिया होता तो शायद यह घटना भी महज़ एक ख़बर बनकर गुम हो जातीI ज्ञात हो कि विश्व आदिवासी दिवस से मात्र तीन दिन पहले 6 अगस्त को छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल्य इलाके सुकुमा ज़िले के नुलकातुंग गांव में पुलिस से “मुठभेड़” में 15 आदिवासी युवाओं के मारे जाने की खबर आईI सरकारी सूत्रों के अनुसार ये मुठभेड़ उस समय हुई जब जिले के कोंटा ब्लॉक स्थित गोलापल्ली थाना के सघन जंगल में डिस्ट्रिक रिजर्व गार्ड, एसटीएफ व सीआरपीएफ के जवान ‘ऑपरेशन मॉनसून’ के तहत घुसे थेI इस मुठभेड़ में माओवादी जन मिलिशिया के 15 लोग मारे गए और दो गिरफ्तार हुएI पुलिस-प्रशासन व सरकार मीडिया के माध्यम से इसे नक्सली हिंसा के खिलाफ एक बड़ी सफलता बताते हुए एक-दूसरे की पीठ ठोक रहे हैंI इसी दौरान ‘सिविल लिबर्टी कमिटी, तेलंगाना’ की ओर से एन.नारायण राव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि ये मुठभेड़ फर्जी था और इसमें निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया गया हैI इसलिए इस मुठभेड़ की एसआईटी से निष्पक्ष जाँच करवायी जायेI उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मृतकों में अधिकाँश कम उम्र के आम ग्रामीण युवा और नाबालिग हैI इसकी पुष्टि कांग्रेस पार्टी की 18 सदस्यीय जाँच टीम ने भी घटना स्थल के दौरे के बाद, करते हुए कहा कि मुठभेड़ में मारे गए सभी लोग आम ग्रामीण हैंI

याचिका पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट के चीफ जस्टिस बेंच ने 13 अगस्त की सुनवाई में छत्तीसगढ़ सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगते हुए याचिकाकर्ता एन. नारायण राव से भी सबूत/शपथ पत्र पेश करने को कहाI इसकी अगली सुनवाई 29 अगस्त को होनी हैI कोर्ट में याचिकाकर्त्ताओं ने घटना के कुछ ऐसे फोटो पेश किये थे जिसपर राज्य सरकार ने आपत्ति दर्ज की थीI                             

मीडिया के ज़रिये छत्तीसगढ़ पुलिस ने यह बताया कि – मारे गए सभी लोग माओवादियों के जन मिलिशिया के कैडर थे और वहाँ उनका कैम्प चल रहा थाI जिसे ध्वस्त करने ‘ऑपरेशन मॉनसून’ के तहत जब पुलिस बल के जवान गए तो वहाँ मौजूद 15 से 50 लोगों ने पुलिस पर फायरिंग की जिसके जवाब में हमें भी गोली चलानी पड़ीI जिसमें 5 लाख की इनामी महिला नक्सली समेत 15 नक्सली मौके पर ही ढेर कर दिए गए और एक महिला व एक पुरुष को ज़िंदा गिरफ्तार किया गयाI मारे गए लोगों के पास से 16 हथियार व अन्य कई गैरकानूनी चीज़ों बरामद कर कैम्प को ध्वस्त करने में बड़ी सफलता मिली हैI

सच्चाई का पता लगाने जब मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं तथा आम आदमी पार्टी सदस्यों की जाँच टीम के लोग 18 अगस्त को जब इलाके में जा रहे थे तो पुलिस ने न सर्फ उनका पीछ किया, बल्कि कई स्थानों पर उन्हें रोक-रोककर पहचान पत्र चेक किया तथा जिस होटल में वे टिके थे उसके मालिक को उन्हें न ठहराने की हिदायत भी दीI तब भी बस्तर–संवाद व कई अन्य स्थानीय आदिवासी संगठनों के युवा कार्यकर्त्ता छिप–छिपाके के इलाके में पहुँच कर गाँव के लोगों से मिलकर जानकारी लीI जिसे उन्होंने सोशल मीडिया वेबसाईट पर जारी कर बताया है कि किस तरह से ‘प्रमोशन-पोस्ट और पैसों’ के लिए ऐसे नाबालिग व युवाओं को, जो वहाँ अपनी परंपरागत कृषि–कार्य के लिए आये थे, पुलिस ने ठंढे दिमाग से मारकर ‘मुठभेड़’ बता रही हैI नुल्कातोंग–मुठभेड़ से पहले गोनपाड़, किन्देमपाड़ व एटेगड्डा समेत आसपास के कई गांवों में भी सर्च अभियान चलाकर दहशत फैलाने का काम किया थाI कई बार राज्य दमन का शिकार होकर भी इस क्षेत्र में आदिवासी अधिकारों के लिए निरंतर सक्रिय रहनेवाली सामाजिक कार्यकर्त्ता सोनी सोरी जी ने भी घटना की जाँचकर यही बातें कहीं हैं और स्वतंत्र न्यायिक कर दोषी पुलिसकर्मियों को सज़ा देने कि मांग की हैI

सवाल उठता है कि जब मुठभेड़ सही है तो पुलिस वहाँ जाँच करने जा रहे लोगों से परेशान क्यों हो रही है और आखिर मामले की सच्चाई सामने आने से उसे भय क्यों लग रहा है? यही नहीं, कांग्रेस की जाँच टीम के जाने पर खुद राज्य के मुख्यमंत्री ने यहाँ तक कह डाला कि – नक्सल हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिएI इलाके में जाकर ग्रामीणों से मिलनेवालों के अनुसार उन्हें भयग्रस्त ग्रामीणों ने बताया कि सन 2005-06 में जब से ‘सलवा जुडुम’ शुरू हुआ है, पुलिसिया अत्याचारों का तांता सा लग गया हैI कुछ माह पहले पुलिसवालों द्वारा एक आदिवासी महिला के साथ गैंग-रेप कर हत्या कर देने का केस न्यायालय में चल रहा हैI गौरतलब है कि माओवादी हिंसा रोकने के नाम पर राज्य के बस्तर समेत वे सभी आदिवासी इलाके जिन्हें कंपनियों के खनन एवं उद्योग के लिए लक्षित किया गया था, वहाँ नक्सली हिंसा रोकने के नाम पर ‘सलवा–जुडूम’ के तहत किये गए पुलिसिया अत्याचारों पर खुद सुप्रीम कोर्ट राज्य की सरकार व पुलिस-प्रशासन को दोषी करार देकर फटकार लगा चुका हैI बावजूद इसके आज भी पूरे जंगल इलाकों में भारी संख्या में मौजूद अर्द्ध सैन्यबल व पुलिस की टुकड़ियाँ मौजूद हैं जो आये दिन ग्रामीणों को नाना प्रकार से उत्पीड़न का शिकार बनाती रहती हैंI इसकी खबर देने वाले कई पत्रकारों को प्रताड़ित– आतंकित करने के साथ–साथ उन पर फर्ज़ी मुकदमे लगा कर जेल में भी डालने की ख़बरें अक्सर आती रहती हैंI

बहरहाल, फिलहाल देखना है कि आदिवासियों पर दमन ढाने के लिए कुख्यात हो चुकी छत्तीसगढ़ सरकार व पुलिस इस मुठभेड़–काण्ड की असली सच्चाई को कब तक दबाये रखती हैI साथ ही माननीय सुप्रीम कोर्ट कब तक फर्जी मुठभेड़ में मारे गए मासूमों के परिजनों को न्याय तथा सरकार के पुलिसिया आतंक से छुटकारा दिला पाता है! और सबसे बढ़कर, आदिवासियों को विकास की मुख्य धारा में लाने का दावा करने वाली वर्तमान सरकार ज़मीनी धरातल पर कैसा सकारात्मक उदहारण पेश करती है?

Chhattisgarh
fake encounters in Chhattisgarh
chattisgarh police
छत्तीसगढ़

Related Stories

छत्तीसगढ़ : दो सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों ने इस्तीफ़ा दिया

छत्तीसगढ़ः 60 दिनों से हड़ताल कर रहे 15 हज़ार मनरेगा कर्मी इस्तीफ़ा देने को तैयार

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

छत्तीसगढ़ :दो सूत्रीय मांगों को लेकर 17 दिनों से हड़ताल पर मनरेगा कर्मी

लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में औंधे मुंह गिरी भाजपा

छत्तीसगढ़: खैरागढ़ विधानसभा सीट के लिए मंगलवार को मतदान, तैयारी पूरी

छत्तीसगढ़: आदिवासियों के फ़र्ज़ी एनकाउंटर वाले एड़समेटा कांड को 9 साल पूरे, माकपा ने कहा दोषियों पर दर्ज हो हत्या का मामला 

छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय

विचार-विश्लेषण: विपक्ष शासित राज्यों में समानांतर सरकार चला रहे हैं राज्यपाल

कोरबा : रोज़गार की मांग को लेकर एक माह से भू-विस्थापितों का धरना जारी


बाकी खबरें

  • general strike
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?
    27 Mar 2022
    भारत के औद्योगिक श्रमिक, कर्मचारी, किसान और खेतिहर मज़दूर ‘लोग बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ 28-29 मार्च 2022 को दो दिवसीय आम हड़ताल करेंगे। इसका मतलब यह है कि न सिर्फ देश के विशाल विनिर्माण क्षेत्र…
  • Bhagat Singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    शहीद भगत सिंह के इतिहास पर एस. इरफ़ान हबीब
    27 Mar 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में नीलांजन ने बात की है इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब से भगत सिंह के इतिहास पर।
  • Raghav Chadha
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: पंजाब में राघव चड्ढा की भूमिका से लेकर सोनिया गांधी की चुनौतियों तक..
    27 Mar 2022
    हर हफ़्ते की प्रमुख ख़बरों को लेकर एकबार फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन…
  • jaunpur violence against dalits
    विजय विनीत
    उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप
    27 Mar 2022
    आरोप है कि बदलापुर थाने में औरतों और बच्चियों को पीटने से पहले सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। पहले उनके कपड़े उतरवाए गए और फिर बेरहमी से पीटा गया। औरतों और लड़कियों ने पुलिस पर यह भी आरोप लगाया कि वे…
  • सोनिया यादव
    अपने ही देश में नस्लभेद अपनों को पराया बना देता है!
    27 Mar 2022
    भारत का संविधान सभी को धर्म, जाति, भाषा, वेशभूषा से परे बिना किसी भेदभाव के एक समान होने की बात करता है, लेकिन नस्लीय भेद इस अनेकता में एकता की भावना को कलंकित करता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License