NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट करेगा संशोधित नागरिकता कानून की संवैधानिक वैधता की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने CAA पर केंद्र को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई की तारीख 22 जनवरी 2020 तय की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Dec 2019
सुप्रीम कोर्ट

संशोधित नागरिकता कानून यानी Citizenship Amendment Act (CAA) को लेकर पूरे देश में घमासान है।

संसद बंद है लेकिन सड़क पर संघर्ष जारी है। ये पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा है और आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून की संवैधानिक वैधता की जांच करने का फैसला किया है, हालांकि उसने इस कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

इस कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आने वाले, गैरमुस्लिम शरणार्थियों हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई वर्ग को नागरिकता देने का प्रावधान है।

प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबड़े, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), कांग्रेस नेता जयराम रमेश, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की तारीख 22 जनवरी 2020 तय की।

उच्चतम न्यायालय ने संशोधित नागरिकता कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली मुख्य याचिका और कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग करने वाली अन्य याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया।

शीर्ष न्यायालय ने इस निवेदन पर गौर किया कि संशोधित नागरिकता कानून के बारे में नागरिकों के बीच भ्रम की स्थिति है।


पीठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की इस दलील से भी सहमत हुई कि आम जनता को इस कानून के उद्देश्यों और विवरण से अवगत कराया जाना चाहिए।

पीठ ने केन्द्र की ओर से पेश अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से कहा कि इस कानून के प्रावधानों के बारे में जनता को जागरूक बनाने के लिये आडियो-वीडियो माध्यम का इस्तेमाल करने पर विचार करें। वेणुगोपाल ने इस सुझाव से सहमति व्यक्त की और कहा कि सरकार इस संबंध में आवश्यक कदम उठायेगी।

इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने नये कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का अनुरोध किया। अटार्नी जनरल ने इसका विरोध किया और कहा कि कम से कम चार ऐसे फैसले हैं जिनमें यह व्यवस्था दी गयी है कि कानून की अधिसूचना जारी होने के बाद उस पर रोक नहीं लगायी जा सकती। पीठ ने कहा, ‘‘हम इस पर रोक नहीं लगा रहे हैं।’’ पीठ ने कहा कि इस कानून पर रोक लगाने के बारे में सुनवाई की अगली तारीख 22 जनवरी को दलीलें दी जा सकती हैं।

एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि इस कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का अनुरोध करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह अभी तक लागू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत अभी नियम बनाये जाने हैं।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी इस कानून को चुनौती दी है। इस दल ने अपनी याचिका में कहा है कि यह कानून संविधान में प्रदत्त समता के मौलिक अधिकार का हनन करता है और इसका मकसद अवैध तरीके से भारत आये शरणार्थियों में से एक वर्ग को धर्म के आधार पर अलग करना है। इस याचिका में नागरिकता संशोधन कानून के क्रियान्वयन के साथ ही विदेशी नागरिक आदेश, 2015 और पासपोर्ट (आगमन के नियम) संशोधन विनियमन 2015 पर अंतिरम रोक लगाने का भी अनुरोध किया है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस कानून को चुनौती देने वाली अपनी याचिका में कहा है कि क्या भारत में नागरिकता देने या इससे इंकार करते समय धर्म एक पहलू हो सकता है? याचिका में कहा गया है कि इसमें अनेक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल न्यायालय के विचारार्थ उठाये गये हैं।

इसके अलावा, राजद के मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा, एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द, आल असम स्टूडेन्ट्स यूनियन, सिटीजन्स अगेन्स्ट हेट, रिहाई मंच, पीस पार्टी, अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और कानून के छात्रों ने भी नागरिक संशोधन कानून को चुनौती दी है। 

संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दी गयी थी। इसके बाद 12 दिसंबर को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने इसे अपनी संस्तुति देकर कानून का रूप प्रदान कर दिया था।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

hindu rashtra
Citizenship Amendment India
Religious Persecution
Muslims in India
Narendra modi
Constitution of India
All-India NRC

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • भाषा
    'आप’ से राज्यसभा सीट के लिए नामांकित राघव चड्ढा ने दिल्ली विधानसभा से दिया इस्तीफा
    24 Mar 2022
    चड्ढा ‘आप’ द्वारा राज्यसभा के लिए नामांकित पांच प्रत्याशियों में से एक हैं । राज्यसभा चुनाव के लिए 31 मार्च को मतदान होगा। अगर चड्ढा निर्वाचित हो जाते हैं तो 33 साल की उम्र में वह संसद के उच्च सदन…
  • सोनिया यादव
    पत्नी नहीं है पति के अधीन, मैरिटल रेप समानता के अधिकार के ख़िलाफ़
    24 Mar 2022
    कर्नाटक हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेक्शन 375 के तहत बलात्कार की सज़ा में पतियों को छूट समानता के अधिकार यानी अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के मुताबिक शादी क्रूरता का लाइसेंस नहीं है।
  • एजाज़ अशरफ़
    2024 में बढ़त हासिल करने के लिए अखिलेश यादव को खड़ा करना होगा ओबीसी आंदोलन
    24 Mar 2022
    बीजेपी की जीत प्रभावित करने वाली है, लेकिन उत्तर प्रदेश में सामाजिक धुरी बदल रही है, जिससे चुनावी लाभ पहुंचाने में सक्षम राजनीतिक ऊर्जा का निर्माण हो रहा है।
  • forest
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु शमन : रिसर्च ने बताया कि वृक्षारोपण मोनोकल्चर प्लांटेशन की तुलना में ज़्यादा फ़ायदेमंद
    24 Mar 2022
    शोधकर्ताओं का तर्क है कि वनीकरण परियोजनाओं को शुरू करते समय नीति निर्माताओं को लकड़ी के उत्पादन और पर्यावरणीय लाभों के चुनाव पर भी ध्यान देना चाहिए।
  • रवि कौशल
    नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 
    24 Mar 2022
    दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने कहा कि गरीब छात्र कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट पास करने के लिए कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाएंगे। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License