NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
साउथ अफ्रीका के मज़दूर संगठनों ने सरकारी निवेश सम्मेलन को धोखा बताया
मज़दूर संगठनों के मुताबिक़, इन सम्मेलनों से आर्थिक सुधार की झूठी आशाएं पैदा की जाती हैं। संगठनों ने सरकार से कहा कि वे इन सम्मेलनों की जगह कॉरपोरेट टैक्स को दोगुना करें। साथ ही पूंजी नियंत्रण और सार्वजनिक-सामाजिक निवेश को बढ़ाने जैसे ठोस कदम उठाए।
पवन कुलकर्णी
12 Nov 2019
South African Unions Call

दक्षिण अफ्रीका में सामाजिक-आर्थिक समता लाने की कोशिशों में लगे मज़दूर संगठनों और दूसरे समूहों ने 7 नवंबर को जोहेंसबर्ग यूनिवर्सिटी के सोवेटो कैंपस में हुए ''दूसरे निवेश सम्मेलन'' स्थल तक जुलूस निकाला। उन्होंने सम्मलेन को धोखा करार दिया। संगठनों ने कठोर नीतियों और विकास के लिए 'प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)' पर सरकार की अंध निर्भरता की निंदा की।

इस मार्च का नेतृत्व साउथ अफ्रीकन फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स (SAFTU) ने किया। इसमें नेशनल यूनियन ऑफ मेटल वर्कर्स ऑफ साउथ अफ्रीका (NUMSA), अबाहलाली बेसम्जोंदोलो (ABM), जनरल इंडस्ट्रीज़ वर्क्स यूनियन ऑफ साउथ अफ्रीका (GIWUSA), द एसोसिएशन ऑफ माइन वर्कर्स एंड कंस्ट्रक्शन यूनियन (AMCU) और अनएंप्लायड पीपल्स असेंबली समेत कई दूसरे नागरिक-सामाजिक संगठन भी शामिल थे।

जुलूस के बाद देश के राष्ट्रपति सायरल रेमाफोसा के लिए संगठनों ने एक साझा मेमोरेंडम जारी किया। 50 संगठनों की तरफ से दिए गए इस मेमोरेंडम को लघु उद्योग विकास मंत्री लिंडिवे जुलू को सौंपा गया। मेमोरेंडम के मुताबिक़, फिलहाल निवेश स्तर जीडीपी का 18 फ़ीसदी है। यह विकास और आर्थिक गतिविधियों को सुचारू तरीके से चलाने के लिए बेहद कम है। 1970 के दशक में, नव उदारवाद युग के पहले, यह जीडीपी का 26-32 फ़ीसदी हुआ करता था। मेमोरेंडम में आगे कहा गया कि सम्मेलन, अर्थव्यवस्था में हो रहे बेहद कम निवेश को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के ज़रिए बढ़ाने से संबंधित झूठी उम्मीदें जगाता है।  

दक्षिण अफ्रीकी सरकार, कॉरपोरेट को छूट देने और दूसरों के लिए कठोरता की अपनी नवउदारवादी नीतियों पर लगातार चल रही है। सरकार को आशा है कि इससे निवेश बढ़ेगा और रोज़गार पैदा होंगे।  लेकिन यूनियनों के दावे के मुताबिक़, आंकड़ों से पता चलता है कि ऐसी ही नीतियों से ताजा आर्थिक संकट पैदा हुआ है।
1_3.JPG
1994 में जब नवउदारवादी सुधारों को बड़े पैमाने पर लागू किया गया, तबसे अबतक कॉरपोरेट टैक्स को 56 फ़ीसदी से घटाकर 28 फ़ीसदी किया जा चुका है। लेकिन इस कटौती से निवेश या नौकरियों की संख्या बढ़ाने में मदद नहीं मिली। इसके उलट कुल निवेश स्तर (जो जीडीपी के फ़ीसद हिस्से में मापा जाता है) गिर गया और इस अवधि में बेरोज़गारी दर 20 फ़ीसदी से बढ़कर 38.5 फ़ीसदी पर पहुंच गई। 15 से 24 साल की उम्र के बीच बेरोज़गारी दर 58 फीसदी जैसे बेहद चिंताजनक स्तर पर है।

यूनियनों का कहना है कि निजी पूंजी से आर्थिक विकास या रोजगार नहीं बढ़ाए जा सकते, इसलिए कॉरपोरेट टैक्स को 1994 की दर, 56 फ़ीसदी पर वापस ले आना चाहिए। ऊपर से ऊंची बेरोज़गारी और नौकरी पर लगे लोगों की घटती वास्तविक आय के चलते साउथ अफ्रीका के आम आदमी की खरीद क्षमता काफी कम हो चुकी है। इसलिए निजी निवेश को सही ठहराने की कोई वजह नहीं बचती।

यूनियनों के मुताबिक़ ताजा हालातों में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए केवल एक ही तरीका है। इसके लिए सार्वजनिक निवेश को बड़े स्तर पर बढ़ाया जाए, इससे सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा और लोगों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। साथ ही नई नौकरियां आएंगी और घरेलू मांग भी बढ़ेगी।''मेमोरेंडम में कहा गया कि दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 33.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के भारी-भरकम आर्थिक पैकेज की जरूरत है। सरकार का खुद का निवेश तेजी से गिर रहा है। इसकी वजह राजकोष द्वारा, राज्य और निगम बजटों में पिछले हफ्ते की गई बड़ी कटौती है। अगर अर्थव्यवस्था के लिए कोई उम्मीद बची है तो उसके लिए इस फ़ैसले को तुरंत पलटा जाना चाहिए।'' लेकिन सार्वजनिक खर्च को बढ़ाने की जगह सरकार उलटा कर रही है।

2_4.JPG

यूनियन ब्याज़ दर को 3 फ़ीसदी कम करने की भी मांग कर रही हैं। ''इससे उधार सस्ता होगा और घरेलू समेत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (SMMEs) को मदद मिलेगी।'' यूनियन पूंजी नियंत्रण और  पूंजी बाधकों को लगाने की भी मांग कर रहे हैं, ताकि देश में जो पैसा बनाया गया है वो बाहर न जा पाए। मेमोरेंडम के मुताबिक़, इससे 18 फीसदी जैसा बेहद खराब निवेश स्तर तेजी से सुधरेगा।

टैक्स से बचने और दूसरे अवैध तरीके जिनसे देश का पैसा बाहर जा रहा है, उन पर भी रोक लगाने की जरूरत है। एक अनुमान के मुताबिक़, दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था को हर साल इन वज़हों से 10.8 से 24.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान होता है।मेमोरेंडम में आगे कहा गया कि सरकार को एक ऐसा तंत्र लाना चाहिए जिससे सरकार के 'खरीद बजट' में बड़े पैमाने पर होने वाले भ्रष्टाचार को रोका जा सके। राजकोषीय अधिकारियों के मुताबिक़ सरकार के खरीद बजट का 30 से 40 फ़ीसदी हिस्सा टेंडर से जुड़े भ्रष्टाचार और आउटसोर्सिंग में नष्ट हो जाता है।

Courtesy: Peoples dispatch

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आपने नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

South African Unions Call Government’s Investment Summit a Bluff

Abahlali baseMjondolo
Austerity policies in Africa
National Union of Metalworkers of South Africa
Public spending in South Africa
South Africa investment summit
South African Federation of Trade Unions
South African trade unions

Related Stories

श्रमिक संघों ने दक्षिण अफ्रीकी डेयरी दिग्गज पर पेट्रोल बम हमले करवाने और धमकाने के आरोप लगाये

अबहलाली बेस के नवनिर्वाचित महासचिव मजोंडोलो का संकल्प: "हम प्रतिरोध करेंगे"

दक्षिण अफ़्रीका के ट्रेड यूनियनिस्ट के हत्यारों की अब तक नहीं हुई गिरफ़्तारी

दक्षिण अफ़्रीका : मैकस्टील में श्रमिकों की छंटनी के ख़िलाफ़ हड़ताल तीसरे दिन भी जारी

दक्षिण अफ़्रीका : 7 अक्टूबर को ट्रेड यूनियनों का हड़ताल का ऐलान

दक्षिण अफ़्रीका : सोने की खनन कंपनी ने कर्मचारियों को काम पर बुलाने के बाद हटाया

यूनियनों ने दक्षिण अफ़्रीकी एयरलाइंस को बंद करने की सरकारी योजना का विरोध किया

दक्षिण अफ़्रीका : लॉकडाउन की वजह से बेघर लोगों की स्थिति बेहद ख़राब

एनयूएमएसए ने दक्षिण अफ्रीका के मोटर उद्योग के 306,000 श्रमिकों के वेतन विवाद को सुलझाया

साउथ अफ़्रीका : सरकारी ऊर्जा कंपनी के निजीकरण को रोकने के लिए यूनियन कर सकते हैं देशव्यापी हड़ताल


बाकी खबरें

  • yogi
    रोहित घोष
    यूपी चुनाव: योगी आदित्यनाथ बार-बार  क्यों कर रहे हैं 'डबल इंजन की सरकार' के वाक्यांश का इस्तेमाल?
    25 Feb 2022
    दोनों नेताओं के बीच स्पष्ट मतभेदों के बावजूद योगी आदित्यनाथ नरेंद्र मोदी के नाम का इसतेमाल करने के लिए बाध्य हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि नरेंद्र मोदी अब भी जनता के बीच लोकप्रिय हैं, जबकि योगी…
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर, युद्ध और दांवः Ukraine पर हमला और UP का आवारा पशु से गरमाया चुनाव
    24 Feb 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने Ukraine पर Russia द्वारा हमले से अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की हार पर चर्चा की। साथ ही, Uttar Pradesh चुनावों में आवारा पशु, नौकरी के सवालों पर केंद्रित होती…
  • UP Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022 : आवारा पशु हैं एक बड़ा मुद्दा
    24 Feb 2022
    न्यूज़क्लिक के इस ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता डॉ संदीप पांडे से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। डॉ पांडेय ने…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    अमेरिकी लालच से पैदा हुआ रूस और यूक्रेन का तनाव, दुनिया पर क्या असर डाल सकता है?
    24 Feb 2022
    अमेरिका के लालच से पैदा हुआ रूस और यूक्रेन का तनाव अगर बहुत लंबे समय तक चलता रहा तो दुनिया के बहुत से मुल्कों में आम लोगों के जीवन जीने की लागत बहुत महँगी हो जाएगी।
  • Tribal Migrant Workers
    काशिफ काकवी
    मध्य प्रदेश के जनजातीय प्रवासी मज़दूरों के शोषण और यौन उत्पीड़न की कहानी
    24 Feb 2022
    गन्ना काटने वाले 300 मज़दूरों को महाराष्ट्र और कर्नाटक की मिलों से रिहा करवाया गया। इनमें से कई महिलाओं का यौन शोषण किया गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License