NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: 12 साल तक जिसका कब्जा, उसकी संपत्ति!
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कब्जाधारी व्यक्ति उस संपत्ति का अधिकार लेने का दावा कर सकता है जो 12 वर्ष या उससे अधिक समय से बिना किसी व्यवधान के उसके कब्जे में है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Aug 2019
SC

अक्सर हम कई वजहों से अपनी जमीन या मकान दूसरों को कुछ समय के लिए दे देते हैं या कुछ लोग अपनी जरूरत अनुसार कई बार अवैध अतिक्रमण भी कर लेते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के अनुसार अब ये जोखिम भरा हो सकता है। 

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस संबंध में एक बेहद अहम फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कब्जाधारी व्यक्ति (एडवर्स पजेसर) उस जमीन या संपत्ति का अधिकार लेने का दावा कर सकता है जो 12 वर्ष या उससे अधिक समय से बिना किसी व्यवधान के उसके कब्जे में है।

इतना ही नहीं, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि अगर ऐसे व्यक्ति को इस जमीन से बेदखल किया जा रहा है तो वह कानूनी सहायता भी ले सकता है।

इस फैसले से साफ है कि अगर वास्तविक या वैध मालिक अपनी अचल संपत्ति को दूसरे के कब्जे से वापस पाने के लिए 12 साल की तय समयसीमा के अंदर कदम नहीं उठा पाएंगे तो उनका मालिकाना हक समाप्त हो जाएगा और उस अचल संपत्ति पर जिसने 12 साल तक कब्जा कर रखा है, उसी को कानूनी तौर पर मालिकाना हक दे दिया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पूर्व 2014 में उच्चतम न्यायालय की दो सदस्यीय पीठ ने फैसला दिया था कि एडवर्स कब्जाधारी व्यक्ति जमीन का अधिकार नहीं ले सकता है। साथ ही कहा था कि अगर मालिक जमीन मांग रहा है तो उसे यह वापस करनी होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने इस फैसले में यह भी कहा था कि सरकार एडवर्स पजेशन के कानून की समीक्षा करे और इसे समाप्त करने पर विचार करे।

सुप्रीम कोर्ट के तीन जज जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने इस कानून के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा कि कानून उस व्यक्ति के साथ है जिसने अचल संपत्ति पर 12 वर्षों से अधिक से कब्जा कर रखा है।

अगर 12 वर्ष बाद उसे वहां से हटाया गया तो उसके पास संपत्ति पर दोबारा अधिकार पाने के लिए कानून की शरण में जाने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने इस बारे में विभिन्न उच्च न्यायालय और शीर्ष अदालत की पीठ के अलग-अलग दिए गए फैसलों को देखते हुए इस मुद्दे को अंतिम रूप से निर्णित करने के लिए बड़ी बेंच (संविधान पीठ) को रेफर कर दिया।

तीन सदस्यीय बेंच ने कहा, 'हमारा फैसला है कि संपत्ति पर जिसका कब्जा है, उसे कोई दूसरा व्यक्ति बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के वहां से हटा नहीं सकता है। अगर किसी ने 12 साल से अवैध कब्जा कर रखा है तो कानूनी मालिक के पास भी उसे हटाने का अधिकार भी नहीं रह जाएगा। ऐसी स्थिति में अवैध कब्जे वाले को ही कानूनी अधिकार, मालिकाना हक मिल जाएगा। हमारे विचार से इसका परिणाम यह होगा कि एक बार अधिकार (राइट), मालिकाना हक (टाइटल) या हिस्सा (इंट्रेस्ट) मिल जाने पर उसे वादी कानून के अनुच्छेद 65 के दायरे में तलवार की तरह इस्तेमाल कर सकता है, वहीं प्रतिवादी के लिए यह एक सुरक्षा कवच होगा। अगर किसी व्यक्ति ने कानून के तहत अवैध कब्जे को भी कानूनी कब्जे में तब्दील कर लिया तो जबर्दस्ती हटाए जाने पर वह कानून की मदद ले सकता है।' 

पीठ ने लिमिटेशन एक्ट, 1963 की धारा 65 का हवाला देते हुए कहा कि, इसमें यह कहीं नहीं कहा गया है कि एडवर्स कब्जाधारी व्यक्ति अपनी भूमि को बचाने के लिए मुकदमा दायर नहीं कर सकता है। ऐसा व्यक्ति कब्जा बचाने के लिए मुकदमा दायर कर सकता है और एडवर्स कब्जे की भूमि का अधिकार घोषित करने का दावा भी कर सकता है।

बता दें कि, लिमिटेशन ऐक्ट 1963 के तहत निजी अचल संपत्ति पर लिमिटेशन (परिसीमन) की वैधानिक अवधि 12 साल जबकि सरकारी अचल संपत्ति के मामले में 30 वर्ष है। यह मियाद कब्जे के दिन से शुरू होती है।

इसके फैसले के साथ ही कोर्ट ने गुरुद्वारा साहिब बनाम ग्राम पंचायत श्रीथला(2014), उत्तराखंड बनाम मंदिर श्रीलक्षमी सिद्ध महाराज (2017) और धर्मपाल बनाम पंजाब वक्फ बोर्ड (2018) में दिए गए फैसलों को निरस्त कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी ने 12 वर्ष तक अवैध कब्जा जारी रखा और उसके बाद उसने कानून के तहत मालिकाना हक प्राप्त कर लिया तो उसे असली मालिक भी नहीं हटा सकता है। अगर उससे जबर्दस्ती कब्जा हटवाया गया तो वह असली मालिक के खिलाफ भी केस कर सकता है और उसे वापस पाने का दावा कर सकता है क्योंकि असली मालिक 12 वर्ष के बाद अपना मालिकाना हक खो चुका होता है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का निश्चित तौर पर व्यापक असर देखने को मिलेगा, साथ ही ये उन लोगों के लिए एक हथिहार बन जाएगा, जिन्होंने दूसरों की जमीन पर वर्षों से कब्जा जमा रखा है।

Supreme Court
Immovable Property
invalid Possession
Law & Order
Property Act
Limitation Act 1963
Squatter
Owner

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • एम्स और सफ़दरजंग के डॉक्टरों ने मध्य प्रदेश के डॉक्टरों के समर्थन में निकाला मार्च
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एम्स और सफ़दरजंग के डॉक्टरों ने मध्य प्रदेश के डॉक्टरों के समर्थन में निकाला मार्च
    07 Jun 2021
    एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के साथ एक तत्काल बैठक करनी चाहिए और अगले 24 घंटों के भीतर इस मुद्दे को हल करना…
  • modi
    परंजॉय गुहा ठाकुरता
    क्या मीडिया में नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ हवा बदलने लगी है?
    07 Jun 2021
    यहां यह समझना जरूरी है कि कभी मोदी के पक्ष में खड़े रहने वाले मीडिया संस्थान और सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म आज अगर उनके ख़िलाफ़ खड़े दिख रहे हैं तो कहीं न कहीं ज़मीनी स्तर पर आम जनता का नरेंद्र मोदी से मोहभंग…
  • रोज़गार पर हमला – जनवरी से अब तक 2.5 करोड़ नौकरियां ख़त्म
    सुबोध वर्मा
    रोज़गार पर हमला – जनवरी से अब तक 2.5 करोड़ नौकरियां ख़त्म
    07 Jun 2021
    कंस्ट्रक्शन, मैन्युफैक्चरिंग, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में सबसे ज्यादा रोज़गार खत्म हुए हैं। 1.7 करोड़ से अधिक दिहाड़ी कर्मचरी अपनी नौकरी खो चुके हैं।
  •  नर्स
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    विभिन्न पक्षों से आलोचना के बाद दिल्ली के अस्पताल में नर्सों को मलयालम बोलने से रोकने वाला आदेश लिया वापस
    07 Jun 2021
    केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने कहा  'मलयालम भारत की आधिकारिक भाषाओं में शुमार है। प्रशासन ने काफी देर से इस निदंनीय परिपत्र को वापस लिया जोकि हमारे देश के सांस्कृतिक एवं लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ था।'
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में एक लाख नए मामले, 2,427 मरीज़ों की मौत
    07 Jun 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1,00,636 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 4.84 फ़ीसदी यानी 14 लाख 1 हज़ार 609 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License