NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
भारत के ग्रामीण स्वास्थ्य क्षेत्र में लगभग 2.37 लाख स्वास्थ्य कर्मियों की कमी
भारत में स्वास्थ्य की स्थिति डगमगा हुई है। जहाँ एक और ग्रामीण क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में स्वास्थ्य केन्द्र और स्वास्थ्य देखभाल का बुनियादी ढाँचा भी उपलब्ध नहीं हैं। वही दूसरी और स्वास्थ्य मुहैया कराने वाले स्वास्थ्य कर्मचारी की भी भरी कमी हैं।
पुलकित कुमार शर्मा
15 Feb 2020
Rural health system
Image courtesy: NewsPole

हाल ही में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ग्रामीण स्वास्थ्य से संबंधित वार्षिक रिपोर्ट जारी हुई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में स्वास्थ्य कर्मचारियों की भारी  मात्रा में कमी है।

यह बात जगजाहिर है कि भारत में सरकार का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च जरूरत के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। इस हकीकत के बाद भी इस खर्च को बढ़ाया भी नहीं जा रहा है। इसलिए देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य की जर्जर हालत बनी हुई है। इस परेशानी के हल के लिए के लिए सरकार आयुष्मान भारत जैसी बीमा योजनाएं लेकर सामने आई है। लेकिन इसकी वजह से स्वास्थ्य क्षेत्र की परेशानी का हल कम प्राइवेट स्वास्थ्य संस्थानों की कमाई ज्यादा हो रही है। ऐसी स्थिति में  दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रो में रहने वाली जनता बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से कोशों दूर रहा जा रही है।  

सब सेंटर में स्वास्थ्य कर्मचारियों की स्थिति

स्वास्थ्य क्षेत्र के संदर्भ में सब सेंटर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने वाली सबसे छोटी इकाई है। सादी भाषा में समझिये तो गांव के लोगों और सरकारी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र के बीच का सबसे पहला लेवल। यहां पर अधिकांशतः प्राथमिक उपचार से संबधित स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया करवायी जाती है। भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य (इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड) के मानक के तहत सब सेंटर में सामान्यतः दो हेल्थ कर्मचारी होने चाहिए। इनमें से एक महिला स्वास्थ्य कर्मचारी और एक पुरुष स्वास्थ्य कर्मचारी होना चाहिए। लेकिन मौजूदा समय में इस मानक का पालन नहीं किया जा रहा है। आकड़ों से पता चलता है कि सब सेंटर में तकरीबन 4424 महिला स्वास्थ्य कर्मचारी तथा 98063 पुरुष स्वास्थ्य कर्मचारियों कमी है।  

प्राइमरी हेल्थ सेंटर में स्वास्थ्य कर्मचारियों की स्थिति

स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया करवाने के संबंध में सब सेंटर से अगला पड़ाव प्राइमरी हेल्थ सेंटरों का होता है। यहां सब सेंटरों से ज्यादा स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध होती है। इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के तहत प्राइमरी हेल्थ सेंटर से लोगो को 24 घंटे बुनियादी और नर्सिंग सुविधाएँ मिलनी चाहिए। लेकिन इसका पालन कम होता है।
 
प्राइमरी हेल्थ सेंटर में मानकों अनुसार सामान्यतः 13 से 21 स्वास्थ्य कर्मचारी होने चाहिए। इनमें एक मेडिकल अफ़सर, एक लेखाकार सह डाटा एंट्री ऑपरेटर, एक फार्मासिस्ट, एक आयुष फार्मासिस्ट, तीन नर्स , एक महिला हेल्थ कर्मचारी, एक महिला हेल्थ अस्सिस्टेंट, एक स्वास्थ्य शिक्षक, एक लेबोटरी टेक्नीशियन ,एक कोल्ड चेन और वैक्सीन लॉजिस्टिक असिस्टेंट, ग्रुप डी के 2 कर्मचारी, एक स्वच्छता कार्यकर्ता सह चौकीदार होना चाहिए।  

लेकिन मौजूदा स्थिति बहुत ही अलग दिखाई देती है। मानकों के तहत प्राइमरी हेल्थ सेंटर में स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी का विवरण इस प्रकार है -

- कुल महीला स्वास्थ्य कर्मचारीयों में 26 फीसदी यानी 6492 पदों की कमी है

- कुल स्वास्थ्य सहायक महिला कर्मचारियों में 48 फीसदी यानी 11906 पदों की कमी है।  

- कुल स्वास्थ्य सहायक पुरुषों में 60 % यानी 14865 पदों की कमी है।  

- कुल एलोपैथिक डॉक्टरों में 6 फीसदी 1484 की कमी है।

- कुल फर्मासिस्ट में 29 फीसदी यानी 7220 फार्मासिस्ट की कमी है।

- कुल लेब्रोटरी टेक्नीशियनों में  51 फीसदी यानी  12638 लेब्रोटरी टेक्नीशियनों की कमी है।

-  कुल नर्स स्टाफों में 25 फीसदी यानी  6126 नर्स स्टाफ की कमी है।

-  इनसे भी अलग कुल प्राइमरी हेल्थ सेंटर में 1807 आयुष चिकित्सक और 220 डेंटल सर्जन भी के पद रिक्त हैं।  

Picture2.png

कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में स्वास्थ्य कर्मचारियों की स्थिति

मानकों के तहत तकरीबन एक लाख बीस हजार की आबादी पर एक कम्युनिटी हेल्थ सेंटर होनी चाहिए। लेकिन इन मानकों  का पालन कम ही होता है। मानकों के तहत एक कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में 46 से 52 स्वास्थ्य कर्मचारियों का स्टाफ होना चाहिए।  

ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट में एक ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी / चिकित्सा अधीक्षक, एक लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, एक सार्वजनिक स्वास्थ्य नर्स होना चाहिए।

विशेष सेवाओं में एक सार्विक शल्य चिकित्सक, एक फिजिशियन, एक प्रसूति विशेषज्ञ और प्रसूतिशास्री, एक बच्चों का चिकित्सक, एक एनेस्थेटिस्ट, और सामान्य ड्यूटी अधिकारियों में एक दन्त शल्य चिकित्सक, दो जनरल ड्यूटी मेडिकल अफ़सर, एक चिकित्सा अधिकारी, एक आयुष अधिकारी  होने चाहिए।  

नर्स और पैरामेडिकल में 10 नर्स स्टाफ, एक फार्मासिस्ट, एक फार्मासिस्ट आयुष, दो लैब टेक्नीशियन, एक रेडियोग्राफर , एक नेत्र सहायक, एक दंत चिकित्सा सहायक, एक कोल्ड चेन और वैक्सीन लॉजिस्टिक सहायक, एक ओटी टेक्नीशियन, एक बहु पुनर्वास /समुदाय आधारित पुनर्वास कार्यकर्ता और एक परामर्शदाता होने चाहिए।  

प्रशासनिक स्टाफ में दो पंजीकरण क्लर्क, दो सांख्यिकीय सहायक /तथ्य दाखिला प्रचालक, एक खाता सहायक, एक प्रशासनिक सहायक होने चाहिए।

ग्रुप डी स्टाफ में एक ड्रेसर (प्रमाणित)रेड क्रॉस / जॉन्स प्रमाणित रोगी वाहन, 5 वार्ड बॉय, एक ड्राइवर आउटसोर्स के लिए होना चाहिए।

लेकिन मौजूदा स्थिति कुछ और ही है।  कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी का विवरण इस प्रकर है :

- कुल आयुष चिकित्सकों में से तकरीबन 40 फीसदी यानी 2154 पदों की कमी है

- कुल डेंटल सर्जनों में  से तकरीबन 79 फीसदी यानी  8456 डेंटल सर्जनों की कमी है

-  कुल सर्जनों में से 86 फीसदी यानी 4567 सर्जनों की कमी है।  

- कुल प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों में से 75 फ़ीसदी की कमी है।

- कुल चिकित्सकों में से 87 फीसदी यानी 4652 पदों की कमी है

- कुल बाल रोग विषेशज्ञों में से 80 फीसदी  यानी 4264  पदों की कमी है  

-  कुल  समान्य ड्यूटी अधिकारीयों में से 10 फीसदी यानी 1078 पदों की कमी है।

- कुल रेडिओग्राफरों में से 59 फीसदी यानी 3184 पदों की कमी है

- कुल फारमिस्टों में 7 फीसदी यानी 361 की कमी है।  

- कुल प्रयोगशाला टेनिशियनों में से 11 फीसदी की कमी

- कुल नर्स स्टाफों में से 3978 की कमी है।  
Picture1.png
सब डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में कर्मचारियों की स्थिति
Picture3_0.jpg

सब डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में स्वीकृत डॉक्टरों की संख्या 22891 हैं। इनमें से 13750 डॉक्टर मौजूद हैं। मतलब 40 % डॉक्टरों की संख्या रिक्त हैं। इसी प्रकार पैरामेडिकल में 52526 कर्मियों की संख्या स्वीकृत हैं। इनमें से 36909 स्वास्थ्य कर्मी मौजूद हैं। इसका मतलब लगभग 30 % सवस्थ कर्मीयों का पद खाली है।  

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में स्वास्थ्य कर्मियों की स्थिति
Picture4_0.png
डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में लगभग 28545 डॉक्टर कर्मी स्वीकृत हैं। इनमें से 3869 डॉक्टर रिक्त हैं। इसका मतलब 14 % डॉक्टरों की संख्या रिक्त हैं। इसी प्रकार कुल पैरमेडिकल स्वास्थ्य कर्मियों में 6 फ़ीसदी यानी  5775 स्वस्थ्य कर्मियों के पद रिक्त हैं।  

Rural Heath system
health care facilities
health department
Health man Power
Public Health Care
Health Center
Primary Heath Center
Community Health Center
Local Hospitals
District Hospitals

Related Stories

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

बिहार में फिर लौटा चमकी बुखार, मुज़फ़्फ़रपुर में अब तक दो बच्चों की मौत

मध्यप्रदेश: सागर से रोज हजारों मरीज इलाज के लिए दूसरे शहर जाने को है मजबूर! 

शर्मनाक : दिव्यांग मरीज़ को एंबुलेंस न मिलने पर ठेले पर पहुंचाया गया अस्पताल, फिर उसी ठेले पर शव घर लाए परिजन

यूपी चुनाव : माताओं-बच्चों के स्वास्थ्य की हर तरह से अनदेखी

यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग

उत्तराखंड: मानसिक सेहत गंभीर मामला लेकिन इलाज के लिए जाएं कहां?

EXCLUSIVE: सोनभद्र के सिंदूर मकरा में क़हर ढा रहा बुखार, मलेरिया से अब तक 40 आदिवासियों की मौत

EXCLUSIVE :  यूपी में जानलेवा बुखार का वैरिएंट ही नहीं समझ पा रहे डॉक्टर, तीन दिन में हो रहे मल्टी आर्गन फेल्योर!


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License