NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
भारत
राजनीति
झारखंड:  रेलवे ठेकदार द्वारा खोदे गड्ढे में डूबकर गांव की 7 बच्चियों की मौत
गुस्साए ग्रामीणों का आरोप है कि यहां से गुज़रनेवाली रेलवे लाइन में मिट्टी भराई के लिए रेलवे ठेकेदार ने गांव से सटी ज़मींन में ही खनन मानक के नियमों का उल्लंघन कर गड्ढे खुदवा दिए थे। इन्हीं में से एक गड्ढे में गिर कर बच्चियों की मौत हो गई।
अनिल अंशुमन
24 Sep 2021
jharkhand
Image courtesy : The Hindu

झारखंड प्रदेश के लातेहार जिले के बालूमाथ स्थित शेरेगड़ा पंचायत के माननडीह टोले में 7 बच्चियों की अकाल मौत से आज भी मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं मृतकों के परिजनों से लेकर स्थानीय ग्रामीणों में काफी आक्रोश समाया हुआ है। जबकि नागरिक समाज का सवाल है कि ऐसा विकास किस काम का जो मासूमों की जान ले ले?

गत 18 सितम्बर को इस टोले की 16 बच्ची व किशोरियां एक दिन पहले धूमधाम से संपन्न हुए ‘करम परब’ के समापन उपरांत करम की डालियों को पानी में विसर्जित करने गयीं थीं। करम की डालियों को पानी में विसर्जित करने के लिए सभी पानी भरे गड्ढे में उतरी गईं। लेकिन गड्ढे की गहराई का अंदाजा नहीं होने के कारण एक के बाद एक करके जब कुछ बच्चियों का पैर अचानक से गहराई में चला गया और वे डूबने लगीं। उन्हें बचाने गयीं किशोरियां भी डूबने लगीं। उनकी चीख पुकार सुनकर आसपास के युवा दौड़कर वहां पहुंचे। 7 बच्चियों को तो किसी तरह से बचा लिया गया, लेकिन तब तक 4 बच्चियां अथाह पानी में डूबकर मौत का शिकार हो चुकी थीं। शेष तीन को आनन-फानन पास के असप्ताल ले जाया गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें भी मृत घोषित कर दिया। हादसे में मारी गयीं सभी बच्ची-किशोरियों की उम्र 9 से 16 वर्ष के बीच बताई जा रही है।   

गुस्साए ग्रामीणों ने सभी बच्चियों के शव लेकर रांची-चतरा मार्ग को घंटों जाम कर दिया। उनका आरोप था कि यहां से गुजरनेवाली रेलवे लाइन में मिट्टी भराई के लिए रेलवे ठेकेदार ने गांव से सटी ज़मींन में ही खनन मानक के नियमों का उल्लंघन कर गड्ढे खुदवा दिए। नियमानुसार मिट्टीनिकालने के बाद इसे भरवा देना था अथवा यहां ‘ख़तरा’ का बोर्ड लगा देना था। लेकिन समय रहते ऐसा कुछ भी नहीं किया गया और बारिश के कारण वह लबालब भर गया था। इसी के चलते करम डाली विसर्जित करने गयी बच्चियों को यहां खतरे का अंदाजा नहीं हो सका।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि 2016 में ही रेलवे ठेकेदार ने सुरक्षित स्थान से मिट्टी लाने की बजाय मनमानी करके गड्ढे खुदवा दिये। जिसमें लापरवाह खनन का ऐसा आलम रहा कि कहीं 2 से 4 फीट तो कहीं 20 फीट गड्ढा खोद कर ऐसे ही छोड़ दिया गया था। स्थानीय ग्रामीण कई बार रेलवे विभाग और स्थानीय प्रशासन से इन खतरनाक गड्ढों को भरवाने की गुहार लगा चुके हैं। लेकिन न तो रेलवे का कोई अधिकारी देखने आया और न ही स्थानीय प्रशासन ने संज्ञान लिया। 2017 में भी यहां कार्यरत एक इंजिनियर की मौत इस गड्ढे में डूबकर मौत हो गई थी।  इसलिए बच्चियों की इस ह्रदय विदारक दुर्घटनापूर्ण मौत का जिम्मेदार सीधे तौर पर रेलवे ठेकेदार और रेलवे है।

ग्रामीणों ने सड़क जाम कर मांग रखी कि इनपर प्राथमिकी दर्ज कर पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख रूपये मुआवजा और रेलवे इन्हें नौकरी दे। मौके पर पहुंचे प्रशासन द्वारा काफी समझाने और पूरे मामले की जांच और दोषियों पर कारवाई करने का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने जाम हटाया। 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भारी चीत्कार और क्रंदन के बीच मृत बच्चियों की अर्थियां उठीं और सैकड़ों की भीड़ के सामने नाम आंखों से दाह संस्कार हुआ।  एक चिता पर तो एक ही परिवार की तीन छोटी बच्चियों के शव रखे गए थे। अब उस घर में एक भी बेटी नहीं रही।  

बच्चियों की मौत पर देश के प्रधानमंत्री ने गहरा शोक जताते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना जताई। वहीं झारखंड प्रदेश के राज्यपाल ने भी शोक प्रकट किया। मुख्यमंत्री ने भी शोक प्रकट करते हुए मृतक बच्चियों के परिजनों को तत्काल राहत व मुआवजा देने की घोषणा की। इससे स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आया और लातेहार डीसी और विधायक ने जाकर पीड़ित परिवारों को मुआवजा तथा अनाज बांटे।

हादसे के बाद से सभी राजनितिक दलों व उनके नेताओं का आना-जाना जारी है। सभी जाकर शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना और आर्थिक सहायता देने की घोषणा कर रहें हैं, लेकिन कोई भी इस हादसे के जिम्मेदार लोगों की चर्चा करने को तैयार नहीं है। उलटे 20 सितम्बर को पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे झारखंड सरकार के श्रम नियोजन मंत्री जी ने तो ग्रामीणों को ही सलाह दे डाली कि वे अपने बच्चे बच्चियों को जागरूक बनाएं और तालाब, नदी और गड्ढों के पास नहीं जाने दें। 

अलबत्ता 22 सितम्बर को घटनास्थल का निरिक्षण कर पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे सत्ता पक्ष के चर्चित आदिवासी विधायक बंधु तिर्की ने सार्वजनिक तौर से कहा कि हादसा पूरी तरह से रेलवे और उसके ठेकेदार की लापरवाही से ही हुआ है। यहां अवैज्ञानिक ढंग से गड्ढा खोदा गया है, जिसे समय रहते भरवाने की जिम्मेदारी रेल प्रबंधन की थी। वे इस मामले को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे। 

खबर है कि प्रशासन द्वारा स्थानीय तौर पर एक जांच कमिटी बना दी गयी है, जिसकी पूरी रिपोर्ट आनी बाकी है, लेकिन हैरानी है कि बिना रिपोर्ट के ही लातेहार डीसी का दावा है कि प्रशासन की ओर से कोई चूक नहीं हुई है। 

इस हादसे ने झारखंड में विकास के नाम पर सरकार, प्रशासन और निर्माण कंपनियों की जारी जानलेवा लापरवाहियों के कारनामों को एक बार फिर से उजागर कर दिया है। जिसे लेकर सामाजिक जन संगठनों, सोशल ऐक्टिविस्टों और नागरिक समाज के लोगों के विरोध के स्वर फिर से तेज़ होने लगे हैं। लातेहार के इलाके के गांवों में जन मुद्दों पर सक्रीय एआईपीऍफ़ से जुड़े युवा ऐक्टिविस्टों जिनमें धीरज कुमार समेत कई युवा शामिल हैं, सब सोशल मीडिया के जरिए लगातार सवाल पूछ रहे हैं  कि सिर्फ और सिर्फ जन विरोधी विकास का मॉडल ही इन मौतों का जिम्मेदार है, जो आदिवासी क्षेत्रों में लगातार थोपा जा रहा है। लोगों का आरोप बरकरार है कि क्या सरकार और प्रशासन बच्चियों की अकाल मौत के असली कारणों को ढूंढेने का प्रयास करेगा और क्या रेलवे लाइन निर्माण कंपनी व ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी?  

Jharkhand
Hemant Soren
borewell
tribals

Related Stories

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

मेघालय और झारखंड में खदान दुर्घटना में आठ लोगों की मौत, चार लापता

झारखंड: सत्ता से बेख़ौफ़ कार्टूनिस्ट बशीर अहमद का जाना...

झारखंड : विवादित विधानसभा भवन में लगी आग

राम के नाम पर दुनिया में कर दिया बदनाम

झारखंड: बिरसा मुंडा की मूर्ति तोड़े जाने से झारखंडी समाज में आक्रोश

भिवानी: कुएं में उतरे दो किसानों की जहरीली गैस से मौत, तीसरे की हालत गंभीर

बोरवेल से 110 घंटे बाद बाहर निकाले गए दो वर्षीय बच्चे की मौत

झारखंड विधान सभा चुनाव 2019 : भूख से मरनेवालों की बढ़ती कतार !

झारखंड : लोकसभा चुनाव : प्रवासी मजदूरों का दर्द नहीं बन सका मुद्दा


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,568 नए मामले, 97 मरीज़ों की मौत 
    15 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.08 फ़ीसदी यानी 33 हज़ार 917 हो गयी है।
  • tree
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु के चाय बागान श्रमिकों को अच्छी चाय का एक प्याला भी मयस्सर नहीं
    15 Mar 2022
    मामूली वेतन, वन्यजीवों के हमलों, ख़राब स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य कारणों ने बड़ी संख्या में चाय बागान श्रमिकों को काम छोड़ने और मैदानी इलाक़ों में पलायन करने पर मजबूर कर दिया है।
  • नतालिया मार्क्वेस
    अमेरिका में रूस विरोधी उन्माद: किसका हित सध रहा है?
    15 Mar 2022
    संयुक्त राज्य अमेरिका का अपनी कार्रवाइयों के सिलसिले में सहमति बनाने को लेकर युद्ध उन्माद की आड़ में चालू पूर्वाग्रहों को बढ़ाने का एक लंबा इतिहास रहा है।
  • डॉ. राजू पाण्डेय
    डिजिटल फाइनेंस: कैशलेस होती दुनिया में बढ़ते फ़्रॉड, मुश्किलें भी आसानी भी..
    15 Mar 2022
    हर साल 15 मार्च के दिन विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष कंज़्यूमर इंटरनेशनल के 100 देशों में फैले हुए 200 कंज़्यूमर समूहों ने "फेयर डिजिटल फाइनेंस" को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस की थीम…
  •  Scheme Workers
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों आंदोलन की राह पर हैं स्कीम वर्कर्स?
    14 Mar 2022
    हज़ारों की संख्या में स्कीम वर्कर्स 15 मार्च यानि कल संसद मार्च करेंगी। आखिर क्यों हैं वे आंदोलनरत ? जानने के लिए न्यूज़क्लिक ने बात की AR Sindhu से।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License