NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
कोरोना वायरस के उद्भव से जुड़ी अफवाहों की वैज्ञानिकों ने की निंदा
चीन से बाहर के वैज्ञानिक भी SARS-CoV-2 का गहन अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने माना है कि कोरोनावायरस का उद्भव जंगल में हुआ है। यह स्टेटमेंट लांसेट में प्रकाशित हुआ है।
संदीपन तालुकदार
25 Feb 2020
coronavirus
Image courtesy : National Institute of Allergy and Infectious Diseases

19 फरवरी को लांसेट में चीन से बाहर के स्वास्थ्य वैज्ञानिकों का एक साझा स्टेटमेंट छपा। इन वैज्ञानिकों की चिंता कोरोना वायरस पर सोशल मीडिया में चल रही अफवाहों, गलत जानकारी और षड्यंत्र अवधारणाओं (Conspiracy Theories)  को लेकर है। स्टेटमेंट के मुताबिक़,''षड्यंत्र अवधारणाओं से जु़ड़ी बातें महज़ डर, अफवाह और पूर्वाग्रह फैलाती हैं। यह चीजें इस ख़तरनाक वायरस से हमारी वैश्विक लड़ाई को कमजोर करता है।''

जानलेवा वायरस COVID-19 जबसे फैला है, तबसे इसे लेकर तमाम तरह की कहानियां फैलाई जा रही हैं। ख़ासकर पश्चिमी मीडिया एक कहानी को आगे बढ़ा रहा है। कहानी के मुताबिक़, इस बीमारी का उद्भव वुहान स्थित एक वायरोलॉजी की लेबोरेटरी से हुआ है। बता दें वुहान ही इस बीमारी का केंद्र है। वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की एक लेबोरेटरी में चमगादड़ों से फैलने वाले कोरोनावायरस पर शोध चल रहा है। इसमें SARS-CoV-2 पर भी शोध जारी है, जिससे COVID-19 फैला है।

लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि इस वायरस को चीन ने बॉयो-एनजीनियरिंग के ज़रिए बनाया था और अब चीन यह मंसूबा छोड़ चुका है। कहा जा रहा है कि चमगादड़ के साथ काम करते हुए एक कर्मचारी संक्रमण का शिकार हुआ था, जिसके बाद यह वायरस लेबोरेटरी बाहर तक फैल गया। इस कहानी को वायरस के उद्भव के बारे में फैलाया जा रहा है। लेकिन लेबोरेटरी ने इन बातों का खंडन करते हुए कहा कि उनका और वायरस के फैलाव का आपस में कोई संबंध नहीं है।

लांसेट के स्टेटमेंट में कहा गया, ''हम उन षड्यंत्र अवधारणाओं की निंदा करते हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि COVID-19 का संक्रमण की वज़ह प्राकृतिक नहीं हैं।'' स्टेटमेंट में चीनी स्वास्थ्य पेशेवरों की तारीफ भी की गई, जो इस संक्रमण से जूझ रहे हैं।लांसेट स्टेटमेंट में यह भी बताया गया कि चीन से बाहर के वैज्ञानिक भी SARS-CoV-2 का गहन अध्ययन कर रहे हैं और उन्होंने माना है कि कोरोनावायरस का उद्भव जंगल में हुआ। इसकी वही प्रक्रिया है, जो हाल ही में सामने आए दूसरे मानवीय वायरसों के फैलाव में हुई।

''डिसीज़ इकोलॉजिस्ट'' और लांसेट स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर करने वाले पीटर डासजैक कहते हैं, ''हम सोशल मीडया द्वारा गलत जानकारी फैलाने वाले युग में हैं। अफवाहों और षड्यंत्र अवधारणाओं का वाकई बुरा असर पड़ता है। चीन के हमारे साथी कर्मचारियों को हिंसा की धमकियां मिल रही हैं। हमारे पास अब दो विकल्प हैं। या तो हम अपने साथियों के साथ खड़े हों, जिन्हें षड्यंत्र अवधारणाएं फैलाने वाले रोज निशाना बना रहे हैं। या फिर हम इस मामले पर आंखें बंद कर लें। मैं गर्व महसूस करता हूं कि 9 देशों के लोग उनका लगातार बचाव कर रहे हैं और उनके साथ खड़े हैं। आखिर हम संक्रमण के दौर में भयावह स्थितियों का सामना कर रहे हैं।''

इन षड्यंत्रकारी अवधारणाओं को अमेरिकी सीनेटर टॉम कॉटन ने और हवा दी है। उन्होंने फॉक्स न्यूज़ पर कहा, ''हमारे पास इस बीमारी के उद्भव से संबंधित सबूत नहीं हैं। लेकिन शुरूआत से ही चीन की बेईमानी और दोगलेपन को देखते हुए हम यह तो पूछ ही सकते हैं कि आखिर सबूत कहते क्या हैं।''

 कॉटन ने बताया कि चीन ने अमेरिकी वैज्ञानिक भेजने संबंधी अमेरिका के प्रस्ताव को भी ख़ारिज कर दिया। इन वैज्ञानिकों को वायरस के उद्भव के बारे में स्थिति साफ करने के लिए भेजे जाने का प्रस्ताव था।

पूरी दुनिया का वैज्ञानिक समुदाय वायरस के उद्भव और मानव शरीर में इसकी पहुंच से जुड़े तथ्य खोजने में जी-जान से लगा हुआ है। ताकि इसके लिए जरूरी दवाएं और वैक्सीन बनाया जा सके। लेकिन षड्यंत्र अवधारणाएं और अफवाहें, इन वैश्विक प्रयासों को महज़ नुकसान ही पहुंचाएंगी। इन अफवाहों और षड्यंत्र संबंधी अवधारणाओं से केवल कुछ ही लोगों के हितों की पूर्ति हो सकती है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Scientists Condemn Rumours About Origin of Coronavirus in China

Coronavirus
Lancet Statement of Scientists
Conspiracy Theories of Coronavirus Origin in China

Related Stories

SARS-CoV-2 के क़रीबी वायरस लाओस में पाए गए

समझें: क्या हैं कोरोना वायरस के अलग-अलग वेरिएंट

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना से अब तक 4 लाख से ज़्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई

सार्स-सीओवी-2 का नया डेल्टा प्लस वैरिएंट और उससे चिंता के कारण

क्या कहते हैं कोरोना वायरस पर हुए नए अध्ययन?

कोरोना संकट : निजी अस्पतालों के लिए 25 प्रतिशत टीकों के आवंटन के फ़ैसले को लेकर उठ रहे हैं सवाल

उत्तर प्रदेश : योगी का दावा 20 दिन में संक्रमण पर पाया काबू , आंकड़े बयां कर रहे तबाही का मंज़र

ब्लैक फंगस पंजाब और हरियाणा के लिए चुनौती बनती जा रही है

कोरोना वैक्सीन से जुड़ी यह मूलभूत बातें जानिए और अफवाहों को कोसों दूर रखिए!

भारत में कोरोना के म्यूटेंट वेरिएंट: अब तक हम क्या जानते हैं?


बाकी खबरें

  • fertilizer
    तारिक अनवर
    उप्र चुनाव: उर्वरकों की कमी, एमएसपी पर 'खोखला' वादा घटा सकता है भाजपा का जनाधार
    04 Feb 2022
    राज्य के कई जिलों के किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा संचालित केंद्रों पर डीएपी और उर्वरकों की "बनावटी" की कमी की वजह से इन्हें कालाबाजार से उच्च दरों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा 5 लाख के पार
    04 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,49,394 नए मामले सामने आए और 1,072 मरीज़ों की मौत हुई है। देश में कोरोना से अब तक 5 लाख 55 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • SKM
    रौनक छाबड़ा
    यूपी चुनाव से पहले एसकेएम की मतदाताओं से अपील: 'चुनाव में बीजेपी को सबक़ सिखायें'
    04 Feb 2022
    एसकेएम ने गुरुवार को अपने 'मिशन यूपी' अभियान को फिर से शुरू करने का ऐलान करते हुए कहा कि 57 किसान संगठनों ने मतदाताओं से आगामी यूपी चुनावों में भाजपा को वोट नहीं देने का आग्रह किया है।
  • unemployment
    अजय कुमार
    क्या बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ने से बेरोज़गारी दूर हो जाएगी?
    03 Feb 2022
    बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ जाने से क्या बेरोज़गारी का अंत हो जाएगा या ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही बात कह रही है?
  • farmers SKM
    रवि कौशल
    कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा
    03 Feb 2022
    मोर्चा ने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार भी किसानों की आय को दुगुना किये जाने का उल्लेख नहीं किया है क्योंकि कई वर्षों के बाद भी वे इस परिणाम को हासिल कर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License